सऊदी अरब पर हमलों के बाद कच्चे तेल के दाम में गिरावट पर ब्रेक, वैश्विक बाजारों में हलचल सऊदी अरब के बुनियादी ढांचे पर ताजा हमलों के बाद कच्चे तेल की कीमतों को सहारा मिला है, जबकि अन्य वैश्विक परिसंपत्तियों में मिला-जुला रुख देखने को मिल रहा है। अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार में कच्चे तेल की कीमतों को लेकर अनिश्चितता एक बार फिर बढ़ गई है। सप्ताहांत के दौरान सऊदी अरब के विभिन्न ठिकानों को निशाना बनाकर किए गए हमलों ने वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला और भू-राजनीतिक सुरक्षा को लेकर नई चिंताएं पैदा कर दी हैं। हालांकि सऊदी प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि प्रमुख ऊर्जा प्रतिष्ठानों को कोई नया नुकसान नहीं हुआ है, लेकिन पहले से बाधित पाइपलाइन और यानबु बंदरगाह पर लोडिंग संबंधी समस्याओं के कारण बाजार में आपूर्ति बाधित होने का डर लगातार बना हुआ है। विश्लेषकों के अनुसार, जब तक सऊदी अरब से कच्चा तेल सामान्य रूप से प्रवाहित नहीं होता और ऊर्जा प्रतिष्ठानों पर हमले पूरी तरह बंद नहीं होते, तब तक ब्रेंट और डब्ल्यूटीआई में और बड़ी गिरावट की गुंजाइश काफी सीमित नजर आ रही है। सऊदी तेल प्रतिष्ठानों पर हमले और आपूर्ति के हालात सप्ताहांत के दौरान हुए घटनाक्रमों में हूती विद्रोहियों ने रियाद और यानबु में स्थित अरामको सुविधा पर मिसाइल तथा ड्रोन हमलों का दावा किया था। इसके विपरीत, सऊदी अरब के अधिकारियों ने कहा कि यानबु और अन्य कई ठिकानों पर इन हमलों को नाकाम कर दिया गया, जिससे पेट्रोलियम ढांचे को कोई नया नुकसान नहीं पहुंचा। इस मामले में ओसीबीसी के क्रिस्टोफर वोंग का मानना है कि तेल कीमतों को हालिया घटनाक्रम से समर्थन मिल सकता है। उन्होंने कहा, "For now, further downside in oil may be limited unless Saudi flows normalise and attacks on energy infrastructure subside." बाजार के मौजूदा हालात इसलिए भी संवेदनशील हैं क्योंकि ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन पहले से ही क्षतिग्रस्त है और यानबु से होने वाली लोडिंग प्रभावित चल रही है। शुक्रवार को आपूर्ति संबंधी चिंताएं कम होने के कारण ब्रेंट क्रूड नरम होकर लगभग 105 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गया था। हालांकि सप्ताहांत की घटनाओं ने निवेशकों को यह याद दिला दिया है कि मध्य पूर्व में भू-राजनीतिक तनाव कभी भी आपूर्ति व्यवस्था को हिला सकता है। मुद्रा बाजारों में उतार-चढ़ाव: ऑस्ट्रेलियाई डॉलर और येन की स्थिति वैश्विक मुद्रा बाजारों में भी भू-राजनीतिक उठापटक का सीधा प्रभाव देखा जा रहा है। एशियाई कारोबारी सत्र में ऑस्ट्रेलियाई डॉलर अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 0.7100 के स्तर से ऊपर स्थिर बना हुआ है। अमेरिकी डॉलर अपने जुलाई के अंत के उच्चतम स्तर से नीचे आ रहा था, लेकिन निरंतर भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं के बीच उसकी यह गिरावट फिलहाल थम गई है। पीबीओसी द्वारा अपनी लोन प्राइम दरों में कोई बदलाव न करने के फैसले का असर भी ऑस्ट्रेलियाई डॉलर पर पड़ा है। इसके बावजूद, ट्रंप-शी शिखर सम्मेलन से पहले आरबीए द्वारा