सऊदी अरब के तेल संयंत्र और हवाई अड्डों पर हूती विद्रोहियों के ड्रोन व मिसाइल हमले, वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में हलचल यमन के हूती संगठन ने रियाद एयरपोर्ट और अरामको रिफाइनरी सहित सऊदी अरब के कई ठिकानों पर हमलों का दावा किया है। इस भू-राजनीतिक तनाव के बीच वैश्विक तेल बाजार में उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है। पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव एक बार फिर गहरा गया है, जहाँ यमन के हूती संगठन ने सऊदी अरब के कई रणनीतिक ठिकानों, हवाई अड्डों और महत्वपूर्ण ऊर्जा प्रतिष्ठानों पर सिलसिलेवार ड्रोन तथा मिसाइल हमलों को अंजाम देने का दावा किया है। इन हमलों के तहत सऊदी राजधानी रियाद के मुख्य अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के साथ-साथ मक्का क्षेत्र में स्थित राष्ट्रीय तेल कंपनी की रिफाइनरी को भी निशाना बनाए जाने की बात कही गई है। इस सैन्य कार्रवाई ने क्षेत्रीय सुरक्षा व्यवस्था को हिलाने के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा और वित्तीय बाजारों की नजरें भी खाड़ी क्षेत्र पर टिका दी हैं। हवाई अड्डों और अरामको रिफाइनरी को निशाना बनाने का दावा हूती सैन्य प्रवक्ता याह्या सारी के अनुसार, अभियानों की इस श्रृंखला में पहला बड़ा हमला सऊदी राजधानी रियाद स्थित किंग खालिद अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे को लक्ष्य बनाकर किया गया। हूती पक्ष का दावा है कि इस हमले ने अपने निर्धारित लक्ष्य को सफलतापूर्वक भेदा, जिससे वहां हवाई यातायात में बाधा उत्पन्न हुई। इसके तुरंत बाद दूसरी सैन्य कार्रवाई मक्का क्षेत्र के राबिग में स्थित सऊदी अरब की सरकारी तेल कंपनी अरामको के एक प्रमुख रिफाइनरी परिसर पर केंद्रित रही। प्रवक्ता के मुताबिक, इस हमले के चलते रिफाइनरी संयंत्र परिसर में आग लग गई, जिसने औद्योगिक सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौती खड़ी की। दक्षिणी सैन्य ठिकानों और सीमावर्ती क्षेत्रों पर बहुस्तरीय प्रहार हूती प्रवक्ता याह्या सारी ने आगे विस्तृत ब्योरा देते हुए बताया कि तीसरे चरण का अभियान सऊदी अरब के दक्षिणी भागों पर केंद्रित था। इसके अंतर्गत असीर प्रांत में स्थित आभा हवाई अड्डे, खमीस मुशैत सैन्य अड्डे और अकफा सैन्य शिविर को निशाना बनाया गया। इसके अतिरिक्त, दक्षिण-पश्चिमी सऊदी अरब के नजारान और जाजान क्षेत्रों में मौजूद कई अन्य संवेदनशील ठिकानों पर भी प्रहार करने का दावा किया गया है। प्रवक्ता ने स्पष्ट किया कि ये सभी अभियान यमन के हूती-नियंत्रित इलाकों पर सऊदी अरब द्वारा बढ़ाए गए हमलों की प्रत्यक्ष प्रतिक्रिया के रूप में चलाए गए हैं। इजरायल और अमेरिका के रुख से गहराती क्षेत्रीय जटिलता खाड़ी क्षेत्र में जारी इस सैन्य तनातनी के बीच सोमवार को इजरायली मीडिया से आई खबरों ने चिंता को और बढ़ा दिया है, जिसमें कहा गया है कि इजरायल ईरान के खिलाफ संभावित हमले की रूपरेखा तैयार कर रहा है। यह सैन्य कार्रवाई या तो अमेरिका के साथ समन्वय स्थापित करके या पूरी तरह स्वतंत्र रूप से की जा सकती है। दूसरी तरफ, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हूती