# कच्चे तेल में नरमी और भू-राजनीतिक चर्चाओं के बीच संभली चांदी, पर बॉन्ड यील्ड से सीमित बढ़त

> ईरान और अमेरिका के बीच वार्ता से कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट आई है, जिससे चांदी को फौरी सहारा मिला है। हालांकि, अमेरिकी डॉलर की मजबूती और ब्याज दरों में बढ़ोतरी की आशंकाएं कीमती धातु की तेजी पर दबाव बनाए हुए हैं।

**Type:** article · **Category:** बाज़ार · **Published:** 2026-09-25 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/market/silver-stabilizes-as-retreating-crude-eases-inflation-jitters-but-surging-yields-cap-upside-38221 · **Language:** Hindi
**Tags:** चांदी, कमोडिटी बाजार, कच्चा तेल, फेडरल रिजर्व, अमेरिकी डॉलर, ट्रेजरी बॉन्ड, सोना, वित्त

अंतरराष्ट्रीय बाजार में दो दिनों की लगातार बिकवाली के बाद कीमती धातुओं में ठहराव देखने को मिल रहा है। एशियाई कारोबारी सत्र के दौरान चांदी हल्की बढ़त के साथ लगभग 63.90 डॉलर प्रति ट्रॉय औंस के आसपास कारोबार करती दिखी, जबकि लाइव बाजार में यह 64.36 डॉलर के स्तर पर दर्ज की गई। ऊर्जा बाजार में आई हालिया नरमी ने महंगाई की चिंताओं को कुछ हद तक शांत किया है, जिससे गैर-यील्ड वाली संपत्तियों को निचले स्तरों पर फौरी सहारा मिल रहा है। भू-राजनीतिक मोर्चे पर संयुक्त राष्ट्र महासभा के इतर कतर की मध्यस्थता में अमेरिका और ईरान के बीच चरणबद्ध समझौते पर विचार की चर्चाओं ने तेल की कीमतों में उछाल को थामा है। यदि यह समझौता आगे बढ़ता है तो इससे ईरानी बंदरगाहों पर अमेरिकी नाकाबंदी हटने और होर्मुज जलडमरूमध्य के पूरी तरह खुलने की राह आसान हो सकती है, जिससे वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति में सुधार आने की उम्मीद बंधी है।

## डॉलर इंडेक्स की मजबूती और फेडरल रिजर्व का कड़ा रुख
ऊर्जा लागत में आई इस राहत के बावजूद चांदी के सामने कई वित्तीय चुनौतियां बरकरार हैं। अमेरिकी डॉलर की मजबूती और अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में बहु-वर्षीय ऊंचाइयों पर बने रहने से गैर-ब्याज वाली संपत्तियों पर दबाव बना हुआ है। वित्तीय बाजारों में निवेशक व्यापक मूल्य दबावों को नियंत्रित करने के लिए फेडरल रिजर्व द्वारा मौद्रिक नीति को और सख्त करने की संभावनाओं को भुना रहे हैं। सीएमई फेडवॉच टूल के ताजा आंकड़ों के अनुसार, अक्टूबर में बेंचमार्क ब्याज दर में वृद्धि की बाजार उम्मीदें उछलकर लगभग 67.5% तक पहुंच गई हैं। यह आंकड़ा पिछले हफ्ते के 55.4% और एक महीने पहले के महज 11% के मुकाबले एक बड़ा उछाल दर्शाता है। बढ़ती ब्याज दरें धातु जैसी शून्य-उपज वाली संपत्तियों को अपने पास रखने की अवसर लागत को बढ़ा देती हैं, जिससे संस्थागत निवेशकों का झुकाव निश्चित आय वाले बॉन्ड की ओर बढ़ रहा है।

## ट्रेजरी विभाग का बायबैक और वैश्विक केंद्रीय बैंकों की नीतियां
बढ़ती बॉन्ड यील्ड को काबू में करने के लिए नीतिगत स्तर पर भी बड़े कदम उठाए जा रहे हैं। अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने बढ़ती यील्ड को नियंत्रित करने के अपने जारी प्रयासों के तहत अतिरिक्त 6 बिलियन डॉलर मूल्य के दीर्घावधि ट्रेजरी बॉन्ड वापस खरीदने की योजना सामने रखी है। ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने इस दूसरे विस्तारित बायबैक की घोषणा बुधवार को की थी। दूसरी ओर, वैश्विक केंद्रीय बैंक भी अपनी मौद्रिक नीतियों को पुनर्गठित कर रहे हैं। बैंक ऑफ जापान (BoJ) ने 7-2 के बहुमत से अपने अल्पकालिक ब्याज दर लक्ष्य को 1.00% से बढ़ाकर 1.25% कर दिया है, जो मौद्रिक नीति के सामान्यीकरण की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम है। बैंक ऑफ जापान का यह फैसला पिछले कुछ हफ्तों से बाजार की व्यापक अपेक्षाओं के पूरी तरह अनुरूप रहा है।

