सऊदी सैन्य ठिकानों पर मिसाइल हमलों के बाद तेल की कीमतों में उछाल, तुर्किये और पाकिस्तान के साथ आपात बैठक यमन के हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब के जाजान, ताइफ और यानबू इलाकों को निशाना बनाकर दर्जनों मिसाइलें और ड्रोन दागे। इस सैन्य तनाव के बीच वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी दर्ज की गई है, जबकि रियाद ने सुरक्षा सहयोग के लिए सहयोगी देशों से संपर्क साधा है। मध्य पूर्व में भू-राजनीतिक तनाव एक बार फिर गहरा गया है, जिसका सीधा असर अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजारों पर देखने को मिल रहा है। यमन में सक्रिय हूती संगठन ने गुरुवार को दावा किया कि उसने सऊदी अरब के दक्षिण-पश्चिमी जाजान क्षेत्र में स्थित रणनीतिक सैन्य ठिकानों पर दर्जनों बैलिस्टिक मिसाइलें और मानवरहित ड्रोन दागे हैं। दूसरी ओर, यमन में सैन्य अभियानों का संचालन कर रहे सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन ने स्पष्ट किया कि इन हमलों की दिशा पश्चिमी सऊदी अरब के ताइफ शहर और लाल सागर तट पर स्थित यानबू औद्योगिक क्षेत्र की तरफ भी थी। इस सैन्य टकराव के सामने आते ही वैश्विक कमोडिटी बाजारों में हलचल बढ़ गई और ऊर्जा आपूर्ति बाधित होने की आशंका के बीच कच्चे तेल के दाम चढ़ गए। जाजान में कमांड सेंटर और हथियार डिपो बने निशाना हूती संगठन के सैन्य प्रवक्ता याह्या सारी ने इस बड़े सैन्य अभियान की घोषणा करते हुए कहा कि उनके हमलों का प्राथमिक लक्ष्य जाजान के अल-तुवाल इलाके में बने कमांड-एंड-कंट्रोल सेंटर, ऑपरेशन रूम और हथियारों के बड़े डिपो थे। इसके अतिरिक्त, अल-डग़रीर सैन्य शिविर में मौजूद मिसाइल प्रक्षेपण स्थलों और इस क्षेत्र के अन्य सऊदी सैन्य अड्डों को भी योजनाबद्ध तरीके से निशाना बनाया गया। सीमाई इलाकों में इतने बड़े पैमाने पर मिसाइल और ड्रोन की तैनाती ने क्षेत्रीय रक्षा तंत्र को पूरी तरह सतर्क कर दिया। नागरिक सुरक्षा विभाग ने जारी किया अलर्ट, बाद में टला खतरा हमलों की गंभीरता को देखते हुए सऊदी अरब के नागरिक सुरक्षा विभाग ने कई प्रमुख शहरी और औद्योगिक केंद्रों के लिए आपातकालीन सुरक्षा चेतावनियां जारी की थीं। शुरुआती चरण में जेद्दा, यानबू और जाजान के साथ-साथ मक्का, ताइफ और उत्तर-पश्चिमी तबुक क्षेत्र के नागरिकों को सतर्क रहने के निर्देश दिए गए थे। हालांकि, बाद में स्थिति की समीक्षा के बाद नागरिक सुरक्षा विभाग ने घोषणा की कि मक्का, ताइफ और तबुक में उत्पन्न हुआ तात्कालिक खतरा अब टल चुका है, जिससे आम नागरिकों और बुनियादी ढांचों ने राहत की सांस ली। संयुक्त रक्षा समझौते के तहत रियाद, अंकारा और इस्लामाबाद की बैठक सुरक्षा स्थिति को देखते हुए सऊदी अरब के विदेश मंत्रालय ने शुक्रवार तड़के कूटनीतिक मोर्चे पर एक बड़ा ऐलान किया। मंत्रालय के अनुसार, सऊदी अरब, तुर्किये और पाकिस्तान अपने सैन्य