ऑस्ट्रेलियाई केंद्रीय बैंक की ब्याज दरों में बढ़ोतरी की तैयारी, कैश रेट 4.85 प्रतिशत पहुंचने के आसार रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया मंगलवार को अपनी आधिकारिक नकद दर में 25 आधार अंकों की बढ़ोतरी कर इसे 4.85 प्रतिशत पर पहुंचा सकता है। महंगाई के लगातार ऊंचे बने रहने के कारण यह फैसला 18 साल के नए उच्च स्तर को छू सकता है। रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया अपने आगामी मौद्रिक नीति समीक्षा में नीतिगत ब्याज दर को बढ़ाकर 4.85 प्रतिशत के स्तर पर ले जाने की तैयारी कर रहा है। मंगलवार को होने वाले इस नीतिगत फैसले में आधिकारिक नकद दर यानी ऑफिशियल कैश रेट में 25 आधार अंकों की वृद्धि का अनुमान लगाया गया है, जिससे यह दर मौजूदा 4.6 प्रतिशत से बढ़कर सीधे 4.85 प्रतिशत तक पहुंच जाएगी। यदि केंद्रीय बैंक बाजार के अनुमानों के अनुरूप कदम उठाता है, तो यह वर्ष 2026 के भीतर ब्याज दरों में होने वाली पांचवीं वृद्धि साबित होगी। इसके साथ ही ऑस्ट्रेलिया की प्रमुख ब्याज दर 18 साल के अपने सर्वोच्च शिखर को छू लेगी। इस बहुप्रतीक्षित नीतिगत निर्णय की घोषणा 03:30 जीएमटी पर की जाएगी, जिसके साथ ही केंद्रीय बैंक अपना मौद्रिक नीति वक्तव्य भी जारी करेगा। इसके ठीक एक घंटे बाद, 04:30 जीएमटी पर बैंक की गवर्नर मिशेल बुलॉक एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करेंगी। इस महत्वपूर्ण घोषणा से पहले विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में ऑस्ट्रेलियाई डॉलर पर दबाव देखा जा रहा है और यह अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 0.7000 के अहम स्तर को बनाए रखने के लिए कड़ा संघर्ष कर रहा है। वैश्विक स्तर पर वित्तीय बाजारों में जोखिम लेने का माहौल बेहतर होने के बावजूद ऑस्ट्रेलियाई मुद्रा में यह कमजोरी दर्ज की जा रही है। महंगाई का बढ़ता दबाव और नीतिगत सख्ती की वजहें साल 2026 के दौरान दुनिया भर में ब्याज दरों में जारी तेज वृद्धि के पीछे निरंतर बना हुआ मुद्रास्फीति का दबाव सबसे बड़ा कारण रहा है, और ऑस्ट्रेलियाई अर्थव्यवस्था भी इस वैश्विक चुनौती से अलग नहीं है। केंद्रीय बैंक ने इस वर्ष पहली बार फरवरी के महीने में नीतिगत ब्याज दर में बढ़ोतरी की थी, जो मध्य पूर्व के सैन्य संघर्ष के चलते वैश्विक ऊर्जा कीमतों में आए भारी उछाल से पहले का समय था। बैंक अब तक चार बार दरें बढ़ा चुका है, लेकिन इसके बावजूद मुद्रास्फीति काबू में नहीं आ सकी है। ताज़ा आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, तीसरी तिमाही में देश की वार्षिक मुद्रास्फीति दर 3.9 प्रतिशत पर दर्ज की गई, जो केंद्रीय बैंक के 2 से 3 प्रतिशत के निर्धारित लक्ष्य दायरे से काफी अधिक बनी हुई है। इसके अतिरिक्त, केंद्रीय बैंक द्वारा सबसे ज्यादा तवज्जो दिया जाने वाला कोर पैमाना, जिसे ट्रिम्ड मीन कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स कहा जाता है, सालाना आधार पर तेज होकर 3.7 प्रतिशत पर पहुंच गया है, जबकि दूसरी तिमाही में यह 3.6 प्रतिशत दर्ज किया गया था। ऑस्ट्रेलियाई संसद के समक्ष अपनी हालिया पेशी के दौरान गवर्नर मिशेल बुलॉक ने स्पष्ट रूप से संकेत दिया था कि महंगाई को लेकर अंतरराष्ट्रीय और घरेलू स्तर पर जो प्रतिकूल जोखिम बने हुए थे, वे अब