# दक्षिण अफ्रीकी रिजर्व बैंक ने ब्याज दरें 7.25% तक बढ़ाईं, वैश्विक तनाव के बीच रैंड पर दबाव

> साउथ अफ्रीकन रिजर्व बैंक ने अपनी प्रमुख ब्याज दर में 25 आधार अंकों की बढ़ोतरी की है। इसके बावजूद वैश्विक तेल की कीमतों, मजबूत अमेरिकी डॉलर और आगामी राजनीतिक घटनाक्रमों के चलते रैंड के लिए चुनौतियां बरकरार हैं।

**Type:** article · **Category:** बाज़ार · **Published:** 2026-09-24 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/market/south-african-reserve-bank-ne-byaja-daren-7-25-taka-barhain-vaishvika-tanava-ke-bicha-rand-para-dabava-37830 · **Language:** Hindi
**Tags:** साउथ अफ्रीकन रिजर्व बैंक, दक्षिण अफ्रीका रैंड, ब्याज दरें, मुद्रास्फीति, बैंक ऑफ जापान, अमेरिकी डॉलर, सोना

साउथ अफ्रीकन रिजर्व बैंक ने अपनी ताजा मौद्रिक नीति बैठक में मानक ब्याज दर को 25 आधार अंकों से बढ़ाकर 7.25 प्रतिशत करने का कदम उठाया है। चालू वर्ष में यह केंद्रीय बैंक द्वारा की गई दूसरी दर वृद्धि है, जो मई के फैसले के बाद सामने आई है। साल की शुरुआत में विश्लेषक और वित्तीय बाजार दर कटौतियों की उम्मीद लगा रहे थे, लेकिन हाल के महीनों में ईरान संघर्ष और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के कारण यह अनुमान पूरी तरह बदल चुका है। केंद्रीय बैंक को महंगाई पर काबू पाने के लिए दरों में पुनः वृद्धि का रास्ता चुनना पड़ा है।

## रैंड की चाल और मुद्रा बाजार की प्रतिक्रिया
ब्याज दर में इस इजाफे के बावजूद दक्षिण अफ्रीकी मुद्रा रैंड में एक प्रतिशत से कुछ अधिक की गिरावट दर्ज की गई। हालांकि, मुद्रा में यह कमजोरी दर के आधिकारिक ऐलान से पहले ही आ चुकी थी, जिसका मतलब है कि गिरावट का कारण यह मौद्रिक फैसला नहीं था। फैसले की घोषणा के बाद विनिमय दर संभलती दिखी, जबकि दिन के दौरान दर्ज कमजोरी का मुख्य कारण मजबूत अमेरिकी डॉलर था। वैश्विक स्तर पर डॉलर की मांग बढ़ने से कई उभरते बाजारों की मुद्राओं पर असर देखा गया है।

केंद्रीय बैंक के गवर्नर कगान्यागो ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में आर्थिक चुनौतियों से निपटने का संकल्प दोहराया। इसके बावजूद यह स्पष्ट नजर आया कि देश की अर्थव्यवस्था ईरान संघर्ष से उत्पन्न प्रभावों से जूझ रही है। मौद्रिक नीति समिति ने आर्थिक विकास के सामने नीचे की ओर जाने वाले जोखिमों को रेखांकित किया, जबकि मुद्रास्फीति के ऊपर जाने का जोखिम बना हुआ है। आने वाले महीनों में मूल्य स्थिरता और विकास के बीच संतुलन साधना केंद्रीय बैंक के लिए एक प्रमुख विषय बना रहेगा।

## आगामी नीतिगत कदम और आर्थिक अनुमान
मौद्रिक समीक्षा से यह भी संकेत मिला कि भविष्य में एक और दर वृद्धि की संभावना के लिए शर्तें अब पहले से अधिक कठिन हो गई हैं। अपने आधारभूत परिदृश्य में केंद्रीय बैंक फिलहाल किसी अन्य बढ़ोतरी का अनुमान नहीं लगा रहा है। वर्तमान में मुद्रास्फीति 4.4 प्रतिशत के स्तर पर है, जिसके सालाना आधार पर बढ़कर 5 प्रतिशत से ऊपर जाने की आशंका जताई गई है। नीति निर्माताओं के रुख के अनुसार, जब तक मुद्रास्फीति में इससे भी अधिक तीव्र उछाल नहीं आता, तब तक अगली दर वृद्धि की संभावना बेहद कम है।

