रुपये को रिकॉर्ड गिरावट से बचाने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक ने कड़े किए नियम, तेल कंपनियों के लिए खुला अलग डॉलर विंडो भारतीय रिजर्व बैंक ने घरेलू मुद्रा को ऐतिहासिक निचले स्तर से उबारने के लिए तेल विपणन कंपनियों की डॉलर खरीद को हाजिर बाजार से हटाकर विशेष विंडो के जरिए सीधे पूरा करने का फैसला किया है। घरेलू मुद्रा के लगातार कमजोर होकर रिकॉर्ड निचले स्तरों के करीब पहुंचने के बाद भारतीय रिजर्व बैंक ने रुपये के बचाव में सख्त कदम उठाए हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और वैश्विक बॉन्ड प्रतिफल में आए उछाल के कारण रुपये पर लगातार दबाव बना हुआ था। इस दबाव को कम करने के लिए केंद्रीय बैंक ने सार्वजनिक क्षेत्र की तीन प्रमुख तेल विपणन कंपनियों की डॉलर खरीद को सामान्य हाजिर बाजार से अलग करने का नया तंत्र लागू किया है। इसके साथ ही मुद्रा हेजिंग से जुड़े नियमों को भी कड़ा कर दिया गया है ताकि बाजार में अत्यधिक अस्थिरता को तुरंत रोका जा सके। तेल कंपनियों के लिए विशेष डॉलर व्यवस्था केंद्रीय बैंक द्वारा उठाए गए इस कदम के तहत सरकारी तेल विपणन कंपनियों की दैनिक डॉलर जरूरतों को पूरा करने के लिए एक अलग विंडो स्थापित की जा रही है। जब ये कंपनियां खुले बाजार से एक साथ भारी मात्रा में अमेरिकी डॉलर खरीदती हैं, तो हाजिर बाजार में डॉलर की मांग तेजी से बढ़ जाती है और रुपया गिरने लगता है। नए फैसले के तहत इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन, हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन और भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन सोमवार से इस विशेष सुविधा का उपयोग कर सकेंगी। इस तंत्र के जरिए रिजर्व बैंक अपने विदेशी मुद्रा भंडार से सीधे इन कंपनियों को आवश्यक डॉलर उपलब्ध कराएगा, जिससे खुले हाजिर बाजार पर खरीद का अतिरिक्त बोझ नहीं पड़ेगा। अतीत में भी जब मुद्रा बाजार में भारी उतार-चढ़ाव देखा गया था, तब केंद्रीय बैंक ने इसी तरह के तंत्र का सहारा लिया था। मुद्रा स्थिरता और मौद्रिक नीति का संतुलन भारतीय रिजर्व बैंक का मुख्य वैधानिक दायित्व आर्थिक वृद्धि के उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए मूल्य स्थिरता बनाए रखना है। इसके तहत केंद्रीय बैंक मुख्य रूप से ब्याज दरों के माध्यम से खुदरा मुद्रास्फीति को 4 प्रतिशत के स्तर पर स्थिर रखने का प्रयास करता है। इसके अलावा विदेशी व्यापार पर देश की भारी निर्भरता, विशेष रूप से कच्चे तेल के आयात को देखते हुए, विनिमय दर को ऐसे स्तर पर रखना अनिवार्य होता है जिससे निर्यातकों और आयातकों को अनावश्यक दिक्कतों का सामना न करना पड़े। रिजर्व बैंक वर्ष में छह बार द्वैमासिक बैठकों में मौद्रिक नीति की समीक्षा करता है। सामान्य नियमों के तहत जब मुद्रास्फीति 4 प्रतिशत के लक्ष्य से ऊपर निकल जाती है, तो उधारी और खर्च को नियंत्रित करने के लिए ब्याज दरों में वृद्धि की जाती है, जिससे रुपये को भी सहारा मिलता है। इसके विपरीत जब महंगाई दर लक्ष्य से काफी नीचे गिरती है, तो कर्ज प्रवाह बढ़ाने के लिए दरों में कटौती की जा सकती है, जो रुपये के लिए नकारात्मक साबित हो सकती है। हाजिर बाजार में हस्तक्षेप