## मुद्रा बाजारों और अन्य परिसंपत्तियों की हलचल
मुद्रा बाजार के व्यापक रुझान भी कमोडिटी बाजार पर गहरा प्रभाव डाल रहे हैं। ऑस्ट्रेलियाई डॉलर (AUD/USD) शुक्रवार के एशियाई सत्र में अगस्त की शुरुआत के बाद के सबसे निचले स्तर पर फिसल गया और रातों-रात 200-दिवसीय एसएमए के नीचे टूटने के बाद 0.7000 के मनोवैज्ञानिक स्तर के पास कमजोर नजर आया। फेडरल रिजर्व के आक्रामक रुख के बीच कच्चे तेल की पूर्व रैली ने मुद्रास्फीति की आशंकाओं को हवा दी थी, जिससे अमेरिकी बॉन्ड यील्ड कई वर्षों के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई। दूसरी तरफ, भू-राजनीतिक जोखिमों ने अमेरिकी डॉलर को दो महीने के शिखर पर पहुंचा दिया, जिसने रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया की ब्याज दर बढ़ोतरी की उम्मीदों को दबा दिया। जापानी येन के मुकाबले डॉलर (USD/JPY) शुक्रवार को थोड़ा नरम होकर 159.00 के तीन सप्ताह के उच्च स्तर से पीछे हटा, क्योंकि येन में बिकवाली करने वाले संभावित सरकारी हस्तक्षेप की आशंका से सतर्क हो गए। सोने की बात करें तो यह गुरुवार के 4,244 डॉलर के साप्ताहिक निचले स्तर से उबरने का प्रयास करते हुए भी 4,300 डॉलर प्रति औंस के नीचे बना रहा और चार हफ्तों में अपने सबसे खराब साप्ताहिक प्रदर्शन की ओर अग्रसर दिखा।

## चांदी की दोहरी भूमिका और औद्योगिक मांग का गणित
चांदी वैश्विक वित्तीय बाजार में निवेशकों के बीच व्यापक रूप से कारोबार की जाने वाली एक बहुमूल्य धातु है। ऐतिहासिक रूप से इसे मूल्य के भंडारण और विनिमय के माध्यम के रूप में उपयोग में लाया जाता रहा है। हालांकि सोने की तुलना में इसका व्यापार परिमाण अलग रहता है, फिर भी निवेशक अपने पोर्टफोलियो में विविधता लाने, इसके आंतरिक मूल्य और उच्च मुद्रास्फीति के समय संभावित बचाव के रूप में चांदी की ओर रुख करते हैं। बाजार सहभागियों के लिए भौतिक चांदी को सिक्कों या सिल्लियों के रूप में खरीदने के साथ-साथ एक्सचेंज ट्रेडेड फंड्स (ETF) जैसे वित्तीय माध्यमों से भी व्यापार करने की सुविधा उपलब्ध है, जो अंतरराष्ट्रीय बाजारों में इसकी कीमतों को ट्रैक करते हैं। इसके अलावा, खनन आपूर्ति और रीसाइक्लिंग दरें भी इसके मूल्य निर्धारण को तय करती हैं, क्योंकि प्राकृतिक रूप से चांदी सोने की तुलना में अधिक प्रचुर मात्रा में पाई जाती है।

मूल्यवान धातु होने के साथ-साथ चांदी का एक बड़ा हिस्सा औद्योगिक प्रक्रियाओं में खप जाता है। तांबे और सोने से भी अधिक विद्युत चालकता होने के कारण इलेक्ट्रॉनिक्स और सौर ऊर्जा जैसे हाई-टेक क्षेत्रों में चांदी की अपरिहार्य भूमिका है। वैश्विक आर्थिक महाशक्तियां इसकी कीमतों में उतार-चढ़ाव तय करने में मुख्य भूमिका निभाती हैं। अमेरिका और विशेष रूप से चीन के विशाल औद्योगिक क्षेत्र विभिन्न विनिर्माण प्रक्रियाओं में चांदी का भारी उपयोग करते हैं। वहीं दूसरी तरफ, भारत जैसे विकासशील देश में उपभोक्ताओं द्वारा आभूषणों और घरेलू परिसंपत्तियों के लिए की जाने वाली मजबूत मांग चांदी के वैश्विक मूल्य निर्धारण में एक अहम आधार तैयार करती है। इन औद्योगिक क्षेत्रों में मांग का उछाल कीमतों को ऊपर की ओर ले जाता है, जबकि विनिर्माण मंदी इसे नीचे धकेल सकती है।

