सस्ते कर्ज का वैश्विक ठिकाना क्यों बना जापान और अब क्यों बदल रहे हैं हालात दशकों तक बेहद कम ब्याज दरों की वजह से जापान दुनिया भर के निवेशकों के लिए सस्ते कर्ज का बड़ा केंद्र बना रहा, लेकिन अब बैंक ऑफ जापान की सख्त होती नीतियां अंतरराष्ट्रीय बाजारों के समीकरण बदल रही हैं। अंतरराष्ट्रीय वित्तीय व्यवस्था में जब दुनिया के बड़े केंद्रीय बैंक महंगाई से निपटने के लिए ब्याज दरों में लगातार बढ़ोतरी कर रहे थे, उस वक्त जापान का रुख सबसे अलग दिखाई दे रहा था। बैंक ऑफ जापान ने असामान्य रूप से लंबे समय तक मौद्रिक सहजता की नीति जारी रखी और घरेलू कर्ज की लागत को शून्य के करीब बनाए रखा। इस व्यवस्था ने दुनिया भर के वित्तीय निवेशकों को जापानी येन में बेहद सस्ती दरों पर कर्ज लेने और उस पूंजी को उन देशों में लगाने की खुली छूट दी जहां संपत्तियों पर कहीं बेहतर रिटर्न मिल रहा था। इस पूरे वित्तीय तंत्र को वैश्विक बाजारों में येन कैरी ट्रेड के नाम से पहचान मिली, जिसने टोक्यो के नीतिगत फैसलों को पूरी दुनिया के वित्तीय बाजारों को प्रभावित करने वाली एक बड़ी ताकत बना दिया। येन कैरी ट्रेड की बुनियादी संरचना और इसका वैश्विक फैलाव बाजारों में भारी भरकम नाम से पहचाने जाने के बावजूद कैरी ट्रेड का मूल सिद्धांत बेहद सीधा और व्यावहारिक है। इसके तहत निवेशक ऐसे देश की मुद्रा में कर्ज जुटाते हैं जहां ब्याज दरें बहुत कम या नगण्य होती हैं। इसके बाद उस राशि को किसी ऐसी विदेशी मुद्रा में बदल दिया जाता है जिसकी ब्याज दरें काफी अधिक हों। फिर इस फंड को सरकारी बॉन्ड, शेयर बाजार या अन्य उच्च आय वाले वित्तीय विकल्पों में लगा दिया जाता है। जब तक दोनों देशों की मुद्राओं की विनिमय दर में कोई तेज उतार-चढ़ाव नहीं आता, तब तक निवेशक अपने सस्ते कर्ज की लागत और निवेश से मिलने वाले मजबूत मुनाफे के बीच के अंतर को शुद्ध लाभ के रूप में समेटते रहते हैं। जापान इस पूरी रणनीति के लिए दुनिया का सबसे पसंदीदा ठिकाना इसलिए बना क्योंकि वहां येन में उधारी की लागत वर्षों तक अत्यंत सस्ती बनी रही। इसके उलट, कोरोना महामारी के बाद अमेरिकी फेडरल रिजर्व ने महंगाई पर काबू पाने के लिए दरों में आक्रामक बढ़ोतरी शुरू की। इससे अमेरिका और जापान की ब्याज दरों का अंतर दशकों के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गया। उस दौर में सस्ते जापानी येन में भारी कर्ज लेकर ऊंचे रिटर्न वाले अमेरिकी वित्तीय साधनों में निवेश करना वैश्विक मैक्रो ट्रेडिंग की सबसे प्रमुख पहचान बन गया था। इसे आमतौर पर विदेशी मुद्रा विनिमय रणनीति के रूप में वर्गीकृत किया जाता है, जो यह स्पष्ट करता है कि टोक्यो के केंद्रीय बैंक की नीतियों में होने वाला कोई भी फेरबदल वैश्विक स्तर पर इतना बड़ा असर क्यों छोड़ता है। अंतरराष्ट्रीय उधारी