विद्रोहियों के खिलाफ सऊदी अरब और सऊदी समर्थित यमनी बलों द्वारा चलाए जा रहे मौजूदा अभियान के परिणामों पर आशा व्यक्त की है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस सैन्य प्रयास पर टिप्पणी करते हुए कहा कि यह बहुत अच्छे से काम करेगा। वैश्विक तेल बाजार की स्थिति और डब्ल्यूटीआई क्रूड पर असर सैन्य गतिविधियों और हमलों के इन दावों के बीच वैश्विक ऊर्जा बाजारों में भी तुरंत प्रतिक्रिया दर्ज की गई। अंतरराष्ट्रीय बाजार में वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट यानी डब्ल्यूटीआई क्रूड के भाव में कारोबारी सत्र के दौरान 2.21 प्रतिशत की गिरावट आई और यह 88.35 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर पहुंच गया। डब्ल्यूटीआई अंतरराष्ट्रीय बाजार में बिकने वाले कच्चे तेल का एक प्रमुख प्रकार है, जिसकी तुलना ब्रेंट और दुबई क्रूड जैसे मानकों से की जाती है। कम गुरुत्वाकर्षण और सल्फर की कम मात्रा के कारण इसे 'लाइट' और 'स्वीट' तेल के रूप में जाना जाता है। अमेरिकी जमीन से उत्पादित यह तेल आसानी से रिफाइन किया जाने वाला उच्च गुणवत्ता वाला क्रूड माना जाता है, जिसका वितरण कुशिंग हब के जरिए होता है, जिसे दुनिया का पाइपलाइन चौराहा भी कहा जाता है। तेल की कीमतों को तय करने वाले प्रमुख वैश्विक कारक दुनियाभर के वित्तीय बाजारों में अन्य परिसंपत्तियों की तरह डब्ल्यूटीआई क्रूड की कीमतों का निर्धारण भी मूल रूप से मांग और आपूर्ति के संतुलन पर निर्भर करता है। जब वैश्विक आर्थिक विकास में तेजी आती है तो मांग बढ़ने से कीमतें चढ़ती हैं, जबकि कमजोर आर्थिक वृद्धि मांग को घटाकर कीमतों को गिरा सकती है। इसके अलावा युद्ध, राजनीतिक अस्थिरता और व्यापारिक प्रतिबंध आपूर्ति तंत्र को बाधित कर कीमतों में उछाल लाते हैं। चूंकि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तेल का व्यापार मुख्य रूप से अमेरिकी डॉलर में होता है, इसलिए डॉलर के मूल्य में उतार-चढ़ाव भी तेल को प्रभावित करता है। अमेरिकी डॉलर के कमजोर होने पर तेल अन्य मुद्राओं वाले खरीदारों के लिए सस्ता हो जाता है, जबकि डॉलर के मजबूत होने पर यह महंगा साबित होता है। इन्वेंटरी रिपोर्ट और ओपेक के नीतिगत फैसलों की भूमिका कच्चे तेल की कीमतों पर नजर रखने वाले विशेषज्ञ अमेरिकी पेट्रोलियम संस्थान यानी एपीआई और अमेरिकी ऊर्जा सूचना एजेंसी यानी ईआईए द्वारा हर हफ्ते जारी की जाने वाली तेल इन्वेंटरी रिपोर्टों का बारीकी से अध्ययन करते हैं। इन्वेंटरी में कमी आना मांग में मजबूती का संकेत देता है, जिससे कीमतें बढ़ती हैं, जबकि भंडार में बढ़ोतरी आपूर्ति अधिक होने का इशारा कर कीमतों को नीचे लाती है। एपीआई अपनी रिपोर्ट हर मंगलवार जारी करता है जबकि सरकारी एजेंसी होने के कारण अधिक विश्वसनीय मानी जाने वाली ईआईए की रिपोर्ट बुधवार को आती है। ये दोनों रिपोर्ट 75 प्रतिशत मामलों में 1 प्रतिशत के अंतर के भीतर एक-दूसरे से मेल खाती हैं। इसके समानांतर, 12 तेल निर्यातक देशों का समूह ओपेक अपने सदस्य देशों के लिए साल में दो बार उत्पादन कोटा तय करता है। उत्पादन में कटौती आपूर्ति घटाकर कीमतों को ऊपर खींचती है, जबकि उत्पादन बढ़ाने से कीमतें