सत्सुकी कटायामा का संकेत, बैंक ऑफ जापान सरकार से मिलकर 2% मुद्रास्फीति लक्ष्य हासिल करे जापान की वित्त मंत्री सत्सुकी कटायामा ने गुरुवार को बजट अनुरोधों की समीक्षा और बाजार में विश्वसनीयता बनाने लायक स्तर पर ऋण जारी करने पर नियंत्रण की बात कही। उन्होंने उम्मीद जताई कि बैंक ऑफ जापान सरकार से नजदीकी समन्वय करेगा और 2% की स्थिर तथा टिकाऊ मुद्रास्फीति हासिल करने की दिशा में मौद्रिक नीति चलाएगा। जापान में सरकारी ऋण की विश्वसनीयता और मुद्रास्फीति के लक्ष्य को एक साथ रखते हुए वित्त मंत्री सत्सुकी कटायामा ने गुरुवार को नीतिगत समन्वय पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि बजट अनुरोधों की समीक्षा की जाएगी और ऋण जारी करने को ऐसे स्तर पर नियंत्रित रखा जाएगा जो बाजार में विश्वसनीयता हासिल कर सके। उनकी उम्मीद है कि बैंक ऑफ जापान सरकार से नजदीकी समन्वय करेगा, उपयुक्त मौद्रिक नीति चलाएगा और 2% की स्थिर तथा टिकाऊ मुद्रास्फीति हासिल करने की दिशा में कदम बढ़ाएगा। बजट अनुरोध और सरकारी उधार एक साथ निगाह में कटायामा के मुताबिक अधिकारी बजट से जुड़े अनुरोधों की फिर समीक्षा करेंगे। यह समीक्षा सरकारी खर्च से जुड़े प्रस्तावों को एक बार और देखने की प्रक्रिया है, लेकिन बयान में किसी खास अनुरोध, राशि या समय-सीमा का उल्लेख नहीं था। मुख्य बात यह थी कि ऋण जारी करने को बाजार की नजर में विश्वसनीय रहने लायक स्तर पर रखा जाना चाहिए। बजट अनुरोधों और ऋण जारी करने को एक ही बयान में रखकर कटायामा ने संकेत दिया कि बाजार विश्वसनीयता केवल मौद्रिक नीति से नहीं, सरकारी उधार के प्रबंधन से भी जुड़ी है। उन्होंने कर्ज की कोई निश्चित ऊपरी सीमा या घटादने का खास आंकड़ा नहीं बताया। इसलिए बयान एक मानक तय करता है, मगर उसकी संख्यात्मक सीमा स्पष्ट नहीं करता। इस दृष्टिकोण में सरकार और केंद्रीय बैंक की जिम्मेदारियां अलग-अलग रहती हैं। बजट और ऋण जारी करना सरकारी नीति का हिस्सा हैं, जबकि मौद्रिक नीति बैंक ऑफ जापान तय करता है। कटायामा ने दोनों को एक दूसरे के विरोधी के रूप में नहीं, बल्कि 2% लक्ष्य और बाजार स्थिरता से जुड़े अलग-अलग हिस्सों के रूप में पेश किया। अत्यधिक उतार-चढ़ाव से निपटने का पुराना रुख कटायामा ने मुद्रा बाजार में अत्यधिक उतार-चढ़ाव से निपटने की बात को जापान और अमेरीका द्वारा किए गए संयुक्त हस्तक्षेप से जोड़ा। उन्होंने कहा कि जब जापान-अमेरीका संयुक्त हस्तक्षेप शुरू किया गया था, तब अत्यधिक उतार-चढ़ाव से निपटने का इरादा स्पष्ट किया गया था। इस बयान में कोई नए हस्तक्षेप की घोषणा नहीं है। कटायामा ने बैंक ऑफ जापान की मौद्रिक नीति पर कोई टिप्पणी भी