प्रमुखों की एक अत्यंत आपात बैठक आयोजित करने जा रहे हैं। यह उच्चस्तरीय बैठक एक संयुक्त रक्षा समझौते के तहत रियाद को सुरक्षात्मक समर्थन प्रदान करने के उद्देश्य से बुलाई गई है। सऊदी अरब के विदेश मंत्री प्रिंस फैसल बिन फरहान बिन अब्दुल्लाह ने स्पष्ट रूप से रेखांकित किया कि सऊदी अरब, तुर्किये और पाकिस्तान संयुक्त राष्ट्र चार्टर के तहत रियाद के आत्मरक्षा के स्वाभाविक अधिकार का पूरी तरह समर्थन करते हैं। कच्चे तेल में तेजी और डब्ल्यूटीआई बेंचमार्क की चाल मध्य पूर्व में सैन्य तनाव भड़कते ही कच्चे तेल की वैश्विक कीमतों में तुरंत उछाल देखने को मिला। घटनाक्रम के दौरान वेस्ट टेक्सस इंटरमीडिएट यानी डब्ल्यूटीआई कच्चा तेल दैनिक आधार पर 0.80% की तेजी के साथ 92.86 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर पहुंच गया। नवीनतम बाजार सत्र के क्लोजिंग आंकड़ों के अनुसार, यह अनुबंध 1.76% की बढ़त के साथ 93.78 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था, जबकि इसका पिछला बंद भाव 92.16 डॉलर था। बीते 52 हफ्तों के दौरान इस जिंस का दायरा 54.98 डॉलर से 119.48 डॉलर प्रति बैरल के बीच दर्ज किया गया है। तकनीकी संकेतकों पर नजर डालें तो इसका 14-दिवसीय आरएसआई 51 के स्तर पर तटस्थ स्थिति में है। वहीं एमएसीडी 2.81 पर है, जो सिग्नल लाइन 3.84 से नीचे होने के कारण हिस्टोग्राम पर -1.03 का बेयरिश रुख दर्शाता है। मूविंग एवरेज संरचना में इसका 20-दिवसीय ईएमए 94.53 डॉलर, 50-दिवसीय ईएमए 89.84 डॉलर और 200-दिवसीय ईएमए 79.97 डॉलर पर है। 50-दिवसीय और 200-दिवसीय ईएमए के बीच बना गोल्डन क्रॉस लंबी अवधि के अपट्रेंड की पुष्टि करता है। बोलिंगर बैंड्स का दायरा 82.16 डॉलर से 107.49 डॉलर के बीच है, जिसका मध्य स्तर 94.82 डॉलर पर स्थित है। 28 के एडीएक्स स्तर के साथ बाजार में मजबूत ट्रेंड देखा जा रहा है, जबकि फास्ट स्टोकेस्टिक 28 और सिग्नल लाइन 27 पर मौजूद हैं। दैनिक अस्थिरता को मापने वाला एटीआर 4.45 पर है। वर्तमान सत्र के लिए पिवट बिंदु 94.09 डॉलर पर है, जिसमें पहला रेजिस्टेंस 94.44 डॉलर और दूसरा रेजिस्टेंस 95.11 डॉलर है, जबकि पहला सपोर्ट 93.42 डॉलर और दूसरा सपोर्ट 93.07 डॉलर पर स्थित है। 20-दिवसीय आधार पर निचला सपोर्ट 80.65 डॉलर और ऊपरी रेजिस्टेंस 106.75 डॉलर पर बना हुआ है। वैश्विक तेल व्यापार में डब्ल्यूटीआई और मूल्य निर्धारण के आधार वेस्ट टेक्सस इंटरमीडिएट अंतरराष्ट्रीय व्यापार में बेचे जाने वाले कच्चे तेल की प्रमुख किस्मों में से एक है। वैश्विक बाजार में ब्रेंट और दुबई क्रूड के साथ डब्ल्यूटीआई का नाम प्रमुख बेंचमार्क के रूप में लिया जाता है। कम गुरुत्वाकर्षण और सल्फर की बेहद कम मात्रा के कारण इसे उद्योग जगत में हल्का और मीठा कच्चा तेल कहा जाता है। इस गुणवत्ता के कारण इसे रिफाइन करना बेहद आसान और किफायती माना जाता है। इसका उत्पादन मुख्य रूप से अमेरिका