## गोल्ड-सिल्वर अनुपात और तकनीकी संकेतक
सुरक्षित निवेश विकल्प के तौर पर चांदी अक्सर सोने के कदमों पर चलती है। जब सोने की कीमतों में उछाल आता है, तो चांदी भी आमतौर पर उसी दिशा में आगे बढ़ती है, हालांकि इसकी गतिशीलता सोने से कुछ भिन्न हो सकती है। दोनों धातुओं के सापेक्ष मूल्यांकन को मापने के लिए गोल्ड/सिल्वर अनुपात एक अहम पैमाना माना जाता है। यह अनुपात दर्शाता है कि सोने के एक औंस के मूल्य के बराबर होने के लिए कितने औंस चांदी की आवश्यकता होगी। यदि यह अनुपात काफी ऊंचा हो जाए, तो कई तकनीकी विश्लेषक इसे चांदी के अवमूल्यन अथवा सोने के अधिक मूल्यवान होने का संकेत मानते हैं। इसके विपरीत, इस अनुपात में भारी गिरावट यह दर्शाती है कि चांदी की तुलना में सोना अपेक्षाकृत सस्ता हो सकता है।

लाइव तकनीकी आंकड़ों के अनुसार, चांदी का 14-दिवसीय आरएसआई (RSI) 48 के स्तर पर बना हुआ है, जो बाजार में तटस्थ रुख का संकेत देता है। एमएसीडी (MACD) -0.07 पर है और इसका सिग्नल लाइन 0.19 पर है, जो हिस्टोग्राम के -0.27 के साथ मंदी का रुख दर्शा रहा है। मूविंग एवरेज की स्थिति देखें तो 20-दिवसीय ईएमए 65.07 डॉलर, 50-दिवसीय ईएमए 64.94 डॉलर और 200-दिवसीय ईएमए 66.89 डॉलर पर है। 50-दिवसीय ईएमए का 200-दिवसीय ईएमए से नीचे होना एक डेथ क्रॉस को रेखांकित करता है, जिससे दीर्घकालिक रुझान दबाव में दिखाई देता है। इसके अतिरिक्त, बोलिंगर बैंड्स 62.70 डॉलर से 67.86 डॉलर के दायरे में फैले हैं, जबकि 14-दिवसीय एडीएक्स 12 पर होने से बाजार सीमित दायरे में होने का संकेत देता है। तत्काल पिवट स्तर 64.30 डॉलर पर है, जहां पहला रेजिस्टेंस 64.59 डॉलर और दूसरा 64.83 डॉलर पर देखा जा रहा है, जबकि सपोर्ट क्रमशः 64.06 डॉलर और 63.77 डॉलर पर स्थित है।

## इसका आप पर असर
कच्चे तेल में नरमी और अंतरराष्ट्रीय बाजार में चांदी के 63.90 से 64.36 डॉलर के दायरे में स्थिर होने से घरेलू व वैश्विक स्तर पर निवेशकों और उपभोक्ताओं पर सीधा असर पड़ेगा।

- **भारत में आभूषण खरीदारों पर:** वैश्विक स्तर पर चांदी की कीमतों में ठहराव आने से घरेलू सर्राफा बाजारों में आभूषणों और चांदी के बर्तनों के दाम स्थिर रहने की संभावना है। आने वाले त्योहारी और वैवाहिक सीजन के दौरान खरीदारों को अचानक तेज मूल्य वृद्धि से फौरी राहत मिल सकती है।
- **औद्योगिक विनिर्माण क्षेत्र पर:** सौर ऊर्जा पैनल और इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण में चांदी का व्यापक इस्तेमाल होता है, जिससे कच्चे माल की लागत नियंत्रण में रहेगी। इससे विनिर्माताओं को अपनी उत्पादन लागत का बेहतर प्रबंधन करने और आपूर्ति श्रृंखला को सुगम बनाए रखने में मदद मिलेगी।
- **कमोडिटी और ईटीएफ निवेशकों पर:** अमेरिकी ब्याज दरों में बढ़ोतरी की 67.5% संभावना के चलते गैर-यील्ड वाली चांदी में बड़ा उछाल सीमित रह सकता है। ट्रेडर्स को 64.30 डॉलर के पिवट स्तर और 64.06 डॉलर के सपोर्ट को ध्यान में रखकर ही नई पोजीशन बनानी चाहिए।
- **वैश्विक ऊर्जा और आयात बिल पर:** होर्मुज जलडमरूमध्य खुलने और कच्चे तेल की कीमतों में नरमी से आयात निर्भर देशों के लिए व्यापार घाटा कम होने के संकेत हैं। इससे आम नागरिकों पर ईंधन जनित महंगाई का सीधा दबाव कुछ हद तक घट सकता है।

