सऊदी पाइपलाइन पर हमले के बाद कच्चे तेल में उछाल, ट्रंप के बयानों से संभला बाजार सऊदी अरब की ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन पर ड्रोन हमले और होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही ठप होने से कच्चे तेल में तेजी आई, लेकिन डोनाल्ड ट्रंप की सोशल मीडिया पोस्ट के बाद कीमतों में नरमी देखी गई। अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में भारी उथल-पुथल देखने को मिली है। वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) कच्चा तेल 1.4% की बढ़त के साथ करीब $98.00 प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा है। दिन के शुरुआती कारोबार में 12:30 GMT के कुछ ही देर बाद यह 4% से अधिक उछलकर $100.50 के स्तर को पार कर गया था। हालांकि 19:00 GMT तक इस बढ़त का अधिकांश हिस्सा खत्म हो गया। तेल बाजार में यह तेज उछाल सऊदी अरब की अहम पाइपलाइन बंद होने के कारण आया, जिसे रविवार को अंतरिक्ष से ली गई तस्वीरों में क्षतिग्रस्त पंपिंग स्टेशन के साथ देखा गया था। वहीं दूसरी तरफ, 15:05 और 16:31 GMT के बीच ट्रुथ सोशल पर आई चार पोस्टों ने कीमतों में आई तेजी को थाम दिया, जिनमें यह दावा किया गया कि युद्ध समाप्त होते ही तेल की कीमतें भारी गिरावट के साथ नीचे आ जाएंगी। इसके अगले आधे घंटे में बाजार में तेज बिकवाली देखने को मिली। सऊदी अरब के तीनों निर्यात मार्ग एक साथ प्रभावित सऊदी अरब का कच्चा तेल विश्व बाजार तक पहुंचने के लिए मुख्य रूप से तीन रास्तों पर निर्भर करता है, और इस पूरे सप्ताह तीनों ही रास्तों पर गहरा संकट देखा गया। पहला रास्ता होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर गुजरने वाले तेल टैंकरों का है, जहां अब ईरान ने अपनी अनुमति को अनिवार्य कर दिया है। सप्ताहांत के दौरान इस मार्ग से केवल चार जहाज बाहर निकल सके, जबकि 28 फरवरी को युद्ध शुरू होने से पहले यहां से रोजाना करीब 100 जहाज गुजरते थे। सऊदी तेल के निकास का दूसरा बड़ा साधन प्रायद्वीप के आर-पार फैली ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन है, जिसकी क्षमता प्रतिदिन 70 लाख बैरल तेल परिवहन की है। यह पाइपलाइन कच्चे तेल को लाल सागर तट पर स्थित यानबू तक ले जाती है। यानबू से यह तेल बाब अल-मंदेब के रास्ते दक्षिण में एशिया की ओर या स्वेज नहर के रास्ते उत्तर में यूरोप भेजा जाता है। हालात तब और बिगड़ गए जब गुरुवार और शुक्रवार को हूती विद्रोहियों ने बाब अल-मंदेब के बीच स्थित मोखा बंदरगाह और पेरीम द्वीप पर नियंत्रण कर लिया। इसके साथ ही उन्होंने ऐलान किया कि यह जलडमरूमध्य सऊदी जहाजों को छोड़कर बाकी सभी जहाजों के लिए खुला रहेगा। इसके ठीक पहले गुरुवार को इराक की ओर से आए ड्रोनों ने ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन के पंपिंग स्टेशनों पर हमला किया था। सुरक्षा के मद्देनजर सऊदी अरब ने शुक्रवार को इस पाइपलाइन को बंद कर दिया, और इसे