नहीं की। इसलिए उनकी बात को मौद्रिक नीति की कोई नई दिशा बताने वाला विवरण नहीं माना जा सकता; इसमें सरकार और केंद्रीय बैंक के समन्वय की उम्मीद जताई गई है। USD/JPY में दैनिक गिरावट का संकेत लिखे जाने के समय USD/JPY दैनिक कारोबार में 0.10% घटकर 156.10 पर था। यह उस समय का बाजार संकेत था, जब सरकारी ऋण, मुद्रास्फीति और मौद्रिक समन्वय पर बयान सामने आए थे। गिरावट छोटी थी और 156.10 को किसी नीतिगत लक्ष्य के रूप में पेश नहीं किया गया था। 0.10% का बदलाव केवल उस दिन की एक समय की स्थिति बताता है, पूरे रुझान का अंतिम निष्कर्ष नहीं। यह अंतर जरूरी है क्योंकि विनिमय दरें तब भी बदलती रहती हैं जब अधिकारी अलग-अलग वित्तीय और मौद्रिक लक्ष्यों पर बात करते हैं। बैंक ऑफ जापान का काम और 2% का लक्ष्य बैंक ऑफ जापान जापान का केंद्रीय बैंक है और देश में मौद्रिक नीति तय करता है। उसका काम बैंकनोट जारी करना और मूल्य स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए मुद्रा तथा मौद्रिक नियंत्रण करना है। इसी ढांचे में मुद्रास्फीति का लक्ष्य लगभग 2% रखा गया है। मूल्य स्थिरता इस लक्ष्य को नीतिगत आधार देती है। बैंक ऑफ जापान की नोट जारी करने और मुद्रा नियंत्रण की जिम्मेदारी इसी उद्देश्य से जुड़ी है, जबकि सरकार के बजट और ऋण प्रबंधन आर्थिक पृष्ठभूमि का वित्तीय हिस्सा बनाते हैं। कटायामा का बयान दोनों हिस्सों को एक साथ देखता है, लेकिन उन्हें एक ही निर्णय में नहीं मिलाता। 2013 में बेहद आसान मौद्रिक नीति की शुरुआत बैंक ऑफ जापान ने 2013 में बेहद आसान मौद्रिक नीति अपनाई थी क्योंकि उस समय कम मुद्रास्फीति वाला माहौल था। इसका उद्देश्य अर्थव्यवस्था को गति देना और मुद्रास्फीति बढ़ाना था। यही वह पृष्ठभूमि थी जिसमें केंद्रीय बैंक ने बड़े पैमाने पर प्रोत्साहन देने का रास्ता अपनाया। इस नीति का आधार क्वांटेटिव एंड क्वालिटेटीव ईजिंग, यानी QQE, था। इसके तहत बैंक ने नोट छापकर सरकारी बॉन्ड और कॉरपोरेट बॉन्ड जैसी संपत्तियां खरीदीं, ताकि बाजार में लिक्विडिटी उपलब्ध हो सके। इस तरह संपत्ति खरीदारी और तरलता बढ़ाने को मिलाकर आसान मौद्रिक रुख को आगे बढ़ाया गया। 2016 में नकारात्मक ब्याज दर और बॉन्ड यील्ड पर नियंत्रण 2016 में बैंक ऑफ जापान ने अपनी रणनीति को और आगे बढ़ाया। पहले उसने नकारात्मक ब्याज दरें लागू कीं और फिर अपने 10 साल के सरकारी बॉन्ड की यील्ड को सीधे नियंत्रित करना शुरू किया। ये दोनों कदम नीति को और आसान बनाने वाले थे। इन दो कदमों ने उसी आसान रुख को ब्याज दरों और दीर्घकालिक सरकारी बॉन्ड बाजार तक फैला दिया। नतीजे में 2016 का चरण 2013 की शुरुआती प्रोत्साहन नीति का विस्तार