का विशाल आकार और बीआईएस के आंकड़े बैंक फॉर इंटरनेशनल सेटलमेंट्स (बीआईएस) के आंकड़ों के अनुसार, इस वर्ष की शुरुआत में जापानी येन के जरिए सीमा पार अंतरराष्ट्रीय उधारी का स्तर लगभग 360 ट्रिलियन येन यानी करीब 2.3 ट्रिलियन डॉलर के आसपास पहुंच गया था। यह आंकड़ा साफ तौर पर दर्शाता है कि येन आधारित फंडिंग दुनिया भर के वित्तीय नेटवर्क में कितनी गहराई से समा चुकी है। पिछले एक दशक में इन आंकड़ों में लगातार तेज इजाफा दर्ज किया गया, विशेष रूप से 2022 के बाद जब अमेरिका और जापान के बीच ब्याज दरों का अंतर अप्रत्याशित रूप से चौड़ा हो गया था। अमेरिकी फेडरल रिजर्व के आक्रामक रुख और बैंक ऑफ जापान की अत्यधिक उदार नीति के इस अंतर ने वैश्विक निवेशकों को येन के सस्ते कर्ज पर ज्यादा से ज्यादा निर्भर होने के लिए प्रेरित किया। हालांकि बीआईएस के आंकड़े अकेले कैरी ट्रेड को नहीं दर्शाते, फिर भी वे इस बात का सबसे पुख्ता प्रमाण हैं कि जापानी मुद्रा अंतरराष्ट्रीय फंडिंग और निवेश प्रवाह में किस हद तक बुनियादी आधार बन चुकी है। अब सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि बैंक ऑफ जापान अपनी नीतियों को सामान्य स्थिति में लाने की प्रक्रिया को किस रफ्तार से आगे बढ़ाएगा। जापान में नीतिगत बदलाव और 2024 की बाजार उथल-पुथल की यादें जापान में घरेलू महंगाई के अधिक टिकाऊ बने रहने और कर्मचारियों के वेतन में सुधार दर्ज किए जाने के बाद नीति निर्माताओं से उम्मीद की जा रही है कि वे लंबी उदारवादी नीतियों के बाद अब ब्याज दरों को धीरे-धीरे सामान्य करने के रास्ते पर टिके रहेंगे। ब्याज दरों में मामूली बढ़ोतरी भी उस दर अंतर को लगातार कम करती है, जिसने पारंपरिक येन कैरी ट्रेड को सहारा दिया था। खास तौर पर यह स्थिति तब और संवेदनशील हो जाती है जब फेडरल रिजर्व अपनी दरों की बढ़ोतरी के चरम पर पहुंच रहा हो और टोक्यो में ब्याज दरें ऊपर जा रही हों। निवेशकों के लिए चुनौती सिर्फ यह नहीं है कि येन में उधारी महंगी हो रही है, बल्कि असल चिंता यह है कि जिस सस्ते जापानी कर्ज की बुनियाद पर एक दशक से ज्यादा समय तक अंतरराष्ट्रीय निवेश टिके रहे, वे मान्यताएं अब धीरे-धीरे खत्म हो रही हैं। बैंक ऑफ जापान द्वारा दरें बढ़ाए जाने की संभावना स्वाभाविक रूप से 2024 में बाजारों में मची भारी उथल-पुथल की याद ताजा कर देती है। उस समय जब केंद्रीय बैंक ने अप्रत्याशित रूप से नीतिगत सख्ती की थी, तब जापानी येन में अचानक बेहद तेज मजबूती आई थी। उस तेज उछाल ने बड़े पैमाने पर लेवरेज पर काम कर रहे निवेशकों को एक साथ अपने सौदे काटने और पोजीशन समेटने पर मजबूर कर दिया था। उस भगदड़ के चलते जापानी शेयर बाजार में दशकों की सबसे बड़ी एकदिनी गिरावट दर्ज की गई थी और वैश्विक बाजार पूरी तरह हिल गए थे। मौजूदा बाजार स्थिति और