सोने की कीमतों में शानदार तेजी, मध्य पूर्व के तनाव के बीच 4,100 डॉलर के पार निकला भाव वैश्विक अनिश्चितताओं और अमेरिका-ईरान के बीच बढ़ते तनाव के कारण निवेशकों ने सुरक्षित निवेश के तौर पर सोने का रुख किया है। इसके चलते पीली धातु की कीमतों में जबरदस्त उछाल आया है और यह 4,100 डॉलर के अहम स्तर को पार कर गई है। वैश्विक कमोडिटी बाजार में पीली धातु की चमक एक बार फिर से काफी तेज हो गई है। गुरुवार को एशियाई बाजार के शुरुआती कारोबारी घंटों में सोने की कीमतों ने भारी बढ़त हासिल की और इसका भाव 4,125 डॉलर के करीब पहुंच गया। 4,100 डॉलर के महत्वपूर्ण मनोवैज्ञानिक स्तर को पार करने के बाद निवेशकों का रुझान इस सुरक्षित निवेश विकल्प की तरफ तेजी से बढ़ा है। यह लगातार चौथा कारोबारी दिन है जब सोने के भाव में मजबूत उछाल दर्ज किया गया है। इस हफ्ते अब तक इस कीमती धातु में लगभग 2.5 प्रतिशत की शानदार तेजी आ चुकी है। बाजार के मौजूदा रुझान को देखते हुए यह पिछले तीन महीनों से अधिक समय में सोने का सबसे बेहतरीन साप्ताहिक प्रदर्शन साबित होने जा रहा है। मध्य पूर्व में गहराते भू-राजनीतिक संकट और अमेरिकी केंद्रीय बैंक की ब्याज दरों से जुड़ी अटकलों ने निवेशकों को सोने की ओर लौटने पर मजबूर कर दिया है। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता भू-राजनीतिक तनाव सोने की कीमतों में आए इस अचानक उछाल का सबसे बड़ा कारण मध्य पूर्व में जारी उथल-पुथल है। अमेरिका और ईरान के बीच चल रहा टकराव अब अपने दूसरे सप्ताह में प्रवेश कर चुका है और इसके शांत होने के कोई स्पष्ट संकेत नहीं दिख रहे हैं। बुधवार को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कड़े शब्दों में चेतावनी दी कि यदि ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य में किसी भी जहाज पर हमला करता है, तो अमेरिका इसके जवाब में ईरान के किसी पुल या बिजली संयंत्र को नष्ट कर देगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि इन संभावित लक्ष्यों में ईरान की राजधानी तेहरान में स्थित बुनियादी ढांचे भी शामिल हो सकते हैं। इस चेतावनी ने वैश्विक कूटनीतिक हलकों में खलबली मचा दी है। दूसरी तरफ ईरान ने भी अमेरिकी धमकियों का कड़ा जवाब दिया है। ईरान ने चेतावनी दी है कि यदि वाशिंगटन ट्रंप की धमकियों को हकीकत में बदलता है, तो वह पूरे क्षेत्र में मौजूद अमेरिका से जुड़े बुनियादी ढांचे और ऊर्जा सुविधाओं को निशाना बनाएगा। इस जुबानी जंग के बीच बुधवार को ही अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने एक बयान दिया। उन्होंने ईरान पर अमेरिका के साथ समझौता करने को लेकर गंभीर नहीं होने का आरोप लगाया। हालांकि रुबियो ने यह भी जोर देकर कहा कि वाशिंगटन मध्य पूर्व में कूटनीति का रास्ता अपनाने के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है। इन लगातार बढ़ती धमकियों और सैन्य तनाव की आशंकाओं ने वैश्विक बाजारों में डर का माहौल पैदा कर दिया है, जिससे निवेशक अपनी पूंजी को सुरक्षित रखने के लिए भारी मात्रा में सोने की खरीदारी कर रहे हैं। ब्याज दरों को लेकर बदलती बाजार की उम्मीदें सुरक्षित निवेश की मांग के अलावा, अमेरिकी फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति को लेकर निवेशकों की बदलती उम्मीदें भी बाजार की दिशा तय कर रही हैं। मुद्रा बाजार अब जुलाई की नीतिगत बैठक में फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में बढ़ोतरी की 34 प्रतिशत संभावना जता रहे हैं। यह आंकड़ा केवल एक सप्ताह पहले मात्र 10 प्रतिशत पर था, जो बाजार की धारणा में आए अचानक बदलाव को दर्शाता है। सीएमई फेडवॉच टूल के आंकड़ों के अनुसार, व्यापारी अब सितंबर महीने में भी ब्याज दरों में कम से कम 25 बेसिस पॉइंट (bps) की बढ़ोतरी की 78 प्रतिशत उम्मीद लगा रहे हैं। आमतौर पर जब ब्याज दरें बढ़ती हैं, तो सोने की कीमतों पर दबाव पड़ता है क्योंकि सोने में निवेश करने पर निवेशकों को कोई निश्चित ब्याज या यील्ड नहीं मिलती है। ऊंचे ब्याज दर वाले माहौल में पूंजी का प्रवाह सरकारी बॉन्ड जैसी संपत्तियों की ओर चला जाता है। लेकिन वर्तमान स्थिति में मध्य पूर्व के तनाव और गहरी मंदी की आशंकाओं ने ब्याज दरों के गणित को पीछे छोड़ दिया है। भू-राजनीतिक अस्थिरता का डर इतना हावी है कि संभावित दर वृद्धि की खबरों के बावजूद सोने में लगातार तेजी बनी हुई है। विशेषज्ञों की राय और बाजार का तकनीकी पक्ष बाजार के दिग्गज विश्लेषक सोने की मौजूदा चाल को तकनीकी और फौरी राहत का मिलाजुला परिणाम मान रहे हैं। टीडी सिक्योरिटीज के वरिष्ठ कमोडिटी रणनीतिकार रयान मैके का कहना है कि यह हालिया उछाल ज्यादातर फ्लो-संचालित महसूस होता है, जो थोड़ी बहुत डिप-बाइंग और 4,000 डॉलर प्रति औंस के निचले स्तर के बरकरार रहने की भारी राहत से प्रेरित है। मैके ने इस बात पर जोर दिया कि वह इसे एक नए ढांचागत रुझान की शुरुआत नहीं मानते हैं। उनका मानना है कि ऊर्जा की कीमतें अब फिर से जोर पकड़ने लगी हैं, और यह चिंता अंततः सोने की कीमतों की ऊपरी सीमा को सीमित कर देगी। वित्तीय बाजारों में सोने का डॉलर और अमेरिकी ट्रेजरी के साथ विपरीत संबंध (इनवर्स कोरिलेशन) होता है। डॉलर के कमजोर होने पर सोने में उछाल आता है। इसके अलावा जोखिम भरी संपत्तियों जैसे कि शेयर बाजार के साथ भी इसका विपरीत संबंध है। जब शेयर बाजार में गिरावट आती है, तो सुरक्षित निवेश के तौर पर कीमती धातुओं को फायदा मिलता है। वर्तमान में बाजार में जोखिम से बचने की भावना हावी है, जो एक्सएयू/यूएसडी (XAU/USD) के रूप में डॉलर में मूल्य निर्धारण वाले इस एसेट को लगातार समर्थन दे रही है। केंद्रीय बैंकों द्वारा रिकॉर्ड सोने की खरीदारी सोने को हमेशा से मूल्य के संचय (स्टोर ऑफ वैल्यू) और विनिमय के माध्यम के रूप में देखा जाता रहा है। मुद्रास्फीति और गिरती मुद्राओं के खिलाफ इसे एक मजबूत ढाल माना जाता है, क्योंकि यह किसी विशिष्ट जारीकर्ता या सरकार पर निर्भर नहीं करता है। यही कारण है कि दुनिया भर के केंद्रीय बैंक सोने के सबसे बड़े खरीदार बनकर उभरे हैं। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के आंकड़ों के अनुसार, साल 2022 में केंद्रीय बैंकों ने अपने भंडार में 70 अरब डॉलर मूल्य का 1,136 टन सोना जोड़ा था। जब से रिकॉर्ड रखना शुरू किया गया है, तब से यह किसी भी एक वर्ष में की गई सबसे बड़ी खरीदारी है। अशांत समय में अपनी अर्थव्यवस्था की कथित ताकत को मजबूत करने और डॉलर पर निर्भरता कम करने के लिए केंद्रीय बैंक अपनी आरक्षित संपत्ति में विविधता ला रहे हैं। चीन, भारत और तुर्की जैसी उभरती अर्थव्यवस्थाओं के केंद्रीय बैंक बहुत तेजी से अपने सोने के भंडार में वृद्धि कर रहे हैं। किसी देश के पास उच्च स्वर्ण भंडार होना उसकी शोधनक्षमता (सॉल्वेंसी) और आर्थिक स्थिरता का एक बड़ा प्रतीक माना जाता है। मुद्रा बाजारों की हलचल और आर्थिक आंकड़े सोने के बाजार से इतर वैश्विक मुद्रा बाजारों में भी कई महत्वपूर्ण गतिविधियां देखने को मिल रही हैं। ब्रिटिश पाउंड (GBP/USD) लगातार संघर्ष कर रहा है और बुधवार को दिन के दूसरे पहर में भी यह 1.3400 के स्तर से नीचे ही बना रहा। ब्रिटेन में जून महीने की वार्षिक उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) मुद्रास्फीति ठंडी होकर 2.6 प्रतिशत पर आ गई है, जबकि बाजार का अनुमान 2.7 प्रतिशत का था। इस गिरावट ने ब्रिटिश पाउंड के लिए रिकवरी की गति हासिल करना मुश्किल कर दिया है। दूसरी ओर, यूरो (EUR/USD) बुधवार को 1.1400 के आसपास एक बहुत ही संकीर्ण दायरे में कारोबार कर रहा है। बाजार में किसी बड़े आर्थिक डेटा के अभाव और मध्य पूर्व में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव ने