# स्कॉट बेसेंट के बॉन्ड बायबैक फैसले से चांदी $69 पर स्थिर, ईरान तनाव ने बढ़ाई अनिश्चितता

> अमेरिकी खजाना विभाग द्वारा बॉन्ड बायबैक की सीमा को 4 अरब डॉलर से अधिक करने के फैसले के बाद चांदी की कीमतें $69 के पास बनी हुई हैं, हालांकि मध्य पूर्व में ऊर्जा संकट और सख्त पाबंदियों से ब्याज दरों में कटौती पर खतरा मंडरा रहा है।

**Type:** article · **Category:** बाज़ार · **Published:** 2026-08-24 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/market/scott-bessent-ke-bonda-bayabaika-phaisale-se-chandi-69-para-sthira-iran-tanava-ne-barhai-anishchitata-21121 · **Language:** Hindi
**Tags:** चांदी कीमत, बॉन्ड बायबैक, यूएस ट्रेजरी, स्कॉट बेसेंट, ईरान पाबंदियां, कच्चा तेल, फेड चेयरमैन वॉर्श, जैक्सन होल

अंतरराष्ट्रीय बाजार में चांदी की कीमतें 69.00 डॉलर प्रति औंस के आसपास स्थिर बनी हुई हैं। अमेरिकी खजाना विभाग (यूएस ट्रेजरी) द्वारा लंबे समय की सरकारी देनदारियों को वापस खरीदने यानी बॉन्ड बायबैक की प्रक्रिया को दोगुना करने के फैसले ने बाजार को सहारा दिया है। हालांकि, ईरान पर अमेरिका की ओर से लागू की जा रही सख्त आर्थिक पाबंदियों और तेल नाकाबंदी के चलते ऊर्जा की कीमतों में उछाल आने का खतरा पैदा हो गया है। अगर ऊर्जा की कीमतें तेजी से बढ़ती हैं, तो इससे आने वाले समय में केंद्रीय बैंकों द्वारा ब्याज दरों में की जाने वाली कटौती सीमित हो सकती है। ब्याज न देने वाली चांदी जैसी धातु के लिए ऊंची ब्याज दरें हमेशा एक चुनौती बनकर उभरती हैं।

## अमेरिकी बॉन्ड बायबैक का दायरा दोगुना और यील्ड पर नियंत्रण
अमेरिकी खजाना विभाग ने बॉन्ड बाजार में बढ़ती यील्ड यानी प्रतिफल दरों पर लगाम लगाने के उद्देश्य से एक बड़ा नीतिगत कदम उठाया है। विभाग ने अपनी नियमित तय समय-सारणी से अलग हटकर एक घोषणा जारी की। इस घोषणा के अनुसार, 10 साल से 20 साल और 20 साल से 30 साल की अवधि वाले सरकारी बॉन्ड क्षेत्रों में नकदी सहायता देने के लिए बायबैक परिचालन के आकार को दोगुना करने का निर्णय लिया गया है। पहले प्रति परिचालन अधिकतम सीमा 2 अरब डॉलर रखी गई थी, जिसे अब बढ़ाकर कम से कम 4 अरब डॉलर कर दिया गया है।

यह नया नियम 9 सितंबर से लागू होकर 4 नवंबर तक प्रभावी रहेगा। अमेरिकी खजाना सचिव स्कॉट बेसेंट ने स्पष्ट किया है कि ये बायबैक परिचालन 4 अरब डॉलर के आंकड़े को भी पार कर सकते हैं। स्कॉट बेसेंट के मुताबिक, इस आक्रामक रणनीति का मुख्य उद्देश्य वित्तीय बाजारों को यह संकेत देना है कि मौजूदा समय में बॉन्ड पर मिल रही ऊंची यील्ड देश की वास्तविक आर्थिक स्थिति और मजबूत बुनियाद को सही ढंग से नहीं दर्शाती है। सरकार का यह हस्तक्षेप सरकारी कर्ज बाजार में स्थिरता लाने और दीर्घकालिक उधारी लागत को अनियंत्रित होने से रोकने की दिशा में एक सोची-समझी कोशिश है।