अन्य मुद्राओं की तलाश हालांकि आज का वित्तीय माहौल 2024 के उस अफरातफरी वाले दौर की तुलना में काफी अलग नजर आ रहा है। पोजिशनिंग डेटा से संकेत मिलता है कि येन के खिलाफ भारी सट्टेबाजी के सौदे पहले ही अपने चरम स्तरों से नीचे आ चुके हैं। इसका अर्थ यह है कि बाजार में किसी आकस्मिक भगदड़ के बजाय एक व्यवस्थित समायोजन की प्रक्रिया चल रही है। यह स्वाभाविक है कि अगर जापान अपनी उस अत्यधिक ढीली मौद्रिक नीति से पीछे हट रहा है जिसने पिछले दशक को परिभाषित किया था, तो निवेशक सस्ते कर्ज के नए ठिकानों की तलाश शुरू करेंगे। बाजार में स्विस फ्रैंक से फंड होने वाले कैरी ट्रेड में बढ़ती दिलचस्पी की चर्चाएं जरूर हुई हैं, लेकिन सट्टेबाजी से जुड़े पोजिशनिंग आंकड़े फिलहाल यह नहीं दिखाते कि येन से स्विस फ्रैंक की तरफ कोई बहुत व्यापक बदलाव हुआ है। मौजूदा आंकड़े बताते हैं कि निवेशकों ने येन के गिरने पर लगाए गए अपने आक्रामक दांवों को तो कम किया है, लेकिन साथ ही उन्होंने स्विस फ्रैंक में कोई असामान्य रूप से बड़ी सट्टेबाजी की पोजीशन नहीं बनाई है। यह अंतर बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि यह दुनिया की पसंदीदा फंडिंग मुद्रा के पूरी तरह बदल जाने का संकेत नहीं है, बल्कि यह दर्शाता है कि निवेशक अपने लेवरेज का पुनर्मूल्यांकन कर रहे हैं और बदलती ब्याज दरों के माहौल के मुताबिक खुद को ढाल रहे हैं। सस्ते कर्ज के तंत्र का भविष्य स्विस फ्रैंक आगे चलकर अंतरराष्ट्रीय फंडिंग में बड़ी भूमिका निभाएगा या नहीं, यह स्थिति समय बीतने के साथ ही पूरी तरह साफ होगी। फिलहाल आंकड़े यही इशारा करते हैं कि कैरी ट्रेड किसी अन्य देश या मुद्रा में स्थानांतरित होने से पहले अपनी कीमतों और जोखिम का पुनर्मूल्यांकन कर रहा है। निवेशकों के सामने अब सबसे बड़ा मुद्दा यह नहीं है कि येन कैरी ट्रेड टिक पाएगा या नहीं, बल्कि यह है कि यह नया स्वरूप कैसा लेगा। सीमा पार येन उधारी अभी भी अपने ऐतिहासिक ऊंचे स्तरों के करीब बनी हुई है, सट्टेबाजी के आंकड़ों में स्विस फ्रैंक की ओर किसी निर्णायक बदलाव के पुख्ता संकेत नहीं हैं, और बैंक ऑफ जापान उन अत्यधिक ढीली नीतियों को धीरे-धीरे समेट रहा है जिन्होंने इस रणनीति को इतना आकर्षक बनाया था। वित्तीय बाजारों के विश्लेषक मानते हैं कि आने वाला समय शायद कैरी ट्रेड के पूरी तरह खत्म होने का नहीं, बल्कि एक नए दौर और नए स्वरूप की शुरुआत का गवाह बनने जा रहा है। अन्य बाजारों में हलचल और तकनीकी रुझान वैश्विक मुद्रा बाजारों में अन्य जोड़ों पर भी केंद्रीय बैंकों की बैठकों का दबाव साफ देखा जा रहा है। एशियाई सत्र में मंगलवार को ऑस्ट्रेलियाई डॉलर बनाम अमेरिकी डॉलर (AUD/USD) 0.7150 के नीचे दबाव में बना रहा, जो पिछले दिन छुए गए तीन सप्ताह से अधिक के निचले स्तर के करीब