संयुक्त राष्ट्र में कूटनीतिक वार्ताओं से पहले कच्चे तेल में स्थिरता, डब्ल्यूटीआई 92 डॉलर प्रति बैरल के पार न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान कूटनीतिक बैठकों की संभावनाओं और होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल आपूर्ति जारी रहने के बीच डब्ल्यूटीआई कच्चा तेल 92.40 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गया है। अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार में चार दिनों से जारी गिरावट के सिलसिले पर विराम लगाते हुए वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट कच्चे तेल की कीमतों में मंगलवार को यूरोपीय कारोबारी घंटों के दौरान मामूली सुधार दर्ज किया गया। इस समय कच्चा तेल 92.40 डॉलर प्रति बैरल के स्तर के आसपास कारोबार कर रहा है। वैश्विक तेल बाजारों में सक्रिय निवेशक और कारोबारी न्यूयॉर्क में इस सप्ताह आयोजित हो रही संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान संभावित कूटनीतिक घटनाक्रमों को लेकर बेहद सतर्क रुख अपनाए हुए हैं, जिससे कीमतों को तात्कालिक सहारा मिला है। संयुक्त राष्ट्र महासभा और वैश्विक कूटनीतिक गतिविधियां भू-राजनीतिक घटनाक्रमों के लिहाज से वित्तीय बाजारों का पूरा ध्यान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के आगामी संबोधन पर टिका हुआ है, जो दिन में संयुक्त राष्ट्र महासभा को संबोधित करने वाले हैं। उनके तय कार्यक्रम में ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन के साथ एक संभावित द्विपक्षीय बैठक शामिल है। इसके अतिरिक्त, अमेरिकी राष्ट्रपति पूरे सप्ताह के दौरान चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग और अन्य खाड़ी देशों के प्रमुख नेताओं के साथ भी अहम बातचीत करने वाले हैं। इस बीच, ट्रंप प्रशासन ने पश्चिम एशिया में युद्ध से क्षतिग्रस्त हुए बुनियादी ढांचे के पुनर्निर्माण में मदद के लिए 5 अरब डॉलर का विशेष फंड स्थापित करने का प्रस्ताव रखा है। इन राजनीतिक बैठकों से तनाव कम होने की उम्मीदें बंधी हैं। होर्मुज जलडमरूमध्य से निर्बाध आपूर्ति और बाजार की प्रतिक्रिया कूटनीतिक आशावाद के बावजूद, तेल की कीमतों में तेज उछाल पर अंकुश लगने के आसार भी दिख रहे हैं, क्योंकि सप्ताहांत के दौरान होर्मुज जलडमरूमध्य से ऊर्जा आपूर्ति की सुरक्षित आवाजाही ने बाजार की चिंताओं को काफी हद तक कम किया है। आंकड़ों के अनुसार, सऊदी अरब ने पिछले छह दिनों के दौरान होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते 2.9 मिलियन बैरल प्रति दिन की दर से कच्चे तेल का परिवहन जारी रखा। इसके साथ ही उपग्रह से प्राप्त तस्वीरों से यह जानकारी सामने आई है कि सप्ताहांत में सऊदी अरब के खाड़ी स्थित निर्यात टर्मिनलों पर कुल 14 मिलियन बैरल की संयुक्त क्षमता वाले सुपरटैंकर खड़े थे। जून के बाद से वहां देखे गए सुपरटैंकरों की यह सबसे बड़ी संख्या है। डॉयचे बैंक के रणनीतिकारों ने रेखांकित किया है कि बीते 24 घंटों में बाजारों ने काफी मजबूत प्रदर्शन दर्ज किया है। हालांकि, पश्चिम एशिया में कूटनीतिक समाधान की बढ़ती उम्मीदों के बीच ब्रेंट क्रूड एक बार फिर थोड़े समय के लिए 100 डॉलर प्रति बैरल के स्तर से नीचे आ गया। रणनीतिकारों के अनुसार, ब्रेंट क्रूड में 3.40 प्रतिशत की गिरावट सीधे तौर पर क्षेत्रीय कूटनीति को लेकर निवेशकों की सुधरती धारणा और आपूर्ति संकट के टलने के संकेतों के कारण देखने को मिली। डब्ल्यूटीआई कच्चा तेल और उसके निर्धारण के प्रमुख कारक वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट