सऊदी अरब की ओर दागी गई बैलिस्टिक मिसाइल हवा में नष्ट, कच्चे तेल और वैश्विक बाजारों पर टिकी निगाहें यमन के हूती विद्रोहियों द्वारा खमीस मुशैत की ओर दागी गई बैलिस्टिक मिसाइल को सऊदी नेतृत्व वाले सैन्य गठबंधन ने हवा में ही मार गिराया। इस घटना के बीच वैश्विक कच्चे तेल और मुद्रा बाजारों में व्यापक हलचल दर्ज की गई। सऊदी अरब के दक्षिणी हिस्से को निशाना बनाकर यमन के हूती गुट द्वारा दागे गए एक बड़े बैलिस्टिक प्रक्षेपास्त्र को सऊदी अरब के नेतृत्व वाले सैन्य गठबंधन ने हवा में ही नष्ट कर दिया। रविवार को सामने आए इस घटनाक्रम की पुष्टि करते हुए गठबंधन के प्रवक्ता मेजर जनरल तुर्की अल-माल्की ने स्पष्ट किया कि यमन की हूती मिलिशिया ने यह बैलिस्टिक मिसाइल खमीस मुशैत की दिशा में दागी थी, जिसे सुरक्षा तंत्र ने समय रहते पहचान कर पूरी तरह मार गिराया। इस हमले से कुछ ही समय पहले सऊदी नागरिक सुरक्षा विभाग ने आभा क्षेत्र में संभावित खतरों को देखते हुए स्थानीय स्तर पर एक सुरक्षा चेतावनी भी जारी की थी। खाड़ी क्षेत्र में हुए इस सैन्य तनाव के बीच अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार और विदेशी मुद्रा विनिमय केंद्रों पर निवेशकों की सतर्क नजर बनी हुई है। कच्चे तेल की कीमतें और डब्ल्यूटीआई मानक की स्थिति मध्य पूर्व में सुरक्षा संबंधी घटनाक्रमों के बीच ऊर्जा बाजार में उतार-चढ़ाव देखा गया। इस दौरान वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट यानी डब्ल्यूटीआई के भाव 1.70 प्रतिशत की दैनिक गिरावट के साथ 89.45 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर आ गए। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कारोबार के लिए डब्ल्यूटीआई कच्चा तेल एक अत्यंत महत्वपूर्ण बेंचमार्क माना जाता है। वैश्विक पटल पर तीन सबसे प्रमुख कच्चे तेल प्रकारों में ब्रेंट और दुबई क्रूड के साथ वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट शामिल है। तकनीकी दृष्टिकोण से डब्ल्यूटीआई को लाइट और स्वीट कच्चा तेल कहा जाता है, क्योंकि इसमें गुरुत्वाकर्षण का स्तर अपेक्षाकृत कम होता है और सल्फर यानी गंधक की मात्रा भी काफी कम पाई जाती है। अपनी इस रासायनिक बनावट की वजह से यह उच्च गुणवत्ता वाला तेल माना जाता है, जिसे रिफाइनरियों में पेट्रोल और डीजल जैसे ईंधनों में बदलना बेहद आसान होता है। यह कच्चा तेल मुख्य रूप से अमेरिका में निकाला जाता है और इसका परिवहन तथा वितरण कुशिंग केंद्र के माध्यम से होता है। ओक्लाहोमा स्थित कुशिंग को पूरी दुनिया में पाइपलाइनों का चौराहा माना जाता है, जहाँ से तेल के बड़े भंडार और प्रवाह नियंत्रित होते हैं। यही कारण है कि वित्तीय बाजारों और वैश्विक मीडिया में कच्चे तेल की कीमतों के संदर्भ के रूप में डब्ल्यूटीआई के मूल्य का उल्लेख सबसे अधिक किया जाता है। कच्चे तेल की कीमतों को तय करने वाले प्रमुख कारक दुनिया की अन्य संपत्तियों की तरह ही कच्चे तेल की कीमतें भी बुनियादी रूप से मांग और आपूर्ति के संतुलन पर