रियाद हवाई अड्डे के पास गहराया धुआं, यमन के हूती विद्रोहियों का सऊदी राजधानी पर मिसाइल और ड्रोन हमले का दावा यमन के हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब की राजधानी रियाद में महत्वपूर्ण ठिकानों को निशाना बनाने की बात कही है, जिसके बाद खाड़ी क्षेत्र में तनाव बढ़ गया है और वैश्विक वित्तीय बाजारों में हलचल तेज हो गई है। यमन के हूती लड़ाकों ने सऊदी अरब की राजधानी रियाद में स्थित संवेदनशील ठिकानों पर मिसाइलों और ड्रोन के जरिए हमला करने की बात कही है। यह घटनाक्रम उस समय सामने आया जब रियाद के मुख्य अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के निकट घने धुएं का एक बड़ा गुबार और भीषण आग की लपटें दिखाई दीं। इस अप्रत्याशित घटना के बाद पूरे इलाके में सुरक्षा तंत्र को सतर्क कर दिया गया है। रियाद में सुरक्षा चेतावनी और क्षेत्रीय तनातनी सऊदी अरब के प्रशासन ने रात भर रियाद और आसपास के इलाकों में संभावित खतरे को लेकर सार्वजनिक चेतावनियां जारी कीं। ईरान समर्थित हूती गुट के साथ जुलाई में संघर्ष भड़कने के बाद यह पहला मौका है जब सऊदी सरकार ने राजधानी रियाद के लिए इस स्तर की आधिकारिक सुरक्षा चेतावनी जारी की है। इस चेतावनी ने खाड़ी क्षेत्र में नागरिक और औद्योगिक सुरक्षा को लेकर नई चिंताएं पैदा कर दी हैं। दूसरी ओर, ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स यानी IRGC ने कड़ा रुख अपनाते हुए सख्त चेतावनी दी है। IRGC ने स्पष्ट किया कि यदि कोई हमला होता है, तो क्षेत्र में स्थित सभी अमेरिकी ठिकाने और हित बिना किसी सीमा या विचार के निरंतर, प्रभावी और दर्दनाक हमलों के निशाने पर आ जाएंगे। इस बयान ने मध्य पूर्व में बड़े पैमाने पर क्षेत्रीय संघर्ष की आशंकाओं को और ज्यादा गहरा कर दिया है। कच्चे तेल के दामों पर दबाव और डब्ल्यूटीआई की स्थिति इस गंभीर भू-राजनीतिक उथल-पुथल के बीच अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में नरमी दर्ज की गई है। वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट यानी WTI क्रूड 1.74% गिरकर 93.60 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर पहुंच गया। आमतौर पर जब भी तेल उत्पादक क्षेत्रों में सैन्य संघर्ष या मिसाइल हमलों की घटनाएं होती हैं, तो आपूर्ति बाधित होने के डर से कीमतों में उछाल आता है, परंतु मौजूदा सत्र में तेल दबाव में कारोबार करता दिखा। WTI क्रूड अंतरराष्ट्रीय बाजारों में बेचा जाने वाला कच्चे तेल का एक प्रमुख प्रकार है। इसे ब्रेंट और दुबई क्रूड के साथ दुनिया के तीन सबसे बड़े तेल प्रकारों में गिना जाता है। अपने अपेक्षाकृत कम घनत्व और सल्फर की अत्यंत कम मात्रा के कारण WTI को 'लाइट' और 'स्वीट' क्रूड भी कहा जाता है। इसे उच्च गुणवत्ता वाला तेल माना जाता है, जिसका शोधन यानी रिफाइनिंग बेहद आसान होता है। इसका उत्पादन संयुक्त राज्य अमेरिका में होता है और इसका वितरण कुशिंग हब के माध्यम से किया जाता है, जिसे 'द पाइपलाइन क्रॉसरोड्स ऑफ द वर्ल्ड' के रूप में जाना जाता है। वैश्विक