घटती हैं। इस संगठन का विस्तारित रूप ओपेक प्लस कहलाता है, जिसमें दस गैर-ओपेक सदस्य शामिल हैं और इनमें सबसे प्रमुख भूमिका रूस की है। मुद्रा बाजारों और बॉन्ड यील्ड में समानांतर हलचल पश्चिम एशिया के घटनाक्रमों के बीच वैश्विक मुद्रा बाजार में भी अहम तकनीकी बदलाव दर्ज किए गए। एशियाई सत्र की शुरुआत से पहले ऑस्ट्रेलियाई डॉलर और अमेरिकी डॉलर की जोड़ी 0.6970 के आसपास टिकी रही, जो 0.7000 के स्तर को दोबारा हासिल करने की कोशिश में दिखी, जबकि घरेलू स्तर पर वेस्टपैक के उपभोक्ता विश्वास सूचकांक का इंतजार किया जा रहा है। वहीं अमेरिकी डॉलर और जापानी येन की जोड़ी ने शुरुआती नुकसान से उबरते हुए सोमवार को एशियाई सत्र में 158.00 का स्तर पार कर लिया, जहां अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में बढ़ोतरी की कमजोर पड़ती संभावनाओं के बावजूद भू-राजनीतिक अनिश्चितता डॉलर को मजबूती दे रही है। दूसरी तरफ, सोने की कीमतों ने कुछ स्थिरता हासिल करते हुए सोमवार देर रात 4,150 डॉलर प्रति ट्रॉय औंस के स्तर के करीब कारोबार किया, जो अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में आई तेजी और मजबूत डॉलर के प्रभाव से जूझ रहा है। केंद्रीय बैंकों की चुनौतियां और यूरोपीय नीतिगत संकट वैश्विक आर्थिक परिदृश्य में मुद्रास्फीति का दबाव केंद्रीय बैंकों के लिए सिरदर्द बना हुआ है। यूरोपियन सेंट्रल बैंक यानी ईसीबी के सामने लक्ष्य से लगभग दोगुनी चल रही मुद्रास्फीति को नियंत्रित करने की चुनौती है। सामान्य परिस्थितियों में इसका सीधा समाधान ब्याज दरों में बढ़ोतरी करना होता है, लेकिन वर्तमान हालात असामान्य हैं। इस समय बॉन्ड बाजार पहले से ही वित्तीय सख्ती का एक हिस्सा खुद ही संभाल रहा है, जिससे यूरोपीय केंद्रीय बैंक के नीति निर्माताओं के सामने ब्याज दरें बढ़ाने को लेकर एक बेहद जटिल और असमंजस भरी स्थिति उत्पन्न हो गई है। इसका आप पर असर पश्चिम एशिया में बढ़ते सैन्य तनाव और तेल शोधन केंद्रों पर हमलों से अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार तथा परिवहन लागत पर सीधा असर पड़ सकता है। • भारत में: कच्चे तेल की आपूर्ति व्यवस्था में व्यवधान आने पर देश में पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है। इसके चलते माल ढुलाई की लागत बढ़ने से रोजमर्रा के घरेलू सामानों की कीमतों पर सीधा असर पड़ सकता है। • खाड़ी क्षेत्र के यात्रियों के लिए: रियाद और आभा हवाई अड्डों पर हमलों के दावों के कारण अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के शेड्यूल में अचानक बदलाव या देरी हो सकती है। यात्रा करने वाले यात्रियों को अपने टिकट और उड़ान की स्थिति की समय पर पुष्टि करनी चाहिए। • ऊर्जा निवेशकों के लिए: भू-राजनीतिक अस्थिरता और ओपेक की उत्पादन नीतियों के कारण कच्चे तेल के वायदा सौदों में तीव्र उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। कमोडिटी ट्रेडर्स को डॉलर की चाल और साप्ताहिक इन्वेंटरी आंकड़ों पर नजर रखनी चाहिए। • वैश्विक मुद्रा और सोने के खरीदारों के लिए: अनिश्चितता के दौर में सोने की कीमतें 4,150 डॉलर प्रति ट्रॉय औंस के आसपास मजबूत हो रही हैं, जिससे आभूषण खरीदारों