निर्भर करती हैं। जब दुनिया भर में आर्थिक विकास की रफ्तार तेज होती है, तब कारखानों, यातायात और ऊर्जा जरूरतों के चलते तेल की मांग बढ़ती है, जो कीमतों को सहारा देती है। इसके विपरीत जब वैश्विक विकास की दर सुस्त पड़ती है, तो मांग घटने से कीमतों में गिरावट आती है। इसके अलावा युद्ध, राजनीतिक अस्थिरता और अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध ऐसे बड़े कारक हैं जो आपूर्ति श्रृंखला को बाधित कर बाजार में अचानक उछाल ला सकते हैं। तेल के इस बाजार में ओपेक का रुख भी काफी निर्णायक होता है। ओपेक असल में 12 प्रमुख तेल निर्यातक देशों का एक संगठित समूह है, जो साल में दो बार होने वाली बैठकों में अपने सदस्य देशों के लिए उत्पादन कोटा निर्धारित करता है। जब यह संगठन उत्पादन में कटौती का फैसला करता है, तो बाजार में आपूर्ति तंग हो जाती है और कीमतें ऊपर की तरफ भागने लगती हैं। वहीं जब उत्पादन बढ़ाने का निर्णय होता है, तो बाजार में तेल की अधिकता से भाव नीचे आते हैं। इसी व्यवस्था का एक विस्तृत रूप ओपेक प्लस है, जिसमें दस अतिरिक्त गैर-ओपेक उत्पादक देश शामिल होते हैं, जिनमें रूस सबसे प्रमुख सदस्य माना जाता है। इसके अतिरिक्त अमेरिकी डॉलर की मजबूती या कमजोरी भी तेल की कीमतों को सीधे प्रभावित करती है। चूंकि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की ज्यादातर खरीद-फरोख्त अमेरिकी डॉलर में ही तय होती है, इसलिए डॉलर के कमजोर होने पर अन्य मुद्राओं वाले देशों के लिए तेल सस्ता पड़ता है, जिससे मांग में तेजी आ सकती है। इसके विपरीत डॉलर में मजबूती आने पर यह विदेशी खरीदारों के लिए महंगा साबित होता है। साप्ताहिक इन्वेंट्री आंकड़े और बाजार पर उनका असर अमेरिकी पेट्रोलियम संस्थान यानी एपीआई और अमेरिकी ऊर्जा सूचना प्रशासन यानी ईआईए द्वारा हर हफ्ते जारी की जाने वाली तेल भंडार रिपोर्ट भी डब्ल्यूटीआई की कीमतों की दिशा तय करने में बड़ी भूमिका निभाती है। इन भंडारण आंकड़ों में होने वाला बदलाव बाजार की वास्तविक मांग और आपूर्ति को दर्शाता है। यदि रिपोर्ट में कच्चे तेल के भंडार में कमी दिखाई देती है, तो इसका सीधा अर्थ यह निकाला जाता है कि खपत बढ़ रही है, जिससे कीमतों में तेजी आती है। वहीं भंडार में बढ़ोतरी यह संकेत देती है कि आपूर्ति मांग के मुकाबले ज्यादा है, जिससे कीमतों पर दबाव बनता है। एपीआई अपने आंकड़े हर मंगलवार को प्रकाशित करता है, जबकि ईआईए की आधिकारिक रिपोर्ट उसके ठीक अगले दिन बुधवार को आती है। ऐतिहासिक रूप से देखा गया है कि दोनों के नतीजों में लगभग समानता होती है और 75 प्रतिशत मौकों पर उनके अनुमानों में केवल एक प्रतिशत तक का ही अंतर पाया जाता है। चूँकि ईआईए एक आधिकारिक सरकारी संस्था है, इसलिए वित्तीय विश्लेषक और बड़े व्यापारी इसके आंकड़ों को अधिक प्रामाणिक और विश्वसनीय मानते हैं। प्रमुख मुद्राओं और सोने के भाव में ताजा हलचल वैश्विक वित्तीय बाजार के अन्य हिस्सों पर नजर डालें तो सोमवार को एशियाई कारोबारी सत्र के दौरान ऑस्ट्रेलियाई