में होता है और इसका वितरण कुशिंग हब के जरिए किया जाता है, जिसे दुनिया का पाइपलाइन चौराहा भी कहा जाता है। किसी भी अन्य वित्तीय संपत्ति की तरह डब्ल्यूटीआई की कीमतें भी मांग और आपूर्ति के बुनियादी नियमों से तय होती हैं। वैश्विक आर्थिक विकास में तेजी आने पर ऊर्जा की खपत बढ़ती है, जिससे मांग में वृद्धि होती है, जबकि सुस्त आर्थिक वृद्धि मांग को घटा देती है। इसके अलावा युद्ध, राजनीतिक अस्थिरता और व्यापारिक प्रतिबंध आपूर्ति श्रृंखला को बाधित कर कीमतों में अचानक तेजी ला सकते हैं। चूंकि कच्चे तेल का अधिकांश लेन-देन अमेरिकी डॉलर में होता है, इसलिए डॉलर का मूल्य भी कीमतों पर असर डालता है। कमजोर डॉलर तेल को अन्य मुद्राओं के धारकों के लिए सस्ता बनाता है, जिससे मांग बढ़ती है, जबकि मजबूत डॉलर से विपरीत प्रभाव पड़ता है। इसके साथ ही पेट्रोलियम निर्यातक देशों के संगठन ओपेक के फैसले भी कीमतों की दिशा तय करने में केंद्रीय भूमिका निभाते हैं। इन्वेंट्री रिपोर्ट्स और ओपेक की भूमिका तेल बाजार के कारोबारी अमेरिकी पेट्रोलियम संस्थान यानी एपीआई और अमेरिकी ऊर्जा सूचना प्रशासन यानी ईआईए द्वारा जारी की जाने वाली साप्ताहिक इन्वेंट्री रिपोर्टों पर पैनी नजर रखते हैं। भंडारों में आने वाले बदलाव मांग और आपूर्ति के संतुलन को दर्शाते हैं। यदि रिपोर्ट में भंडार में गिरावट दर्ज की जाती है, तो यह मजबूत मांग का संकेत देती है और कीमतें ऊपर जाती हैं। इसके विपरीत भंडारों में बढ़ोतरी अतिरिक्त आपूर्ति की ओर इशारा करती है, जिससे कीमतों पर दबाव बनता है। एपीआई अपनी रिपोर्ट हर मंगलवार को जारी करता है, जबकि ईआईए का आधिकारिक डेटा अगले दिन बुधवार को आता है। लगभग 75% मामलों में इन दोनों रिपोर्टों के आंकड़े 1% के दायरे में एक समान होते हैं। चूंकि ईआईए एक सरकारी संस्था है, इसलिए इसके आंकड़ों को बाजार में अधिक विश्वसनीय माना जाता है। वहीं दूसरी तरफ 12 सदस्य देशों का संगठन ओपेक साल में दो बार होने वाली बैठकों में अपने उत्पादन कोटे का निर्धारण करता है। जब ओपेक उत्पादन में कटौती का फैसला करता है, तो बाजार में आपूर्ति तंग हो जाती है और कीमतें बढ़ जाती हैं। उत्पादन बढ़ाने पर कीमतों में नरमी आती है। जब ओपेक में रूस जैसे 10 गैर-ओपेक उत्पादक देश शामिल होते हैं, तो इस विस्तारित समूह को ओपेक प्लस के नाम से जाना जाता है। मुद्रा बाजारों और बॉन्ड यील्ड में उथल-पुथल ऊर्जा संकट और मुद्रास्फीति के बढ़ते दबाव के कारण वैश्विक मुद्रा और बॉन्ड बाजारों में भी भारी उतार-चढ़ाव देखा गया। अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में आई तेजी के कारण ऑस्ट्रेलियाई डॉलर लगातार तीसरे कारोबारी दिन गिरावट में रहा। अमेरिकी डॉलर के मुकाबले यह 0.37% फिसलकर 0.7012 पर आ गया, जो इसके 200-दिवसीय सिंपल मूविंग एवरेज 0.7021 के बेहद करीब है। बढ़ती महंगाई और ब्याज दरों के ऊंचे बने रहने की