# सरकारी बैंकों के विलय की फर्जी अधिसूचना हुई खारिज, बाजार में शेयरों ने दिखाई मजबूती

> सोशल मीडिया पर सरकारी बैंकों के नए विलय का फर्जी दस्तावेज वायरल होने के बाद पीआईबी ने इसे पूरी तरह निराधार बताया है, वहीं शेयर बाजार में पीएसयू बैंक शेयरों पर इसका कोई नकारात्मक असर नहीं दिखा।

**Type:** article · **Category:** बाज़ार · **Published:** 2026-09-19 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/market/sarakari-bainkon-ke-vilaya-ki-pharji-adhisuchana-hui-kharija-bajara-men-sheyaron-ne-dikhai-majabuti-33506 · **Language:** Hindi
**Tags:** बैंक विलय, पीएसयू बैंक, शेयर बाजार, निफ्टी पीएसयू, भारतीय स्टेट बैंक, पीआईबी फैक्ट चेक, वित्त मंत्रालय

सोशल मीडिया पर सरकारी बैंकों के बड़े पैमाने पर एकीकरण को लेकर फैलाई जा रही अफवाहों पर आधिकारिक तौर पर पूर्णविराम लग गया है। वित्त मंत्रालय के नाम से प्रसारित एक जाली राजपत्र अधिसूचना में यह दावा किया गया था कि देश के प्रमुख ऋणदाता बैंक कई छोटे सरकारी बैंकों का अधिग्रहण करने जा रहे हैं। सरकारी सूचना एजेंसी पीआईबी की तथ्य जांच इकाई ने इस पूरे मामले की पड़ताल करते हुए स्पष्ट किया है कि सरकार ने ऐसी कोई योजना अधिसूचित नहीं की है और प्रसारित किया जा रहा परिपत्र पूरी तरह मनगढ़ंत है। इस भ्रामक प्रचार के बावजूद 18 सितंबर को घरेलू शेयर बाजार में सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के शेयरों पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ा और संबंधित सूचकांक हरे निशान पर बंद हुआ।

## जाली राजपत्र में किए गए थे मनगढ़ंत दावे
सोशल मीडिया मंचों पर प्रसारित किए जा रहे जाली दस्तावेज को भारत के राजपत्र के प्रारूप में तैयार किया गया था, ताकि आम जनता और बैंक ग्राहक इसे वास्तविक सरकारी आदेश समझ बैठें। इस दस्तावेज में यह मनगढ़ंत दावा किया गया था कि केंद्र सरकार ने सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के एकीकरण की एक नई व्यापक योजना और संरचना तैयार कर ली है। इसमें कहा गया था कि नौ छोटे और मझोले सरकारी बैंकों का देश के तीन बड़े बैंकों में विलय कर दिया जाएगा। इस जाली मसौदे में अधिग्रहण करने वाले बैंकों और विलय होने वाले बैंकों की एक विस्तृत सूची भी पेश की गई थी।

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इस फर्जी परिपत्र के अनुसार, इंडियन बैंक, बैंक ऑफ महाराष्ट्र और सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया को भारतीय स्टेट बैंक में समाहित किए जाने का उल्लेख था, जिसके तहत ये तीनों बैंक एसबीआई समूह का हिस्सा बनने वाले थे। इसी तरह पंजाब नेशनल बैंक द्वारा यूनियन बैंक ऑफ इंडिया, बैंक ऑफ इंडिया और पंजाब एंड सिंध बैंक का अधिग्रहण करने की बात कही गई थी। तीसरे हिस्से में बैंक ऑफ बड़ौदा को केनरा बैंक, इंडियन ओवरसीज बैंक और यूको बैंक का अधिग्रहणकर्ता बताया गया था। इसमें यह भी दावा जोड़ा गया था कि विलय होने वाली संस्थाओं के तमाम अधिकार, शक्तियां, दावे, विशेषाधिकार, कर्मचारी, ग्राहक खाते, अनुबंध, बॉन्ड और बैंकिंग समझौते सीधे अधिग्रहण करने वाले बड़े बैंकों के पास चले जाएंगे।

## पीआईबी तथ्य जांच ने दी सतर्क रहने की सलाह
इस फर्जीवाड़े की गंभीरता को देखते हुए पीआईबी ने त्वरित रूप से इसका खंडन जारी किया। सूचना एजेंसी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के समामेलन को लेकर प्रसारित किया जा रहा दस्तावेज पूरी तरह फर्जी है। वित्त मंत्रालय द्वारा ऐसा कोई आदेश अथवा राजपत्र प्रकाशित नहीं किया गया है। एजेंसी ने नागरिकों और बैंक उपभोक्ताओं को आगाह करते हुए कहा कि वे इस तरह की असत्यापित जानकारियों और दस्तावेजों पर विश्वास करने अथवा उन्हें आगे साझा करने से पहले हमेशा आधिकारिक और विश्वसनीय स्रोतों से उनकी सत्यता की पुष्टि अवश्य करें।

