चांदी में तेज उछाल के बाद 52 डॉलर का स्तर पार, क्या 55 डॉलर की रुकावट को तोड़ पाएंगे खरीदार कमजोर डॉलर और सुधरते मोमेंटम के बीच चांदी की कीमतों ने 52 डॉलर प्रति औंस के पार वापसी की है। हालांकि व्यापक गिरावट के बीच 55 डॉलर और प्रमुख मूविंग एवरेज पर मजबूत तकनीकी प्रतिरोध बना हुआ है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में चांदी की कीमतों में जोरदार तेजी देखने को मिली है, जहां XAG/USD ने निचले स्तरों से जबरदस्त उछाल दर्ज करते हुए 52.00 डॉलर प्रति औंस के महत्वपूर्ण आंकड़े को पार कर लिया है। ताजा कारोबारी सत्र में चांदी 52.47 डॉलर के आसपास कारोबार कर रही है, जो पिछले 49.59 डॉलर के बंद स्तर के मुकाबले 5.80 प्रतिशत की दैनिक बढ़त को दर्शाती है। इस दौरान ट्रेडिंग वॉल्यूम अपने 20-दिवसीय औसत से 19.40 गुना अधिक दर्ज किया गया, जिससे यह संकेत मिलता है कि निचले भावों पर बाजार में खरीदारों की सक्रिय भागीदारी लौट रही है। तकनीकी संकेतकों में भी सुधार के स्पष्ट संकेत दिखाई दे रहे हैं। रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स यानी RSI जो हाल ही में अत्यधिक बिकवाली वाले क्षेत्र के करीब पहुंच गया था, अब तेजी से 40 के स्तर को पार करते हुए अपने 50 के न्यूट्रल जोन की ओर बढ़ रहा है। मौजूदा समय में 14-दिवसीय RSI 39 के स्तर पर है। हालांकि लंबी अवधि के चार्ट पर यह धातु अब भी व्यापक डाउनट्रेंड में फंसी हुई है, लेकिन मोमेंटम संकेतक में यह तेज रिकवरी इस बात का सबूत है कि गिरावट के बावजूद खरीदारी का दबाव धीरे-धीरे मजबूत हो रहा है। तकनीकी स्तर और आगे की प्रमुख बाधाएं बाजार का तकनीकी ढांचा यह स्पष्ट करता है कि हालिया उछाल के बावजूद चांदी की स्थिति पूरी तरह से मंदी के चंगुल से बाहर नहीं निकली है। स्पॉट कीमतें अभी भी 50-दिवसीय और 100-दिवसीय सिंपल मूविंग एवरेज यानी SMA के संगम से काफी नीचे चल रही हैं। ये दोनों अहम मूविंग एवरेज क्रमशः 60.65 डॉलर और 60.99 डॉलर पर स्थित हैं। सितंबर के आखिर से ही बिकवाली करने वाले ट्रेडर्स इस क्षेत्र का आक्रामक रूप से बचाव कर रहे हैं, जिससे इस सीमा के ऊपर निकलना खरीदारों के लिए एक कठिन चुनौती बना हुआ है। इसके अलावा, लंबी अवधि के अन्य तकनीकी संकेतक भी दबाव की पुष्टि करते हैं। वर्तमान में 20-दिवसीय EMA 54.80 डॉलर, 50-दिवसीय EMA 58.68 डॉलर और 200-दिवसीय EMA 66.64 डॉलर पर मौजूद है, जबकि 200-दिवसीय SMA 70.27 डॉलर पर स्थित है। 50-दिवसीय EMA का 200-दिवसीय EMA से नीचे होना एक डेथ क्रॉस को दर्शाता है, जो चार्ट पर दीर्घकालिक कमजोरी का स्पष्ट प्रमाण है। एमएसीडी इंडिकेटर भी -2.82 पर है जो -2.56 की सिग्नल लाइन से नीचे बना हुआ है और इसका हिस्टोग्राम -0.26 पर नकारात्मक स्थिति दिखा रहा है। साथ ही 44 के स्तर पर मौजूद एडीएक्स इंडिकेटर यह जाहिर करता है कि बाजार में मौजूदा ट्रेंड काफी मजबूत है। रिवर्सल के लिए जरूरी पड़ाव और संभावित गिरावट कीमतों में किसी भी टिकाऊ तेजी या बुलिश रिवर्सल को जमीन पर उतारने के लिए खरीदारों को सबसे पहले 55.00 डॉलर के मनोवैज्ञानिक बैरियर को पार करना होगा। यदि बाजार इस बाधा को निर्णायक रूप से पार करने में सफल रहता है, तो अगला संभावित लक्ष्य 21 अक्टूबर का दैनिक उच्च स्तर 58.18 डॉलर होगा। इसके बाद ही कीमतें 60.65 डॉलर और 60.99 डॉलर के उस संगम की ओर बढ़ सकती हैं, जहां 50-दिवसीय और 100-दिवसीय SMA एक