के लिए यह धातु महंगी बनी रहेगी। मुद्रा बाजार में डॉलर की मजबूती अन्य मुद्राओं पर दबाव बनाए रख सकती है। ऐसा क्यों हुआ सऊदी अरब पर हूती हमलों की यह ताजा श्रृंखला यमन में सऊदी समर्थित बलों की तेज होती सैन्य कार्रवाई और पश्चिम एशिया में जारी व्यापक क्षेत्रीय टकराव का परिणाम है। • सीधा कारण: हूती प्रवक्ता ने साफ किया है कि ये हमले यमन के उनके नियंत्रण वाले इलाकों पर सऊदी अरब द्वारा की गई भीषण बमबारी की सीधी प्रतिक्रिया हैं। संगठन ने सऊदी हवाई अड्डों और अरामको रिफाइनरी को निशाना बनाकर जवाबी दबाव बनाने का प्रयास किया है। • क्षेत्रीय तनाव की पृष्ठभूमि: सऊदी समर्थित यमनी बलों और हूती विद्रोहियों के बीच लंबे समय से जारी गृहयुद्ध ने दोनों पक्षों के बीच लगातार सैन्य टकराव की परिस्थितियां बनाई हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा सऊदी अभियान का समर्थन किए जाने से दोनों पक्षों के बीच आक्रामकता और बढ़ गई है। • ईरान और इजरायल का संभावित टकराव: इजरायल द्वारा ईरान के खिलाफ संभावित हमले की तैयारियों की खबरों ने पूरे खाड़ी क्षेत्र में तनाव को और गहरा कर दिया है। चूंकि हूती संगठन क्षेत्रीय शक्ति संतुलन में एक प्रमुख पक्ष है, इसलिए यह संघर्ष बहुपक्षीय रूप लेता दिखाई दे रहा है। सवाल-जवाब 1. हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब के किन प्रमुख ठिकानों पर हमला करने का दावा किया है? हूती संगठन ने रियाद के किंग खालिद एयरपोर्ट, राबिग में अरामको की रिफाइनरी, आभा एयरपोर्ट, खमीस मुशैत बेस और अकफा कैंप पर हमलों का दावा किया है। 2. अरामको रिफाइनरी पर हमले के क्या परिणाम बताए गए हैं? हूती प्रवक्ता याह्या सारी के अनुसार, मक्का क्षेत्र के राबिग में स्थित अरामको रिफाइनरी पर हमले के बाद वहां आग लग गई थी। 3. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस सैन्य संघर्ष पर क्या कहा? अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सऊदी अरब और उसके समर्थित बलों द्वारा चलाए जा रहे अभियान पर सकारात्मक रुख जताते हुए कहा कि यह बहुत अच्छे से काम करेगा। 4. इन हमलों के समय अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार में डब्ल्यूटीआई क्रूड का क्या भाव था? उस समय डब्ल्यूटीआई क्रूड के भाव में 2.21 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई थी और यह 88.35 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था। 5. इजरायल को लेकर क्या खबर सामने आई है? इजरायली मीडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, इजरायल ईरान पर संभावित हमले की तैयारी कर रहा है, जो अमेरिका के समन्वय से या स्वतंत्र रूप से हो सकता है। 6. डब्ल्यूटीआई तेल की कीमतें किन प्रमुख कारकों से प्रभावित होती हैं? डब्ल्यूटीआई क्रूड के दाम मांग और आपूर्ति, भू-राजनीतिक युद्ध, अमेरिकी डॉलर के मूल्य, साप्ताहिक इन्वेंटरी रिपोर्ट और ओपेक के उत्पादन फैसलों से तय होते हैं। https://trendkia.com/market/saudi-arabia-ke-tela-snyntra-aura-havai-addon-para-houthi-vidrohiyon-ke-drona-va-misaila-hamale-vaishvika-bajara-men-kachche-tela--43574 TrendKia — Har trend, sabse pehle.