ऊर्जा बाजार के लिए यह एक अनिवार्य बेंचमार्क है और वित्तीय मीडिया में इसके दामों का लगातार उल्लेख किया जाता है। तेल की कीमतों को तय करने वाले प्रमुख कारक दुनिया की अन्य सभी संपत्तियों की तरह WTI क्रूड की कीमतें भी मूल रूप से मांग और आपूर्ति के संतुलन पर निर्भर करती हैं। मजबूत वैश्विक आर्थिक विकास कच्चे तेल की बढ़ती मांग का बड़ा माध्यम बनता है, जबकि कमजोर वैश्विक विकास मांग को घटा देता है। राजनीतिक अस्थिरता, क्षेत्रीय युद्ध और अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध तेल की आपूर्ति श्रृंखला को बाधित करके कीमतों पर गहरा असर डालते हैं। इसके अलावा प्रमुख तेल उत्पादक देशों के समूह ओपेक के नीतिगत फैसले भी कीमतों के सबसे बड़े निर्धारकों में से एक हैं। अमेरिकी डॉलर का मूल्य भी WTI क्रूड के भाव को प्रभावित करता है, क्योंकि वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल का अधिकांश कारोबार अमेरिकी डॉलर में ही होता है। जब अमेरिकी डॉलर कमजोर होता है, तो अंतरराष्ट्रीय खरीदारों के लिए तेल खरीदना अपेक्षाकृत किफायती हो जाता है, जबकि डॉलर की मजबूती से कच्चे तेल की खरीद महंगी हो जाती है। इन्वेंट्री रिपोर्ट्स और ओपेक का उत्पादन तंत्र कच्चे तेल के भाव को तय करने में साप्ताहिक इन्वेंट्री डेटा अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। अमेरिकन पेट्रोलियम इंस्टीट्यूट यानी API और सरकारी ऊर्जा सूचना एजेंसी यानी EIA द्वारा जारी की जाने वाली साप्ताहिक तेल भंडार रिपोर्ट से कीमतों में सीधे उतार-चढ़ाव आता है। भंडार में आने वाले बदलाव वास्तविक आपूर्ति और मांग की स्थिति को दर्शाते हैं। यदि रिपोर्ट में भंडार घटता दिखता है, तो यह मांग में वृद्धि का संकेत देता है जिससे कीमतें ऊपर चढ़ती हैं। इसके विपरीत, ऊंचे भंडार आपूर्ति की अधिकता को दर्शाते हैं, जिससे दामों में गिरावट आती है। API की यह रिपोर्ट हर मंगलवार को प्रकाशित होती है और EIA की रिपोर्ट उसके अगले दिन यानी बुधवार को सामने आती है। इन दोनों एजेंसियों के आंकड़े आमतौर पर एक समान दिशा दिखाते हैं और 75% मामलों में इनका अंतर 1% के भीतर ही रहता है। एक आधिकारिक सरकारी एजेंसी होने के नाते EIA के आंकड़ों को वित्तीय जगत में अधिक विश्वसनीय और प्रामाणिक माना जाता है। संगठन के मोर्चे पर, ओपेक 12 तेल उत्पादक देशों का एक साझा मंच है, जो साल में दो बार होने वाली अपनी बैठकों में सदस्य देशों के लिए उत्पादन कोटा तय करता है। जब ओपेक उत्पादन कोटा घटाने का निर्णय लेता है, तो वैश्विक बाजार में आपूर्ति तंग हो जाती है, जिससे तेल की कीमतें उछलती हैं। वहीं, जब ओपेक उत्पादन बढ़ाता है, तो इसका ठीक उल्टा असर दिखाई देता है। ओपेक+ इस समूह का विस्तारित रूप है, जिसमें दस अतिरिक्त गैर-ओपेक उत्पादक देश शामिल हैं, जिनमें सबसे प्रमुख देश रूस है। वैश्विक मुद्रा बाजार और बॉन्ड नीति का व्यापक असर सैन्य तनाव और ऊर्जा बाजार की हलचल के साथ-साथ वैश्विक मुद्रा और धातु बाजारों में भी अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है। एशियाई