साथ मौजूद हैं, तथा लगभग 61.00 डॉलर के पास का क्षेत्र परीक्षण के दायरे में आएगा। दैनिक पिवट स्तरों के अनुसार पहला प्रमुख रेजिस्टेंस 53.65 डॉलर और दूसरा रेजिस्टेंस 54.83 डॉलर पर आंका गया है। दूसरी ओर, मंदी की प्रवृत्ति को बनाए रखने के लिए बिकवाली करने वाले ट्रेडर्स को कीमतों को 50.00 डॉलर के आंकड़े से नीचे धकेलना होगा। यदि यह स्तर टूटता है, तो बाजार 3 नवंबर के स्विंग लो 48.65 डॉलर की ओर फिसल सकता है, जिसके बाद बिकवाल 45.00 डॉलर के मनोवैज्ञानिक सपोर्ट को निशाना बना सकते हैं। वर्तमान में 20-दिवसीय बोलिंगर बैंड 48.64 डॉलर से 61.85 डॉलर के दायरे में फैले हुए हैं जिनका मध्य स्तर 55.25 डॉलर है। इसके अलावा 14-दिवसीय एवरेज ट्रू रेंज यानी ATR 1.61 डॉलर पर है, जो दैनिक उतार-चढ़ाव को ध्यान में रखते हुए स्टॉप-लॉस निर्धारित करने के लिए एक व्यावहारिक बफर प्रदान करता है। एक मूल्यवान धातु और औद्योगिक संपत्ति के रूप में भूमिका चांदी वैश्विक वित्तीय बाजारों में अत्यधिक सक्रियता से ट्रेड की जाने वाली एक कीमती धातु है। ऐतिहासिक रूप से इसे मूल्य के संचय और विनिमय के माध्यम के रूप में इस्तेमाल किया जाता रहा है। यद्यपि यह सोने जितनी लोकप्रिय नहीं मानी जाती, फिर भी निवेशक अपने निवेश पोर्टफोलियो में विविधता लाने, इसके अंतर्निहित मूल्य का लाभ उठाने या उच्च मुद्रास्फीति के दौर में संभावित बचाव के लिए चांदी का रुख करते हैं। बाजार सहभागियों के पास भौतिक रूप में सिक्के या बार खरीदने का विकल्प होता है, अथवा वे अंतरराष्ट्रीय एक्सचेंजों पर इसकी कीमतों को ट्रैक करने वाले एक्सचेंज ट्रेडेड फंड यानी ETF जैसे वित्तीय माध्यमों के जरिए व्यापार कर सकते हैं। पिछले 52 हफ्तों के दौरान चांदी ने 46.81 डॉलर के निचले स्तर से लेकर 121.30 डॉलर के उच्चतम स्तर तक का व्यापक दायरा तय किया है। कीमतों में उतार-चढ़ाव कई बहुआयामी कारकों पर निर्भर करता है। भू-राजनीतिक अस्थिरता या गंभीर आर्थिक मंदी की आशंकाएं चांदी की कीमतों को ऊपर की ओर धकेल सकती हैं क्योंकि इसे भी सुरक्षित निवेश माना जाता है, भले ही सोने की तुलना में इसका सुरक्षित आश्रय प्रभाव कुछ कम रहता है। इसके साथ ही बिना किसी ब्याज या यील्ड वाली संपत्ति होने के कारण ब्याज दरों में कटौती होने पर चांदी के दाम अक्सर बढ़ते हैं। चूंकि यह कमोडिटी अमेरिकी डॉलर में आंकी जाती है, इसलिए डॉलर इंडेक्स की चाल का इस पर सीधा असर पड़ता है। मजबूत डॉलर आमतौर पर कीमतों को दबाकर रखता है, जबकि कमजोर डॉलर तेजी को हवा देता है। इसके अलावा माइनिंग सप्लाई, जहां चांदी सोने की तुलना में प्रकृति में काफी अधिक मात्रा में उपलब्ध है, रीसाइक्लिंग दरें और निवेशकों की मांग भी इसकी दिशा तय करती हैं। औद्योगिक मांग, विनिर्माण क्षेत्र और वैश्विक अर्थव्यवस्था का प्रभाव पारंपरिक कीमती धातुओं से इतर चांदी का एक बड़ा हिस्सा उद्योगों में खपत होता है। इलेक्ट्रॉनिक्स और सौर ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में इसका बड़े पैमाने पर उपयोग किया जाता है, क्योंकि इसमें तांबे और सोने से भी अधिक सभी धातुओं में सबसे अधिक विद्युत चालकता पाई जाती है। विनिर्माण गतिविधियों में तेजी आने से औद्योगिक मांग बढ़ती है जो कीमतों को सहारा देती है, जबकि औद्योगिक मंदी दरों को नीचे लाती है। संयुक्त राज्य अमेरिका, चीन और भारत की अर्थव्यवस्थाओं की गतिशीलता इस संदर्भ में बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। अमेरिका और विशेष रूप से चीन के विशाल औद्योगिक विनिर्माण क्षेत्र विभिन्न तकनीकी प्रक्रियाओं में चांदी का व्यापक उपभोग करते हैं। वहीं दूसरी तरफ, भारत में आभूषणों, बर्तनों और पारंपरिक निवेश के लिए उपभोक्ताओं की मांग वैश्विक स्तर पर बाजार संतुलन को प्रभावित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। सोने के साथ संबंध और गोल्ड-सिल्वर रेश्यो का विश्लेषण चांदी की चाल आमतौर पर सोने के रुख का अनुसरण करती है। जब सोने के भाव में तेजी आती है, तो चांदी भी उसी दिशा में आगे बढ़ती है क्योंकि दोनों ही संपत्तियों का सुरक्षित निवेश स्वरूप काफी हद तक समान है। इस परस्पर संबंध को मापने के लिए गोल्ड-सिल्वर रेश्यो का उपयोग किया जाता है, जो यह दर्शाता है कि सोने के एक औंस के बराबर मूल्य प्राप्त करने के लिए चांदी के कितने औंस की आवश्यकता होगी। वित्तीय विश्लेषक दोनों धातुओं के सापेक्ष मूल्यांकन का आकलन करने के लिए इस अनुपात की बारीकी से निगरानी करते हैं। एक उच्च अनुपात यह संकेत दे सकता है कि सोने की तुलना में चांदी का अवमूल्यन हुआ है, अथवा सोना अधिक मूल्यांकित हो गया है। इसके विपरीत, जब यह अनुपात निचले स्तर पर पहुंचता है, तो यह माना जाता है कि चांदी की तुलना में सोना सस्ता हो सकता है। मुद्रा बाजारों, बॉन्ड यील्ड और अन्य संपत्तियों का रुख चांदी में यह ताजा उछाल व्यापक वित्तीय बाजारों में हुए बड़े बदलावों के बीच देखने को मिला है। बुधवार को एशियाई कारोबारी सत्र के दौरान शुरुआती मध्यावधि चुनाव नतीजों ने राजनीतिक अनिश्चितता को बढ़ा दिया, जिससे अमेरिकी डॉलर पर भारी दबाव पड़ा। यूएस बॉन्ड यील्ड में आई नई गिरावट ने फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में बढ़ोतरी के दावों को कमजोर किया। इस माहौल में AUD/USD दो सप्ताह के निचले स्तर के ऊपर स्थिर रहते हुए 0.6965 के आसपास कारोबार करता दिखा, हालांकि रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया के कम आक्रामक रुख ने इसकी बढ़त को सीमित रखा। इसी तरह राजनीतिक गतिरोध की संभावनाओं और अमेरिकी डॉलर के एक महीने के निचले स्तर तक लुढ़कने से USD/JPY में जोरदार बिकवाली आई और यह 158.00 के नीचे फिसल गया। सोने ने भी अपने लगातार दो दिनों के पुलबैक को पीछे छोड़ते हुए प्रति ट्रॉय औंस 4,000 डॉलर के अहम स्तर को पुनः हासिल कर लिया। डॉलर की कमजोरी, ट्रेजरी यील्ड में गिरावट और कच्चे तेल के नरम दामों ने सोने की इस बहाली को गति दी। डिजिटल एसेट मार्केट में भी धारणा में सुधार हुआ, जहां बिटकॉइन 78,000 डॉलर के ऊपर निकल गया, एथेरियम 2,300 डॉलर के पार रहा और रिपल 1.28 डॉलर के स्तर से ऊपर कारोबार करता नजर आया। इसका आप पर असर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चांदी की कीमतों में आए उछाल और डॉलर की कमजोरी का सीधा असर घरेलू खुदरा आभूषण खरीदारों, औद्योगिक कंपनियों और कमोडिटी निवेशकों की लागत पर पड़ेगा। • भारत में आभूषण खरीदारों के लिए: वैश्विक बाजार में चांदी के 52 डॉलर पार करने से घरेलू सर्राफा बाजारों में चांदी के जेवर और बर्तनों के दाम बढ़ेंगे। त्योहारी या शादी के सीजन में खरीदारी की योजना बना रहे परिवारों को तत्काल बजट की समीक्षा करनी होगी क्योंकि भावों में 5 प्रतिशत से अधिक की दैनिक तेजी आई है। • औद्योगिक विनिर्माताओं के लिए: सोलर पैनल और