रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया की ब्याज दरों में बढ़ोतरी का अनुमान, महंगाई के दबाव से बदला रुख स्टैंडर्ड चार्टर्ड के निकोलस चिया के अनुसार रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया 29 सितंबर की बैठक में ब्याज दर बढ़ाकर 4.60 प्रतिशत कर सकता है। साथ ही पहली दर कटौती का अनुमान भी 2027 की तीसरी तिमाही तक खिसक गया है। रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया की आगामी मौद्रिक समीक्षा को लेकर वित्तीय बाजारों में हलचल तेज हो गई है। स्टैंडर्ड चार्टर्ड के विश्लेषक निकोलस चिया ने अपने हालिया आकलन में अनुमान जताया है कि केंद्रीय बैंक 29 सितंबर को होने वाली अपनी बैठक में नीतिगत नकद दर को बढ़ाकर 4.60 प्रतिशत कर सकता है। इससे पहले उनका अनुमान था कि केंद्रीय बैंक यथास्थिति बनाए रखेगा और ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं करेगा। नया अनुमान मौजूदा चक्र के उच्च स्तर 4.35 प्रतिशत से ऊपर की दर तय करने का संकेत देता है। इसके साथ ही बैंक द्वारा नीतिगत दरों में कटौती शुरू करने की अपेक्षित समयसीमा को भी आगे खिसका दिया गया है, जो पहले 2027 की पहली तिमाही आंकी गई थी और अब 2027 की तीसरी तिमाही में होने की संभावना जताई जा रही है। महंगाई के बढ़ते जोखिम और आर्थिक लचीलेपन की स्थिति विश्लेषकों का मानना था कि लेबर मार्केट और हाउसिंग मार्केट में कमजोरी के शुरुआती संकेत मिलने से कीमतों पर बना दबाव कम होगा, जिससे रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया अपने सख्त मौद्रिक रुख को नरम कर सकेगा। हालांकि केंद्रीय बैंक के हालिया संदेशों से स्पष्ट हुआ है कि नीति निर्माता महंगाई से जुड़े जोखिमों को लेकर बेहद सतर्क हैं। कच्चे तेल की कीमतें तिहरे अंकों के करीब पहुंचने और कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी AI क्षेत्र की तीव्र गतिविधियों के चलते लागत पर अतिरिक्त दबाव बना है। इन परिस्थितियों ने केंद्रीय बैंक के सामने नीतिगत प्राथमिकताओं का संतुलन साधने की चुनौती बढ़ा दी है। निकोलस चिया के अनुसार इन कारकों ने ब्याज दरों में अतिरिक्त वृद्धि की राह आसान कर दी है, भले ही 24 सितंबर को जारी होने वाली अगस्त माह की लेबर मार्केट रिपोर्ट का परिणाम कुछ भी रहे। अब तक तीन बार की गई दरों में बढ़ोतरी के बावजूद समग्र आर्थिक रफ्तार स्थिर बनी हुई है। केंद्रीय बैंक वर्तमान नीतिगत स्थिति को केवल मामूली रूप से प्रतिबंधात्मक मान सकता है। चौथी तिमाही में और बढ़ोतरी की संभावना को भी पूरी तरह खारिज नहीं किया जा रहा है, हालांकि यह रुख अक्टूबर के अंत में आने वाले तीसरी तिमाही के उपभोक्ता मूल्य सूचकांक यानी CPI आंकड़ों और आर्थिक विकास तथा उपभोक्ता खर्च की निरंतर मजबूती पर निर्भर करेगा। दरों में पहली कटौती की संभावना अब 2027 की तीसरी तिमाही तक टल गई है, क्योंकि केंद्रीय बैंक नीति को लचीला बनाने से पहले लंबे समय तक सुस्त विकास दर के पुख्ता प्रमाण देखना चाहता है। ग्लोबल करेंसी मार्केट में हलचल और डॉलर का दबदबा मुद्रा बाजार में ऑस्ट्रेलियाई डॉलर अमेरिकी डॉलर के मुकाबले