अंतरराष्ट्रीय बाजारों में बेचे जाने वाले कच्चे तेल के प्रमुख प्रकारों में से एक है। वैश्विक बाजार में ब्रेंट और दुबई क्रूड के साथ डब्ल्यूटीआई तीन मुख्य बेंचमार्क में गिना जाता है। अपने अपेक्षाकृत कम घनत्व और कम सल्फर स्तर की वजह से डब्ल्यूटीआई को हल्का और मीठा कच्चा तेल कहा जाता है। इसे उच्च गुणवत्ता वाला तेल माना जाता है, जिसे रिफाइन करना काफी आसान होता है। इसका उत्पादन संयुक्त राज्य अमेरिका में होता है और इसका वितरण कुशिंग हब के माध्यम से किया जाता है, जिसे दुनिया में पाइपलाइनों का चौराहा माना जाता है। अन्य संपत्तियों की तरह डब्ल्यूटीआई की कीमतें भी मुख्य रूप से मांग और आपूर्ति के बुनियादी नियमों से तय होती हैं। वैश्विक आर्थिक विकास में तेजी जहां तेल की मांग को बढ़ाती है, वहीं कमजोर विकास मांग को घटा देता है। इसके अलावा राजनीतिक अस्थिरता, क्षेत्रीय संघर्ष और व्यापारिक प्रतिबंध आपूर्ति श्रृंखला को बाधित करके कीमतों को प्रभावित करते हैं। चूंकि कच्चे तेल का अधिकांश अंतरराष्ट्रीय व्यापार अमेरिकी डॉलर में होता है, इसलिए डॉलर के कमजोर होने से खरीदारों के लिए तेल सस्ता हो जाता है, जबकि डॉलर में मजबूती से तेल महंगा हो जाता है। ओपेक, भंडार डेटा और अन्य वित्तीय बाजारों की चाल पेट्रोलियम निर्यातक देशों का संगठन यानी ओपेक 12 तेल उत्पादक देशों का एक समूह है, जो साल में दो बार होने वाली बैठकों में अपने सदस्य देशों के लिए उत्पादन कोटा निर्धारित करता है। ओपेक द्वारा उत्पादन घटाने से आपूर्ति सीमित हो जाती है और कीमतें बढ़ जाती हैं, जबकि उत्पादन बढ़ाने पर उलटा प्रभाव पड़ता है। इसमें दस अतिरिक्त गैर-ओपेक देशों को जोड़कर ओपेक प्लस बनता है, जिसमें रूस सबसे प्रमुख भागीदार है। इसके अलावा, अमेरिकी पेट्रोलियम संस्थान मंगलवार को और अमेरिकी ऊर्जा सूचना प्रशासन बुधवार को अपने साप्ताहिक तेल भंडार आंकड़े जारी करते हैं। भंडार में गिरावट मजबूत मांग का संकेत देती है जिससे कीमतें चढ़ती हैं, जबकि भंडार बढ़ने से कीमतें गिरती हैं। इन दोनों संस्थाओं के परिणाम 75 प्रतिशत मौकों पर 1 प्रतिशत के अंतर के भीतर समान रहते हैं, हालांकि सरकारी एजेंसी होने के नाते ईआईए के आंकड़ों को अधिक विश्वसनीय माना जाता है। कच्चे तेल के साथ-साथ अन्य वित्तीय बाजारों में भी हलचल देखी जा रही है। ऑस्ट्रेलियाई डॉलर बनाम अमेरिकी डॉलर एशियाई सत्र में 0.7100 के ऊपर रहा, जिसे रिज़र्व बैंक ऑफ़ ऑस्ट्रेलिया की सहायक गवर्नर सारा हंटर और गवर्नर मिशेल बुलक के कड़े बयानों से सहारा मिला, हालांकि अमेरिकी फेडरल रिजर्व के आक्रामक रुख और पश्चिम एशिया में जारी तनाव ने डॉलर को समर्थन दिया। डॉलर बनाम जापानी येन 157.50 के स्तर के पास कारोबार करता दिखा। बैंक ऑफ़ जापान ने अपनी अल्पकालिक ब्याज दर 1.00 प्रतिशत से बढ़ाकर 1.25 प्रतिशत कर दी, जो 7-2 के बहुमत से हुआ निर्णय था और 31 वर्षों का उच्चतम स्तर है। दूसरी ओर, सोने की कीमतें गिरकर 4,315 डॉलर के क्षेत्र में तीन दिन के निचले स्तर पर आ गईं। इसके अलावा बिटकॉइन पिछले दिन 6.7 प्रतिशत उछलने के बाद सुस्ती दिखाते हुए 85,500 डॉलर से नीचे आ गया, जबकि स्पॉट बिटकॉइन ईटीएफ में सोमवार को लगभग 1 अरब डॉलर का प्रवाह देखा गया और स्ट्रैटेजी ने अपने खजाने में 950 बीटीसी जोड़े। इसका आप पर असर अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों में आ रहे इस उतार-चढ़ाव का सीधा असर आम उपभोक्ताओं के परिवहन खर्च और घरेलू बजट पर पड़ता है। • भारत में: कच्चे तेल का 92 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बना