इलेक्ट्रॉनिक्स उपकरण बनाने वाली भारतीय कंपनियों के लिए कच्चे माल की लागत बढ़ सकती है। कंपनियों को आने वाले हफ्तों में अपनी इन्वेंट्री सुरक्षित करने के लिए अतिरिक्त पूंजी आवंटित करनी पड़ सकती है। • कमोडिटी ट्रेडर्स के लिए: 55 डॉलर का प्रमुख स्तर टूटने से पहले बाजार में उतार-चढ़ाव बना रहेगा। सक्रिय ट्रेडर्स 1.61 डॉलर के दैनिक एटीआर को स्टॉप-लॉस बफर के रूप में इस्तेमाल करके जोखिम सीमित कर सकते हैं। • लंबी अवधि के निवेशकों के लिए: 50 और 100-दिवसीय मूविंग एवरेज के नीचे रहने के कारण संपूर्ण डाउनट्रेंड अभी समाप्त नहीं हुआ है। नए खरीदारों को एकमुश्त निवेश के बजाय एसआईपी या चरणबद्ध खरीदारी की रणनीति अपनानी चाहिए। ऐसा क्यों हुआ अमेरिकी मध्यावधि चुनावों के शुरुआती नतीजों के चलते राजनीतिक अनिश्चितता बढ़ने से डॉलर इंडेक्स में तेज गिरावट आई, जिसने चांदी और अन्य कीमती धातुओं में जोरदार रिकवरी की राह खोली। • डॉलर और बॉन्ड यील्ड में गिरावट: वाशिंगटन में राजनीतिक गतिरोध की संभावनाओं ने सुरक्षित निवेश के प्रवाह को बॉन्ड बाजार की ओर मोड़ा, जिससे अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में भारी गिरावट आई। बॉन्ड यील्ड गिरने और डॉलर कमजोर होने से डॉलर में आंकी जाने वाली चांदी विदेशी खरीदारों के लिए आकर्षक बन गई। • तकनीकी ओवरसोल्ड स्थिति से रिकवरी: रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स यानी आरएसआई 40 के करीब पहुंचकर अत्यधिक बिकवाली के दबाव को कम कर रहा था। निचले स्तरों पर शॉर्ट कवरिंग और 20-दिवसीय औसत से 19.40 गुना वॉल्यूम आने से तेजी को तुरंत बल मिला। • व्यापक वित्तीय बाजारों में सुधार: सोने के दोबारा 4,000 डॉलर के पार जाने और डिजिटल संपत्तियों में आई तेजी ने पूरे कमोडिटी और जोखिम बाजार में धारणा को सुधारा। जब सोना सुरक्षित संपत्ति के रूप में मजबूत हुआ, तो चांदी ने भी ऐतिहासिक पैटर्न के अनुसार उसका अनुसरण किया। सवाल-जवाब 1. चांदी की कीमतों में हालिया तेजी का तात्कालिक कारण क्या है? अमेरिकी मध्यावधि चुनाव नतीजों के बीच डॉलर इंडेक्स और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में गिरावट आने से चांदी को मजबूत सहारा मिला है। 2. तकनीकी रूप से चांदी के लिए अगला सबसे बड़ा प्रतिरोध स्तर कौन सा है? खरीदारों के लिए 55.00 डॉलर का मनोवैज्ञानिक स्तर मुख्य बाधा है, जिसके बाद 58.18 डॉलर और लगभग 61.00 डॉलर पर स्थित मूविंग एवरेज का स्तर आता है। 3. यदि बाजार में दोबारा बिकवाली आती है तो कौन सा सपोर्ट स्तर अहम रहेगा? गिरावट की स्थिति में 50.00 डॉलर का स्तर पहला बड़ा सपोर्ट है, जिसके टूटने पर कीमतें 48.65 डॉलर और फिर 45.00 डॉलर तक फिसल सकती हैं। 4. औद्योगिक मांग चांदी की कीमतों को कैसे प्रभावित करती है? चांदी में विद्युत चालकता सबसे अधिक होती है, जिसके चलते सौर ऊर्जा और इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योगों में मांग बढ़ने पर इसके भाव ऊपर जाते हैं। 5. गोल्ड-सिल्वर रेश्यो का क्या महत्व है? यह रेश्यो यह दर्शाता है कि एक औंस सोने के बराबर कितने औंस चांदी होगी, जिससे यह पता चलता है कि दोनों में से कौन सी धातु अपेक्षाकृत सस्ती या महंगी है। https://trendkia.com/market/silver-men-teja-uchhala-ke-bada-52-dolara-ka-stara-para-kya-55-dolara-ki-rukavata-ko-tora-paenge-kharidara-56697 TrendKia — Har trend, sabse pehle.