था। एफओएमसी की बैठक से पहले अमेरिकी बॉन्ड यील्ड बहु-वर्षीय उच्च स्तरों के आसपास टिकी हुई है, जिसे कच्चे तेल से जुड़ी मुद्रास्फीति के जोखिमों से समर्थन मिल रहा है। दूसरी ओर अगस्त के मिले-जुले चीनी आर्थिक आंकड़ों ने भी ऑस्ट्रेलियाई डॉलर को कोई खास सहारा नहीं दिया। अमेरिकी डॉलर बनाम जापानी येन (USD/JPY) मंगलवार की शुरुआत में 155.00 की ओर मजबूत होता दिखा। कारोबारी इस सप्ताह होने वाली अमेरिकी फेडरल रिजर्व और बैंक ऑफ जापान की नीतिगत बैठकों के नतीजों की प्रतीक्षा कर रहे हैं। हालांकि अमेरिकी बॉन्ड प्रतिफल डॉलर को मजबूती दे रहे हैं, लेकिन बैंक ऑफ जापान की सख्त होती नीतिगत दिशा जापानी येन को समर्थन दे सकती है, जिससे इस जोड़ी की बढ़त सीमित होने की संभावना बनी हुई है। कमोडिटी बाजार में सोने की कीमतों में भी दबाव देखा गया और मंगलवार को पीली धातु 4,260 डॉलर प्रति ट्रॉय औंस के दायरे में कारोबार करती नजर आई। मजबूत अमेरिकी डॉलर, अनिश्चित ट्रेजरी यील्ड और फेडरल रिजर्व की बैठक से पहले निवेशकों की सतर्कता ने सोने पर दबाव बनाए रखा। वहीं डिजिटल एसेट बाजार में प्रमुख ऑल्टकॉइन्स जैसे रिपल (XRP), कार्डानो (ADA) और हाइपरलिक्विड (HYPE) मंगलवार को लाल निशान में कारोबार करते दिखे, जहां इनमें लगभग 2 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। मंगलवार को होने वाले क्लैरिटी एक्ट क्लोजर वोट से पहले इन टोकन्स पर बिकवाली का असर देखा गया। इसका आप पर असर बैंक ऑफ जापान द्वारा ब्याज दरों को धीरे-धीरे बढ़ाने और येन कैरी ट्रेड के सिमटने से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पूंजी की लागत बढ़ेगी और वैश्विक बाजारों में उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। • भारत में असर: विदेशी संस्थागत निवेशक अपने लेवरेज सौदों को समेटने के लिए भारतीय शेयर बाजार से पूंजी निकाल सकते हैं। इसके चलते घरेलू इक्विटी सूचकांकों में अल्पकालिक बिकवाली और रुपये की विनिमय दर पर दबाव बढ़ सकता है। • वैश्विक कर्जदार: अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सस्ती विदेशी मुद्रा में कर्ज जुटाने वाली कंपनियों के लिए फंडिंग की लागत में बढ़ोतरी होगी। कंपनियों को अपने मौजूदा कर्जों के पुनर्वित्त के लिए अधिक ब्याज दरें चुकानी होंगी। • खुदरा निवेशक: वैश्विक तरलता घटने से जोखिम वाली संपत्तियों जैसे इक्विटी और डिजिटल टोकन्स में तेज गिरावट का जोखिम रहेगा। छोटे निवेशकों को अपने पोर्टफोलियो में अत्यधिक लेवरेज से बचना चाहिए और सुरक्षित विकल्पों पर ध्यान देना चाहिए। • मुद्रा बाजार के कारोबारी: अमेरिकी डॉलर और जापानी येन की विनिमय दर में होने वाले नीतिगत बदलावों से मुद्रा बाजार में उठापटक जारी रहेगी। फॉरेक्स ट्रेडर्स को केंद्रीय बैंकों के नीतिगत बयानों के