वास्तव में सामने आ चुके हैं या आ रहे हैं। उनका मानना है कि अर्थव्यवस्था की मजबूती के लिए यह बेहद आवश्यक है कि मुद्रास्फीति लंबे समय तक तय लक्ष्य से दूर न रहे, क्योंकि ऐसा होने पर यह महंगाई की उम्मीदों में रच-बस जाएगी और आगे चलकर कीमतों तथा वेतन निर्धारण से जुड़े फैसलों पर स्थायी असर डालने लगेगी। मुद्रा बाजार पर संभावित असर और तकनीकी स्तर यदि केंद्रीय बैंक अपेक्षा के अनुरूप 25 आधार अंकों की बढ़ोतरी का फैसला सुनाता है, तो ऑस्ट्रेलियाई डॉलर को निकट भविष्य में सहारा मिलने की संभावना है। हालांकि यह बढ़त इस बात पर काफी हद तक निर्भर करेगी कि जारी होने वाले आधिकारिक बयान और गवर्नर बुलॉक की टिप्पणियों में सख्त रुख कितना मजबूत नजर आता है। यदि अनुमान से भी बड़ी बढ़ोतरी की जाती है, तो अमेरिकी डॉलर में नरमी और बाजार के सकारात्मक रुख के बीच ऑस्ट्रेलियाई मुद्रा में तेज उछाल आ सकता है। दरों को यथावत रखने की संभावना बेहद कम मानी जा रही है, लेकिन यदि ऐसा कोई अप्रत्याशित निर्णय आता है तो ऑस्ट्रेलियाई डॉलर में भारी गिरावट दर्ज की जा सकती है। तकनीकी विश्लेषण के लिहाज से, बेदनारिक के अनुसार यदि ऑस्ट्रेलियाई डॉलर 0.6990 के स्तर से नीचे खिसकता है, तो इससे बिकवाली का नया दौर शुरू हो सकता है क्योंकि खरीदार अपनी स्थिति छोड़ने को मजबूर होंगे। ऐसी स्थिति में गिरावट का यह दायरा बढ़कर 0.6640 के दायरे तक गहरा सकता है। इसके विपरीत, यदि मुद्रा लगातार मजबूती हासिल करते हुए 0.7070 के पार निकलती है, तो यह फिर से 0.7100 के अहम स्तर पर अपनी पकड़ मजबूत कर सकती है। ऑस्ट्रेलियाई डॉलर के मुख्य कारक और आर्थिक समीकरण ऑस्ट्रेलियाई डॉलर के मूल्य निर्धारण में रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया द्वारा तय की जाने वाली ब्याज दरें सबसे अहम भूमिका निभाती हैं। चूंकि ऑस्ट्रेलिया प्राकृतिक संसाधनों से भरपूर एक प्रमुख निर्यातक देश है, इसलिए इसके सबसे बड़े निर्यात उत्पाद लौह अयस्क की अंतरराष्ट्रीय कीमतें भी मुद्रा के उतार-चढ़ाव को सीधे नियंत्रित करती हैं। इसके साथ ही ऑस्ट्रेलिया के सबसे बड़े व्यापारिक साझेदार चीन की आर्थिक स्थिति, घरेलू विकास दर, व्यापार संतुलन और घरेलू महंगाई के आंकड़े भी मुद्रा के उतार-चढ़ाव को दिशा देते हैं। वैश्विक बाजारों का मिजाज भी असर डालता है, जहां जोखिम भरे दौर में इस मुद्रा को बल मिलता है और सतर्कता के माहौल में दबाव बढ़ता है। केंद्रीय बैंक बैंकों के बीच परस्पर उधारी की दर तय करके पूरी अर्थव्यवस्था में उधारी की लागत को नियंत्रित करता है। बैंक का मुख्य ध्येय ब्याज दरों के समायोजन के जरिए महंगाई को 2 से 3 प्रतिशत के दायरे में बनाए रखना है। अन्य प्रमुख केंद्रीय बैंकों की तुलना में ऑस्ट्रेलिया में ऊंची ब्याज दरें इसकी मुद्रा को मजबूत करती हैं, जबकि दरें कम रहने पर इसका उल्टा असर पड़ता है। इसके अलावा केंद्रीय बैंक क्वांटिटेटिव ईजिंग और टाइटनिंग जैसे मौद्रिक उपकरणों से भी कर्ज की उपलब्धता को नियंत्रित करता है, जहां नकदी की सख्ती मुद्रा के लिए सकारात्मक और तरलता का विस्तार नकारात्मक असर लाता है। चीनी अर्थव्यवस्था, लौह अयस्क और व्यापार संतुलन की भूमिका चीन के साथ ऑस्ट्रेलिया के गहरे व्यापारिक रिश्ते हैं, इसलिए चीनी अर्थव्यवस्था की सेहत का ऑस्ट्रेलियाई