सिंगापुर डॉलर की मजबूती बरकरार, एमयूएफजी ने केंद्रीय बैंक के फैसलों और आर्थिक आंकड़ों का किया विश्लेषण तीसरी तिमाही में सिंगापुर की आर्थिक वृद्धि दर 5.4 प्रतिशत दर्ज की गई, जबकि मौद्रिक प्राधिकरण ने अपनी विनिमय दर नीति में कोई बदलाव नहीं किया है। मुद्रा बाजार में डॉलर के उतार-चढ़ाव के बीच सिंगापुर डॉलर, सोना और प्रमुख मुद्राओं में हलचल देखी गई। सिंगापुर की अर्थव्यवस्था में तीसरी तिमाही के दौरान सालाना आधार पर 5.4 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है, जो बाजार के 5.1 प्रतिशत के अनुमान से बेहतर रही। हालांकि, यह रफ्तार दूसरी तिमाही की संशोधित 6.2 प्रतिशत की विकास दर के मुकाबले कुछ धीमी जरूर पड़ी है, लेकिन वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच देश की आर्थिक बुनियाद मजबूत बनी हुई है। एमयूएफजी के विश्लेषक लॉयड चान के अनुसार, मॉनेटरी अथॉरिटी ऑफ सिंगापुर यानी एमएएस ने अपनी विनिमय दर नीति से जुड़े बैंड में कोई बदलाव न करके बाजार के कड़े रुख की उम्मीदों को थाम दिया है। नीतिगत मोर्चे पर इस स्थिरता और प्रौद्योगिकी क्षेत्र की मांग के दम पर स्थानीय मुद्रा यानी सिंगापुर डॉलर के आगे भी अपेक्षाकृत लचीला और मजबूत बने रहने का अनुमान है। केंद्रीय बैंक का नीतिगत रुख और आर्थिक संतुलन बाजार के विश्लेषक इस समीक्षा बैठक में मौद्रिक सख्ती की हल्की उम्मीद जता रहे थे, लेकिन एमएएस ने एस$एनईईआर नीतिगत बैंड के स्लोप, केंद्र और चौड़ाई तीनों को जस का तस बनाए रखने का फैसला किया। एमएएस का मानना है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI से जुड़े नए ऑर्डर्स और विनिर्माण क्षमता विस्तार की गतिविधियां निकट अवधि में आर्थिक विकास को लगातार सहारा देंगी। हालांकि, इसके साथ ही अर्थव्यवस्था का पॉजिटिव आउटपुट गैप वर्ष 2027 के दौरान धीरे-धीरे सिमटने का अनुमान लगाया गया है। मुद्रास्फीति के मोर्चे पर केंद्रीय बैंक का आकलन है कि मुख्य मुद्रास्फीति वर्ष 2027 की पहली छमाही तक 2 प्रतिशत से कुछ ऊपर बनी रह सकती है, जिसके बाद इसमें नरमी देखने को मिलेगी। चूंकि नीतिगत बैंड का स्लोप बढ़त की दिशा में बना हुआ है, इसलिए सिंगापुर डॉलर आने वाले समय में भी मजबूती बनाए रखने में सक्षम रहेगा। अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में गिरावट और वैश्विक मुद्राओं का हाल वैश्विक मुद्रा बाजारों में अमेरिकी सीपीआई के आंकड़ों के बाद डॉलर में तेज हलचल देखने को मिली। बुधवार को महंगाई के गर्म आंकड़ों के बाद अमेरिकी डॉलर अप्रैल 2025 के उच्च स्तर पर पहुंच गया था, लेकिन गुरुवार के एशियाई कारोबारी सत्र में अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में आई गिरावट ने डॉलर को नीचे खींच लिया। चीन द्वारा बॉन्ड खरीद से जुड़ी चर्चाओं के चलते अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में गिरावट दर्ज की गई, जिससे अमेरिकी डॉलर पर दबाव बढ़ा। इस बीच, ऑस्ट्रेलिया में रोजगार के कमजोर आंकड़ों के कारण ऑस्ट्रेलियाई डॉलर यानी AUD/USD में दबाव बना रहा और यह 0.6950 के करीब