कारोबारी सत्र में सोमवार को AUD/USD की जोड़ी 0.7100 के स्तर से ऊपर मजबूती से टिकी रही। अमेरिकी डॉलर ने जुलाई के अंत के बाद के अपने उच्चतम स्तर से शुरू हुई हल्की गिरावट को थाम लिया है, जिसके पीछे भू-राजनीतिक अनिश्चितताएं प्रमुख वजह बनी हुई हैं। हालांकि चीनी केंद्रीय बैंक यानी PBOC द्वारा लोन प्राइम रेट्स पर यथास्थिति बनाए रखने से ऑस्ट्रेलियाई डॉलर पर दबाव बना, लेकिन ट्रंप-शी शिखर सम्मेलन से पहले ऑस्ट्रेलियाई केंद्रीय बैंक यानी RBA द्वारा ब्याज दरों में एक और बढ़ोतरी के दांव ने ऑस्ट्रेलियाई डॉलर को सहारा दिया। उधर, जापानी मुद्रा बाजार में USD/JPY की जोड़ी सोमवार को एशिया में 157.00 के नीचे फिसलती नजर आई। बैंक ऑफ जापान द्वारा शुक्रवार को रेट चेक किए जाने के बाद संभावित सरकारी हस्तक्षेप के जोखिम के बीच जापानी येन में हल्की मजबूती दर्ज की गई। जापान में सार्वजनिक अवकाश के दौरान रूस और यूक्रेन तथा मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के चलते कारोबारी सतर्क रहे, जिससे अमेरिकी डॉलर की गिरावट सीमित रही। वहीं, कीमती धातुओं में सोने को पिछले दो दिनों में दर्ज की गई अपनी रिकवरी को आगे बढ़ाने में भारी संघर्ष करना पड़ा और नए कारोबारी सप्ताह की शुरुआत में नए बिकवाल सक्रिय हो गए। मध्य पूर्व में व्यापक संघर्ष के जोखिम ने सुरक्षित निवेश माने जाने वाले अमेरिकी डॉलर को जुलाई के अंत के बाद के उच्च स्तर से नीचे फिसलने से रोक दिया। इसके अलावा, अमेरिकी फेडरल रिजर्व के आक्रामक नीतिगत रुख ने अमेरिकी डॉलर को मजबूती प्रदान की, जिससे गैर-उपज वाली पीली धातु यानी सोना 4,400 डॉलर के नीचे दबाव में बना रहा। नीतिगत स्तर पर एक बड़ा कदम उठाते हुए बैंक ऑफ जापान यानी BoJ ने 7-2 के बहुमत से अपने अल्पकालिक ब्याज दर लक्ष्य को 1.00% से बढ़ाकर 1.25% कर दिया। यह निर्णय मौद्रिक नीति को सामान्य बनाने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम है, जो कई हफ्तों से वित्तीय विश्लेषकों और बाजार सहभागियों की व्यापक उम्मीदों के पूरी तरह अनुरूप रहा। इसका आप पर असर खाड़ी क्षेत्र में सैन्य टकराव और ऊर्जा बाजार में उतार-चढ़ाव से अंतरराष्ट्रीय व्यापार लागत और मुद्रा विनिमय दरों पर सीधा असर पड़ सकता है। • भारत में प्रभाव: मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला पर जोखिम बढ़ सकता है। यदि कच्चे तेल की अस्थिरता बढ़ती है, तो आयात पर निर्भर घरेलू ईंधन कीमतों और परिवहन लागत पर असर पड़ने की संभावना रहती है। • खाड़ी प्रवासियों के लिए: सऊदी अरब और आसपास के देशों में रहने वाले भारतीय कामगारों के लिए स्थानीय सुरक्षा चेतावनियों का पालन करना आवश्यक हो गया है। हवाई अड्डों के आसपास सुरक्षा सतर्कता बढ़ने से यात्रा और उड़ानों के समय में बदलाव पर नजर रखनी चाहिए। • जिंस और मुद्रा व्यापारियों पर असर: सोने की कीमतों में 4,400 डॉलर के नीचे बने दबाव और WTI में गिरावट से जिंस बाजारों में उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है। विदेशी