यानी AUD/USD मंगलवार को एशियाई कारोबारी सत्र में 0.7100 के स्तर से ऊपर खरीदारी हासिल करने में सफल रहा। इस तेजी को रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया की सहायक गवर्नर सारा हंटर और गवर्नर मिशेल बुलॉक की सख्त टिप्पणियों से समर्थन मिला। इसके बावजूद मध्य पूर्व में गहराते तनाव और अमेरिकी फेडरल रिजर्व के आक्रामक रुख ने अमेरिकी डॉलर में तेजी का माहौल बनाए रखा है, जिससे ऑस्ट्रेलियाई डॉलर की बढ़त सीमित हो सकती है। बाजार की नजर सप्ताह के उत्तरार्ध में होने वाले ट्रंप और शी के शिखर सम्मेलन पर भी टिकी हुई है। दूसरी ओर जापानी येन के मुकाबले अमेरिकी डॉलर यानी USD/JPY मंगलवार के एशियाई सत्र में 157.50 के आसपास मामूली बढ़त के साथ कारोबार करता दिखा। जापानी अधिकारियों द्वारा बाजार हस्तक्षेप की आशंकाओं ने येन की गिरावट को एक सीमा तक रोकने में मदद की। हालांकि बैंक ऑफ जापान द्वारा 31 साल के उच्च स्तर पर की गई ब्याज दर बढ़ोतरी के बावजूद उसका नरम लहजा येन में निवेश करने वालों को दबाव में रखे हुए है। बैंक ऑफ जापान ने 7-2 के बहुमत से अपने अल्पकालिक ब्याज दर लक्ष्य को 1.00 प्रतिशत से बढ़ाकर 1.25 प्रतिशत कर दिया है, जो मौद्रिक नीति को सामान्य बनाने की दिशा में एक और कदम है और व्यापक बाजार अपेक्षाओं के अनुरूप रहा है। वहीं फेडरल रिजर्व के लंबे समय तक सख्त रुख और भू-राजनीतिक तनावों के बीच अमेरिकी डॉलर मजबूत स्थिति में टिका हुआ है। सोने की कीमतों में गिरावट और बिटकॉइन का हाल कमोडिटी बाजार में सोने की चमक लगातार दूसरे कारोबारी सत्र में कमजोर पड़ती नजर आई। बहुमूल्य धातु प्रति ट्रॉय औंस 4,300 डॉलर के स्तर से नीचे फिसल गई, हालांकि बाद में इसमें मामूली स्थिरता दर्ज की गई। अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों को लंबे समय तक उच्च स्तर पर बनाए रखने की संभावनाओं से अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड और डॉलर को लगातार समर्थन मिल रहा है, जिसका सीधा दबाव सोने की कीमतों पर बना हुआ है। क्रिप्टोकरेंसी बाजार में बिटकॉइन पिछले दिन 6.7 प्रतिशत की जोरदार तेजी के बाद मंगलवार को ठहराव के दौर में नजर आया और 85,500 डॉलर के स्तर से नीचे कारोबार कर रहा था। इस मामूली गिरावट के बीच संस्थागत मांग मजबूत बनी हुई है। सोमवार को स्पॉट बिटकॉइन एक्सचेंज ट्रेडेड फंड यानी ETF में लगभग 1 अरब डॉलर का पूंजी प्रवाह दर्ज किया गया, जबकि स्ट्रैटेजी ने अपने ट्रेजरी भंडार में 950 BTC और जोड़े हैं। वैश्विक संपत्तियों में यह उतार-चढ़ाव निवेशकों की बदलती प्राथमिकताओं को दर्शा रहा है। इसका आप पर असर वैश्विक केंद्रीय बैंकों की सख्त मौद्रिक नीतियों और बढ़ती ब्याज दरों से अंतरराष्ट्रीय वित्तीय बाजारों में उथल-पुथल तेज हो सकती है, जिसका असर मुद्रा और निवेश संपत्तियों पर पड़ेगा। • मुद्रा विनिमय: विदेशी मुद्रा बाजारों में अमेरिकी डॉलर की मजबूती से एशियाई और अन्य प्रमुख मुद्राओं पर दबाव बढ़ सकता है। जो लोग विदेश यात्रा या अंतरराष्ट्रीय भुगतान की योजना बना रहे हैं, उन्हें विनिमय दरों पर नजदीकी नजर रखनी चाहिए। • सोने में निवेश: वैश्विक