डॉलर और अमेरिकी डॉलर की जोड़ी सीमित तरलता के बीच सुधरकर 0.7000 के मनोवैज्ञानिक स्तर के करीब पहुंची। अमेरिकी बॉन्ड प्रतिफल में बहु-वर्षीय उच्च स्तर से आई नरमी के कारण अमेरिकी डॉलर पर दबाव देखा गया, जिससे ऑस्ट्रेलियाई डॉलर को सहारा मिला। हालांकि अमेरिकी फेडरल रिजर्व के आक्रामक रुख और अमेरिका तथा ईरान के बीच बने तनाव ने डॉलर की इस कमजोरी को सीमित दायरे में बांधे रखा। साथ ही ऑस्ट्रेलियाई केंद्रीय बैंक द्वारा नवंबर में ब्याज दरें बढ़ाए जाने की घटती संभावनाओं ने ऑस्ट्रेलियाई डॉलर की बढ़त को सीमित किया। दूसरी ओर अमेरिकी डॉलर और जापानी येन की जोड़ी नए कारोबारी सप्ताह की शुरुआत में 158.00 के आसपास एक सीमित दायरे में घूमती रही। जापानी येन को सहारा देने के लिए सरकारी हस्तक्षेप की बढ़ती चर्चाओं के बीच निवेशक अत्यधिक सतर्क रहे। इसके अलावा कमजोर बॉन्ड प्रतिफल ने डॉलर को रोके रखा, जबकि जापान और अमेरिका में सार्वजनिक अवकाश होने के कारण बाजार में तरलता काफी कम दर्ज की गई। सुरक्षित निवेश माने जाने वाले सोने की बात करें तो सोमवार को एशियाई सत्र में पीली धातु 4,200 डॉलर प्रति औंस के पार निकलकर एक सप्ताह से अधिक के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई। कमजोर अमेरिकी बॉन्ड प्रतिफल ने सोने की कीमतों को आगे बढ़ाया। हालांकि होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर अमेरिका और ईरान के बीच गहराते गतिरोध और फेडरल रिजर्व के कड़े रुख ने डॉलर को बहुत अधिक गिरने से रोका, जिससे बिना ब्याज वाली इस धातु की बढ़त पर भी कुछ हद तक अंकुश लगा रहा। अब बाजार से जुड़े तमाम प्रतिभागियों की नजरें आगामी अमेरिकी मुद्रास्फीति के आंकड़ों और फेडरल रिजर्व के अध्यक्ष केविन वार्श के संभावित संबोधन पर टिकी हैं, जो इस सप्ताह बाजार को नई दिशा दे सकते हैं। इसका आप पर असर खाड़ी क्षेत्र में सुरक्षा तनाव और कच्चे तेल के 89.45 डॉलर प्रति बैरल पर आने से वैश्विक ऊर्जा कीमतों और मुद्रा बाजारों पर सीधा असर पड़ेगा। • भारत में प्रभाव: अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव से देश में पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतों तथा आयात बिल पर असर पड़ता है। यदि कच्चे तेल की कीमतें इसी दायरे में स्थिर रहती हैं, तो तेल विपणन कंपनियों के मुनाफे और मुद्रास्फीति के दबाव में संतुलन बना रह सकता है। • वैश्विक निवेशकों के लिए: मध्य पूर्व में भू-राजनीतिक तनाव और अमेरिका तथा ईरान के बीच तनातनी के चलते सोने और सुरक्षित मुद्राओं में मांग बढ़ सकती है। सोने के 4,200 डॉलर के पार जाने से निवेशकों को अपने कमोडिटी पोर्टफोलियो में सतर्कता बरतनी होगी। • वाहन चालकों और उपभोक्ताओं के लिए: वैश्विक तेल आपूर्ति में किसी बड़े व्यवधान के अभाव में निकट भविष्य में ईंधन की कीमतों में अचानक भारी वृद्धि की संभावना सीमित है। फिर भी ओपेक और अमेरिकी इन्वेंट्री के आंकड़ों पर नजर रखना आवश्यक रहेगा। • विदेशी मुद्रा विनिमय पर: अमेरिकी बॉन्ड प्रतिफल