डॉलर पर सीधा असर देखने को मिलता है। जब चीन की आर्थिक गतिविधियां तेज होती हैं, तो वह ऑस्ट्रेलिया से भारी मात्रा में कच्चा माल, उत्पाद और सेवाएं खरीदता है, जिससे ऑस्ट्रेलियाई मुद्रा की मांग और मूल्य में बढ़ोतरी होती है। इसके विपरीत, जब चीनी अर्थव्यवस्था की रफ्तार सुस्त पड़ती है, तो मांग घट जाती है। चीन के आर्थिक विकास से जुड़े आंकड़ों के सकारात्मक या नकारात्मक रुझान का असर सीधे तौर पर मुद्रा जोड़े पर दिखाई पड़ता है। लौह अयस्क ऑस्ट्रेलिया का सबसे बड़ा निर्यात उत्पाद है, जो 2021 के आंकड़ों के अनुसार सालाना 118 अरब डॉलर का योगदान देता है और इसका मुख्य खरीदार चीन है। ऐसे में लौह अयस्क की वैश्विक कीमतों में होने वाला उतार-चढ़ाव सीधे मुद्रा की दिशा तय करता है। जब अयस्क की कीमतें चढ़ती हैं, तो मुद्रा की मांग बढ़ने से इसका मूल्य मजबूत होता है, जबकि कीमतें गिरने पर मुद्रा दबाव में आ जाती है। इसके अलावा, मजबूत कीमतें ऑस्ट्रेलिया के व्यापार संतुलन को अनुकूल बनाने में मदद करती हैं, जो मुद्रा के लिए एक और सकारात्मक पहलू है। व्यापार संतुलन यानी आयात पर किए गए खर्च के मुकाबले निर्यात से होने वाली आय का अंतर भी काफी असरदार होता है, जहां व्यापार अधिशेष मुद्रा को शक्ति देता है और घाटा इसे कमजोर करता है। वैश्विक वित्तीय बाजारों में व्यापक हलचल सप्ताह की शुरुआत में मुद्रा और जिंस बाजारों में अन्यत्र भी महत्वपूर्ण हलचल देखने को मिल रही है। अमेरिकी डॉलर के मुकाबले जापानी येन में नई मजबूती देखी गई, जहां यूएसडी/जेपीवाई शुक्रवार को बैंक ऑफ जापान के रुख के बाद उपजे 157.00 से नीचे के स्तर से उबरकर एशियाई सत्र के दौरान 158.00 के करीब पहुंच गया। जापान के वित्त मंत्री सात्सुकी कातायामा की ओर से बाजार में हस्तक्षेप की ताजा चेतावनी के बावजूद यह गति जारी रही। कमोडिटी बाजार में, अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत की सकारात्मक सुर्खियों के बाद कच्चे तेल की कीमतों में आई गिरावट के दम पर सोने ने अमेरिकी कारोबारी सत्र के दौरान अपनी रिकवरी का दायरा बढ़ाया। सोना शुक्रवार को 3,870 डॉलर के वार्षिक निचले स्तर तक गिरने और अक्टूबर में 6.87 प्रतिशत की मासिक गिरावट झेलने के बाद संभलने की कोशिश करता दिखा, हालांकि व्यापक बुनियादी हालात अब भी इस सुधार पर सवाल खड़े कर रहे हैं। वहीं कॉरपोरेट मोर्चे पर, एप्पल ने अपनी चौथी तिमाही में आईफोन की मजबूत बिक्री के सहारे वाल स्ट्रीट के अनुमानों को पीछे छोड़ दिया। कंपनी ने 57.58 अरब डॉलर की आईफोन बिक्री दर्ज की, जो विश्लेषकों के औसत अनुमान से 1 अरब डॉलर से अधिक रही, हालांकि वित्तीय आंकड़ों के बेहतर रहने के बावजूद आफ्टर-आवर्स कारोबार में एप्पल के शेयरों में करीब 4 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। इसका आप पर असर रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया द्वारा नीतिगत दरों में संभावित बढ़ोतरी से वैश्विक मुद्रा बाजारों में अस्थिरता बढ़ेगी और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उधारी लागत में इजाफा होगा। • वैश्विक निवेशकों के लिए: दरों में 25 आधार अंकों की वृद्धि से ऑस्ट्रेलियाई डॉलर को अल्पकालिक मजबूती मिल सकती है। निवेशकों को 0.6990 और 0.7070 के प्रमुख तकनीकी स्तरों पर नजर बनाए