कारोबार करता नजर आया। यह जोड़ी मासिक उच्च स्तर से फिसलकर सप्ताह के निचले स्तर पर पहुंच गई, हालांकि डॉलर की कमजोरी ने इसके नुकसान को कुछ हद तक सीमित करने का काम किया। येन पर हस्तक्षेप की निगरानी और सोने में खरीदारी जापानी मुद्रा येन के मुकाबले अमेरिकी डॉलर यानी USD/JPY में भी गिरावट का रुख दिखा और यह गुरुवार के एशियाई सत्र के दौरान 158.00 के स्तर से नीचे फिसल गया। यह जोड़ी तीन सप्ताह के उच्च स्तर से पीछे हटी है और इसमें लगातार बिकवाली दर्ज की गई। मुद्रा बाजार के कारोबारी इस बात को लेकर पूरी तरह सतर्क हैं कि जापानी अधिकारी गिरते येन को सहारा देने के लिए बाजार में सीधा हस्तक्षेप कर सकते हैं। दूसरी ओर, बहुमूल्य धातु सोने में गुरुवार को नए सिरे से लिवाली देखने को मिली। इक्विटी बाजारों में AI से जुड़े निवेशों को लेकर बढ़ती चिंताओं के कारण वैश्विक शेयर बाजारों में कमजोरी आई। इस सुस्ती ने अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में तेज गिरावट ला दी, जिससे अमेरिकी डॉलर अपने साल के उच्चतम स्तर से नीचे आ गया और सुरक्षित निवेश के रूप में सोने की मांग में तेजी आई। क्रिप्टो बाजार पर दबाव और ब्रिटेन का आर्थिक परिदृश्य डिजिटल एसेट बाजार में रिपल यानी XRP मंदी के दौर में फंसा दिखा और गुरुवार को इसका भाव 1.30 डॉलर के करीब संघर्ष करता रहा। इस रेमिटेंस टोकन में आई कमजोरी पूरे क्रिप्टोकरेंसी बाजार के मिजाज को दर्शाती है, जहां अमेरिका में बढ़ती महंगाई को लेकर निवेशकों की चिंताएं भारी बिकवाली का कारण बनी हुई हैं। दूसरी तरफ, ब्रिटेन के आर्थिक परिदृश्य से सकारात्मक संकेत सामने आ रहे हैं, जहां चांसलर द्वारा अपना पहला बजट पेश किए जाने में दो सप्ताह से भी कम समय बचा हुआ है। ब्रिटेन के लिए इस बार बजट की पूर्व संध्या पर आर्थिक और वित्तीय पृष्ठभूमि काफी उत्साहजनक बनी हुई है। देश के सरकारी बॉन्ड में तेजी देखी जा रही है, एफटीएसई 100 इस सप्ताह प्रमुख शेयर सूचकांकों में सबसे बेहतरीन प्रदर्शन करने वाला इंडेक्स बन गया है, और पाउंड भी अमेरिकी डॉलर के मुकाबले स्थिरता हासिल करता दिखाई दे रहा है। इसका आप पर असर वैश्विक मुद्रा बाजारों में हो रहे इन बदलावों का असर अंतरराष्ट्रीय यात्रा, विदेशी शिक्षा और कमोडिटी की कीमतों पर सीधे तौर पर दिखाई देता है। • विदेशी मुद्रा विनिमय पर असर: सिंगापुर डॉलर की मजबूती से वहां पढ़ाई या यात्रा करने वाले लोगों के खर्च बढ़ सकते हैं। यात्रियों और छात्रों को मुद्रा विनिमय के लिए अतिरिक्त बजट की व्यवस्था करनी होगी। • सोने के खरीदारों के लिए संकेत: डॉलर में नरमी और इक्विटी बाजार की कमजोरी से सोने की कीमतों में तेजी आ सकती है। खुदरा खरीदारों और आभूषण प्रेमियों को खरीदारी से पहले भाव के रुख पर नजर रखनी चाहिए। • क्रिप्टो निवेशकों पर प्रभाव: अमेरिकी महंगाई की चिंताओं से डिजिटल परिसंपत्तियों पर बिकवाली का दबाव बना हुआ है। छोटे और खुदरा क्रिप्टो निवेशकों को अत्यधिक उतार-चढ़ाव को देखते हुए सतर्क रहने की जरूरत है। • निर्यात और व्यापार क्षेत्र: प्रमुख वैश्विक मुद्राओं