## अफवाहों के बीच भी पीएसयू बैंक शेयरों में तेजी का रुख
इस तरह के व्यापक दावों के बावजूद शेयर बाजार में निवेशकों का भरोसा नहीं डिगा और 18 सितंबर के कारोबारी सत्र में बैंकिंग शेयरों पर कोई घबराहट नहीं देखी गई। निफ्टी पीएसयू इंडेक्स 0.34 प्रतिशत यानी 28.75 अंकों की बढ़त दर्ज करते हुए 8,291.55 के स्तर पर कारोबार कर रहा था। अधिकांश सरकारी बैंकों के शेयरों में खरीदारी का रुझान देखने को मिला।

बाजार में बढ़त दर्ज करने वाले शेयरों में बैंक ऑफ महाराष्ट्र सबसे आगे रहा, जिसके शेयर लगभग 3 प्रतिशत चढ़कर 82.87 रुपये पर पहुंच गए। सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया के शेयर में 2.2 प्रतिशत का उछाल आया और यह 31.08 रुपये प्रति शेयर पर कारोबार करता दिखा। देश के सबसे बड़े सरकारी बैंक एसबीआई के शेयरों में भी मामूली बढ़त देखी गई और यह 991.90 रुपये के आसपास कारोबार कर रहा था। इसके अलावा पीएनबी, बैंक ऑफ बड़ौदा, यूको बैंक, इंडियन बैंक, इंडियन ओवरसीज बैंक और पंजाब एंड सिंध बैंक के शेयरों में 0.51 प्रतिशत तक की हल्की बढ़त दर्ज की गई। इसके विपरीत, यूनियन बैंक ऑफ इंडिया और केनरा बैंक के शेयरों में मामूली गिरावट देखी गई।

## बैंक विलय का ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य और आगे की रूपरेखा
भारत में सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों का एकीकरण और समामेलन पिछले एक दशक से भी अधिक समय से केंद्र सरकार के आर्थिक एजेंडे का एक अहम हिस्सा रहा है। इसका प्राथमिक उद्देश्य वैश्विक वित्तीय बाजार में प्रतिस्पर्धा करने में सक्षम बड़े और वित्तीय रूप से सुदृढ़ बैंकों की स्थापना करना है। पिछले तीन दशकों से अधिक समय में भारतीय वित्तीय प्रणाली में बुनियादी और संरचनात्मक परिवर्तन हुए हैं, और कई बैंकों को मिलाकर एक मजबूत इकाई बनाना इसी व्यापक बदलाव की कड़ी रहा है।

रिकॉर्ड के अनुसार, अप्रैल 2020 के बाद से देश में किसी नए सरकारी बैंक का विलय नहीं हुआ है। अगले दौर के संभावित एकीकरण में उन बैंकों के भविष्य पर विचार होना बाकी है जिनका पिछले दौर में विलय नहीं हुआ था, हालांकि यह अगला बड़ा कदम कब उठाया जाएगा, इसकी कोई निश्चित समयसीमा अभी तय नहीं है। जून में यह संकेत मिले थे कि सरकार वित्त वर्ष 2026-27 तक सरकारी बैंकों की कुल संख्या घटाकर 4 करने के उद्देश्य से एक बड़ी विलय योजना का मसौदा तैयार कर सकती है। इसलिए बैंकिंग क्षेत्र में वास्तविक और आधिकारिक घटनाक्रमों पर बाजार तथा विश्लेषकों की पैनी नजर बनी हुई है।

## इसका आप पर असर
सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के विलय को लेकर प्रसारित दस्तावेज पूरी तरह फर्जी साबित हुआ है, जिससे बैंक ग्राहकों और निवेशकों के दैनिक कामकाज पर किसी तरह का कोई असर नहीं पड़ेगा।