संभावनाओं ने डॉलर को व्यापक मजबूती प्रदान की है। जापान के मुद्रा बाजार में भी असाधारण हलचल दर्ज की गई। जापानी वित्त मंत्री कातायामा ने गुरुवार को दोहराया कि 31 जुलाई को किए गए अमेरिका-जापान संयुक्त हस्तक्षेप के पीछे के सिद्धांत आज भी प्रासंगिक हैं। इस चेतावनी के बावजूद डॉलर के मुकाबले येन कमजोर होकर 159.00 के स्तर को छू गया, जो सितंबर की शुरुआत के बाद का सबसे ऊंचा स्तर है। अमेरिकी डॉलर और जापानी येन की यह जोड़ी 159.00 के ठीक नीचे कारोबार करते हुए लगातार पांचवें दिन बढ़त की राह पर थी। बैंक ऑफ जापान द्वारा अपनी नीतिगत ब्याज दर बढ़ाने, अधिकारियों द्वारा डीलरों के साथ दरों की जांच करने और वित्त मंत्री द्वारा बार-बार मौखिक चेतावनी देने के बावजूद येन में कमजोरी जारी रही। बैंक ऑफ जापान ने 7-2 के बहुमत से अपनी अल्पकालिक ब्याज दर के लक्ष्य को 1.00% से बढ़ाकर 1.25% कर दिया, जिसे मौद्रिक नीति को सामान्य बनाने की दिशा में एक अपेक्षित कदम माना जा रहा है। सोने में नरमी और फेडरल रिजर्व के आगामी रुख पर नजर मुद्रा बाजार के साथ-साथ कीमती धातुओं में भी दबाव देखा गया। शुक्रवार को एशियाई कारोबारी सत्र के दौरान सोने की कीमत गिरकर लगभग 4,275 डॉलर प्रति औंस के करीब पहुंच गई। अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा इस वर्ष ब्याज दरों में और बढ़ोतरी किए जाने के बढ़ते दांव के कारण पीली धातु में यह गिरावट दर्ज की गई। निवेशक अब अमेरिकी केंद्रीय बैंक के अधिकारियों के वक्तव्यों की प्रतीक्षा कर रहे हैं, जहां न्यूयॉर्क फेड के अध्यक्ष जॉन विलियम्स और क्लीवलैंड फेड की अध्यक्ष बेथ हैमैक दिन में बाद में आर्थिक स्थिति पर अपने विचार रखने वाले हैं। इसका आप पर असर मध्य पूर्व में बढ़े सैन्य तनाव और तेल की कीमतों में आई तेजी से भारतीय उपभोक्ताओं और वैश्विक निवेशकों पर सीधा वित्तीय प्रभाव पड़ सकता है। • भारत में: अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उछाल से भारत के आयात बिल पर दबाव बढ़ेगा। यदि कीमतें लंबे समय तक ऊंची बनी रहती हैं तो घरेलू स्तर पर पेट्रोल, डीजल और माल ढुलाई की लागत बढ़ सकती है। • वैश्विक निवेशकों के लिए: जिंस और ऊर्जा बाजारों में बढ़ती अनिश्चितता के कारण तेल और सुरक्षित संपत्तियों में उतार-चढ़ाव बढ़ सकता है। निवेशकों को भू-राजनीतिक जोखिमों को ध्यान में रखते हुए अपनी पोर्टफोलियो रणनीतियों की समीक्षा करनी चाहिए। • मुद्रा और विनिमय दर: अमेरिकी डॉलर के मजबूत होने और बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी से एशियाई मुद्राओं पर दबाव बढ़ सकता है। विदेशी मुद्रा बाजार में कारोबार करने वालों को आगामी केंद्रीय बैंक नीतियों और ब्याज दरों पर नजर रखनी चाहिए। • हवाई और परिवहन क्षेत्र: जेट ईंधन की कीमतें कच्चे तेल के साथ सीधे जुड़ी होने के कारण विमानन कंपनियों के संचालन खर्च में बढ़ोतरी हो सकती