## ऐसा क्यों हुआ
चांदी की कीमतों में स्थिरता और बॉन्ड यील्ड के दबाव के पीछे भू-राजनीतिक वार्ताएं, ऊर्जा बाजार में नरमी और अमेरिकी मौद्रिक नीति से जुड़े कड़े संकेत मुख्य कारक रहे हैं।

- **कच्चे तेल में गिरावट और कूटनीतिक चर्चा:** संयुक्त राष्ट्र महासभा के इतर अमेरिका और ईरान के बीच कतर की मध्यस्थता से चरणबद्ध समझौते की खबरों ने ऊर्जा बाजारों को ठंडा किया है। इस समझौते से होर्मुज जलडमरूमध्य के खुलने और ईरानी बंदरगाहों से नाकाबंदी हटने की उम्मीद से तेल कीमतें गिरीं, जिससे मुद्रास्फीति का डर कम हुआ।
- **फेडरल रिजर्व की दर वृद्धि की प्रबल संभावना:** सीएमई फेडवॉच टूल के मुताबिक अक्टूबर में अमेरिकी ब्याज दर बढ़ने की संभावना 55.4% से बढ़कर 67.5% हो गई है। ऊंची ब्याज दरें बॉन्ड यील्ड को बढ़ाती हैं, जिससे शून्य-उपज वाली चांदी जैसी धातुओं का आकर्षण सीमित हो गया।
- **अमेरिकी डॉलर की दो महीने की ऊंचाई:** वैश्विक अनिश्चितताओं और बॉन्ड यील्ड में तेजी के चलते अमेरिकी डॉलर मजबूत होकर दो महीने के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर डॉलर में मूल्यवर्गित होने के कारण मजबूत डॉलर चांदी की बढ़त पर सीधा अंकुश लगाता है।

## सवाल-जवाब

### 1. चांदी की कीमतों में गिरावट रुकने का मुख्य कारण क्या है?
अमेरिका और ईरान के बीच वार्ता की खबरों से कच्चे तेल की कीमतों में कमी आई है, जिससे वैश्विक स्तर पर महंगाई का डर कम हुआ और चांदी को सहारा मिला।

### 2. फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों को लेकर बाजार की क्या उम्मीदें हैं?
सीएमई फेडवॉच टूल के अनुसार अक्टूबर में ब्याज दर बढ़ाए जाने की संभावना बढ़कर 67.5% हो गई है, जो पिछले हफ्ते 55.4% थी।

### 3. अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने बॉन्ड यील्ड नियंत्रित करने के लिए क्या कदम उठाया?
ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने बढ़ती बॉन्ड यील्ड को नियंत्रित करने के लिए 6 बिलियन डॉलर के दीर्घावधि ट्रेजरी बॉन्ड वापस खरीदने की घोषणा की है।

### 4. बैंक ऑफ जापान ने हाल ही में क्या नीतिगत फैसला लिया है?
बैंक ऑफ जापान ने 7-2 के बहुमत से अपने अल्पकालिक ब्याज दर लक्ष्य को 1.00% से बढ़ाकर 1.25% कर दिया है।

### 5. औद्योगिक क्षेत्र में चांदी की मांग क्यों महत्वपूर्ण मानी जाती है?
चांदी में तांबे और सोने से भी अधिक विद्युत चालकता होती है, जिस कारण सौर ऊर्जा और इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योगों में इसका भारी उपयोग होता है।

### 6. गोल्ड-सिल्वर अनुपात से निवेशक क्या समझते हैं?
यह अनुपात दर्शाता है कि एक औंस सोने के बराबर कितने औंस चांदी होगी; ऊंचा अनुपात चांदी के अवमूल्यन और कम अनुपात सोने के सस्ते होने का संकेत दे सकता है।

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