सऊदी पाइपलाइन बहाल होने और बातचीत से कच्चे तेल में लगातार गिरावट, 98 डॉलर पर पहुंचा ब्रेंट सऊदी अरब द्वारा ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन को दोबारा शुरू किए जाने और अमेरिका-ईरान वार्ता के संकेतों के बीच ब्रेंट क्रूड फिसलकर करीब 98 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया है। अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार में कच्चे तेल की कीमतों पर दबाव गहराता जा रहा है, जिससे ब्रेंट क्रूड लगातार छठे कारोबारी सत्र में नुकसान दर्ज करते हुए 98 डॉलर प्रति बैरल के करीब कारोबार करता नजर आया। कच्चे तेल में आई इस ताजा कमजोरी ने वित्तीय बाजारों में कारोबारी गतिविधियों को भी बड़े पैमाने पर प्रभावित किया है। वैश्विक स्तर पर जोखिम धारणा और फिक्स्ड इनकम सिक्योरिटीज पर भी इसका सीधा असर देखने को मिला है। इस गिरावट की मुख्य वजह सऊदी अरब की ओर से अपनी रणनीतिक ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन को दोबारा शुरू करने की प्रक्रिया और अमेरिका व ईरान के बीच राजनयिक बातचीत में दिखे प्रगति के शुरुआती संकेत हैं। सऊदी ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन और तेल बाजार की स्थिति सऊदी अरब की तरफ से ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन को दोबारा चालू करने के कदम ने बाजार में आपूर्ति को लेकर बनी चिंताओं को काफी हद तक हल्का कर दिया है। इससे पहले ब्रेंट क्रूड गिरकर करीब 99 डॉलर प्रति बैरल के आसपास आया था, जो लगातार पांचवें कारोबारी सत्र की कमजोरी थी। यह अगस्त 2025 के बाद से कच्चे तेल में गिरावट का सबसे लंबा सिलसिला बन गया था। इसके बाद सुबह के समय गिरावट का यह क्रम छठे दिन भी खिंच गया और कीमतें लगभग 98 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गईं। ऊर्जा बाजार के जानकारों का मानना है कि तेल की इन हलचलों ने दिन के दौरान इक्विटी और बॉन्ड समेत व्यापक बाजारों के लिए एक प्रमुख दिशा तय करने का काम किया। अमेरिका और ईरान की अप्रत्यक्ष वार्ता और होर्मुज जलडमरूमध्य राजनयिक मोर्चे पर, संयुक्त राष्ट्र सभा के इतर अमेरिकी और ईरानी अधिकारियों के बीच मध्यस्थों के माध्यम से अप्रत्यक्ष स्तर पर बातचीत हुई। जून के बाद से दोनों पक्षों के बीच यह पहली आधिकारिक बातचीत दर्ज की गई। हालांकि इस दौर में किसी अंतिम समझौते पर सहमति नहीं बन पाई, लेकिन दोनों पक्षों ने भविष्य में और चर्चाएं जारी रखने की उम्मीद जताई है। इसी बीच तेहरान ने यह स्पष्ट किया कि यदि अमेरिका ईरानी बंदरगाहों पर लगी अपनी नाकाबंदी हटा लेता है, तो वह सात दिनों के भीतर होर्मुज जलडमरूमध्य को दोबारा खोलने के लिए तैयार रहेगा। इन बयानों के बावजूद, फिलहाल होर्मुज जलडमरूमध्य के जरिए सामान्य समुद्री यातायात बहाल होने की संभावनाएं सीमित ही नजर आ रही हैं, जिससे रणनीतिक जलमार्गों को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। मुद्रा बाजारों में उतार-चढ़ाव: ऑस्ट्रेलियाई डॉलर और येन कच्चे तेल में गिरावट और अन्य व्यापक घटनाओं के बीच विदेशी मुद्रा बाजार में भी अहम बदलाव देखे गए। एशियाई कारोबारी