मुद्रा और कमोडिटी में ट्रेडिंग करने वालों को डॉलर सूचकांक और भू-राजनीतिक घोषणाओं पर विशेष सतर्कता बरतनी होगी। • वैश्विक यात्रियों के लिए: रियाद के मुख्य हवाई अड्डे के आसपास सुरक्षा अलर्ट जारी होने से मध्य पूर्व के हवाई मार्गों में सावधानी बरती जा रही है। अंतरराष्ट्रीय उड़ानों से यात्रा करने वाले नागरिकों को प्रस्थान से पूर्व एयरलाइंस के अपडेट की जांच कर लेनी चाहिए। ऐसा क्यों हुआ यमन के हूती विद्रोहियों और सऊदी नेतृत्व के बीच जुलाई से जारी तनाव और तेज हो गया है, जिसने राजधानी रियाद को सीधे निशाने पर ला दिया है। • सीधा कारण: हूती गुट ने रियाद के संवेदनशील ठिकानों को निशाना बनाकर ड्रोन और मिसाइलें दागीं, जिसके बाद हवाई अड्डे के पास आग और धुआं देखा गया। यह हमला दोनों पक्षों के बीच चल रहे सैन्य टकराव का सीधा विस्तार है। • ईरानी समर्थन और चेतावनियां: ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने क्षेत्र में अमेरिकी ठिकानों पर व्यापक हमलों की चेतावनी जारी की है। इस क्षेत्रीय गठजोड़ ने सऊदी अरब और पश्चिमी सहयोगियों के खिलाफ तनाव को गंभीर रूप से भड़का दिया है। • पूर्व घटनाक्रम की निरंतरता: सऊदी अरब और हूती विद्रोहियों के बीच जुलाई में नए सिरे से संघर्ष शुरू हुआ था। उसी गतिरोध की निरंतरता में पहली बार राजधानी रियाद के लिए इस प्रकार की आपातकालीन सुरक्षा चेतावनियां जारी की गई हैं। सवाल-जवाब 1. यमन के हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब में कहां हमला करने का दावा किया है? हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब की राजधानी रियाद के संवेदनशील ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन से हमला करने की बात कही है। 2. रियाद हवाई अड्डे के निकट क्या देखा गया था? रियाद के मुख्य हवाई अड्डे के पास आग की भीषण लपटें और धुएं का एक विशाल गुबार उठता हुआ देखा गया था। 3. ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) ने क्या चेतावनी दी है? IRGC ने चेतावनी दी है कि हमला होने की स्थिति में क्षेत्र के सभी अमेरिकी ठिकाने और हित बिना किसी सीमा के निरंतर और दर्दनाक हमलों के निशाने पर होंगे। 4. इस घटनाक्रम के समय WTI कच्चे तेल की कीमत क्या दर्ज की गई? घटनाक्रम के समय WTI कच्चा तेल 1.74% की गिरावट के साथ 93.60 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर कारोबार कर रहा था। 5. बैंक ऑफ जापान ने ब्याज दरों में क्या बदलाव किया है? बैंक ऑफ जापान ने 7-2 के बहुमत से अपने अल्पकालिक ब्याज दर लक्ष्य को 1.00% से बढ़ाकर 1.25% कर दिया है। 6. सोने की कीमत अंतरराष्ट्रीय बाजार में किस स्तर के नीचे बनी हुई है? मजबूत अमेरिकी डॉलर और फेडरल रिजर्व के रुख के कारण सोना 4,400 डॉलर प्रति औंस के स्तर से नीचे दबाव में बना रहा। https://trendkia.com/market/riyadh-havai-adde-ke-pasa-gaharaya-dhuan-yemen-ke-houthi-vidrohiyon-ka-saudi-rajadhani-para-misaila-aura-drona-hamale-ka-dava-35477 TrendKia — Har trend, sabse pehle.