सोने-चांदी की कीमतों में गिरावट: भू-राजनीतिक तनाव और ब्याज दरों के डर से बाजार पर दबाव अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल के कारण सोने और चांदी के भाव लुढ़क गए हैं। सितंबर में फेड रिजर्व द्वारा ब्याज दरें बढ़ाने की संभावना बढ़कर 50 प्रतिशत हो गई है। सोने और चांदी के बाजार में बुधवार को बड़ी गिरावट दर्ज की गई। एमसीएक्स (MCX) पर सोने की कीमतों में 1.45 लाख रुपये के स्तर से नीचे की गिरावट देखी गई, जबकि चांदी भी करीब 1,000 रुपये सस्ती हुई। यह गिरावट ऐसे समय में आई है जब अमेरिका और ईरान के बीच नए सिरे से भू-राजनीतिक तनाव पैदा हो गया है, जिससे वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता का माहौल है। भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल का प्रभाव हाल ही में अमेरिकी सेना ने ईरान के खिलाफ हवाई हमले किए हैं। यह कार्रवाई तब हुई जब ईरान पर होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले व्यावसायिक जहाजों पर हमले का आरोप लगा। इस घटनाक्रम ने कच्चे तेल की कीमतों में लगभग 3 प्रतिशत का उछाल ला दिया है, जिससे डब्ल्यूटीआई (WTI) क्रूड 72 डॉलर के पार चला गया है और ब्रेंट क्रूड 76 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गया है। ईरान ने अमेरिकी कार्रवाई को जून में हुए संघर्ष विराम समझौते का उल्लंघन करार दिया है और बदले की चेतावनी दी है। अमेरिकी हमलों ने बंदर अब्बास के रणनीतिक बंदरगाह को निशाना बनाया है, जिसके साथ ही वाशिंगटन ने ईरान पर नए प्रतिबंध भी लागू किए हैं। महंगाई और फेड रिजर्व की नीति कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि से महंगाई को लेकर दोबारा चिंताएं बढ़ गई हैं। निवेशकों की नजरें अब फेड रिजर्व की जून की बैठक के मिनट्स पर टिकी हैं, ताकि केंद्रीय बैंक के भविष्य के रुख का संकेत मिल सके। वर्तमान में बाजार सितंबर में फेड द्वारा ब्याज दरें बढ़ाने की संभावना को 50 प्रतिशत मानकर चल रहा है, जो एक दिन पहले तक 46 प्रतिशत थी। इसके अलावा, मई महीने में अमेरिका का व्यापार घाटा 77.6 अरब डॉलर तक पहुंच गया है, जो मार्च 2025 के बाद का उच्चतम स्तर है। सोने-चांदी पर असर अंतरराष्ट्रीय बाजार में स्पॉट गोल्ड 4,120 डॉलर प्रति औंस के आसपास और स्पॉट सिल्वर 60 डॉलर प्रति औंस के करीब कारोबार कर रहा है। डॉलर इंडेक्स के 101.12 के स्तर से ऊपर जाने ने भी बुलियन की कीमतों पर दबाव बनाया है। जतीन त्रिवेदी, जो एलकेपी सिक्योरिटीज में कमोडिटी और करेंसी के वीपी रिसर्च एनालिस्ट हैं, का मानना है कि एमसीएक्स गोल्ड में अंतरराष्ट्रीय रुझान के अनुरूप कमजोरी बनी हुई है। तकनीकी रूप से निकट भविष्य में सोने की ट्रेडिंग रेंज 1,44,250 से 1,46,250 रुपये के बीच रहने का अनुमान है। घरेलू स्तर पर, सऊदी अरब द्वारा अगस्त के लिए कच्चे तेल की कीमतों में कटौती के कारण रुपया 0.50 प्रतिशत मजबूत होकर 94.95 के स्तर पर आ गया है, जिसने भी सोने की कीमतों पर दबाव डाला है। इसका आप पर असर भारत में: कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट और रुपये की मजबूती से भारत के आयात बिल पर दबाव कम होगा, जिससे घरेलू स्तर पर ईंधन और सोने की कीमतों में उतार-चढ़ाव बना रहेगा। निवेशकों के लिए: वैश्विक अस्थिरता और फेड रिजर्व की संभावित ब्याज दर वृद्धि के कारण सोने और चांदी में निवेश के जोखिम बढ़ गए हैं, इसलिए सतर्क रहना उचित है। सवाल-जवाब 1. सोने और चांदी की कीमतों में गिरावट का मुख्य कारण क्या है? अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव, कच्चे तेल की कीमतों में उछाल और फेड रिजर्व द्वारा ब्याज दरें बढ़ाने की आशंका के चलते सोने और चांदी की कीमतों में गिरावट आई है। 2. फेड रिजर्व की दर वृद्धि की संभावना कितनी है? सितंबर में फेड रिजर्व द्वारा ब्याज दरें बढ़ाने की संभावना बढ़कर 50 प्रतिशत हो गई है, जो पहले 46 प्रतिशत थी। 3. रुपये की मजबूती का सोने पर क्या असर हुआ है? रुपया 0.50 प्रतिशत मजबूत होकर 94.95 पर पहुंच गया है, जिसने एमसीएक्स (MCX) सोने की कीमतों पर अतिरिक्त दबाव डाला है। 4. निकट भविष्य के लिए सोने की ट्रेडिंग रेंज क्या है? एलकेपी सिक्योरिटीज के अनुसार, एमसीएक्स (MCX) सोने के लिए निकट भविष्य में 1,44,250 से 1,46,250 रुपये की रेंज रहने का अनुमान है। https://trendkia.com/market/sone-chandi-ki-kimaton-men-giravata-bhu-rajanitika-tanava-aura-byaja-daron-ke-dara-se-bajara-para-dabava-5692 TrendKia — Har trend, sabse pehle.