और डेरिवेटिव्स का उपयोग भारतीय अर्थव्यवस्था में विदेशी व्यापार के व्यापक महत्व को देखते हुए केंद्रीय बैंक विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में सक्रिय रूप से हस्तक्षेप करता है। इसका प्राथमिक उद्देश्य विनिमय दर को एक सीमित दायरे में बनाए रखना है ताकि अत्यधिक अस्थिरता के दौर में भारतीय कारोबारी अनावश्यक मुद्रा जोखिम में न फंसें। रिजर्व बैंक अहम स्तरों पर हाजिर बाजार में रुपये की खरीद और बिक्री करता है तथा अपनी स्थिति को सुरक्षित रखने के लिए वित्तीय डेरिवेटिव्स के माध्यम से हेजिंग का सहारा लेता है। तेल कंपनियों को विशेष सुविधा देकर केंद्रीय बैंक ने हाजिर बाजार में डॉलर की सीधी मांग को सीमित करने का प्रयास किया है। वैश्विक मुद्राओं का उतार-चढ़ाव और जिंस बाजार का रुख वैश्विक विदेशी मुद्रा और जिंस बाजारों में भी कई बड़े बदलाव देखे जा रहे हैं। एशियाई कारोबारी सत्र में सोमवार को ऑस्ट्रेलियाई डॉलर और अमेरिकी डॉलर (AUD/USD) के युग्म में शुरुआती गिरावट के बाद मामूली सुधार देखा गया, लेकिन छुट्टियों के कारण कम नकदी के बीच यह 0.7000 के स्तर से नीचे ही बना रहा। अमेरिकी बॉन्ड प्रतिफल में बहु-वर्षीय उच्च स्तर से आई नरमी के बावजूद अमेरिकी डॉलर ने उबरने का प्रयास किया। साथ ही ऑस्ट्रेलियाई केंद्रीय बैंक द्वारा नवंबर में ब्याज दरें बढ़ाए जाने की घटती संभावनाओं ने भी ऑस्ट्रेलियाई मुद्रा की बढ़त को सीमित रखा। दूसरी तरफ अमेरिकी डॉलर और जापानी येन (USD/JPY) का युग्म नए सप्ताह में सीमित दायरे में कारोबार करते हुए 158.00 के पार बना रहा। येन को सहारा देने के लिए जापानी अधिकारियों के संभावित हस्तक्षेप की अटकलों के बीच निवेशक सतर्क बने हुए हैं। अमेरिकी और जापानी बाजारों में छुट्टी के चलते पतली नकदी और भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं के बीच सुरक्षित निवेश के रूप में डॉलर को समर्थन मिल रहा है। इसके साथ ही सोने की कीमतों में भी जोरदार तेजी देखी गई, जहां एशियाई कारोबार में पीली धातु चढ़कर लगभग 4,215 डॉलर प्रति औंस के करीब पहुंच गई। कमजोर अमेरिकी डॉलर और बुलियन-समर्थित एक्सचेंज-ट्रेडेड फंड्स में मजबूत मांग से सोने को सहारा मिला है, जहां ऐसे फंड्स में निवेश का प्रवाह चार साल के उच्चतम स्तर पर दर्ज किया गया। इसका आप पर असर केंद्रीय बैंक द्वारा तेल कंपनियों के लिए अलग डॉलर विंडो खोलने से हाजिर बाजार में रुपये की तेज गिरावट पर तत्काल रोक लगने की उम्मीद है। • भारत में: विदेशी मुद्रा बाजार से डॉलर की अचानक भारी मांग कम होने से रुपये की विनिमय दर स्थिर रहने में मदद मिलेगी। इससे विदेशों से आयातित कच्चे तेल की लागत में आने वाले तेज उछाल को रोकने में मदद मिल सकती है। • आयातकों और निर्यातकों के लिए: मुद्रा हेजिंग के सख्त नियमों के चलते अंतरराष्ट्रीय व्यापार से जुड़ी फर्मों को अपनी विदेशी मुद्रा जोखिम प्रबंधन रणनीतियों की समीक्षा करनी होगी। विनिमय दर में स्थिरता आने से अग्रिम सौदों और व्यापारिक भुगतान की योजना बनाना अधिक पारदर्शी हो सकेगा। • घरेलू उपभोक्ताओं के लिए: यदि रुपये में आ रही गिरावट रुकती है तो आयातित वस्तुओं पर मुद्रा अवमूल्यन के कारण बढ़ने वाली लागत का दबाव कम होगा। इससे