रिज़र्व बैंक ऑफ़ ऑस्ट्रेलिया ने ब्याज दरें बढ़ाईं फिर भी लुढ़का ऑस्ट्रेलियाई डॉलर रिज़र्व बैंक ऑफ़ ऑस्ट्रेलिया द्वारा नीतिगत दर बढ़ाकर 4.85 प्रतिशत करने के बावजूद ऑस्ट्रेलियाई डॉलर दो हफ़्ते के निचले स्तर पर फिसल गया, क्योंकि बाज़ार इसे आखिरी बढ़ोतरी मान रहा है। नीतिगत ब्याज दरों में बढ़ोतरी के बावजूद मुद्रा में तेज़ गिरावट का असामान्य नज़ारा विदेशी मुद्रा बाज़ार में देखने को मिला। रिज़र्व बैंक ऑफ़ ऑस्ट्रेलिया ने अपनी प्रमुख नीतिगत दर में 25 आधार अंकों का इज़ाफ़ा करते हुए इसे 4.85 प्रतिशत के स्तर पर पहुंचा दिया, लेकिन मुद्रा बाज़ार ने इस फ़ैसले का स्वागत करने के बजाय ऑस्ट्रेलियाई डॉलर में बिकवाली शुरू कर दी। एशियाई कारोबारी सत्र के दौरान मंगलवार को लगातार दूसरे दिन ऑस्ट्रेलियाई डॉलर अमेरिकी डॉलर के मुकाबले कमज़ोर होकर अपने दो हफ़्ते के निचले स्तर पर फिसल गया। केंद्रीय बैंक के बंटे हुए फ़ैसले ने बाज़ार का मूड बदला आमतौर पर जब कोई केंद्रीय बैंक ब्याज दरें बढ़ाता है, तो उसकी घरेलू मुद्रा को मजबूती मिलती है। हालांकि, रिज़र्व बैंक ऑफ़ ऑस्ट्रेलिया के इस क़दम के बाद ठीक उलटा असर दिखा। केंद्रीय बैंक के नौ सदस्यीय बोर्ड में इस निर्णय पर पूर्ण सहमति नहीं बन सकी। बोर्ड के छह सदस्यों ने दर बढ़ाने के पक्ष में मतदान किया, जबकि तीन सदस्यों का रुख़ अलग रहा और वे दरों को 4.60 प्रतिशत के पिछले स्तर पर ही स्थिर रखने के पक्ष में थे। छह बनाम तीन के इस मतदान विभाजन ने वित्तीय बाज़ारों को स्पष्ट संदेश दिया कि बोर्ड के भीतर भविष्य में मौद्रिक सख्ती को लेकर सतर्कता बढ़ रही है। कोमर्ज़बैंक के नॉर्मन लीबके के अनुसार, छह-तीन के बहुमत से हुआ यह फ़ैसला बोर्ड में बढ़ती सावधानी को रेखांकित करता है। नॉर्मन लीबके ने कहा, "Overall, the hurdle for another rate hike is therefore likely to be quite high, and we do not expect any further increase in interest rates." विश्लेषकों का मानना है कि इस संकोच भरे रुख़ की वजह से अगली दर वृद्धि की संभावना बेहद क्षीण हो गई है, जिसके चलते आने वाले दिनों में ऑस्ट्रेलियाई डॉलर पर दबाव बना रह सकता है। महंगाई का लक्ष्य देर से हासिल होने का अनुमान नीतिगत बयान में ऑस्ट्रेलियाई केंद्रीय बैंक ने स्वीकार किया कि देश में मुद्रास्फीति अब भी उसके 2 से 3 प्रतिशत के आधिकारिक लक्ष्य दायरे से काफी ऊपर बनी हुई है। ताज़ा अनुमानों के अनुसार, मुद्रास्फीति के इस तय दायरे में 2027 के उत्तरार्ध तक ही लौटने की संभावना है, जो कि पहले लगाए गए अनुमानों की तुलना में लगभग तीन तिमाहियां देरी से होगा। इस देरी का मुख्य कारण वैश्विक कच्चे तेल के झटके और बाहरी कारक हैं, जिन्होंने मूल्य वृद्धि पर लगातार दबाव बनाए रखा है। मुद्रास्फीति की प्रत्याशाओं को लेकर भी चिंताएं गहरा रही हैं। सर्वेक्षण आधारित पैमानों में हाल ही में अल्पकालिक और दीर्घकालिक दोनों स्तरों पर तेज़ उछाल दर्ज किया गया है। सैद्धांतिक रूप से महंगाई के ऐसे लंबे अनुमान केंद्रीय बैंक को आक्रामक क़दम उठाने के लिए प्रेरित करते हैं, जिसे पहली नज़र में सख्त नीति माना जा सकता है। इसके बावजूद आर्थिक विकास