में नरमी और विभिन्न केंद्रीय बैंकों के ब्याज दर निर्णयों से मुद्राओं में अस्थिरता बनी रहेगी। डॉलर के मुकाबले अन्य प्रमुख मुद्राओं में लेन-देन करने वाले व्यापारियों को केंद्रीय बैंकों के नीतिगत बयानों पर ध्यान देना चाहिए। ऐसा क्यों हुआ यमन के हूती विद्रोहियों ने दक्षिणी सऊदी अरब के रणनीतिक और आबादी वाले इलाकों को निशाना बनाकर बैलिस्टिक मिसाइल दागी, जिसे सुरक्षा बलों ने समय रहते नष्ट कर दिया। यह घटनाक्रम खाड़ी में लंबे समय से चले आ रहे क्षेत्रीय तनाव और सीमा पार सैन्य टकरावों की कड़ी का हिस्सा है। • प्रत्यक्ष कारण: हूती मिलिशिया द्वारा खमीस मुशैत की ओर एक लंबी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल दागी गई थी, जिसके बाद सऊदी नागरिक सुरक्षा ने आभा क्षेत्र में खतरे की चेतावनी जारी की और वायु रक्षा प्रणाली ने मिसाइल को हवा में ही मार गिराया। • क्षेत्रीय तनाव का माहौल: होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनातनी और खाड़ी क्षेत्र में रणनीतिक प्रतिद्वंद्विता ने सुरक्षा जोखिमों को लगातार संवेदनशील बनाए रखा है। • बाजार की प्रतिक्रिया: सैन्य तनाव के बावजूद तेल भंडारण में बदलाव, अमेरिकी बॉन्ड प्रतिफल में गिरावट और वैश्विक मांग की अनिश्चितताओं के कारण डब्ल्यूटीआई तेल की कीमतों में मामूली दैनिक गिरावट दर्ज की गई। • जांच और आगे की स्थिति: सऊदी नेतृत्व वाला गठबंधन सीमावर्ती क्षेत्रों में हवाई सुरक्षा निगरानी बनाए हुए है, जबकि वित्तीय बाजार अब आगामी आर्थिक आंकड़ों और केंद्रीय बैंकों के रुख पर नजरें टिकाए हुए हैं। सवाल-जवाब 1. सऊदी अरब ने किस शहर की ओर दागी गई मिसाइल को मार गिराया? सऊदी नेतृत्व वाले सैन्य गठबंधन ने खमीस मुशैत की ओर यमन के हूती विद्रोहियों द्वारा दागी गई बैलिस्टिक मिसाइल को हवा में ही नष्ट कर दिया। 2. इस घटना के समय डब्ल्यूटीआई कच्चे तेल की कीमत क्या दर्ज की गई? इस दौरान वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (डब्ल्यूटीआई) का भाव 1.70 प्रतिशत घटकर 89.45 डॉलर प्रति बैरल दर्ज किया गया। 3. डब्ल्यूटीआई कच्चा तेल मुख्य रूप से कहां से निकाला और वितरित किया जाता है? यह कच्चा तेल मुख्य रूप से अमेरिका में निकाला जाता है और ओक्लाहोमा के कुशिंग वितरण केंद्र के माध्यम से पाइपलाइनों द्वारा वितरित किया जाता है। 4. सोने के भाव में क्या हलचल देखी गई? कमजोर अमेरिकी बॉन्ड प्रतिफल के बीच एशियाई सत्र में सोने की कीमत 4,200 डॉलर प्रति औंस के पार पहुंचकर एक सप्ताह से अधिक के उच्च स्तर पर दर्ज की गई। 5. ओपेक संगठन में कितने देश शामिल हैं और यह तेल की कीमतों को कैसे प्रभावित करता है? ओपेक में 12 प्रमुख तेल उत्पादक देश शामिल हैं, जो उत्पादन कोटा तय करके बाजार में कच्चे तेल की आपूर्ति और कीमतों को नियंत्रित करते हैं। https://trendkia.com/market/saudi-arabia-ki-ore-daagi-gayi-ballistic-missile-hawa-mein-nasht-wti-crude-aur-global-market-par-nazar-46628 TrendKia — Har trend, sabse pehle.