में उतार-चढ़ाव से आयात और निर्यात की लागत प्रभावित होती है। सीमा पार व्यापार करने वाले कारोबारियों को अपनी विनिमय दरों को सुरक्षित करने के कदम उठाने चाहिए। ऐसा क्यों हुआ वैश्विक मुद्रा बाजार और अर्थव्यवस्थाओं में यह फेरबदल केंद्रीय बैंकों के नीतिगत निर्णयों, तकनीकी उद्योग की मांग और मुद्रास्फीति के दबावों के मिले-जुले असर के कारण हुआ है। • मजबूत विनिर्माण और तकनीकी मांग: सिंगापुर की तीसरी तिमाही में 5.4 प्रतिशत की विकास दर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जुड़ी मांग और क्षमता विस्तार के कारण संभव हुई। इस ठोस विकास ने मौद्रिक प्राधिकरण को अपनी नीति में कड़ा बदलाव न करने का आत्मविश्वास दिया। • अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में गिरावट: अमेरिकी मुद्रास्फीति के गर्म आंकड़ों के बाद भी चीन द्वारा बॉन्ड खरीदने की अटकलों से अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में गिरावट आई। इस गिरावट ने अमेरिकी डॉलर पर दबाव बनाया और प्रमुख जोड़ियों में बदलाव ला दिया। • येन में संभावित हस्तक्षेप का डर: जापानी मुद्रा के कमजोर होकर 158.00 के करीब पहुंचने से बाजार में यह धारणा बनी कि अधिकारी सीधे बाजार में हस्तक्षेप कर सकते हैं। इस डर के कारण डॉलर-येन जोड़ी में व्यापारियों ने मुनाफावसूली और बिकवाली शुरू की। • इक्विटी बाजारों में अनिश्चितता: प्रौद्योगिकी और AI क्षेत्र के पूंजीगत खर्चों को लेकर निवेशकों में उभरी चिंताओं ने वैश्विक शेयरों को गिराया। इसके चलते निवेशक सुरक्षित संपत्तियों की ओर मुड़े, जिससे सोने की मांग को बढ़ावा मिला। सवाल-जवाब 1. तीसरी तिमाही में सिंगापुर की अर्थव्यवस्था किस दर से बढ़ी? सिंगापुर की अर्थव्यवस्था में तीसरी तिमाही के दौरान सालाना आधार पर 5.4 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई, जो बाजार के 5.1 प्रतिशत के अनुमान से अधिक रही। 2. एमएएस ने अपनी मौद्रिक नीति में क्या बदलाव किया? एमएएस ने विनिमय दर आधारित एस$एनईईआर नीतिगत बैंड के स्लोप, केंद्र और चौड़ाई में कोई बदलाव नहीं किया और इसे स्थिर रखा। 3. सिंगापुर में मुख्य मुद्रास्फीति कब तक 2 प्रतिशत से ऊपर रहने का अनुमान है? केंद्रीय बैंक के अनुसार मुख्य मुद्रास्फीति वर्ष 2027 की पहली छमाही तक 2 प्रतिशत से थोड़ा ऊपर बनी रह सकती है, जिसके बाद इसमें नरमी आएगी। 4. सोने की कीमतों में ताजा तेजी क्यों देखी गई? वैश्विक शेयर बाजारों में कमजोरी और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में गिरावट के कारण निवेशकों ने सुरक्षित ठिकाना ढूंढते हुए सोने में खरीदारी की। 5. क्रिप्टो बाजार में रिपल पर बिकवाली का क्या कारण रहा? अमेरिका में बढ़ती महंगाई को लेकर निवेशकों की चिंताओं के कारण पूरे डिजिटल एसेट बाजार पर दबाव बना, जिससे रिपल 1.30 डॉलर के करीब संघर्ष करता दिखा। https://trendkia.com/market/singapore-dollar-ki-majabuti-barakarara-mufg-ne-kendriya-bainka-ke-phaisalon-aura-arthika-ankaron-ka-kiya-vishleshana-47856 TrendKia — Har trend, sabse pehle.