दोबारा चालू करने की कोई निश्चित तारीख तय नहीं की गई है। सऊदी अरब ने अगस्त महीने में प्रतिदिन 62.38 लाख बैरल उत्पादन दर्ज किया, जो 1990 के बाद का सबसे निचला स्तर है। वहीं शिपिंग आंकड़ों के अनुसार देश का निर्यात घटकर करीब 32 लाख बैरल प्रतिदिन रह गया, जो 2013 के बाद का सबसे कमजोर आंकड़ा है। वैश्विक रिफाइनरियों में अमेरिकी तेल की मांग और ट्रुथ सोशल का असर सऊदी अरब से जो बैरल बाहर नहीं निकल पा रहे हैं, उनकी भरपाई के लिए एशियाई रिफाइनरियां अटलांटिक बेसिन की ओर रुख कर रही हैं। वर्तमान में अतिरिक्त कच्चा तेल उपलब्ध कराने की क्षमता केवल अमेरिकी गल्फ कोस्ट के टर्मिनलों के पास है। यही कारण रहा कि रविवार को बाजार खुलते ही WTI को भारी लिवाली का सहारा मिला। दूसरी तरफ, यानबू टर्मिनल ने गर्मियों के दौरान अपना तेल दक्षिण के बजाय उत्तर की ओर भेजना शुरू किया था, लेकिन शुक्रवार से पाइपलाइन बंद होने के कारण वहां तेल की आवक पूरी तरह शून्य हो गई है। बाजार में बिकवाली का दौर चार चरणों में शुरू हुआ, और हर चरण एक सोशल मीडिया पोस्ट के कुछ ही मिनटों के भीतर आया। पहली पोस्ट 15:05 GMT पर आई, जिसमें कहा गया कि यूक्रेन और रूस अपने ऊर्जा प्रतिष्ठानों पर हमले रोकने पर सहमत हो गए हैं। इस पोस्ट में दुनिया भर में डीजल की बढ़ती कीमतों के लिए मध्य पूर्व के बजाय रूस-यूक्रेन युद्ध को जिम्मेदार ठहराया गया। करीब एक घंटे बाद यूक्रेन के राष्ट्रपति ने जवाब दिया कि हमलों का रुकना इस बात पर निर्भर करता है कि रूस पहले हमले बंद करे। अमेरिका में सोमवार को डीजल की औसत कीमत रिकॉर्ड $6.23 प्रति गैलन तक पहुंच गई, जबकि गल्फ कोस्ट ने अगस्त में युद्ध पूर्व के स्तर का केवल एक-चौथाई डीजल निर्यात किया। रिफाइनरियों के परिचालन को निर्धारित करने वाला यही ईंधन बिकवाली की पहली चपेट में आया। दूसरी पोस्ट 15:32 GMT पर आई, जिसमें कहा गया कि ईरान बहुत जल्द एक समझौता चाहता है और वॉशिंगटन तय करेगा कि बातचीत करनी है या नहीं। इससे पहले 11:00 GMT के करीब ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड ने घोषणा की थी कि उसने जलडमरूमध्य के ऊपर एक अमेरिकी ड्रोन को मार गिराया है। ईरान के विदेश मंत्री ने रविवार को दोहराया कि जलडमरूमध्य तब तक बंद रहेगा जब तक वॉशिंगटन जून के उस ज्ञापन का सम्मान नहीं करता जो अगस्त में समाप्त होने से पहले ही निष्प्रभावी हो गया था। सोमवार को सलालाह में होर्मुज कॉरिडोर पर चर्चा के लिए प्रस्तावित क्षेत्रीय बैठक भी रविवार को टाल दी गई, जिसके बारे में तेहरान का कहना है कि यह रियाद के अनुरोध पर हुआ। तीसरी और चौथी पोस्ट 16:25 और 16:31 GMT पर सामने आईं, जिनमें दावा किया गया कि होर्मुज से कच्चा तेल बह रहा है और युद्ध खत्म होते ही कीमतों में भारी गिरावट आएगी, जिसमें ज्यादा समय नहीं लगेगा। आयरलैंड के एक गोल्फ कोर्स से दिए गए बयान में कहा गया कि मध्यावधि चुनावों के तुरंत बाद युद्ध समाप्त हो जाएगा। इस समय