विश्लेषकों के आकलन के अनुसार, वर्तमान परिस्थितियां रैंड के पक्ष में मजबूत रुख के अनुकूल नहीं हैं। अमेरिका में ब्याज दर अपेक्षाओं में हो रही बढ़ोतरी आने वाले हफ्तों में मुद्रा पर और अधिक दबाव बना सकती है। इसके साथ ही, नवंबर में होने वाले स्थानीय चुनावों को लेकर घरेलू मोर्चे पर राजनीतिक जोखिम भी बना हुआ है, जो वित्तीय बाजारों की धारणा को प्रभावित कर सकता है।

## प्रमुख वैश्विक केंद्रीय बैंकों के फैसले
दक्षिण अफ्रीका के अलावा अन्य प्रमुख वैश्विक केंद्रीय बैंकों ने भी अपनी मौद्रिक नीतियों के संकेत दिए हैं। बैंक ऑफ जापान ने 7-2 के बहुमत से अपने अल्पकालिक ब्याज दर लक्ष्य को 1.00 प्रतिशत से बढ़ाकर 1.25 प्रतिशत कर दिया है। यह कदम जापान में मौद्रिक नीति को सामान्य बनाने की दिशा में एक और बड़ा पड़ाव है, जो बाजार की उम्मीदों के पूरी तरह अनुरूप रहा है। जापानी बॉन्ड यील्ड में तेजी ने येन को समर्थन दिया है, जबकि संभावित सरकारी हस्तक्षेप के जोखिम भी बने हुए हैं।

इसके विपरीत, स्विस नेशनल बैंक ने अपनी प्रमुख नीतिगत ब्याज दर को 0 प्रतिशत पर अपरिवर्तित रखा है, जो बाजार के अनुमानों के मुताबिक था। स्विस केंद्रीय बैंक ने कहा कि उसके पास रखी बैंकों की मांग जमाओं पर एक निश्चित सीमा तक नीतिगत दर के हिसाब से भुगतान किया जाएगा। स्विट्जरलैंड के लिए 2026 की मुद्रास्फीति का अनुमान 0.6 प्रतिशत से बढ़ाकर 0.7 प्रतिशत कर दिया गया है, जबकि आर्थिक परिदृश्य का मुख्य जोखिम वैश्विक अर्थव्यवस्था के घटनाक्रमों से जुड़ा है।

## अंतरराष्ट्रीय बाजारों और परिसंपत्तियों की स्थिति
विदेशी मुद्रा और कमोडिटी बाजारों में भी महत्वपूर्ण हलचल देखने को मिल रही है। एशियाई सत्र में ऑस्ट्रेलियाई डॉलर बनाम अमेरिकी डॉलर (AUD/USD) 0.7000 के स्तर की ओर गिरता दिखा। ऑस्ट्रेलिया के अगस्त महीने के श्रम बाजार आंकड़ों में बेरोजगारी दर बढ़कर 4.6 प्रतिशत पर पहुंच गई, जबकि इसके 4.5 प्रतिशत रहने का अनुमान था। हालांकि, रोजगार परिवर्तन के आंकड़ों ने 39.5 हजार के साथ अनुमान को पीछे छोड़ दिया।

उधर, डॉलर के मुकाबले येन (USD/JPY) तीन सप्ताह के उच्च स्तर से फिसलकर एशियाई कारोबार में 158.00 के करीब आ गया। अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ओर से सख्त रुख के अनुमान और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में मजबूती के दम पर डॉलर दो महीने के उच्च स्तर के करीब मजबूती बनाए हुए है।

कमोडिटी बाजार में, सोने की कीमतों में लगातार दूसरे दिन नकारात्मक रुख बना रहा। यूरोपीय सत्र के पूर्वार्ध में सोना 4,300 डॉलर के स्तर से नीचे फिसलकर एक सप्ताह के निचले स्तर पर कारोबार करता देखा गया। बाजार भागीदार अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच होने वाली अहम बैठक के परिणामों का इंतजार कर रहे हैं। हालांकि किसी बड़े समझौते की उम्मीद कम है, फिर भी दुर्लभ खनिज तत्वों (रेयर अर्थ्स), तकनीकी प्रतिबंधों और व्यापार विराम के विस्तार को लेकर होने वाली प्रगति पर निवेशकों की नजरें टिकी हुई हैं।

## इसका आप पर असर
वैश्विक स्तर पर केंद्रीय बैंकों द्वारा ब्याज दरों में बढ़ोतरी और मजबूत डॉलर से उभरते बाजारों में विदेशी मुद्रा विनिमय और आयात लागत सीधे प्रभावित होगी।