बन गया, न कि उससे अलग मोड़। मार्च 2024 में ब्याज दरें बढ़ीं बैंक ऑफ जापान ने मार्च 2024 में ब्याज दरें बढ़ाईं। इस कदम ने प्रभावी रूप से बैंक को बेहद आसान मौद्रिक नीति से पीछे हटाया। यह परिवर्तन लंबे समय तक चले आक्रामक आसान रुख के बाद आया। यह पृष्ठभूमि वर्तमान चर्चा के लिए अहम है क्योंकि कटायामा अब उपयुक्त मौद्रिक नीति और सरकारी समन्वय की उम्मीद जता रही हैं। मार्च 2024 का कदम दिखाता है कि केंद्रीय बैंक पहले से ही अपने पुराने अति-आसान ढांचे से दूरी बना चुका है। 2022 और 2023 में नीति के अंतर ने येन को दबाया बैंक के भारी प्रोत्साहन से येन अपनी प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले कमजोर हुआ था। 2022 और 2023 में यह प्रक्रिया और तेज हुई, क्योंकि बैंक ऑफ जापान और अन्य प्रमुख केंद्रीय बैंकों के बीच नीतिगत अंतर बढ़ रहा था। अन्य प्रमुख केंद्रीय बैंकों ने दशकों के उच्च स्तर की मुद्रास्फीति से लड़ने के लिए ब्याज दरें तेजी से बढ़ाईं। इससे मुद्राओं के बीच अंतर और चौड़ा हुआ और येन का मूल्य नीचे खिंचा। 2024 में जब बैंक ऑफ जापान ने अपना बेहद आसान रुख छोड़ने का फैसला किया, तो इस प्रवृत्ति का कुछ हिस्सा पलटा। येन की कमजोरी और ऊर्जा कीमतों ने मुद्रास्फीति बढ़ाई येन का कमजोर होना और वैश्विक ऊर्जा कीमतों में उछाल जापान में मुद्रास्फीति बढ़ने का कारण बना। इसके बाद मुद्रास्फीति बैंक ऑफ जापान के 2% लक्ष्य से ऊपर चली गई। देश में वेतन बढ़ने की संभावना ने भी इसी दिशा में योगदान दिया। वेतन को मुद्रास्फीति बढ़ाने वाला अहम तत्व माना गया, लेकिन बयान में ऊर्जा, मुद्रा और वेतन में से किसी एक कारक का प्रतिशत हिस्सा नहीं बताया गया। इसलिए तीनों को सह-कारक के रूप में देखा जाता है, किसी एक को अकेले कारण के रूप में नहीं। कटायामा के बयान से क्या स्पष्ट है कटायामा का संदेश दो जुड़े हिस्सों में समझा जा सकता है। सरकारी हिस्से में बजट अनुरोधों की समीक्षा और बाजार में विश्वसनीयता दिलाने लायक स्तर पर ऋण जारी करने पर नियंत्रण है। मौद्रिक हिस्से में बैंक ऑफ जापान से उपयुक्त नीति चलाने, सरकार से नजदीकी समन्वय करने और 2% के मूल्य लक्ष्य की ओर बढ़ने की उम्मीद है। इस बयान में नई ब्याज दर की राह, कर्ज की कोई निश्चित सीमा या वित्तीय बदलाव की समय-सीमा नहीं दी गई है। कटायामा ने बैंक ऑफ जापान की नीति पर अलग से कोई टिप्पणी नहीं की, इसलिए इसे किसी खास फैसले की घोषणा के रूप में नहीं पढ़ा जाना चाहिए। स्थिर और टिकाऊ शब्द भी मायने रखते हैं क्योंकि वे केवल 2% तक अस्थायी तौर पर पहुंचने की बात नहीं करते। उम्मीद इस बात की है कि मुद्रास्फीति इतनी स्थिर रहे