सीमा को 3 नवंबर के संदर्भ में देखा जा रहा है। इन्वेंट्री के आंकड़े और फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति बाजार अब अमेरिकी तेल भंडारों के आंकड़ों पर नजर बनाए हुए है। अमेरिकन पेट्रोलियम इंस्टीट्यूट (API) मंगलवार को 20:30 GMT पर अपने इन्वेंट्री अनुमान जारी करेगा, जबकि एनर्जी इंफॉर्मेशन एडमिनिस्ट्रेशन (EIA) बुधवार को 14:30 GMT पर आधिकारिक आंकड़े पेश करेगा। 4 सितंबर को समाप्त सप्ताह में अमेरिका के रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार (SPR) में केवल 28.54 करोड़ बैरल तेल बचा था। यह नवंबर 1982 के बाद का सबसे निचला स्तर है और युद्ध की शुरुआत की तुलना में 13 करोड़ बैरल कम है। रणनीतिक भंडार इस समय अपनी कुल क्षमता का केवल 40% ही भरा हुआ है, जो तेल कीमतों के लिए एक बुनियादी सहारा बना हुआ है। इसके साथ ही फेडरल ओपन मार्केट कमेटी (FOMC) बुधवार को 18:00 GMT पर अपनी ब्याज दरों की घोषणा करेगी, जिसके साथ आर्थिक अनुमानों का सारांश (SEP) भी पेश किया जाएगा। फेड की ब्याज दरों से जुड़े फ्यूचर्स अनुबंध 0.25% की वृद्धि के साथ दरें 3.75% से 4.00% होने की 93% संभावना जता रहे हैं, जो शुक्रवार को लगभग 70% थी। यदि ऐसा होता है, तो यह 2023 के बाद पहली दर वृद्धि होगी। ब्याज दरों में बढ़ोतरी से कर्ज महंगा होता है, जिससे परिवहन, उड़ानों और औद्योगिक गतिविधियों की लागत बढ़ती है और तेल की मांग पर धीमी गति से दबाव बनता है। इस सप्ताह के आर्थिक कैलेंडर पर केवल यही एक ऐसा कार्यक्रम है जिसका समय और संभावना पूर्व-निर्धारित है, क्योंकि सऊदी पाइपलाइन के दोबारा शुरू होने या होर्मुज जलडमरूमध्य के खुलने की कोई निश्चित तारीख मौजूद नहीं है। तकनीकी स्तर और बाजार का रुझान तकनीकी मोर्चे पर $100.50 से ठीक ऊपर का सत्र का उच्चतम स्तर लगातार तीसरे दिन $100.00 से ऊपर के कारोबार को दर्शाता है, लेकिन यह दूसरा दिन भी रहा जब दिन के भीतर कीमतें गिरकर इसके नीचे आ गईं। इसलिए $100.50 से $101.00 का दायरा एक मजबूत प्रतिरोध के रूप में काम कर रहा है। गुरुवार का बंद भाव मई के बाद पहली बार $100.00 के पार रहा था, और $101.00 के ऊपर दैनिक बंद भाव मई के $103.00 के स्तर को दोबारा खोल सकता है। समर्थन स्तरों की बात करें तो $97.00 से ठीक नीचे का सत्र निचला स्तर न्यूयॉर्क में आई बिकवाली को रोकने में सफल रहा। शुक्रवार का निचला स्तर जो $95.50 के करीब था, सितंबर की इस पूरी तेजी को आधार प्रदान कर रहा है। वहीं गुरुवार का $93.00 से ठीक नीचे का निचला स्तर इस तेजी के बने रहने के लिए अंतिम सीमा है। जब तक शुक्रवार का निचला स्तर $95.50 कायम है, तब तक बाजार का रुख ऊपर की ओर बना हुआ है, जिसमें $101.00 का दैनिक बंद पहला लक्ष्य और $103.00 दूसरा लक्ष्य होगा। सोमवार को छह घंटे के भीतर लगभग $4.00 की तेजी गंवाने के बावजूद भाव शुक्रवार के बंद से ऊपर टिके रहे। दैनिक स्टोकेस्टिक रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स (Stoch RSI) 85 के करीब बना हुआ है और चढ़ रहा है, जो यह दर्शाता है कि तेजी का रुझान बरकरार है लेकिन आगे की गुंजाइश सीमित है। यदि दैनिक बंद भाव $95.50 के नीचे जाता है, तो यह माना जाएगा कि बाजार ने पाइपलाइन बंद होने की खबर को पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया है। लाइव मार्केट डेटा के अनुसार कच्चा तेल (CL=F) $100.30 पर ट्रेड कर रहा है, जो पिछले बंद भाव $101.91 की तुलना में 1.58% की गिरावट दर्शाता है। इसका 52 हफ्तों का दायरा $54.98 से $119.48 रहा है और वॉल्यूम 20 दिनों के औसत का 0.88 गुना है। तकनीकी संकेतकों में RSI(14) 64 पर है, जबकि MACD 5.12 पर है जो सिग्नल 4.34 के मुकाबले 0.78 के बुलिश हिस्टोग्राम के साथ सकारात्मक बना हुआ है। मूविंग एवरेजेस में 20-दिवसीय EMA $94.81, 50-दिवसीय EMA $89.11 और 200-दिवसीय EMA $79.29 पर हैं, जबकि 50-दिवसीय SMA $86.40 और 200-दिवसीय SMA $80.68 पर हैं। 50-दिवसीय EMA का 200-दिवसीय EMA से ऊपर होना गोल्डन क्रॉस के साथ लंबी अवधि के अपट्रेंड की पुष्टि करता है। बोलिंगर बैंड्स $77.45 से $108.23 के बीच हैं और कीमत बैंड्स के अंदर बनी हुई है। ADX(14) 34 पर ट्रेंडिंग स्थिति दर्शा रहा है, जबकि स्टोकेस्टिक की फास्ट लाइन 72 और सिग्नल लाइन 78 पर है। 14-दिवसीय ATR 4.27 दैनिक वोलैटिलिटी दर्शाता है। इसके प्रमुख स्तरों में पिवट $100.99, रेजिस्टेंस R1 $102.79 और R2 $105.28 हैं, जबकि सपोर्ट S1 $98.50 और S2 $96.70 पर स्थित है। WTI कच्चे तेल की बुनियादी संरचना WTI यानी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट अंतरराष्ट्रीय बाजारों में बिकने वाले कच्चे तेल की प्रमुख किस्मों में से एक है, जिसमें ब्रेंट और दुबई क्रूड भी शामिल हैं। अपने कम घनत्व और कम सल्फर सामग्री के कारण इसे 'लाइट' और 'स्वीट' क्रूड कहा जाता है। यह उच्च गुणवत्ता वाला तेल माना जाता है जिसे आसानी से रिफाइन किया जा सकता है। यह अमेरिका में उत्पादित होता है और इसका वितरण कुशिंग हब के जरिए होता है, जिसे 'दुनिया का पाइपलाइन चौराहा' माना जाता है। कच्चे तेल की कीमतें मुख्य रूप से मांग और आपूर्ति के संतुलन पर निर्भर करती हैं। मजबूत वैश्विक आर्थिक वृद्धि मांग को बढ़ाती है, जबकि सुस्त वृद्धि इसे घटाती है। राजनीतिक अस्थिरता, युद्ध और प्रतिबंध आपूर्ति श्रृंखला को बाधित कर कीमतों में तेजी लाते हैं। इसके अतिरिक्त ओपेक (पेट्रोलियम निर्यातक देशों का संगठन), जिसमें 12 सदस्य देश शामिल हैं, साल में दो बार बैठक कर उत्पादन कोटा तय करता है। जब ओपेक उत्पादन में कटौती करता है तो कीमतें बढ़ती हैं, जबकि उत्पादन बढ़ाने पर दबाव कम होता है। ओपेक प्लस में रूस सहित दस अतिरिक्त गैर-ओपेक देश शामिल हैं। इसके अलावा तेल का व्यापार अमेरिकी डॉलर में होने के कारण डॉलर की मजबूती या कमजोरी भी इसकी मांग को प्रभावित करती है। अमेरिकी तेल भंडार के आंकड़े, जो API द्वारा मंगलवार