# रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया की ब्याज दरों में और बढ़ोतरी की तैयारी, महंगाई के लंबे खिंचने का बढ़ा जोखिम

> रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया की सहायक गवर्नर सारा हंटर ने मुद्रास्फीति को नियंत्रित करने के लिए इस साल दरों में और इजाफे की जरूरत बताई है। 29 सितंबर की बैठक में ब्याज दरों में 25 आधार अंकों की बढ़ोतरी की 94 फीसदी संभावना जताई जा रही है।

**Type:** article · **Category:** बाज़ार · **Published:** 2026-09-22 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/market/reserve-bank-of-australia-ki-byaja-daron-men-aura-barhotari-ki-taiyari-mahngai-ke-lnbe-khinchane-ka-barha-jokhima-36017 · **Language:** Hindi
**Tags:** रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया, ब्याज दरें, मुद्रास्फीति, ऑस्ट्रेलियाई डॉलर, वैश्विक बाजार, बैंक ऑफ जापान

ऑस्ट्रेलियाई केंद्रीय बैंक मुद्रास्फीति के दबाव को शांत करने के लिए सख्त मौद्रिक रुख बनाए रखने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया की सहायक गवर्नर सारा हंटर ने स्पष्ट किया है कि देश में महंगाई को नियंत्रण में रखने के लिए चालू वर्ष के दौरान ब्याज दरों में और इजाफा करने की दरकार है। नीति निर्माताओं के इस रुख के सामने आने के बाद 29 सितंबर को प्रस्तावित नीतिगत बैठक में ब्याज दरें बढ़ाए जाने की संभावनाओं को नया बल मिला है। मुद्रास्फीति की ऊंची दर उम्मीद से ज्यादा समय तक बनी रहने के चलते केंद्रीय बैंक के भीतर गहरी चिंता पैदा हो रही है।

## लंबे समय तक ऊंची महंगाई बने रहने की चिंता
एक पॉडकास्ट चर्चा में सारा हंटर ने नियामक बोर्ड के विचारों को साझा करते हुए बताया कि नीति निर्माता इस बात को लेकर बेहद सतर्क हैं कि महंगाई बहुत लंबे समय से काफी ऊंचे स्तर पर बनी हुई है। उन्होंने आगाह किया कि अगर इसे समय रहते काबू में नहीं लाया गया, तो यह आर्थिक तंत्र में गहराई से जड़ें जमा सकती है। उनके मुताबिक मौजूदा दौर में ऐसे कई ठोस आर्थिक कारण दिखाई दे रहे हैं, जिनकी वजह से मुद्रास्फीति की दर मौजूदा आकलनों के मुकाबले अधिक रह सकती है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में रेखांकित किया कि बोर्ड ऐसे कई आधार देख रहा है जो कीमतों को लगातार ऊपर की ओर धकेल रहे हैं।

> “We can see lots of reasons why inflation might be a bit higher than what we currently think.”
वित्तीय बाजारों ने भी इस सख्त नीतिगत बयान के आधार पर अपनी भविष्यवाणियों को तेजी से समायोजित करना शुरू कर दिया है। प्राइम टर्मिनल के आंकड़ों के अनुसार, मुद्रा बाजार अब इस बात की 94% संभावना जता रहे हैं कि 29 सितंबर की आगामी समीक्षा बैठक में केंद्रीय बैंक नीतिगत ब्याज दरों में 25 आधार अंकों (0.25 प्रतिशत) की बढ़ोतरी का ऐलान करेगा। वित्तीय विश्लेषकों और बाजार प्रतिभागियों के बीच बनी सहमति मुख्य रूप से इसी बढ़ोतरी के अनुमान पर टिकी हुई है।

## रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया का मूल ढांचा और अधिदेश
रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया देश भर में नकदी के प्रवाह, ब्याज दरों के निर्धारण और समग्र मौद्रिक नीति के प्रबंधन का मुख्य काम करता है। इन नीतिगत फैसलों की रूपरेखा तैयार करने के लिए बैंक का गवर्नर बोर्ड नियमित तौर पर साल भर में 11 बैठकें आयोजित करता है, जबकि आपात स्थितियों में अतिरिक्त तदर्थ बैठकें भी बुलाई जाती हैं। बैंक का प्राथमिक कानूनी दायित्व कीमतों में स्थिरता बनाए रखना है। इसके तहत देश की सालाना मुद्रास्फीति दर को 2 से 3 प्रतिशत के दायरे में सीमित रखने का स्पष्ट लक्ष्य रखा गया है।

मूल्य स्थिरता के इस केंद्रीय लक्ष्य के अलावा बैंक के व्यापक अधिदेश में राष्ट्रीय मुद्रा की स्थिरता, अर्थव्यवस्था में पूर्ण रोजगार का माहौल तैयार करना तथा ऑस्ट्रेलियाई नागरिकों की आर्थिक समृद्धि और कल्याण को आगे बढ़ाना भी शामिल है। अपने इन मकसदों को पूरा करने के लिए बैंक मुख्य तौर पर ब्याज दरों में कटौती या बढ़ोतरी के साधन का इस्तेमाल करता है। जब बैंक ब्याज दरों को अपेक्षाकृत उच्च स्तर पर रखता है, तो इससे ऑस्ट्रेलियाई डॉलर मजबूत होता है। वहीं दूसरी ओर, दरों में कमी आने पर राष्ट्रीय मुद्रा पर दबाव बढ़ता है। इन बुनियादी ब्याज दरों के अलावा बैंक आर्थिक परिस्थितियों के अनुसार क्वांटिटेटिव ईजिंग और क्वांटिटेटिव टाइटनिंग जैसी गैर-पारंपरिक नीतिगत रणनीतियों का भी सहारा लेता है।

## वैश्विक पूंजी और मुद्रा मूल्य के बदलते समीकरण
पारंपरिक आर्थिक सिद्धांतों में लंबे समय तक यह माना जाता रहा कि किसी भी मुद्रा के लिए ऊंची महंगाई एक नकारात्मक कारक साबित होती है, क्योंकि यह सीधे तौर पर पैसे की क्रय शक्ति को घटाती है। हालांकि, मौजूदा वित्तीय परिदृश्य में जब सीमा पार पूंजी नियंत्रण लगभग समाप्त हो चुके हैं, यह समीकरण उलट गया है। आधुनिक दौर में जब किसी देश में मुद्रास्फीति मध्यम रूप से बढ़ती है, तो वहां के केंद्रीय बैंक उसे रोकने के लिए ब्याज दरों को बढ़ाने पर मजबूर होते हैं।

ब्याज दरों में यह वृद्धि अंतरराष्ट्रीय निवेशकों के लिए एक आकर्षक अवसर पैदा करती है। वैश्विक पूंजी बेहतर रिटर्न की तलाश में उन देशों की तरफ मुड़ती है जहां जमा और प्रतिभूतियों पर ऊंचा ब्याज मिल रहा हो। इस प्रक्रिया से स्थानीय मुद्रा की मांग में जोरदार उछाल आता है। ऑस्ट्रेलिया के संदर्भ में, ऊंची ब्याज दरों की यह संभावना ऑस्ट्रेलियाई डॉलर को विदेशी निवेशकों के बीच पसंदीदा बनाती है और उसकी विनिमय दरों को सहारा देती है।

## व्यापक आर्थिक आंकड़े और राष्ट्रीय मुद्रा पर उनका असर
व्यापक आर्थिक आंकड़े किसी भी देश की अर्थव्यवस्था के स्वास्थ्य और उसकी मजबूती को मापने का सबसे विश्वसनीय पैमाना होते हैं। इन आंकड़ों का राष्ट्रीय मुद्रा के मूल्य पर सीधा प्रभाव पड़ता है, क्योंकि अंतरराष्ट्रीय निवेशक अपनी पूंजी को अनिश्चित और सिकुड़ती हुई अर्थव्यवस्थाओं के बजाय सुरक्षित और विस्तार कर रही अर्थव्यवस्थाओं में लगाना पसंद करते हैं। जब किसी देश में विदेशी पूंजी का आगमन तेज होता है, तो वहां की घरेलू मुद्रा की कुल मांग और उसके विनिमय मूल्य में इजाफा दर्ज किया जाता है।