दौरान सख्त स्टॉप-लॉस का उपयोग करना होगा। ऐसा क्यों हुआ जापान में दशकों से जारी शून्य ब्याज दर नीति अब घरेलू महंगाई और वेतन वृद्धि के चलते समाप्त हो रही है, जिससे दुनिया भर में फैले सस्ते कर्ज का ढांचा प्रभावित हुआ है। • मुद्रास्फीति और वेतन वृद्धि: जापान में लंबे समय बाद मुद्रास्फीति अधिक टिकाऊ बनी हुई है और कामगारों की मजदूरी में लगातार सुधार दर्ज किया जा रहा है। इन आर्थिक बदलावों के कारण केंद्रीय बैंक के लिए अत्यधिक ढीली मौद्रिक नीति को जारी रखना अब संभव नहीं रहा। • वैश्विक ब्याज दरों का अंतर: महामारी के बाद अमेरिकी केंद्रीय बैंक द्वारा दरों में की गई तेज वृद्धि ने अमेरिका और जापान के बीच ब्याज दरों के अंतर को दशकों के उच्चतम स्तर पर पहुंचा दिया था। इस बड़े अंतर ने निवेशकों को सस्ते येन में रिकॉर्ड कर्ज जुटाकर उच्च रिटर्न वाली विदेशी संपत्तियों में लगाने के लिए प्रोत्साहित किया। • लेवरेज का पुनर्मूल्यांकन: वर्ष 2024 में अप्रत्याशित दर वृद्धि के बाद मची बाजार उथल-पुथल ने सटोरियों को सतर्क कर दिया। अब निवेशक किसी नए झटके से बचने के लिए अपने अत्यधिक जोखिम वाले सौदों को पहले से ही नियंत्रित कर रहे हैं। सवाल-जवाब 1. येन कैरी ट्रेड क्या होता है? यह एक वित्तीय रणनीति है जिसमें निवेशक जापान से बेहद सस्ती दरों पर येन में कर्ज लेते हैं और उस पैसे को अन्य देशों की अधिक रिटर्न देने वाली संपत्तियों में निवेश करते हैं। 2. अंतरराष्ट्रीय स्तर पर येन में कितना कर्ज लिया गया था? बैंक फॉर इंटरनेशनल सेटलमेंट्स के आंकड़ों के अनुसार इस वर्ष की शुरुआत में जापानी येन में सीमा पार उधारी लगभग 360 ट्रिलियन येन यानी करीब 2.3 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच गई थी। 3. वर्ष 2024 में वित्तीय बाजारों में अचानक गिरावट क्यों आई थी? बैंक ऑफ जापान द्वारा अप्रत्याशित रूप से ब्याज दरें बढ़ाने के कारण येन तेजी से मजबूत हुआ था, जिससे लेवरेज वाले निवेशकों को आनन-फानन में अपनी पोजीशन काटनी पड़ी और शेयर बाजारों में भारी गिरावट आई। 4. क्या निवेशक येन की जगह स्विस फ्रैंक का उपयोग कर रहे हैं? बाजार में स्विस फ्रैंक को लेकर चर्चाएं जरूर हैं, लेकिन सट्टेबाजी के आंकड़े फिलहाल यह नहीं दिखाते कि निवेशकों ने येन को छोड़कर बड़े पैमाने पर स्विस फ्रैंक में नए दांव लगाए हैं। 5. बैंक ऑफ जापान की नीति में बदलाव का बाजारों पर क्या असर हो रहा है? नीतियों के सामान्य होने से अमेरिका और जापान के बीच ब्याज दरों का अंतर कम हो रहा है, जिससे येन आधारित सस्ता कर्ज महंगा हो रहा है और निवेशक अपने जोखिम को घटा रहे हैं। https://trendkia.com/market/saste-karja-ka-vaishvika-thikana-kyon-bana-japan-aura-aba-kyon-badala-rahe-hain-halata-33912 TrendKia — Har trend, sabse pehle.