आने वाले समय में घरेलू खुदरा महंगाई दर को 4 प्रतिशत के लक्ष्य के करीब बनाए रखने में सहायता मिलेगी। • विदेशी निवेशकों के लिए: केंद्रीय बैंक के सक्रिय हस्तक्षेप से मुद्रा बाजार में अत्यधिक उतार-चढ़ाव का जोखिम कम होता है। इससे भारतीय संपत्तियों में निवेश रखने वाले विदेशी प्रतिभागियों के लिए मुद्रा का अतिरिक्त जोखिम सीमित रहेगा। ऐसा क्यों हुआ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और वैश्विक बॉन्ड प्रतिफल में तेजी के कारण भारतीय रुपये पर निरंतर बिकवाली का दबाव बना हुआ था। इस वजह से घरेलू मुद्रा अपने सर्वकालिक निचले स्तरों के करीब पहुंच गई थी और हाजिर बाजार में डॉलर की मांग तेजी से बढ़ रही थी। • कच्चे तेल की बढ़ती लागत: भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए बड़े पैमाने पर कच्चे तेल के आयात पर निर्भर है और इसके भुगतान डॉलर में होते हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के भाव बढ़ने से सरकारी तेल कंपनियों की डॉलर मांग में भारी इजाफा हो गया। • वैश्विक बॉन्ड प्रतिफल में तेजी: अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बॉन्ड प्रतिफल कई वर्षों के उच्च स्तर पर पहुंचने से पूंजी का प्रवाह अमेरिकी डॉलर की ओर बढ़ा। इसके कारण उभरते बाजारों की मुद्राओं पर स्वाभाविक दबाव बन गया। • हाजिर बाजार पर केंद्रित दबाव: इंडियन ऑयल, हिंदुस्तान पेट्रोलियम और भारत पेट्रोलियम द्वारा खुले बाजार से डॉलर खरीदे जाने से रुपये पर एकतरफा बिकवाली दिख रही थी। इसी असंतुलन को समाप्त करने के लिए केंद्रीय बैंक को अपने विदेशी मुद्रा भंडार से सीधे आपूर्ति शुरू करनी पड़ी। सवाल-जवाब 1. भारतीय रिजर्व बैंक ने रुपये को मजबूत करने के लिए क्या कदम उठाया है? केंद्रीय बैंक ने तीन सरकारी तेल विपणन कंपनियों की दैनिक डॉलर जरूरतों को हाजिर बाजार से हटाकर एक विशेष विंडो के जरिए सीधे पूरा करने और हेजिंग नियमों को सख्त करने का निर्णय लिया है। 2. इस विशेष डॉलर विंडो का लाभ कौन सी कंपनियां उठा सकेंगी? इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन, हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन और भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन सोमवार से इस विशेष डॉलर सुविधा का उपयोग करने के लिए पात्र होंगी। 3. रिजर्व बैंक इन तेल कंपनियों को डॉलर कहां से उपलब्ध कराएगा? रिजर्व बैंक अपने विदेशी मुद्रा भंडार से सीधे इन कंपनियों की डॉलर जरूरतों की आपूर्ति करेगा ताकि हाजिर बाजार पर अतिरिक्त दबाव न पड़े। 4. आरबीआई का मुद्रास्फीति लक्ष्य क्या है? भारतीय रिजर्व बैंक ब्याज दर उपकरणों का उपयोग करके मुद्रास्फीति दर को 4 प्रतिशत के स्थिर स्तर पर बनाए रखने का लक्ष्य रखता है। 5. सोने की कीमतों में हाल ही में क्या हलचल दर्ज की गई? एशियाई कारोबारी सत्र में सोना लगभग 4,215 डॉलर के स्तर पर पहुंच गया, जिसे कमजोर डॉलर और गोल्ड ईटीएफ में चार साल के उच्चतम निवेश प्रवाह से सहारा मिला। https://trendkia.com/market/rupee-ko-rikorda-giravata-se-bachane-ke-lie-reserve-bank-of-india-ne-kare-kie-niyama-tela-knpaniyon-ke-lie-khula-alaga-dollar-vind-46645 TrendKia — Har trend, sabse pehle.