ब्याज दरों में एक और बढ़ोतरी के कयासों से ऑस्ट्रेलियाई मुद्रा को समर्थन मिल रहा है। दूसरी ओर, अमेरिकी डॉलर और जापानी येन के सौदों में दबाव नजर आया और यह जोड़ी एशियाई कारोबार में 157.00 से नीचे फिसल गई। शुक्रवार को बैंक ऑफ जापान द्वारा दरों की समीक्षा किए जाने के बाद संभावित सरकारी हस्तक्षेप के डर ने जापानी येन को थोड़ी मजबूती दी है। जापान में स्थानीय अवकाश होने के कारण कारोबारी अतिरिक्त सावधानी बरत रहे हैं, खासकर तब जब रूस और यूक्रेन के साथ-साथ पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव बढ़ रहा है। सोने और क्रिप्टोकरेंसी बाजार का रुख कीमती धातुओं के बाजार में सोने ने नए सप्ताह की शुरुआत कमजोरी के साथ की है। शुक्रवार को 4,400 डॉलर के स्तर के करीब पहुंचने में विफलता के बाद यह पीली धातु फिसलकर 4,350 डॉलर के स्तर के करीब कारोबार कर रही है। बाजार प्रतिभागी अब मध्य पूर्व संकट से जुड़े ताजा घटनाक्रमों और उनके महंगाई पर पड़ने वाले प्रभावों पर नजर रख रहे हैं, क्योंकि मुद्रास्फीति में किसी भी बदलाव का असर केंद्रीय बैंकों की ब्याज दर अपेक्षाओं पर पड़ेगा और उसी आधार पर बिना ब्याज देने वाले सोने की दिशा तय होगी। डिजिटल परिसंपत्तियों के मोर्चे पर डॉगकॉइन में सुधार का दायरा बढ़ता दिख रहा है। पिछले हफ्ते लगभग 6 प्रतिशत की तेजी दर्ज करने के बाद यह टोकन 0.088 डॉलर के ऊपर बना हुआ है। डॉग स्पॉट एक्सचेंज ट्रेडेड फंड्स के माध्यम से संस्थागत मांग की वापसी ने इस मीम कॉइन को काफी गति दी है। इसके अतिरिक्त, तकनीकी संकेतकों में सुधार और बड़े निवेशकों यानी व्हेल्स द्वारा लगातार की जा रही खरीदारी इस डॉग-थीम वाले कॉइन के सकारात्मक दृष्टिकोण को रेखांकित कर रही है। आर्थिक आंकड़े और केंद्रीय बैंकों के कदम आगामी घरेलू आंकड़ों के मोर्चे पर यह हफ्ता अपेक्षाकृत शांत रहने वाला है, जिसमें मुख्य ध्यान गुरुवार को आने वाली नए घरों की बिक्री रिपोर्ट पर रहेगा। जुलाई में भारी गिरावट के बाद अगस्त में बिक्री के आंशिक सुधार के साथ 2.6 प्रतिशत बढ़कर 623 हजार की गति पर पहुंचने का अनुमान है। हालांकि बंधक दरों में वृद्धि आवास की मांग और लोगों की पहुंच को प्रभावित कर रही है, लेकिन बिल्डरों द्वारा दी जा रही रियायतें बाजार को स्थिरता प्रदान कर रही हैं। उधर नीतिगत मोर्चे पर, बैंक ऑफ जापान ने मौद्रिक नीति को सामान्य बनाने की दिशा में एक और बड़ा कदम उठाया है। बैंक ने अपने अल्पकालिक ब्याज दर लक्ष्य को 1.00 प्रतिशत से बढ़ाकर 1.25 प्रतिशत कर दिया है। यह फैसला 7-2 के बहुमत से लिया गया, जो काफी हद तक बाजार की उन अपेक्षाओं के अनुरूप है जो पिछले कई हफ्तों से लगाई जा रही थीं। इसका आप पर असर कच्चे तेल की कीमतों में रुकावट और मुद्राओं के उतार-चढ़ाव का असर सीधे आम उपभोक्ता की जेब और निवेश पोर्टफोलियो पर पड़ता है। • पेट्रोल-डीजल और परिवहन: कच्चे तेल के 105 डॉलर प्रति बैरल के आसपास टिके रहने से घरेलू स्तर पर ईंधन के दाम कम होने की उम्मीदें धूमिल हो सकती हैं। परिवहन लागत ऊंची रहने से रोजमर्रा की वस्तुओं और माल ढुलाई के खर्चे पर दबाव बना रहेगा। • सोने में निवेश: सोना गिरकर 4,350 डॉलर के करीब आने से गहने या सर्राफा खरीदने वालों को थोड़ी