और EIA द्वारा बुधवार को जारी किए जाते हैं, आपूर्ति की वास्तविक स्थिति को दर्शाते हैं और कीमतों की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाते हैं। अन्य बाजारों और मुद्राओं की स्थिति वैश्विक वित्तीय बाजारों में सोमवार को अमेरिकी डॉलर की मजबूती का व्यापक असर देखने को मिला। ऑस्ट्रेलियाई डॉलर बनाम अमेरिकी डॉलर (AUD/USD) दबाव में रहा और 0.7100 के करीब पहुंचने के बाद एशियाई कारोबार की शुरुआत से पहले सुधरकर 0.7150 के पास पहुंचा। फेड द्वारा ब्याज दरें बढ़ाने की बढ़ती संभावनाओं ने जोखिम वाली संपत्तियों पर दबाव बनाए रखा। निवेशक अब चीन से आने वाले प्रमुख आर्थिक आंकड़ों पर नजर रख रहे हैं। अमेरिकी डॉलर बनाम जापानी येन (USD/JPY) में सप्ताह की शुरुआत में लिवाली देखी गई और एशियाई सत्र के दौरान यह 154.00 के करीब पहुंच गया। हालांकि हाजिर कीमतें पिछले सप्ताह के दायरे में ही सीमित रहीं और प्रमुख केंद्रीय बैंक निर्णयों से पहले पिछले मंगलवार को बने करीब सात महीने के निचले स्तर के आसपास बनी रहीं। सोने की कीमतों में नई तेजी आई और पीली धातु ने सोमवार को $4,300 प्रति ट्रॉय औंस के अहम स्तर को चुनौती दी। हालांकि डॉलर में मजबूती और अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में बढ़त के कारण बढ़त सीमित रही। क्रिप्टो बाजार में जैस्मीकॉइन (JasmyCoin) $0.0035 के सपोर्ट और $0.0040 के रेजिस्टेंस के बीच फंसा रहा, जो मई के $0.0078 के उच्च स्तर से काफी नीचे है। उत्पादक मूल्य सूचकांक (PPI) और उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) के आंकड़ों के बाद फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरें बढ़ाने की संभावनाएं मजबूत हुई हैं, जिससे डॉलर की प्रतिक्रिया तय करने में नया डॉट प्लॉट बेहद अहम होगा। इसका आप पर असर कच्चे तेल की कीमतों में आए इस तेज उतार-चढ़ाव और आपूर्ति बाधाओं का सीधा असर आने वाले दिनों में ईंधन की खुदरा कीमतों और परिवहन लागत पर पड़ सकता है। • भारत में: अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल का $100 के करीब टिके रहना देश की तेल विपणन कंपनियों के आयात बिल को बढ़ाएगा। यदि कीमतें लंबे समय तक ऊंची बनी रहती हैं, तो घरेलू स्तर पर पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है। • वैश्विक उपभोक्ताओं पर: अमेरिका में डीजल की औसत कीमत $6.23 प्रति गैलन के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचने से माल ढुलाई और लॉजिस्टिक्स लागत में बढ़ोतरी होगी। इसका सीधा असर आम जनता के लिए रोजमर्रा की वस्तुओं और खाद्य पदार्थों की महंगाई के रूप में सामने आएगा। • ऊर्जा निवेशकों के लिए: WTI में $95.50 का स्तर अहम सपोर्ट है और बाजार में भारी वोलैटिलिटी बनी हुई है। व्यापारियों को आगामी फेड नीति और अमेरिकी इन्वेंट्री आंकड़ों से पहले सख्त स्टॉप-लॉस बनाए रखने की आवश्यकता है। • उद्योग और विनिर्माण क्षेत्र पर: ईंधन की लागत