कि लक्ष्य टिकाऊ बने। यही कारण है कि बाजार की नजर अब केवल एक बयान पर नहीं, बल्कि आगे के बजट और मौद्रिक कदमों की विश्वसनीयता पर भी रहेगी। USD/JPY का 156.10 का स्तर उस एक समय की स्थिति थी। नीतिगत पृष्ठभूमि बताती है कि सरकारी ऋण प्रबंधन और केंद्रीय बैंक का समन्वय क्यों एक साथ देखा जा रहा है। आगे का असली सवाल यही है कि बजट और मौद्रिक नीति के कदम कटायामा द्वारा बताए गए विश्वसनीय, स्थिर और टिकाऊ रास्ते से कितना मेल खाते हैं। इसका आप पर असर सबसे बड़ा असर: जापान की सरकारी ऋण नीति और मौद्रिक समन्वय पर बात से येन, बॉन्ड और जापान से जुड़े बाजारों की निगाह अस्थिरता पर बनी रहेगी। • विनिमय दर: लिखे जाने के समय USD/JPY 0.10% घटकर 156.10 पर था। इसका मतलब है कि उस समय येन की स्थिति डॉलर के मुकाबले थोड़ी बेहतर थी, लेकिन यह भविष्य का लक्ष्य नहीं है। • सरकारी ऋण: बजट अनुरोधों की समीक्षा और ऋण जारी करने पर नियंत्रण रखा जाएगा। निवेशक इस बात से सरकारी उधार की विश्वसनीयता का अंदाज़ा लगा सकते हैं, मगर कोई कर्ज सीमा अभी नहीं दी गई। • मुद्रास्फीति: नीति का लक्ष्य स्थिर और टिकाऊ 2% मुद्रास्फीति है। जिन पाठकों को जापानी संपत्तियों या विनिमय दर से मतलब है, उन्हें केवल एक दिन के आंकड़े की जगह लक्ष्य के अनुरूप कार्रवाई देखनी चाहिए। • नीतिगत स्पष्टता: कटायामा ने बैंक ऑफ जापान की नीति पर कोई टिप्पणी नहीं की। इसलिए बयान को नई ब्याज दर या हस्तक्षेप की घोषणा नहीं माना जा सकता। ऐसा क्यों हुआ इस बयान के पीछे सीधी चुनौती 2% मुद्रास्फीति लक्ष्य को स्थिर और टिकाऊ बनाने की थी। कटायामा ने कोई नई दर कार्रवाई नहीं घोषित की; उन्होंने सरकारी ऋण की विश्वसनीयता और केंद्रीय बैंक से समन्वय को इस लक्ष्य से जोड़ा। • कम मुद्रास्फीति का पुराना माहौल: 2013 में जापान में मुद्रास्फीति कम थी, इसलिए बैंक ऑफ जापान ने अर्थव्यवस्था को गति देने और मुद्रास्फीति बढ़ाने के लिए बेहद आसान नीति अपनाई। QQE में नोट छापकर सरकारी और कॉरपोरेट बॉन्ड खरीदने से लिक्विडिटी बढ़ाई गई। • 2016 का और आसान चरण: केंद्रीय बैंक ने पहले नकारात्मक ब्याज दरें लागू कीं और फिर 10 साल के सरकारी बॉन्ड की यील्ड पर सीधा नियंत्रण लगाया। इन कदमों ने 2013 के प्रोत्साहन ढांचे को और गहरा किया। • अन्य केंद्रीय बैंकों से अंतर: 2022 और 2023 में अन्य प्रमुख केंद्रीय बैंकों ने दशकों के उच्च स्तर की मुद्रास्फीति से लड़ने के लिए ब्याज दरें तेजी से बढ़ाईं। नीतिगत अंतर और फैला, जिससे येन का मूल्य नीचे खिंचा। • मुद्रास्फीति के सह-कारक: येन की कमजोरी और वैश्विक ऊर्जा कीमतों में उछाल ने जापानी मुद्रास्फीति को 2% से ऊपर ले जाने