- **मुद्रा विनिमय पर प्रभाव:** रैंड और अन्य उभरती मुद्राओं पर दबाव रहने से अंतरराष्ट्रीय लेन-देन अधिक खर्चीला हो सकता है। आयातकों और विदेशी मुद्रा में भुगतान करने वालों को विनिमय दरों में उतार-चढ़ाव पर नजर रखनी चाहिए।
- **कच्चे तेल और ईंधन की कीमतें:** मध्य पूर्व में तनाव और तेल की ऊंची कीमतों से वैश्विक परिवहन और रसद लागत बढ़ सकती है। दैनिक उपभोक्ताओं के लिए इसका असर पेट्रोल, डीजल और आवश्यक वस्तुओं के दामों पर पड़ सकता है।
- **सोने के निवेशकों के लिए:** सोने की कीमतें 4,300 डॉलर से नीचे आने और मजबूत डॉलर के चलते कीमती धातुओं में अल्पकालिक उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है। सर्राफा निवेशक बड़े नीतिगत फैसलों और भू-राजनीतिक वार्ताओं के स्पष्ट होने की प्रतीक्षा कर सकते हैं।
- **ऋण और उधारी लागत:** केंद्रीय बैंकों द्वारा सख्ती बनाए रखने से अंतरराष्ट्रीय वित्तीय बाजारों में उधारी लागत ऊंची बनी रह सकती है। विदेशी मुद्रा में ऋण लेने वाले व्यवसायों को अपनी ब्याज देनदारियों की योजना सावधानी से बनानी होगी।

## ऐसा क्यों हुआ
दक्षिण अफ्रीकी रिजर्व बैंक को ईरान संघर्ष के चलते कच्चे तेल की कीमतों में तेजी और लगातार बनी महंगाई के कारण ब्याज दरें बढ़ाने के लिए मजबूर होना पड़ा है।

- **ईरान संघर्ष और तेल की कीमतें:** भू-राजनीतिक तनाव के चलते कच्चे तेल की कीमतों में उछाल आया है, जिससे वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाएं प्रभावित हुई हैं। इसके परिणामस्वरूप मुद्रास्फीति का दबाव बढ़ा और पहले से सोची गई दर कटौतियों की योजनाएं टल गईं।
- **बढ़ती मुद्रास्फीति का जोखिम:** दक्षिण अफ्रीका में महंगाई 4.4 प्रतिशत से बढ़कर 5 प्रतिशत से ऊपर जाने की आशंका है। केंद्रीय बैंक को मध्यम अवधि में कीमतों को अनियंत्रित होने से रोकने के लिए समय रहते नीति सख्त करनी पड़ी।
- **मजबूत अमेरिकी डॉलर:** अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा दरों को ऊंचा रखने के अनुमानों ने डॉलर को मजबूती दी है। इसके चलते रैंड सहित दुनिया भर की कई मुद्राओं पर तेज दबाव बना हुआ है।
- **घरेलू राजनीतिक अनिश्चितता:** नवंबर में देश में होने वाले स्थानीय चुनावों को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। इसने विदेशी निवेशकों के विश्वास को सतर्क कर दिया है, जिससे घरेलू मुद्रा के त्वरित सुधार की गुंजाइश सीमित हो गई है।

## सवाल-जवाब

### 1. साउथ अफ्रीकन रिजर्व बैंक ने ब्याज दर में कितनी बढ़ोतरी की है?
केंद्रीय बैंक ने अपनी मानक ब्याज दर को 25 आधार अंकों से बढ़ाकर 7.25 प्रतिशत कर दिया है।

### 2. क्या इस साल दक्षिण अफ्रीका में पहले भी दरें बढ़ाई गई थीं?
हां, यह इस वर्ष की दूसरी दर वृद्धि है, इससे पहले मई में भी दरों में बढ़ोतरी की गई थी।

### 3. दक्षिण अफ्रीका में महंगाई को लेकर क्या अनुमान है?
वर्तमान में मुद्रास्फीति 4.4 प्रतिशत पर है, जिसके सालाना आधार पर बढ़कर 5 प्रतिशत से ऊपर जाने की संभावना जताई गई है।

### 4. बैंक ऑफ जापान ने अपनी ब्याज दर को लेकर क्या फैसला लिया?
बैंक ऑफ जापान ने 7-2 के बहुमत से अपने अल्पकालिक ब्याज दर लक्ष्य को 1.00 प्रतिशत से बढ़ाकर 1.25 प्रतिशत कर दिया है।

### 5. स्विस नेशनल बैंक की नीतिगत दर किस स्तर पर रखी गई है?
स्विस नेशनल बैंक ने अपनी प्रमुख नीतिगत दर को बिना किसी बदलाव के 0 प्रतिशत पर ही बरकरार रखा है।

### 6. अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की क्या स्थिति देखी गई?
सोने की कीमत में गिरावट आई और यह 4,300 डॉलर प्रति औंस के स्तर से नीचे फिसलकर एक सप्ताह के निचले स्तर पर पहुंच गया।

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