## ऊर्जा संकट, ईरान नाकाबंदी और ब्याज दरों पर असर
बायबैक योजना से मिले आर्थिक सहारे के बावजूद चांदी के सामने आने वाले दिनों में बड़ी चुनौतियां खड़ी हो सकती हैं। इसका सबसे बड़ा कारण वैश्विक ऊर्जा बाजार में संभावित तेजी है। अमेरिकी खजाना सचिव स्कॉट बेसेंट ने ईरान को आर्थिक रूप से अलग-थलग करने के लिए अब तक की सबसे सख्त पाबंदियां लगाने की योजना का ऐलान किया है। इस नीतिगत बदलाव का मकसद ईरान और उसके व्यापारिक साझेदारों पर दबाव बनाना है ताकि वे अंतरराष्ट्रीय नियमों का पालन करें।

इस कदम के कारण वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला में भारी व्यवधान आने की आशंका गहरा गई है। अमेरिकी नौसेना द्वारा की जा रही घेराबंदी के बीच ईरानी कच्चे तेल के जहाजों की आवाजाही बुरी तरह प्रभावित हुई है, जबकि चीनी खरीदारों की ओर से मिलने वाले सौदों में भी भारी गिरावट दर्ज की गई है। दूसरी ओर, तेहरान ने अमेरिका के इन दबावकारी कदमों को पूरी तरह से खारिज कर दिया है। तेहरान का कहना है कि उनके पास दशकों से ऐसे आर्थिक प्रतिबंधों और नाकेबंदी का सामना करने का अनुभव है और उन्होंने अपनी अर्थव्यवस्था में पर्याप्त मजबूती विकसित कर ली है।

इसके अलावा, दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल परिवहन मार्ग, हॉरमुज़ जलडमरूमध्य में भू-राजनीतिक तनाव चरम पर है। इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग से जहाजों की आवाजाही ऐतिहासिक औसत से काफी नीचे बनी हुई है। यदि इन तनावों के कारण कच्चे तेल और ऊर्जा के दामों में बड़ा उछाल आता है, तो इससे मुद्रास्फीति दोबारा बढ़ सकती है। मुद्रास्फीति बढ़ने की स्थिति में केंद्रीय बैंक ब्याज दरों में कटौती का सिलसिला रोक सकते हैं या उसमें देरी कर सकते हैं। चूंकि चांदी पर कोई ब्याज या यील्ड नहीं मिलती, इसलिए लंबे समय तक ऊंची ब्याज दरें रहने से निवेशकों का रुझान अन्य यील्ड देने वाले परिसंपत्तियों की तरफ स्थानांतरित हो सकता है।

## जैक्सन होल सम्मेलन और फेड चेयरमैन वॉर्श का रुख
वित्तीय बाजार के विश्लेषक और निवेशक केंद्रीय बैंक के आगामी कदमों पर भी बारीक नजर बनाए हुए हैं। डॉयचे बैंक के अमेरिकी अर्थशास्त्रियों ने फेड चेयरमैन वॉर्श के आगामी जैक्सन होल भाषण को लेकर एक विस्तृत समीक्षा पेश की है। अर्थशास्त्रियों का मानना है कि यदि वॉर्श अपने संबोधन में किसी व्यापक या व्यापक नीतिगत विषय को चुनते हैं, तो उनके पास कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर चर्चा करने का विकल्प होगा।

इन विकल्पों में उनके द्वारा गठित फेड टास्क फोर्स के कामकाज की समीक्षा शामिल हो सकती है, या फिर अर्थव्यवस्था पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के प्रभावों और उस पर उनकी सोच संबंधी विषय हो सकते हैं। जैक्सन होल में होने वाला यह वार्षिक सम्मेलन बाजार के लिए फेड की दीर्घकालिक आर्थिक सोच और मौद्रिक नीति के भविष्य की दिशा को समझने का एक अत्यंत महत्वपूर्ण अवसर माना जा रहा है।