सकल घरेलू उत्पाद, विनिर्माण और सेवा क्षेत्रों के पीएमआई आंकड़े, रोजगार के स्तर तथा उपभोक्ता धारणा से जुड़े सर्वेक्षण वे प्रमुख संकेतक हैं जो सीधे तौर पर ऑस्ट्रेलियाई डॉलर की चाल तय करते हैं। एक मजबूत और तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था केंद्रीय बैंक को ब्याज दरों में बढ़ोतरी जारी रखने के लिए अनुकूल माहौल देती है, जिससे अंततः मुद्रा को बाजार में और मजबूती हासिल होती है।

## क्वांटिटेटिव ईजिंग और क्वांटिटेटिव टाइटनिंग के औजार
अत्यधिक विषम आर्थिक परिस्थितियों में जब केवल ब्याज दरों में कटौती करने से अर्थव्यवस्था में कर्ज का प्रवाह सामान्य नहीं हो पाता, तब केंद्रीय बैंक क्वांटिटेटिव ईजिंग की व्यवस्था अपनाता है। यह वह नीतिगत प्रक्रिया है जिसके तहत रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया नई नकदी यानी ऑस्ट्रेलियाई डॉलर छापता है। इस नई राशि का इस्तेमाल वित्तीय संस्थानों से सरकारी या कॉरपोरेट बॉन्ड जैसी वित्तीय संपत्तियों को खरीदने के लिए किया जाता है। इससे बैंकिंग प्रणाली में तरलता का प्रवाह बढ़ जाता है, लेकिन बाजार में अत्यधिक नकदी आने के कारण आमतौर पर ऑस्ट्रेलियाई डॉलर कमजोर हो जाता है।

क्वांटिटेटिव टाइटनिंग असल में इस पूरी प्रक्रिया का ठीक विपरीत कदम है। इसे सामान्यतः उस समय लागू किया जाता है जब अर्थव्यवस्था मंदी से उबर रही हो और मुद्रास्फीति में लगातार इजाफा दर्ज किया जा रहा हो। क्वांटिटेटिव ईजिंग में जहां केंद्रीय बैंक वित्तीय संस्थानों को तरलता मुहैया कराने के लिए उनसे बॉन्ड खरीदता है, वहीं क्वांटिटेटिव टाइटनिंग के तहत बैंक नई संपत्तियों की खरीद पर पूरी तरह रोक लगा देता है। साथ ही अपने पास मौजूद जिन बॉन्ड्स की परिपक्वता अवधि पूरी हो जाती है, उनसे प्राप्त मूलधन को दोबारा निवेश करने से मना कर देता है। अर्थव्यवस्था से तरलता को समेटने का यह कदम ऑस्ट्रेलियाई डॉलर के लिए सकारात्मक और तेजी लाने वाला साबित होता है।

## विदेशी मुद्रा, सोना और वैश्विक परिसंपत्तियों का ताजा हाल
वैश्विक विदेशी मुद्रा बाजार में सोमवार के कारोबारी सत्र के दौरान एयूडी/यूएसडी जोड़ी अपनी स्पष्ट दिशा तय करने के लिए संघर्ष करती नजर आई। 0.7140 के स्तर का दोबारा परीक्षण करने के तुरंत बाद इस जोड़ी पर नए सिरे से बिकवाली का दबाव बना और मंगलवार को एशियाई बाजारों की शुरुआत से पहले यह 0.7100 के निचले स्तरों के करीब स्थिर होने की कोशिश कर रही थी। इस जोड़ी में यह दैनिक गिरावट मुख्य रूप से अमेरिकी डॉलर के प्रति निवेशकों के रुझान में आए व्यापक सुधार के कारण दर्ज की गई।