रखनी चाहिए। • आयात-निर्यात कारोबारियों के लिए: मजबूत कैश रेट और लौह अयस्क की कीमतों के रुझान से व्यापार संतुलन प्रभावित होगा। अंतरराष्ट्रीय व्यापार में लगे आयातकों और निर्यातकों को मुद्रा विनिमय दरों के उतार-चढ़ाव के लिए अग्रिम हेजिंग करनी पड़ सकती है। • कमोडिटी और शेयर बाजारों के लिए: कच्चे तेल में नरमी और सोने की अस्थिरता के बीच उच्च ब्याज दरें इक्विटी वैल्यूएशन पर दबाव बनाए रख सकती हैं। निवेशकों को केंद्रीय बैंक के नीतिगत बयान के आधार पर पोर्टफोलियो जोखिम का पुनर्मूल्यांकन करना चाहिए। • ऋणधारकों और छात्रों के लिए: ऑस्ट्रेलिया में अध्ययनरत या वहां निवास कर रहे लोगों के लिए स्थानीय स्तर पर होम लोन और व्यक्तिगत उधारी 18 साल के उच्चतम स्तर पर पहुंच जाएगी। इससे मासिक किश्तों और जीवनयापन के खर्च में तुरंत बढ़ोतरी देखने को मिलेगी। ऐसा क्यों हुआ रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया द्वारा ब्याज दरों में बढ़ोतरी का मुख्य कारण घरेलू और अंतरराष्ट्रीय कारकों से उपजी लगातार ऊंची मुद्रास्फीति है। बैंक के तमाम पिछले प्रयासों के बावजूद महंगाई दर निर्धारित सीमा से काफी ऊपर बनी हुई है। • अनियंत्रित मुद्रास्फीति: तीसरी तिमाही में देश की वार्षिक मुद्रास्फीति 3.9 प्रतिशत और कोर ट्रिम्ड मीन सीपीआई 3.7 प्रतिशत पर पहुंच गई। यह स्तर केंद्रीय बैंक के 2 से 3 प्रतिशत के तय लक्ष्य दायरे से कहीं अधिक है। • वैश्विक ऊर्जा और भू-राजनीतिक झटके: वर्ष 2026 की शुरुआत में ही मध्य पूर्व के युद्ध ने ऊर्जा कीमतों में भारी उछाल ला दिया था। इस अंतरराष्ट्रीय संकट ने आयातित वस्तुओं की लागत बढ़ाकर घरेलू महंगाई को और हवा दी। • दीर्घकालिक महंगाई की आशंका: केंद्रीय बैंक को अंदेशा है कि यदि दरों को नहीं बढ़ाया गया तो ऊंची कीमतें वेतन और मूल्य निर्धारण में स्थायी रूप से शामिल हो जाएंगी। इस मनोवैज्ञानिक चक्र को तोड़ने के लिए नीतिगत सख्ती अपरिहार्य हो गई है। सवाल-जवाब 1. रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया ब्याज दरों में कितने बदलाव की तैयारी कर रहा है? केंद्रीय बैंक द्वारा आधिकारिक नकद दर को 25 आधार अंक बढ़ाकर 4.6 प्रतिशत से 4.85 प्रतिशत करने का अनुमान है। 2. यदि ब्याज दरें 4.85 प्रतिशत हो जाती हैं, तो यह कितने वर्षों का रिकॉर्ड होगा? ब्याज दर के 4.85 प्रतिशत पर पहुंचने से यह पिछले 18 वर्षों के अपने उच्चतम स्तर को छू लेगी। 3. ऑस्ट्रेलिया में मौजूदा मुद्रास्फीति की दर कितनी दर्ज की गई है? तीसरी तिमाही में देश की वार्षिक मुद्रास्फीति दर 3.9 प्रतिशत और कोर ट्रिम्ड मीन दर 3.7 प्रतिशत दर्ज की गई है। 4. ऑस्ट्रेलियाई डॉलर के मूल्य को कौन से प्रमुख आर्थिक कारक प्रभावित करते हैं? केंद्रीय बैंक की ब्याज दरें, लौह अयस्क की कीमतें, चीन की आर्थिक वृद्धि दर और देश का व्यापार संतुलन इसके मुख्य कारक हैं। 5. साल 2021 के आंकड़ों के अनुसार ऑस्ट्रेलिया के लौह अयस्क निर्यात का मूल्य कितना था? साल 2021 के आंकड़ों के मुताबिक ऑस्ट्रेलिया का वार्षिक लौह अयस्क निर्यात 118 अरब डॉलर का रहा था। https://trendkia.com/market/reserve-bank-of-australia-ki-byaja-daron-men-barhotari-ki-taiyari-cash-rate-4-85-pratishata-pahunchane-ke-asara-55338 TrendKia — Har trend, sabse pehle.