सत्र में बुधवार को AUD/USD जोड़ी पर ताजा बिकवाली दबाव देखा गया और यह 0.7100 के स्तर का परीक्षण कर रही थी। ऑस्ट्रेलिया के ताजा फ्लैश पीएमआई आंकड़ों के अनुसार मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर संकुचन में चला गया है, जबकि सेवा क्षेत्र लगातार दूसरे महीने धीमी गति से विस्तार कर रहा है। इसके साथ ही अमेरिकी डॉलर की मजबूती ऑस्ट्रेलियाई मुद्रा पर दबाव बढ़ा रही है। दूसरी ओर, USD/JPY की जोड़ी एशियाई सत्र में 157.00 के मध्य स्तर पर मंडराती रही, जो पिछले शुक्रवार को छूए गए दो सप्ताह के उच्चतम स्तर के करीब है। बैंक ऑफ जापान द्वारा हाल ही में की गई मौद्रिक नीतिगत सख्ती के बाद भी येन कमजोर स्थिति में बना हुआ है, जबकि अमेरिकी फेडरल रिजर्व के सख्त रुख ने डॉलर को मजबूत सहारा दे रखा है। हालांकि, जापानी अधिकारियों द्वारा संभावित करेंसी हस्तक्षेप के डर से येन में और तेज गिरावट सीमित रही। केंद्रीय बैंक के फैसले और डॉलर की ताकत बैंक ऑफ जापान ने अपनी मौद्रिक नीति को सामान्य बनाने की दिशा में एक और कदम उठाते हुए अल्पकालिक ब्याज दर लक्ष्य को 1.00% से बढ़ाकर 1.25% कर दिया। नीति निर्माताओं ने यह फैसला 7-2 के बहुमत से लिया, जो काफी हद तक बाजार की पुरानी उम्मीदों के अनुरूप रहा। दूसरी तरफ, अमेरिकी फेडरल रिजर्व के सख्त रुख के कारण अमेरिकी डॉलर का अपट्रेंड जारी रहा और उसने 30 जुलाई के बाद का नया उच्चतम स्तर छू लिया। इस मजबूत डॉलर ने गैर-उपज वाले सर्राफा बाजार को खासा प्रभावित किया, जिससे सोना उप-4,300 डॉलर के स्तर से उबरने के बाद फिर से बिकवाली के दबाव में आ गया। क्रिप्टो बाजार की बढ़त और ट्रंप-शी शिखर सम्मेलन पर नजर पारंपरिक वित्तीय बाजारों में सुस्ती के बीच डिजिटल एसेट बाजार में मजबूती देखी गई। कार्डानो (ADA) ने अपनी बढ़त जारी रखी और इस सप्ताह 14% से अधिक की तेजी के बाद 0.262 डॉलर के ऊपर कारोबार किया। कार्डानो के डेरिवेटिव मेट्रिक्स में लगातार सुधार देखा जा रहा है, जिसे बढ़ते ओपन इंटरेस्ट, सकारात्मक फंडिंग दरों और बड़ी व्हेल खरीदारी से समर्थन मिल रहा है। इसके अलावा, वित्तीय बाजार गुरुवार को वाशिंगटन में होने वाले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के महत्वपूर्ण शिखर सम्मेलन पर नजरें गड़ाए हुए हैं। दोनों देशों के बीच व्यापार तनाव में कुछ महीनों की नरमी के बाद, यह बैठक तय करेगी कि दुनिया की दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाएं अपने संघर्ष विराम को आगे बढ़ाएंगी या फिर वैश्विक कारोबार एक नए अनिश्चितता के दौर में प्रवेश करेगा। इसका आप पर असर कच्चे तेल में लगातार गिरावट और मजबूत डॉलर वैश्विक आयात लागत, पेट्रोल-डीजल की कीमतों और मुद्रा विनिमय दरों पर सीधा असर डाल सकते हैं। • भारत में: अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तेल की गिरती कीमतें भारत के आयात बिल और चालू खाता घाटे को कम करने में मदद करेंगी। इससे घरेलू स्तर पर ईंधन की कीमतों में स्थिरता बने रहने या कमी आने की उम्मीद बढ़ सकती है। • वैश्विक निवेशकों के लिए: मजबूत अमेरिकी डॉलर के कारण सोना और अन्य गैर-उपज वाली