दूसरी ओर, अमेरिकी डॉलर और जापानी येन की जोड़ी भी एशियाई कारोबार के दौरान 157.00 के स्तर से नीचे फिसलती दिखी। शुक्रवार को बैंक ऑफ जापान द्वारा की गई दर समीक्षा के बाद संभावित हस्तक्षेप के जोखिमों के बीच जापानी येन को हल्की मजबूती मिली, जिससे यूएसडी/जेपीवाई पर असर पड़ा। रूस और यूक्रेन के बीच बढ़ते तनाव तथा पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक संकट के बीच जापानी बाजार में अवकाश होने से कारोबारी काफी सतर्क बने रहे। इन वैश्विक तनावों के कारण अमेरिकी डॉलर की गिरावट थम गई, जिससे इस जोड़ी का निचला स्तर सीमित रहा।

कमोडिटी बाजार में नए कारोबारी सप्ताह की शुरुआत पर सोने की कीमतों में कमजोरी का रुख दिखाई दिया और यह 4,350 डॉलर प्रति ट्रॉय औंस के करीब कारोबार करता रहा। अमेरिकी डॉलर की मजबूती के कारण बहुमूल्य धातु में यह सुधारात्मक गिरावट देखने को मिली, भले ही समूचे यील्ड वक्र में अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में नरमी देखी जा रही थी।

## तीसरी तिमाही के अंतिम दौर में वित्तीय बाजारों का मिजाज
वित्तीय बाजार तीसरी तिमाही के अंतिम हफ्तों में प्रवेश करते हुए एक बेहद असामान्य स्थिति का सामना कर रहे हैं। बाजारों में अनिश्चितता और भारी उतार-चढ़ाव लगातार बना हुआ है, लेकिन इसके बावजूद कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट दर्ज की जा रही है। दूसरी तरफ सोमवार के सत्र में यूरोपीय और अमेरिकी शेयर बाजार मजबूती के साथ खुलने की तैयारी में दिखाई दिए। वित्तीय तनाव का मुख्य केंद्र सॉवरेन बॉन्ड बाजार बना हुआ है, जहां शुक्रवार देर रात यूरोपीय और अमेरिकी प्रतिफल में दोबारा घबराहट देखी गई और दरें ऊपर चढ़ गईं।

इस वैश्विक पृष्ठभूमि के बीच एशियाई केंद्रीय बैंकों के मोर्चे पर एक बड़ा घटनाक्रम देखने को मिला। बैंक ऑफ जापान ने अपनी मौद्रिक नीति को सामान्य बनाने की दिशा में एक और कदम उठाते हुए अपनी अल्पकालिक ब्याज दर के लक्ष्य को 1.00 प्रतिशत से बढ़ाकर 1.25 प्रतिशत कर दिया। नीतिगत बोर्ड में यह फैसला 7-2 के बहुमत से लिया गया, जो काफी हद तक उन उम्मीदों के अनुरूप रहा जिनका बाजार हफ्तों से इंतजार कर रहा था।

## इसका आप पर असर
रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया की संभावित ब्याज दर वृद्धि का सीधा प्रभाव अंतरराष्ट्रीय व्यापार, विदेशी यात्रा और मुद्रा विनिमय दरों पर पड़ेगा।

- **मुद्रा विनिमय दर:** ऑस्ट्रेलियाई डॉलर में मजबूती आने से विदेशों में खर्च करना और आयातित सामान खरीदना अपेक्षाकृत सस्ता हो सकता है। यदि आप ऑस्ट्रेलिया यात्रा की योजना बना रहे हैं, तो अन्य मुद्राओं के मुकाबले ऑस्ट्रेलियाई डॉलर के लिए अधिक खर्च करना पड़ेगा।
- **वैश्विक कर्ज लागत:** प्रमुख केंद्रीय बैंकों द्वारा दरों में बढ़ोतरी से दुनिया भर में उधारी की लागत ऊंची बनी रहेगी। होम लोन और पर्सनल लोन लेने वाले अंतरराष्ट्रीय ग्राहकों को आने वाले समय में राहत की उम्मीद कम रखनी चाहिए।
- **निर्यात और कारोबार:** मजबूत घरेलू मुद्रा से ऑस्ट्रेलियाई निर्यातकों की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता प्रभावित हो सकती है। आयात पर निर्भर उद्योगों को मुद्रा की मजबूती से लागत में थोड़ी राहत मिलने की संभावना है।
- **निवेशक रणनीतियाँ:** बॉन्ड और निश्चित आय वाले उत्पादों में निवेश करने वाले फंड प्रबंधकों को अधिक यील्ड वाले देशों में पूंजी लगाने का अवसर मिलेगा। खुदरा निवेशकों को मुद्रा बाजार के उतार-चढ़ाव को ध्यान में रखकर अपने विदेशी पोर्टफोलियो का प्रबंधन करना चाहिए।