## निवेश साधन के रूप में चांदी की दोहरी प्रकृति
चांदी वैश्विक वित्तीय बाजारों में व्यापक रूप से कारोबार की जाने वाली एक बहुमूल्य धातु है। ऐतिहासिक रूप से चांदी का उपयोग धन को सुरक्षित रखने के साधन (स्टोर ऑफ वैल्यू) और विनिमय के माध्यम के रूप में किया जाता रहा है। यद्यपि यह सोने की तुलना में कम लोकप्रिय मानी जाती है, फिर भी निवेशक अपने पोर्टफोलियो में विविधता लाने, इसके अंतर्निहित मूल्य का लाभ उठाने और उच्च मुद्रास्फीति के दौर में मुद्रास्फीति से बचाव के लिए चांदी में निवेश करते हैं।

निवेशक भौतिक रूप से चांदी के सिक्के या छड़ें (बार) खरीद सकते हैं। इसके अलावा एक्सचेंज ट्रैडेड फंड (ETF) जैसे आधुनिक वित्तीय साधनों के माध्यम से भी व्यापार किया जा सकता है, जो अंतरराष्ट्रीय बाजारों में चांदी की कीमतों पर नज़र रखते हैं। चांदी की कीमतों में उतार-चढ़ाव कई कारकों पर निर्भर करता है। भू-राजनीतिक अस्थिरता या गहरी आर्थिक मंदी की आशंका के समय चांदी को सुरक्षित निवेश माना जाता है, जिससे इसकी मांग और कीमतों में बढ़ोतरी होती है, भले ही यह तेजी सोने जितनी तीव्र न हो।

अमेरिकी डॉलर (USD) के मूल्य में होने वाले बदलाव भी चांदी की कीमत को सीधे प्रभावित करते हैं, क्योंकि अंतरराष्ट्रीय बाजारों में इसका व्यापार डॉलर (XAG/USD) में होता है। जब अमेरिकी डॉलर मजबूत होता है, तो चांदी की कीमतों पर दबाव बनता है। इसके विपरीत, डॉलर के कमजोर होने पर चांदी के दाम ऊपर चढ़ते हैं। इसके अतिरिक्त, खनन आपूर्ति, पुनर्चक्रण (रीसाइक्लिंग) दरें और निवेश मांग भी इसकी वैश्विक दरों को तय करने में बड़ी भूमिका निभाते हैं। सोना प्राकृतिक रूप से बेहद दुर्लभ है, जबकि उसकी तुलना में चांदी की उपलब्धता अधिक है।

## औद्योगिक मांग और वैश्विक अर्थव्यवस्थाओं की भूमिका
सुरक्षित निवेश के अलावा, चांदी की सबसे बड़ी ताकत इसकी व्यापक औद्योगिक मांग है। इलेक्ट्रॉनिक्स और सौर ऊर्जा (सोलर एनर्जी) जैसे आधुनिक क्षेत्रों में चांदी का अत्यधिक उपयोग होता है। सभी धातुओं में चांदी की विद्युत चालकता (इलेक्ट्रिकल कंडक्टिविटी) सबसे अधिक होती है, जो तांबे और सोने से भी ज्यादा है। इस वजह से हरित ऊर्जा प्रौद्योगिकियों और हाई-टेक विनिर्माण में इसकी भारी खपत होती है। जब औद्योगिक उत्पादन बढ़ता है, तो चांदी की मांग और कीमतें दोनों तेज हो जाती हैं, जबकि औद्योगिक सुस्ती इसके दामों को नीचे ले आती है।

वैश्विक स्तर पर अमेरिका, चीन और भारत की अर्थव्यवस्थाएं चांदी की कुल मांग को सबसे अधिक प्रभावित करती हैं। अमेरिका और चीन के विशाल औद्योगिक क्षेत्र विभिन्न विनिर्माण प्रक्रियाओं में चांदी का भारी उपयोग करते हैं। दूसरी ओर, भारत में आभूषणों के लिए उपभोक्ताओं की मांग बहुत मजबूत रहती है, जो अंतरराष्ट्रीय बाजार में चांदी की मूल्य निर्धारण प्रक्रिया का एक अनिवार्य हिस्सा है।