संपत्तियों पर दबाव बना रह सकता है। वहीं तेल की कीमतों में गिरावट से वैश्विक स्तर पर महंगाई के दबाव में कुछ नरमी आ सकती है। • मुद्रा बाजार पर प्रभाव: जापानी येन और ऑस्ट्रेलियाई डॉलर पर कमजोरी का दबाव बना रह सकता है। अंतरराष्ट्रीय व्यापार या विदेश यात्रा से जुड़े लोगों को विनिमय दरों में उतार-चढ़ाव का सामना करना पड़ सकता है। • क्रिप्टो निवेशकों के लिए: कार्डानो जैसी संपत्तियों में जारी सकारात्मक रुख से डेरिवेटिव बाजार में ट्रेडिंग वॉल्यूम बढ़ सकता है। हालांकि वृहद आर्थिक अनिश्चितता के बीच निवेशकों को जोखिम प्रबंधन पर ध्यान देना होगा। ऐसा क्यों हुआ कच्चे तेल में आई हालिया गिरावट मुख्य रूप से आपूर्ति में सुधार की संभावनाओं और प्रमुख भू-राजनीतिक तनावों में अस्थायी नरमी के संकेतों का परिणाम है। • पाइपलाइन का दोबारा शुरू होना: सऊदी अरब द्वारा अपनी रणनीतिक ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन को फिर से चालू करने की प्रक्रिया ने अंतरराष्ट्रीय आपूर्ति में बढ़ोतरी के संकेत दिए हैं। इससे ऊर्जा बाजार में आपूर्ति संबंधी तत्काल चिंताओं में कमी आई है। • अमेरिका-ईरान अप्रत्यक्ष वार्ता: जून के बाद पहली बार अमेरिकी और ईरानी अधिकारियों के बीच मध्यस्थों के जरिए हुई चर्चा से कूटनीतिक प्रगति की उम्मीद जगी है। यद्यपि कोई औपचारिक समझौता नहीं हुआ है, लेकिन दोनों पक्षों द्वारा आगे की बातचीत की उम्मीद ने तेल की कीमतों को ठंडा किया है। • होर्मुज जलडमरूमध्य की शर्त: ईरान ने बंदरगाह नाकाबंदी हटाए जाने की शर्त पर सात दिनों में जलमार्ग खोलने की बात कही है। इस भू-राजनीतिक रुख से आपूर्ति में भारी व्यवधान का तत्काल जोखिम आंशिक रूप से कम हुआ है। सवाल-जवाब 1. ब्रेंट क्रूड में गिरावट का ताजा स्तर क्या रहा? लगातार छह सत्रों की गिरावट के बाद ब्रेंट क्रूड फिसलकर करीब 98 डॉलर प्रति बैरल के आसपास आ गया। 2. कच्चे तेल में गिरावट की मुख्य वजह क्या है? सऊदी अरब द्वारा ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन को दोबारा शुरू करना और अमेरिका-ईरान के बीच अप्रत्यक्ष वार्ता होना इसकी मुख्य वजह है। 3. ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर क्या शर्त रखी है? ईरान ने कहा कि यदि अमेरिका उसके बंदरगाहों पर लगी नाकाबंदी हटाता है, तो वह सात दिनों के भीतर होर्मुज जलडमरूमध्य को खोल सकता है। 4. बैंक ऑफ जापान ने ब्याज दरों पर क्या फैसला लिया? बैंक ऑफ जापान ने 7-2 के बहुमत से अपनी अल्पकालिक ब्याज दर लक्ष्य को 1.00% से बढ़ाकर 1.25% कर दिया। 5. कार्डानो में हालिया सप्ताह के दौरान क्या रुझान दिखा? कार्डानो 14% से अधिक की तेजी दर्ज करते हुए 0.262 डॉलर के ऊपर कारोबार करता नजर आया। 6. ट्रंप और शी जिनपिंग की बैठक कहां और कब निर्धारित है? अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग गुरुवार को वाशिंगटन में एक महत्वपूर्ण शिखर सम्मेलन के लिए मिलेंगे। https://trendkia.com/market/saudi-pipeline-bahal-hone-aur-baat-cheet-se-crude-oil-mein-lagatar-girawat-98-dollar-par-pahuncha-brent-36951 TrendKia — Har trend, sabse pehle.