में भूमिका निभाई। वेतन बढ़ने की संभावना भी मुद्रास्फीति बढ़ाने वाले अहम तत्व के रूप में सामने आई। • अगला चरण: मार्च 2024 में बैंक ने ब्याज दरें बढ़ाकर बेहद आसान रुख से पीछे हटना शुरू किया। अब देखने योग्य बात यह है कि बजट समीक्षा, ऋण जारी करने का स्तर और मौद्रिक समन्वय किस तरह आगे बढ़ते हैं; कोई समय-सीमा नहीं दी गई। सवाल-जवाब 1. सत्सुकी कटायामा ने बजट अनुरोधों और सरकारी ऋण के बारे में क्या कहा? उन्होंने कहा कि बजट अनुरोधों की समीक्षा की जाएगी और ऋण जारी करने को ऐसे स्तर पर नियंत्रित रखा जाएगा जो बाजार में विश्वसनीयता हासिल कर सके। 2. 2% लक्ष्य के लिए उन्होंने बैंक ऑफ जापान से क्या उम्मीद जताई? उन्होंने उम्मीद जताई कि बैंक सरकार से नजदीकी समन्वय करेगा, उपयुक्त मौद्रिक नीति चलाएगा और स्थिर तथा टिकाऊ 2% मुद्रास्फीति हासिल करेगा। 3. क्या उन्होंने बैंक ऑफ जापान की नीति पर कोई टिप्पणी की? नहीं, उन्होंने बैंक ऑफ जापान की नीति पर कोई टिप्पणी नहीं की। उनके बयान में केवल समन्वय और उपयुक्त नीति की उम्मीद जताई गई। 4. जापान-अमेरीका संयुक्त हस्तक्षेप पर क्या कहा गया? कटायामा ने कहा कि जापान-अमेरीका संयुक्त हस्तक्षेप शुरू करते समय अत्यधिक उतार-चढ़ाव से निपटने का इरादा स्पष्ट किया गया था। 5. लिखे जाने के समय USD/JPY किस स्तर पर था? USD/JPY उस समय दैनिक कारोबार में 0.10% घटकर 156.10 पर था। यह उस समय की विनिमय दर थी, कोई नीतिगत लक्ष्य नहीं। 6. बैंक ऑफ जापान का मुख्य काम क्या है? बैंक ऑफ जापान जापान का केंद्रीय बैंक है और मौद्रिक नीति तय करता है। उसके काम में बैंकनोट जारी करना, मुद्रा और मौद्रिक नियंत्रण करना और लगभग 2% मुद्रास्फीति लक्ष्य के तहत मूल्य स्थिरता सुनिश्चित करना शामिल है। 7. येन 2022 और 2023 में क्यों दबा? बैंक ऑफ जापान और अन्य प्रमुख केंद्रीय बैंकों के बीच नीतिगत अंतर बढ़ गया था। अन्य केंद्रीय बैंकों ने दशकों के उच्च स्तर की मुद्रास्फीति से लड़ने के लिए ब्याज दरें तेजी से बढ़ाईं, जिससे येन कमजोर हुआ। 8. जापानी मुद्रास्फीति 2% से ऊपर क्यों गई? येन की कमजोरी और वैश्विक ऊर्जा कीमतों में उछाल ने मुद्रास्फीति बढ़ाई। वेतन बढ़ने की संभावना ने भी मुद्रास्फीति बढ़ाने वाले अहम तत्व के रूप में योगदान दिया। 9. मार्च 2024 में बैंक ऑफ जापान ने क्या किया? बैंक ऑफ जापान ने मार्च 2024 में ब्याज दरें बढ़ाईं। इससे वह प्रभावी रूप से अपनी बेहद आसान मौद्रिक नीति से पीछे हटा। https://trendkia.com/market/satsuki-katayama-ka-snketa-bank-of-japan-sarakara-se-milakara-2-mudrasphiti-lakshya-hasila-kare-32872 TrendKia — Har trend, sabse pehle.