फेडरल रिजर्व की सख्ती की उम्मीदों और अमरीका-ईरान तनाव के बीच चांदी की कीमतों पर दबाव मजबूत रोजगार आंकड़ों के बाद अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा सितंबर में ब्याज दरें बढ़ाने की संभावना बढ़ गई है, जिससे चांदी की कीमतों पर लगातार दबाव बना हुआ है। अमरीका में रोजगार के मजबूत आंकड़े सामने आने और फेडरल रिजर्व द्वारा आगामी सितंबर महीने में ब्याज दरों में बढ़ोतरी की संभावनाओं के बीच चांदी की कीमतों में नरमी देखने को मिल रही है। हाल ही में जारी आंकड़ों के अनुसार अमरीकी श्रम बाजार में नौकरियों की संख्या में उल्लेखनीय इजाफा हुआ है, जबकि बेरोजगारी दर स्थिर बनी हुई है। इसके साथ ही भू-राजनीतिक मोर्चे पर मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव ने ऊर्जा बाजार को प्रभावित किया है, जिससे वैश्विक स्तर पर महंगाई को लेकर चिंताएं फिर से गहरा गई हैं और निवेशक सुरक्षित निवेश विकल्पों की दिशा में नए सिरे से आकलन कर रहे हैं। रोजगार आंकड़ों और मौद्रिक नीति का असर अमरीकी श्रम विभाग के श्रम सांख्यिकी ब्यूरो की ओर से जारी रिपोर्ट के मुताबिक अगस्त महीने के दौरान नॉनफार्म पेरोल्स में 1,62,000 की बढ़ोतरी दर्ज की गई, जो बाजार के विश्लेषकों के शुरुआती अनुमानों से काफी बेहतर रही। इस बीच बेरोजगारी दर 4,1 प्रतिशत के स्तर पर बरकरार रही, हालांकि वार्षिक वेतन वृद्धि में हल्की सुस्ती जरूर देखी गई। इन मजबूत आर्थिक संकेतों के आने के बाद मुद्रा बाजारों में मौद्रिक नीति को लेकर सख्ती बरतने की अटकलें तेज हो गईं। सीएमई फेडवॉच टूल के आंकड़े संकेत देते हैं कि सितंबर की बैठक में फेडरल रिजर्व द्वारा 25 आधार अंकों की दर वृद्धि किए जाने की संभावना अब 58.3 प्रतिशत तक पहुंच चुकी है। फेडरल रिजर्व के अधिकारियों के कड़े तेवर फेडरल रिजर्व के अधिकारियों की ओर से आ रहे बयानों में नीतिगत मोर्चे पर नरमी के संकेत पूरी तरह गायब नजर आ रहे हैं। अधिकारियों का मानना है कि मौजूदा मौद्रिक नीति पर्याप्त रूप से सख्त नहीं है और महंगाई दर अभी भी सहज स्तर से काफी ऊपर बनी हुई है। बाजार में इस बात की चर्चा जोर पकड़ने लगी है कि केंद्रीय बैंक के लिए नीतिगत दरों में बढ़ोतरी का सिलसिला जारी रखने का यह सही समय है। इस आक्रामक रुख ने बाजार की उन उम्मीदों को तगड़ा झटका दिया है, जो निकट भविष्य में नीतिगत दरों में कटौती या ठहराव की उम्मीद लगाए बैठे थे। इस पूरी स्थिति से अमरीकी डॉलर को मजबूती मिल रही है, जो कीमती धातुओं के लिए एक बड़ी बाधा साबित हो रहा है। भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की चाल चांदी के लिए चुनौतियों का दायरा केवल मौद्रिक नीतियों तक सीमित नहीं है, बल्कि भू-राजनीतिक उथल-पुथल ने भी इसमें अहम भूमिका निभाई है। हार्मोन जलडमरूमध्य के पास अमरीका और ईरान के बीच हाल ही में भड़के तनाव के चलते कच्चे तेल के दामों में तेजी दर्ज की गई है। अमरीकी युद्धपोतों पर हुए मिसाइल हमलों के बाद की गई जवाबी कार्रवाई के कारण तेहरान ने इस जल क्षेत्र के आसपास एक नया प्रतिबंधित दायरा घोषित कर दिया है। ऊर्जा कीमतों में इस तरह की अचानक बढ़त से वैश्विक स्तर पर महंगाई के एक बार फिर से भड़कने का खतरा पैदा हो गया है, जिसका सीधा असर कमोडिटी बाजारों पर पड़ रहा है। तकनीकी विश्लेषण और मूल्य का रुख हाजिर बाजार में चांदी का कारोबार वर्तमान में 66.10 डॉलर के आसपास चल रहा है। लाइव बाजार के आंकड़ों के अनुसार इसकी कीमत 66.75 डॉलर दर्ज की गई है, जो पिछले बंद भाव 66.05 डॉलर के मुकाबले 1.06 प्रतिशत की बढ़त को दर्शाती है। तकनीकी मोर्चे पर 14-दिवसीय रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स 55 के स्तर पर बना हुआ है, जो मध्यम गति को दर्शाता है। कीमत अपने प्रमुख मूविंग एवरेज के आसपास स्थिर बनी हुई है और बाजार में कंसोलिडेशन का दौर जारी है। विश्लेषकों का मानना है कि ऊपरी स्तरों पर तात्कालिक बाधा का सामना करना पड़ सकता है, जबकि निचले स्तरों पर मजबूत समर्थन मूल्य को एक निश्चित दायरा प्रदान कर रहा है। कीमती धातु के बाजार की बुनियादी विशेषताएं चांदी ऐतिहासिक रूप से एक बहुमूल्य धातु रही है जिसका उपयोग निवेशकों द्वारा मूल्य संचय और विनिमय के माध्यम के रूप में किया जाता रहा है। हालांकि यह सोने की तुलना में कम लोकप्रिय है, लेकिन उच्च मुद्रास्फीति के दौर में पोर्टफोलियो में विविधता लाने के लिए निवेशक इसकी तरफ रुख करते हैं। बाजार में इसकी उपलब्धता फिजिकल सिक्कों, छड़ों के साथ-साथ एक्सचेंज ट्रेडेड फंड्स के जरिए भी होती है जो अंतरराष्ट्रीय बाजारों में इसके भाव को ट्रैक करते हैं। इसके अलावा औद्योगिक उपयोग के मामले में चांदी की मांग हमेशा से मजबूत रही है, विशेष रूप से इलेक्ट्रॉनिक्स और सौर ऊर्जा क्षेत्रों में जहां इसकी उच्च विद्युत चालकता इसे अनिवार्य बनाती है। इसका आप पर असर चांदी और कमोडिटी बाजार में जारी उतार-चढ़ाव का असर निवेशकों, आभूषण खरीदारों और औद्योगिक उपभोक्ताओं पर सीधे तौर पर पड़ता है। • भारत में: घरेलू सर्राफा बाजार में चांदी की कीमतों पर अंतरराष्ट्रीय संकेतों का सीधा असर देखने को मिलता है, जिससे खुदरा खरीदारों और निवेशकों को अपने पोर्टफोलियो में निवेश करते समय अधिक सतर्क रहना होगा। • वैश्विक स्तर पर: मुद्रास्फीति और ब्याज दरों से जुड़े फैसलों के कारण वैश्विक वित्तीय बाजारों में जोखिम की स्थिति बदलती है, जिससे निवेशकों को सुरक्षित संपत्तियों की ओर रुख करने के लिए बाध्य होना पड़ता है। • औद्योगिक क्षेत्र में: सौर ऊर्जा और इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण में चांदी के उपयोग के कारण कच्चे माल की कीमतों में उतार-चढ़ाव विनिर्माण लागत को प्रभावित कर सकता है। • निवेशकों के लिए: मुद्रा बाजार में डॉलर की मजबूती और बॉंड यील्ड में बदलाव के चलते निवेशकों को अपनी परिसंपत्ति आवंटन रणनीति पर नए सिरे से विचार करना पड़ सकता है। • मुद्रास्फीति का प्रभाव: कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आने से परिवहन और ऊर्जा लागत बढ़ सकती है, जिसका अप्रत्यक्ष असर आम उपभोक्ता की दैनिक लागत पर पड़ता है। सवाल-जवाब 1. चांदी की कीमतें वर्तमान में किस स्तर पर कारोबार कर रही हैं? चांदी की हाजिर कीमत 66.75 डॉलर के आसपास चल रही है, जो पिछले सत्र के मुकाबले 1.06 प्रतिशत की बढ़त को दर्शाती है। 2. फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरें बढ़ाने की संभावना क्यों बढ़ गई है? अमरीका में अगस्त महीने के दौरान मजबूत नॉनफार्म पेरोल आंकड़ों के आने के बाद निवेशकों ने सख्त मौद्रिक नीति की संभावनाओं को तेजी से मूल्यवान किया है। 3. भू-राजनीतिक तनाव का चांदी की कीमतों पर क्या असर पड़ा है? अमरीका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतें ऊपर गई हैं, जिससे महंगाई की चिंताएं बढ़ने से कमोडिटी बाजार प्रभावित हुआ है। 4. तकनीकी संकेतकों के अनुसार चांदी का बाजार किस स्थिति में है? 14-दिवसीय रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स 55 के स्तर पर है, जो मध्यम गति और एक स्थिर कंसोलिडेशन दौर का संकेत देता है। https://trendkia.com/market/silver-price-holds-near-66-00-amid-fed-hike-bets-and-us-iran-tensions-28781 TrendKia — Har trend, sabse pehle.