रहना भारत जैसे बड़े तेल आयातक देश के लिए आयात बिल बढ़ाता है। यदि यह स्तर लंबे समय तक बना रहता है तो तेल विपणन कंपनियों पर पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतों में कटौती रोकने या उन्हें बढ़ाने का दबाव बन सकता है। • वैश्विक यात्रियों और उपभोक्ताओं पर: ईंधन की अंतरराष्ट्रीय दरें स्थिर रहने से विमानन कंपनियों की परिचालन लागत ऊंची बनी रहेगी। इसके चलते आने वाले दिनों में हवाई टिकटों की कीमतों में तत्काल कमी आने की संभावना सीमित रहेगी। • शेयर और कमोडिटी निवेशकों पर: तेल की कीमतों में सीमित उछाल और कूटनीतिक शांति की कोशिशों से ऊर्जा शेयरों में उतार-चढ़ाव रह सकता है। कमोडिटी व्यापारियों को अमेरिकी साप्ताहिक इन्वेंट्री डेटा और संयुक्त राष्ट्र की बैठकों पर कड़ी नजर रखनी चाहिए। • मुद्रास्फीति और दैनिक बजट पर: अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तेल महंगा रहने से माल ढुलाई लागत ऊंची बनी रहती है। इसका सीधा असर खाद्य पदार्थों और दैनिक उपभोग की वस्तुओं की खुदरा कीमतों पर देखा जा सकता है। ऐसा क्यों हुआ कच्चे तेल की कीमतों में चार दिनों की लगातार गिरावट के बाद यह स्थिरता कूटनीतिक बैठकों की अनिश्चितता और भौतिक तेल आपूर्ति की निरंतरता के संतुलन के कारण आई है। • संयुक्त राष्ट्र महासभा में कूटनीतिक हलचल: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन के बीच संभावित वार्ता की खबरों ने व्यापारियों को सतर्क कर दिया है। इस बैठक से पश्चिम एशिया में तनाव कम होने या प्रतिबंधों पर चर्चा की उम्मीद जगी है। • होर्मुज से सुरक्षित तेल परिवहन: सप्ताहांत में होर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों की सुरक्षित आवाजाही ने आपूर्ति ठप होने का तात्कालिक डर खत्म कर दिया है। सऊदी अरब द्वारा 2.9 मिलियन बैरल प्रति दिन की दर से तेल भेजने और 14 मिलियन बैरल क्षमता वाले टैंकरों की मौजूदगी ने आपूर्ति की मजबूती दिखाई। • ब्रेंट क्रूड पर सुधरती धारणा का असर: क्षेत्रीय कूटनीति की उम्मीदों के कारण ब्रेंट क्रूड में 3.40 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई और वह 100 डॉलर से नीचे आया। इस व्यापक बाजार नरमी ने डब्ल्यूटीआई में भी किसी भी एकतरफा तेजी को सीमित रखा है। सवाल-जवाब 1. डब्ल्यूटीआई कच्चे तेल की कीमत इस समय क्या चल रही है? मंगलवार को यूरोपीय कारोबारी घंटों के दौरान डब्ल्यूटीआई कच्चे तेल की कीमत लगभग 92.40 डॉलर प्रति बैरल के आसपास रही। 2. संयुक्त राष्ट्र में किन नेताओं की संभावित मुलाकात पर बाजार की नजर है? बाजार की नजर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन के बीच संभावित बैठक पर टिकी है। 3. सऊदी अरब ने होर्मुज जलडमरूमध्य से कितना तेल भेजा है? सऊदी अरब ने पिछले छह दिनों में होर्मुज जलडमरूमध्य के जरिए 2.9 मिलियन बैरल प्रति दिन की दर से कच्चे तेल का परिवहन किया है। 4. सऊदी अरब के टर्मिनलों पर कितने बड़े टैंकर देखे गए? सप्ताहांत में उपग्रह तस्वीरों में 14 मिलियन बैरल की संयुक्त क्षमता वाले सुपरटैंकर सऊदी टर्मिनलों पर खड़े देखे गए, जो जून के बाद सबसे अधिक हैं। 5. बैंक ऑफ़ जापान ने ब्याज दरों में क्या बदलाव किया है? बैंक ऑफ़ जापान ने 7-2 के बहुमत से अपनी अल्पकालिक ब्याज दर 1.00 प्रतिशत से बढ़ाकर 31 साल के उच्च स्तर 1.25 प्रतिशत कर दी है। https://trendkia.com/market/snyukta-rashtra-men-kutanitika-vartaon-se-pahale-kachche-tela-men-sthirata-wti-92-dolara-prati-bairala-ke-para-36321 TrendKia — Har trend, sabse pehle.