इस जोड़ी की बढ़त को सीमित कर रखा है। अब निवेशकों की नजरें यूरोपीय सेंट्रल बैंक (ECB) पर टिकी हैं, जो गुरुवार को अपने मौद्रिक नीति के अहम फैसलों की घोषणा करने वाला है। इसके अलावा, ऑस्ट्रेलिया भी गुरुवार को 01:30 जीएमटी पर अपनी जून महीने की रोजगार रिपोर्ट प्रकाशित करेगा। बाजार सहभागियों को उम्मीद है कि ऑस्ट्रेलिया में 15K नई नौकरियां जुड़ी होंगी, जबकि बेरोजगारी दर मई के समान ही 4.4 प्रतिशत पर स्थिर रहने का अनुमान है। क्रिप्टोकरेंसी और पारंपरिक वित्त का संगम शेयर बाजारों में मची उथल-पुथल के बीच क्रिप्टोकरेंसी बाजार ने कुछ अलग तरह की मजबूती दिखाई है। बिटवाइज के मुख्य निवेश अधिकारी (CIO) मैट होगन के अनुसार, अगला क्रिप्टो बुल मार्केट ब्लॉकचेन-आधारित वित्तीय बुनियादी ढांचे और पारंपरिक वित्त के बीच बढ़ते संगम से प्रेरित हो सकता है। मंगलवार देर रात प्रकाशित एक विस्तृत रिपोर्ट में होगन ने तर्क दिया कि क्रिप्टो बाजार में संभावित रूप से निचले स्तर (मार्केट बॉटम) के शुरुआती संकेत दिख रहे हैं। उन्होंने आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि 1 जुलाई के बाद से बिटकॉइन में 9 प्रतिशत की अच्छी खासी बढ़त दर्ज की गई है, जबकि इसी समान अवधि में नैस्डैक 100 इंडेक्स में 6 प्रतिशत की गिरावट आई है। यह विरोधाभासी प्रदर्शन पारंपरिक जोखिम वाले एसेट और डिजिटल एसेट के बीच बदलती गतिशीलता को दर्शाता है। इसका आप पर असर • वैश्विक निवेशकों के लिए: सोने की कीमतों में आया यह उछाल बताता है कि शेयर बाजार और वैश्विक राजनीति में अनिश्चितता बढ़ने पर सुरक्षित निवेश (सेफ-हेवन) की मांग बढ़ जाती है, जिससे पोर्टफोलियो में विविधता लाना जरूरी हो गया है। • आम खरीदारों के लिए: 4,100 डॉलर के पार जाने का सीधा मतलब है कि खुदरा बाजार में सोने के आभूषण और सिक्के खरीदने वालों को अब पहले की तुलना में काफी अधिक कीमत चुकानी पड़ेगी। सवाल-जवाब 1. सोने की कीमत किस नए स्तर पर पहुंच गई है? सोने की कीमतें लगातार बढ़ते हुए 4,100 डॉलर के मनोवैज्ञानिक स्तर को पार कर गई हैं और गुरुवार के शुरुआती एशियाई कारोबार में 4,125 डॉलर के करीब पहुंच गई थीं। 2. सोने की कीमतों में इस भारी उछाल का मुख्य कारण क्या है? इस उछाल का मुख्य कारण अमेरिका और ईरान के बीच मध्य पूर्व में बढ़ता तनाव है, जिसने निवेशकों को डरा दिया है और वे सुरक्षित निवेश के तौर पर सोने की खरीदारी कर रहे हैं। 3. ईरान को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने क्या चेतावनी दी है? डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी दी है कि यदि ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों पर हमला करता है, तो अमेरिका इसके जवाब में तेहरान सहित ईरान के पुलों या बिजली संयंत्रों को नष्ट कर देगा। 4. अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों को लेकर बाजार की क्या उम्मीदें हैं? बाजार अब जुलाई की नीतिगत बैठक में ब्याज दर बढ़ने की 34 प्रतिशत और सितंबर में कम से कम 25 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी की 78 प्रतिशत संभावना जता रहा है। 5. साल 2022 में केंद्रीय बैंकों ने कितना सोना खरीदा था? वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के अनुसार, साल 2022 में दुनिया भर के केंद्रीय बैंकों ने 70 अरब डॉलर मूल्य का कुल 1,136 टन सोना खरीदा, जो एक रिकॉर्ड है। 6. हाल ही में बिटकॉइन का प्रदर्शन कैसा रहा है? बिटवाइज के सीआईओ मैट होगन के अनुसार, 1 जुलाई के बाद से बिटकॉइन में 9 प्रतिशत की वृद्धि हुई है, जबकि इसी अवधि में नैस्डैक 100 इंडेक्स में 6 प्रतिशत की गिरावट आई है। https://trendkia.com/market/sone-ki-kimaton-men-shanadara-teji-middle-east-ke-tanava-ke-bicha-4-100-dolara-ke-para-nikala-bhava-9977 TrendKia — Har trend, sabse pehle.