स्तर पर ब्याज दरें ऊंची रहने की संभावनाओं से सोने की कीमतों पर दबाव देखा जा रहा है। सोने में नया निवेश करने वाले खरीदारों को कीमतों में आने वाले उतार-चढ़ाव को ध्यान में रखकर ही निर्णय लेना चाहिए। • क्रिप्टोकरेंसी बाजार: बिटकॉइन में मजबूत संस्थागत निवेश प्रवाह के बावजूद अल्कालिक मूल्य अस्थिरता बनी हुई है। बड़े फंड्स द्वारा भारी खरीदारी के बीच खुदरा निवेशकों को सतर्क रुख अपनाना चाहिए। • वैश्विक कर्ज और व्यापार: दुनिया भर में दरों में संभावित बढ़ोतरी से वैश्विक व्यापारिक लागत और आयात-निर्यात से जुड़ी वित्त पोषण लागत बढ़ सकती है। आयातकों और निर्यातकों को अपनी हेजिंग रणनीतियों की समीक्षा करने की आवश्यकता हो सकती है। ऐसा क्यों हुआ केंद्रीय बैंकों द्वारा मौद्रिक नीति को और अधिक सख्त करने का निर्णय अनियंत्रित होती महंगाई के जोखिमों और मजबूत आर्थिक आंकड़ों के कारण लिया जा रहा है। ऊर्जा की बढ़ती कीमतें और प्रौद्योगिकी क्षेत्र की तीव्र वृद्धि नीति निर्माताओं को सतर्क रहने पर मजबूर कर रही है। • ऊर्जा कीमतों में उछाल: कच्चे तेल की कीमतें तिहरे अंकों के निकट पहुंचने से उत्पादन और परिवहन लागत में तेज वृद्धि हुई है। इस लागत दबाव के कारण केंद्रीय बैंकों के लिए महंगाई को अपने तय लक्ष्यों तक लाना कठिन हो गया है। • प्रौद्योगिकी और एआई का प्रभाव: कृत्रिम बुद्धिमत्ता क्षेत्र में बढ़ते निवेश और मांग ने बुनियादी ढांचे और आपूर्ति श्रृंखलाओं पर मूल्य दबाव बढ़ाया है। इससे व्यापक अर्थव्यवस्था में कीमतों पर ऊपर की ओर दबाव बना हुआ है। • आर्थिक लचीलापन: पिछली ब्याज दर बढ़ोतरी के बावजूद समग्र आर्थिक विकास और उपभोक्ता खर्च अपेक्षा से अधिक मजबूत बना हुआ है। इसके परिणामस्वरूप केंद्रीय बैंकों को लगता है कि नीतिगत दरें अभी भी पर्याप्त रूप से प्रतिबंधात्मक नहीं हैं। सवाल-जवाब 1. निकोलस चिया के अनुसार रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया ब्याज दरें कितनी कर सकता है? निकोलस चिया का अनुमान है कि 29 सितंबर की बैठक में रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया नकद दर को बढ़ाकर 4.60 प्रतिशत कर सकता है। 2. ऑस्ट्रेलिया में दरों में पहली कटौती कब होने की संभावना जताई गई है? दरों में पहली कटौती का अनुमान 2027 की पहली तिमाही से खिसकाकर 2027 की तीसरी तिमाही कर दिया गया है। 3. बैंक ऑफ जापान ने अपनी ब्याज दरों में क्या बदलाव किया है? बैंक ऑफ जापान ने 7-2 के बहुमत से अपने अल्पकालिक ब्याज दर लक्ष्य को 1.00 प्रतिशत से बढ़ाकर 1.25 प्रतिशत कर दिया है। 4. सोने की कीमत में हाल में क्या बदलाव दर्ज किया गया? सोने की कीमत लगातार दूसरे सत्र में गिरकर 4,300 डॉलर प्रति ट्रॉय औंस के स्तर से नीचे फिसल गई। 5. बिटकॉइन में संस्थागत मांग की क्या स्थिति रही? सोमवार को स्पॉट बिटकॉइन ईटीएफ में लगभग 1 अरब डॉलर का निवेश आया और स्ट्रैटेजी ने अपने ट्रेजरी में 950 बीटीसी जोड़े। https://trendkia.com/market/reserve-bank-of-australia-ki-byaja-daron-men-barhotari-ka-anumana-mahngai-ke-dabava-se-badala-rukha-36533 TrendKia — Har trend, sabse pehle.