बढ़ने से विमानन, लॉजिस्टिक्स और रासायनिक उद्योगों के परिचालन मार्जिन पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। कंपनियां अतिरिक्त लागत का बोझ ग्राहकों पर डालने के लिए कीमतें बढ़ा सकती हैं। ऐसा क्यों हुआ कच्चे तेल की कीमतों में यह तेज हलचल मध्य पूर्व में आपूर्ति के प्रमुख बुनियादी ढांचे पर हुए हमलों और भू-राजनीतिक बयानों के टकराव के कारण उत्पन्न हुई है। • पाइपलाइन और बंदरगाहों पर हमले: इराक से आए ड्रोनों ने सऊदी अरब की 70 लाख बैरल प्रतिदिन क्षमता वाली ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन के पंपिंग स्टेशनों को निशाना बनाया, जिससे इसे एहतियातन बंद करना पड़ा। इसके साथ ही हूती विद्रोहियों द्वारा मोखा बंदरगाह और पेरीम द्वीप पर कब्जे ने लाल सागर के निकास मार्ग को बाधित कर दिया। • होर्मुज में आवागमन पर पाबंदी: ईरानी अधिकारियों द्वारा जहाजों के लिए विशेष अनुमति अनिवार्य करने से होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों की संख्या 100 से घटकर सप्ताहांत में मात्र चार रह गई। इसके चलते एशियाई रिफाइनरियों को अटलांटिक बाजार और अमेरिकी गल्फ कोस्ट से तत्काल तेल खरीदने के लिए मजबूर होना पड़ा। • सोशल मीडिया पर कूटनीतिक टिप्पणियां: कीमतों में आई तेजी उस समय थमी जब ट्रुथ सोशल पर आई पोस्टों में रूस-यूक्रेन के बीच ऊर्जा हमलों को रोकने के समझौते और युद्ध समाप्त होने पर तेल कीमतें गिरने का दावा किया गया। इन बयानों ने सटोरिया खरीदारी पर अस्थायी ब्रेक लगा दिया। सवाल-जवाब 1. कच्चे तेल की कीमतों में अचानक तेजी क्यों आई थी? सऊदी अरब की ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन पर ड्रोन हमलों के बाद उसे बंद कर दिया गया और होर्मुज में जहाजों की आवाजाही ठप होने से WTI तेल $100.50 के पार चला गया था। 2. दिन के उच्चतम स्तर से तेल की कीमतें वापस क्यों गिरीं? ट्रुथ सोशल पर आई चार पोस्टों में युद्ध समाप्त होने पर कीमतों में भारी गिरावट आने और ऊर्जा समझौते की बात कहे जाने के बाद बाजार में तेज बिकवाली आई। 3. सऊदी अरब का तेल उत्पादन कितना गिर चुका है? सऊदी अरब ने अगस्त में प्रतिदिन 62.38 लाख बैरल तेल का उत्पादन किया, जो 1990 के बाद का उसका सबसे निचला स्तर है। 4. होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही पर क्या असर पड़ा है? युद्ध से पहले जहां रोजाना करीब 100 जहाज गुजरते थे, वहीं सप्ताहांत में केवल चार जहाज ही ईरानी अनुमति के साथ वहां से बाहर निकल सके। 5. फेडरल रिजर्व की आगामी बैठक से तेल बाजार पर क्या असर पड़ सकता है? फेड द्वारा ब्याज दरों में 0.25% की बढ़ोतरी की 93% संभावना है, जिससे कर्ज महंगा होने पर औद्योगिक और परिवहन मांग धीमी पड़ सकती है। https://trendkia.com/market/saudi-arabia-paipalaina-para-hamale-ke-bada-crude-oil-men-uchhala-donald-trump-ke-bayanon-se-snbhala-bajara-34002 TrendKia — Har trend, sabse pehle.