## ऐसा क्यों हुआ
रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया द्वारा नीतिगत दरों में और वृद्धि की तैयारी का मुख्य कारण मुद्रास्फीति का लक्ष्य से लगातार ऊपर बने रहना है।

- **लगातार बनी हुई महंगाई:** देश में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक केंद्रीय बैंक के 2 से 3 प्रतिशत के तय लक्ष्य से काफी समय से ऊपर चल रहा है। यदि इसे जल्द नियंत्रित नहीं किया गया, तो वेतन और उत्पादन लागत में दीर्घकालिक बढ़ोतरी का जोखिम बन सकता है।
- **मजबूत व्यापक आर्थिक आंकड़े:** रोजगार और घरेलू उपभोग में निरंतर मजबूती ने केंद्रीय बैंक को दरें बढ़ाने की गुंजाइश दी है। आर्थिक गतिविधियों के स्थिर रहने से नीति निर्माताओं को मंदी के तात्कालिक खतरे के बिना सख्ती बरतने का अवसर मिला है।
- **वैश्विक मौद्रिक नीतियां:** बैंक ऑफ जापान सहित अन्य वैश्विक केंद्रीय बैंकों द्वारा दरों का सामान्यीकरण मुद्रास्फीति पर काबू पाने के साझा प्रयासों को दर्शाता है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कमोडिटी और बॉन्ड बाजार की अनिश्चितताएं भी सख्त मौद्रिक फैसलों को प्रेरित कर रही हैं।

## सवाल-जवाब

### 1. रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया की सहायक गवर्नर कौन हैं?
रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया की सहायक गवर्नर सारा हंटर हैं।

### 2. रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया का मुद्रास्फीति लक्ष्य क्या है?
बैंक का प्राथमिक अधिदेश मूल्य स्थिरता बनाए रखना है, जिसके तहत 2 से 3 प्रतिशत की मुद्रास्फीति दर का लक्ष्य रखा गया है।

### 3. 29 सितंबर की बैठक में ब्याज दर बढ़ने की कितनी संभावना है?
प्राइम टर्मिनल के अनुसार मुद्रा बाजार 29 सितंबर की बैठक में ब्याज दरों में 25 आधार अंकों की बढ़ोतरी की 94% संभावना जता रहे हैं।

### 4. रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया एक साल में कितनी नियमित बैठकें करता है?
बैंक का गवर्नर बोर्ड मौद्रिक नीति संबंधी निर्णयों के लिए साल भर में 11 नियमित बैठकें आयोजित करता है।

### 5. बैंक ऑफ जापान ने हाल ही में क्या नीतिगत फैसला लिया है?
बैंक ऑफ जापान ने अपनी अल्पकालिक ब्याज दर के लक्ष्य को 7-2 के मत से 1.00% से बढ़ाकर 1.25% कर दिया है।

### 6. क्वांटिटेटिव ईजिंग और क्वांटिटेटिव टाइटनिंग में क्या अंतर है?
क्वांटिटेटिव ईजिंग में केंद्रीय बैंक तरलता बढ़ाने के लिए बॉन्ड खरीदता है जिससे मुद्रा कमजोर होती है, जबकि क्वांटिटेटिव टाइटनिंग में बॉन्ड खरीद रोक दी जाती है जो मुद्रा को मजबूती देती है।

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