- **बैंक खाताधारकों पर असर:** खाताधारकों की शाखा, पासबुक, चेकबुक और मौजूदा खाता संख्या पूरी तरह यथावत बनी रहेगी। विलय की कोई आधिकारिक योजना अधिसूचित नहीं होने के कारण ग्राहकों को किसी भी बैंक शाखा में जाकर दस्तावेज बदलने या घबराने की आवश्यकता नहीं है।
- **शेयर निवेशकों के लिए:** पीएसयू बैंकिंग शेयरों में निवेश करने वाले ट्रेडर्स को फर्जी सोशल मीडिया दावों के आधार पर जल्दबाजी में बिकवाली से बचना चाहिए। 18 सितंबर को बाजार के स्थिर रुख से यह स्पष्ट है कि संस्थागत निवेशक केवल आधिकारिक सरकारी घोषणाओं पर ही भरोसा करते हैं।
- **बैंक कर्मचारियों के लिए:** नौ सरकारी बैंकों के कर्मचारियों के सेवा नियमों, वेतन संरचना या पदस्थापना में कोई तात्कालिक बदलाव नहीं हो रहा है। सोशल मीडिया पर प्रसारित अधिकारों और सेवा स्थानांतरण से जुड़े सभी दावे पूरी तरह असत्य हैं।
- **सूचना सत्यापन की सीख:** वित्तीय और प्रशासनिक मामलों से जुड़े किसी भी वायरल दस्तावेज को आगे भेजने से पहले आधिकारिक पोर्टलों से जांचना आवश्यक है। पीआईबी और संबंधित बैंकों की आधिकारिक वेबसाइट्स ही ऐसी नीतिगत सूचनाओं के वास्तविक स्रोत हैं।

## ऐसा क्यों हुआ
यह घटनाक्रम सोशल मीडिया पर अज्ञात तत्वों द्वारा वित्त मंत्रालय के नाम से एक फर्जी राजपत्र अधिसूचना प्रसारित करने के बाद सामने आया, जिस पर स्पष्टीकरण जारी करना जरूरी हो गया था।

- **फर्जी अधिसूचना का प्रसार:** सोशल मीडिया पर एक जाली दस्तावेज तेजी से प्रसारित किया गया, जिसमें नौ सरकारी बैंकों के बड़े ऋणदाताओं में विलय का मनगढ़ंत दावा था। इसमें भारत के राजपत्र का प्रारूप नकल किया गया था ताकि लोग इसे वास्तविक समझ लें।
- **आधिकारिक खंडन की आवश्यकता:** बैंक ग्राहकों, कर्मचारियों और वित्तीय बाजार में भ्रम की स्थिति को रोकने के लिए सरकारी तथ्य जांच इकाई पीआईबी को सामने आकर स्थिति साफ करनी पड़ी। पीआईबी ने पुष्टि की कि वित्त मंत्रालय ने ऐसा कोई आदेश जारी नहीं किया है।
- **अतीत की नीतिगत पृष्ठभूमि:** सरकार ने पिछले एक दशक में मजबूत बैंकों के निर्माण के लिए कई एकीकरण किए हैं, जिनमें अंतिम बड़ा विलय अप्रैल 2020 में हुआ था। इसके अलावा जून में यह संभावना सामने आई थी कि सरकार वित्त वर्ष 2026-27 तक सार्वजनिक बैंकों की संख्या घटाकर 4 करने पर विचार कर सकती है, जिससे अफवाह फैलाने वालों को माहौल बनाने का मौका मिला।

## सवाल-जवाब

### 1. क्या एसबीआई, पीएनबी और बैंक ऑफ बड़ौदा में अन्य सरकारी बैंकों का विलय हो रहा है?
नहीं, यह दावा पूरी तरह झूठा है। सरकार और पीआईबी ने स्पष्ट किया है कि ऐसी किसी विलय योजना की अधिसूचना जारी नहीं की गई है।

### 2. पीआईबी ने वायरल दस्तावेज को लेकर क्या कहा है?
पीआईबी ने साफ किया है कि सोशल मीडिया पर चल रहा वित्त मंत्रालय का राजपत्र पूरी तरह फर्जी है और नागरिकों को असत्यापित खबरों से बचना चाहिए।

### 3. इस फर्जी खबर का शेयर बाजार पर क्या प्रभाव पड़ा?
18 सितंबर को बाजार पर इस अफवाह का कोई नकारात्मक असर नहीं दिखा और निफ्टी पीएसयू इंडेक्स 0.34 प्रतिशत बढ़कर 8,291.55 पर कारोबार कर रहा था।

### 4. किन बैंकों के शेयरों में सबसे ज्यादा बढ़त दर्ज की गई?
बैंक ऑफ महाराष्ट्र में लगभग 3 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई, जबकि सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया के शेयर 2.2 प्रतिशत तक चढ़े।

### 5. देश में सरकारी बैंकों का अंतिम विलय कब हुआ था?
सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों का पिछला बड़ा विलय अप्रैल 2020 में प्रभावी हुआ था और उसके बाद से कोई नया विलय नहीं हुआ है।

### 6. सरकारी बैंकों की संख्या को लेकर भविष्य की क्या योजना चर्चा में रही है?
जून में यह बात सामने आई थी कि सरकार वित्त वर्ष 2026-27 में सरकारी बैंकों की संख्या घटाकर 4 करने की योजना पर विचार कर सकती है।

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