राहत मिल सकती है। हालांकि भू-राजनीतिक संकट गहराने पर इसमें कभी भी दोबारा तेज उछाल देखने को मिल सकता है। • क्रिप्टोकरेंसी निवेशक: डॉगकॉइन का 0.088 डॉलर से ऊपर निकलना खुदरा निवेशकों के लिए अल्पावधि में मुनाफे के संकेत दे रहा है। संस्थागत निवेश और ईटीएफ की मांग से इसमें आगे भी उतार-चढ़ाव की संभावना है। • ऋण और रियल एस्टेट: आवास बाजार में बिक्री दर 623 हजार रहने और ऊंची बंधक दरों के कारण कर्ज लेकर घर खरीदना अभी महंगा बना हुआ है। खरीदारों को बिल्डरों की ओर से मिल रही रियायतों और ब्याज दरों के रुख पर नजर रखनी चाहिए। ऐसा क्यों हुआ कच्चे तेल और संबंधित वैश्विक बाजारों में यह स्थिति मध्य पूर्व में सुरक्षा संकट और प्रमुख केंद्रीय बैंकों के नीतिगत फैसलों के टकराव से उत्पन्न हुई है। • ऊर्जा बुनियादी ढांचे पर हमले: हूती विद्रोहियों द्वारा रियाद और यानबु स्थित अरामको सुविधा पर मिसाइल व ड्रोन हमलों ने आपूर्ति के खतरे को फिर से जीवित कर दिया है। यद्यपि सऊदी अरब ने कहा कि कोई नया ढांचागत नुकसान नहीं हुआ है, लेकिन पहले से क्षतिग्रस्त ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन ने जोखिम बढ़ा रखा है। • आपूर्ति मार्गों में पूर्व से मौजूद रुकावटें: यानबु बंदरगाह पर लोडिंग संबंधी समस्याएं पहले से चल रही थीं, जिससे तेल की सामान्य आपूर्ति प्रभावित थी। इन अनसुलझी समस्याओं के बीच नए हमलों की खबरों ने कीमतों को 105 डॉलर से नीचे जाने से रोक दिया। • केंद्रीय बैंकों के नीतिगत बदलाव: बैंक ऑफ जापान द्वारा अपनी अल्पकालिक ब्याज दर को 1.00% से बढ़ाकर 1.25% करने और पीबीओसी द्वारा दरों को अपरिवर्तित रखने से मुद्रा बाजारों में हलचल मची है। इसके साथ ही भू-राजनीतिक अनिश्चितता के चलते निवेशकों ने अपनी रणनीतियों में बदलाव किया है। सवाल-जवाब 1. सऊदी अरब में किन ठिकानों पर हमले का दावा किया गया था? हूती विद्रोहियों ने रियाद और यानबु में स्थित अरामको तेल सुविधा पर ड्रोन और मिसाइल हमलों का दावा किया था। 2. क्या इन हमलों से सऊदी अरब के तेल प्रतिष्ठानों को नुकसान पहुंचा है? सऊदी अरब के अधिकारियों के अनुसार इन हमलों को विफल कर दिया गया और तेल ढांचे को कोई नया नुकसान नहीं हुआ है। 3. ब्रेंट क्रूड का हालिया मूल्य स्तर क्या रहा है? शुक्रवार को आपूर्ति संबंधी चिंताएं घटने के बाद ब्रेंट क्रूड नरम होकर लगभग 105 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गया था। 4. बैंक ऑफ जापान ने ब्याज दरों में क्या बदलाव किया है? बैंक ऑफ जापान ने 7-2 के बहुमत से अपनी अल्पकालिक ब्याज दर को 1.00% से बढ़ाकर 1.25% कर दिया है। 5. सोने की कीमत किस स्तर के आसपास कारोबार कर रही है? शुक्रवार को 4,400 डॉलर के स्तर के करीब विफल होने के बाद सोना 4,350 डॉलर के करीब कारोबार कर रहा है। 6. डॉगकॉइन में हालिया तेजी का मुख्य कारण क्या है? डॉगकॉइन के 0.088 डॉलर के पार जाने की वजह स्पॉट एक्सचेंज ट्रेडेड फंड्स के जरिए संस्थागत मांग की वापसी और व्हेल्स की खरीदारी है। https://trendkia.com/market/saudi-arabia-para-hamalon-ke-bada-kachche-tela-ke-dama-men-giravata-para-breka-vaishvika-bajaron-men-halachala-35628 TrendKia — Har trend, sabse pehle.