है। इसके परिणामस्वरूप आगामी यात्रा सीजन में हवाई किरायों में संशोधन देखने को मिल सकता है। ऐसा क्यों हुआ यमन में चल रहे लंबे संघर्ष और रणनीतिक सीमावर्ती क्षेत्रों में सैन्य गतिरोध के कारण सऊदी अरब के प्रमुख प्रतिष्ठानों पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए गए। • सीधी वजह: यमन के हूती गुट ने सऊदी अरब के सीमावर्ती सैन्य शिविरों, हथियारों के गोदामों और नियंत्रण कक्षों को सीधे तौर पर निशाना बनाया। इस अभियान का उद्देश्य जाजान और अन्य रणनीतिक केंद्रों में सऊदी रक्षा क्षमताओं को चुनौती देना था। • रणनीतिक पृष्ठभूमि: लाल सागर और सीमावर्ती इलाकों में लंबे समय से जारी सैन्य अभियानों के जवाब में यह कार्रवाई की गई। सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन और हूती बलों के बीच जारी टकराव के कारण क्षेत्रीय बुनियादी ढांचे लगातार जोखिम में रहे हैं। • संयुक्त रक्षा पहल: सुरक्षा खतरों के बढ़ने के बाद सऊदी अरब ने तुर्किये और पाकिस्तान के साथ मिलकर रक्षात्मक सहयोग को सक्रिय किया। संयुक्त राष्ट्र चार्टर के तहत रियाद ने अपने क्षेत्र और नागरिकों की सुरक्षा के लिए इस त्रिपक्षीय बैठक का आह्वान किया। सवाल-जवाब 1. सऊदी अरब के किन क्षेत्रों को निशाना बनाकर हमले किए गए? हूती संगठन के अनुसार हमलों में जाजान के अल-तुवाल और अल-डग़रीर क्षेत्रों को निशाना बनाया गया, जबकि सऊदी गठबंधन ने ताइफ और यानबू की ओर हमलों की पुष्टि की। 2. नागरिक सुरक्षा विभाग ने किन क्षेत्रों के लिए अलर्ट जारी किया था? शुरुआत में जेद्दा, यानबू, जाजान, मक्का, ताइफ और तबुक के लिए आपातकालीन चेतावनियां जारी की गई थीं, जिन्हें बाद में मक्का, ताइफ और तबुक में हटा लिया गया। 3. तुर्किये और पाकिस्तान के साथ सऊदी अरब की बैठक का क्या उद्देश्य है? यह आपातकालीन बैठक एक संयुक्त रक्षा समझौते के तहत बुलाई गई है, जिसका उद्देश्य सऊदी अरब को आत्मरक्षा के अधिकार के तहत सुरक्षात्मक समर्थन प्रदान करना है। 4. हमलों की खबर के बाद कच्चे तेल की कीमतों पर क्या असर पड़ा? वेस्ट टेक्सस इंटरमीडिएट (डब्ल्यूटीआई) कच्चा तेल 0.80% की तेजी के साथ 92.86 डॉलर पर पहुंच गया और बाद में 93.78 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार करता दिखा। 5. बैंक ऑफ जापान ने हाल ही में ब्याज दरों पर क्या निर्णय लिया है? बैंक ऑफ जापान ने 7-2 के बहुमत से अपनी अल्पकालिक ब्याज दर के लक्ष्य को 1.00% से बढ़ाकर 1.25% कर दिया है। 6. अमेरिकी डॉलर के मुकाबले जापानी येन किस स्तर पर पहुंचा? वित्त मंत्री की चेतावनी और ब्याज दरों में बढ़ोतरी के बावजूद यूएसडी/जेपीवाई बढ़कर 159.00 के स्तर पर पहुंच गया। https://trendkia.com/market/saudi-sainya-thikanon-para-misaila-hamalon-ke-bada-tela-ki-kimaton-men-uchhala-turkey-aura-pakistan-ke-satha-apata-baithaka-38162 TrendKia — Har trend, sabse pehle.