दर और श्रम बाज़ार से जुड़े अनुमानों में नरमी के कारण निवेशक आश्वस्त हैं कि केंद्रीय बैंक अब दरों में और बढ़ोतरी करने की स्थिति में नहीं है। वैश्विक दरों और प्रमुख मुद्राओं का रुख़ विशेषज्ञों का आकलन है कि ऑस्ट्रेलियाई डॉलर का भविष्य अब घरेलू नीतियों के बजाय मुख्य रूप से संयुक्त राज्य अमेरिका और यूरो क्षेत्र की ब्याज दर अपेक्षाओं पर निर्भर करेगा। हालांकि कुछ अर्थशास्त्री दिसंबर में ब्याज दरों में बढ़ोतरी की उम्मीद कर रहे हैं, लेकिन बाज़ार में अतिरिक्त मौद्रिक सख्ती को लेकर लगाई जा रही मौजूदा अटकलें ज़रूरत से ज़्यादा हो सकती हैं। यदि वैश्विक स्तर पर दर वृद्धि का चक्र थमता है, तो इससे अंततः ऑस्ट्रेलियाई डॉलर को कुछ सहारा मिल सकता है। अन्य प्रमुख मुद्राओं की बात करें तो यूएसडी/जेपीवाई मंगलवार के एशियाई सत्र में फिसल गया और 158.00 के पिछले स्तर से नीचे आ गया। ईरान से जुड़ी कूटनीतिक उम्मीदों और अमेरिकी मध्यावधि चुनावों से पहले अमेरिकी डॉलर में कुछ सुस्ती देखी गई। वहीं बैंक ऑफ़ जापान द्वारा अगली दर वृद्धि के समय को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है, हालांकि संभावित सरकारी हस्तक्षेप का डर जापानी येन को गिरावट से बचा रहा है। इसके चलते यह मुद्रा जोड़ी एक सीमित दायरे में कारोबार कर रही है। सोने और क्रिप्टोकरेंसी बाज़ार पर असर कमोडिटी बाज़ार में सोने की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई। यूरोपीय सत्र के पहले हिस्से में सोना 3,900 डॉलर प्रति औंस के मनोवैज्ञानिक स्तर से नीचे आ गया। अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा आगे भी सख्त मौद्रिक नीति बनाए रखने की चिंताओं के बीच सोने की कीमतें अक्टूबर 2025 के बाद के अपने सबसे निचले स्तर के क़रीब पहुंच गईं। इस बिकवाली को सोमवार को आए अमेरिकी विनिर्माण क्षेत्र के आंकड़ों से भी बल मिला, जहां अक्टूबर में कारोबारी गतिविधियां लगातार 10वें महीने विस्तारित हुईं। इंस्टीट्यूट फॉर सप्लाई मैनेजमेंट का विनिर्माण पीएमआई सितंबर के 54.5 से बढ़कर अक्टूबर में 55.5 पर पहुंच गया, जो बाज़ार के अनुमानों से बेहतर था। डिजिटल परिसंपत्तियों के क्षेत्र में कार्डानो की कीमतों में गिरावट का सिलसिला जारी रहा। सोमवार को अपना अहम समर्थन स्तर गंवाने के बाद कार्डानो मंगलवार को 0.189 डॉलर से नीचे कारोबार कर रहा था। डेरिवेटिव बाज़ार के मिले-जुले आंकड़ों, सतर्क ऑन-चेन संकेतकों और तकनीकी संकेतकों की कमज़ोरी के कारण टोकन में लगातार मंदी का माहौल देखा जा रहा है। इसका आप पर असर केंद्रीय बैंकों के फैसलों और वैश्विक बाज़ार की हलचलों का सीधा प्रभाव निवेशकों के पोर्टफोलियो, विदेशी मुद्रा विनिमय और आयात-निर्यात लागत पर पड़ता है। • मुद्रा विनिमय: ऑस्ट्रेलियाई डॉलर में निवेश या लेनदेन करने वालों को फिलहाल सतर्कता बरतनी होगी। नीतिगत रुख़ नरम पड़ने से आने वाले हफ्तों में यह मुद्रा सीमित दायरे में दबाव में रह सकती है। • सोने के खरीदार: अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में 3,900 डॉलर प्रति औंस से नीचे आने से सोने की कीमतों में नरमी का रुख बना हुआ है। अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों में मजबूती बने रहने तक सोने में तेज़ उछाल की संभावना कम दिखती है। • क्रिप्टो निवेशक: कार्डानो के 0.189 डॉलर से नीचे जाने से altcoins में जोखिम बढ़ गया है। महत्वपूर्ण सपोर्ट टूटने के बाद ट्रेडर्स को नए सौदे लेने से पहले बाज़ार में स्थिरता का इंतज़ार करना चाहिए। • वैश्विक व्यापार: तेल के झटकों और मुद्रास्फीति में देरी के कारण आयातकों की लागत ऊंची बनी रह सकती है। अमेरिकी विनिर्माण पीएमआई 55.5 पर पहुंचने से डॉलर का दबदबा अन्य मुद्राओं पर भारी पड़ रहा है। ऐसा क्यों हुआ ऑस्ट्रेलियाई डॉलर में गिरावट ब्याज दर बढ़ने के बावजूद इसलिए आई क्योंकि केंद्रीय बैंक के भीतर मतभेद खुलकर सामने आ गए और आगे बढ़ोतरी की उम्मीदें समाप्त हो गईं। • बंटा हुआ मतदान: रिज़र्व बैंक के बोर्ड में छह सदस्यों ने 25 आधार अंकों की बढ़ोतरी का समर्थन किया जबकि तीन ने दरें 4.60 प्रतिशत पर रखने का पक्ष लिया। इस आंतरिक विभाजन ने संकेत दिया कि भविष्य में दरों में इज़ाफ़े की संभावना लगभग ख़त्म हो चुकी है। • कमज़ोर विकास पूर्वानुमान: मुद्रास्फीति के 2027 के उत्तरार्ध तक लक्ष्य दायरे से बाहर रहने के बावजूद आर्थिक विकास और श्रम बाज़ार में नरमी देखी जा रही है। बाहरी तेल झटकों से उपजी महंगाई के बीच आक्रामक रुख अपनाना केंद्रीय बैंक के लिए मुश्किल साबित हो रहा है। • अमेरिकी डॉलर की मजबूती: अमेरिका में विनिर्माण पीएमआई 55.5 पर आने और 10 महीनों के लगातार विस्तार ने अमेरिकी डॉलर को मजबूती दी। अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा सख्ती जारी रखने की उम्मीदों ने ऑस्ट्रेलियाई डॉलर, सोने और अन्य संपत्तियों पर चौतरफा दबाव डाला। सवाल-जवाब 1. रिज़र्व बैंक ऑफ़ ऑस्ट्रेलिया ने ब्याज दरों में कितना बदलाव किया? रिज़र्व बैंक ऑफ़ ऑस्ट्रेलिया ने नीतिगत ब्याज दर में 25 आधार अंकों की बढ़ोतरी करते हुए इसे 4.85 प्रतिशत कर दिया। 2. दरें बढ़ने के बाद भी ऑस्ट्रेलियाई डॉलर क्यों गिरा? बोर्ड के तीन सदस्यों ने बढ़ोतरी का विरोध किया और बाज़ार ने इसे भविष्य में दरें न बढ़ने का संकेत मानकर बिकवाली शुरू कर दी। 3. ऑस्ट्रेलिया में महंगाई कब तक 2-3 प्रतिशत के लक्ष्य पर लौटने की उम्मीद है? केंद्रीय बैंक के अनुसार महंगाई 2027 के उत्तरार्ध तक ही अपने लक्ष्य दायरे में लौट पाएगी, जो पहले के अनुमान से लगभग तीन तिमाहियां देर से है। 4. सोने की कीमतों में कितनी गिरावट दर्ज की गई? सोना फिसलकर 3,900 डॉलर प्रति औंस के नीचे आ गया और अक्टूबर 2025 के बाद के अपने निचले स्तर के क़रीब पहुंच गया। 5. अमेरिकी विनिर्माण पीएमआई के ताज़ा आंकड़े क्या रहे? इंस्टीट्यूट फॉर सप्लाई मैनेजमेंट के अनुसार अक्टूबर में अमेरिकी विनिर्माण पीएमआई बढ़कर 55.5 पर पहुंच गया, जो पिछले महीने 54.5 था। 6. कार्डानो क्रिप्टोकरेंसी का ताज़ा स्तर क्या है? कार्डानो अपने प्रमुख सपोर्ट स्तर को गंवाने के बाद मंगलवार को 0.189 डॉलर से नीचे कारोबार कर रहा था। https://trendkia.com/market/reserve-bank-of-australia-ne-byaja-daren-barhain-phira-bhi-lurhaka-australian-dollar-55685 TrendKia — Har trend, sabse pehle.