## सोने-चांदी का अनुपात और विदेशी मुद्रा बाजार का हाल
सामान्य तौर पर चांदी की कीमतें सोने के रुख का ही अनुसरण करती हैं। जब सोने में तेजी आती है, तो चांदी भी उसी दिशा में आगे बढ़ती है। दोनों धातुओं के सापेक्ष मूल्यांकन को मापने के लिए बाजार विश्लेषक 'गोल्ड/सिल्वर रेशियो' यानी सोना-चांदी अनुपात का इस्तेमाल करते हैं। यह अनुपात बताता है कि एक औंस सोने के बराबर मूल्य पाने के लिए कितने औंस चांदी की आवश्यकता होगी।

जब यह अनुपात ऐतिहासिक रूप से ऊंचे स्तर पर होता है, तो विश्लेषक मानते हैं कि चांदी का मूल्य वास्तविक स्तर से कम (अंडरवैल्यूड) है या सोना अति-मूल्यांकित (ओवरवैल्यूड) हो गया है। इसके उलट, एक निचला अनुपात यह संकेत देता है कि सोने की कीमत चांदी की तुलना में कम है। फिलहाल, अंतरराष्ट्रीय यूरोपीय सत्र के दौरान सोना अपने तीन महीने के उच्चतम स्तर 4,650 डॉलर के करीब कारोबार कर रहा है। सोने को कमजोर डॉलर और अमेरिका-कनाडा के बीच उभरे नए व्यापारिक तनावों से समर्थन मिल रहा है।

विदेशी मुद्रा बाजार की बात करें तो सप्ताह की शुरुआत में ब्रिटिश पाउंड (GBP/USD) अमेरिकी डॉलर की रिकवरी के चलते 1.3600 के मध्य स्तर पर नकारात्मक दबाव के साथ कारोबार कर रहा है। वहीं, यूरो (EUR/USD) 1.1700 के स्तर से नीचे रक्षात्मक स्थिति में बना हुआ है। ईरान पर संभावित अमेरिकी प्रतिबंधों और उसके वैश्विक आर्थिक नतीजों को लेकर बाजार में बनी अनिश्चितता के कारण डॉलर को समर्थन मिल रहा है, जिसका असर अन्य प्रमुख वैश्विक मुद्राओं पर देखने को मिल रहा है।

## इसका आप पर असर
**भारत में:** अंतरराष्ट्रीय बाजार में चांदी के $69 पर बने रहने से घरेलू बाजारों में चांदी के आभूषण और सिक्कों के दाम स्थिर रहेंगे, जिससे त्योहारी या शादी की खरीदारी करने वालों को अचानक आई तेजी से राहत मिलेगी।

**निवेशकों के लिए:** अमेरिकी बॉन्ड बायबैक और ऊर्जा संकट के चलते शेयर बाजार में अनिश्चितता रह सकती है, इसलिए पोर्टफोलियो में विविधता लाने के लिए चांदी और एसआईपी जैसे साधनों पर नजर रखी जा सकती है।

## सवाल-जवाब

### 1. अमेरिकी खजाना विभाग ने बायबैक योजना में क्या बदलाव किया है?
अमेरिकी खजाना विभाग ने 10 से 30 साल की अवधि वाले बॉन्ड बायबैक के अधिकतम आकार को 2 अरब डॉलर से बढ़ाकर कम से कम 4 अरब डॉलर प्रति परिचालन कर दिया है।

### 2. चांदी की कीमतें किस स्तर पर बनी हुई हैं?
अंतरराष्ट्रीय बाजार में चांदी की कीमतें लगभग 69.00 डॉलर प्रति औंस के आसपास स्थिर बनी हुई हैं।

### 3. ईरान पर अमेरिकी पाबंदियों का चांदी पर क्या असर पड़ सकता है?
ईरान पर सख्त पाबंदियों और तेल नाकेबंदी से ऊर्जा की कीमतें बढ़ सकती हैं, जिससे महंगाई बढ़ने पर केंद्रीय बैंक ब्याज दरों में कटौती रोक सकते हैं और चांदी की तेजी पर लगाम लग सकती है।

### 4. सोना इस समय किस स्तर पर कारोबार कर रहा है?
सोना अपने तीन महीने के उच्चतम स्तर के करीब लगभग 4,650 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार कर रहा है।

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