आरबीआई की ब्याज दरों पर स्टैण्डर्ड चार्टर्ड का नया अनुमान, वित्त वर्ष 2027 में हो सकती है 50 आधार अंकों की बढ़ोतरी स्टैण्डर्ड चार्टर्ड के रणनीतिकारों का मानना है कि भारतीय रिजर्व बैंक वित्त वर्ष 2027 के दौरान रेपो रेट में कुल 50 आधार अंकों की बढ़ोतरी कर सकता है। यह कदम मजबूत आर्थिक गतिविधियों और मौद्रिक नीति समिति की बैठकों के रुख को देखते हुए उठाया जा सकता है। भारतीय रिजर्व बैंक की आगामी मौद्रिक नीतियों को लेकर वित्तीय विशेषज्ञों की ओर से नए आकलन सामने आए हैं। वित्तीय सेवा फर्म स्टैण्डर्ड चार्टर्ड के रणनीतिकारों अनुभूती सहाय और सौरव आनंद ने अनुमान जताया है कि केंद्रीय बैंक वित्त वर्ष 2027 के दौरान रीपो रेट में कुल 50 आधार अंकों की बढ़ोतरी कर सकता है। इस अनुमान के पीछे देश में बनी हुई मजबूत आर्थिक गतिविधियों और मौद्रिक नीति समिति की पिछली बैठकों के सख्त रुख को मुख्य वजह बताया गया है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि महंगाई के आंकड़े अनुमान से अधिक ऊपर जाते हैं, तो इसमें कुछ और बढ़ोतरी का जोखिम भी बना रह सकता है। हालांकि, कुल मिलाकर इस पूरी प्रक्रिया को मौजूदा स्तरों से एक सामान्य नीतिगत समायोजन के रूप में देखा जा रहा है, जिससे दरों में बहुत ज्यादा तेज उछाल की संभावना कम ही नजर आती है। रेपो रेट में बदलाव का संभावित समय और कारण इस पूरी योजना के तहत दरों में होने वाली बढ़ोतरी को साल 2026 के अक्टूबर और दिसंबर महीनों के बीच दो बराबर हिस्सों में बांटे जाने की संभावना जताई गई है। स्टैण्डर्ड चार्टर्ड के रणनीतिकारों के अनुसार इस संबंध में उनका ताजा आकलन यह है कि अर्थव्यवस्था के लचीलेपन और मौद्रिक नीति समिति के पिछले विवरणों को ध्यान में रखते हुए यह कदम उठाया जाना स्वाभाविक है। भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर द्वारा पहले ही यह संकेत दिए जा चुके हैं कि जैसे-जैसे महंगाई दर पिछले साल के 2 प्रतिशत के स्तर से बढ़कर वित्त वर्ष 2027 में लगभग 5 प्रतिशत की ओर बढ़ेगी, वैसे-वैसे 5.25 प्रतिशत के मौजूदा रीपो रेट में फेरबदल करना आवश्यक हो सकता है। महंगाई और भू-राजनीतिक तनाव से जुड़े संभावित जोखिम इस अनुमान के साथ ही कुछ खास जोखिमों पर भी ध्यान दिलाया गया है जो इस नीति को प्रभावित कर सकते हैं। यदि भू-राजनीतिक तनावों के कारण वैश्विक स्तर पर दबाव बढ़ता है और महंगाई के आंकड़े उम्मीद से ज्यादा मजबूत रहते हैं, तो एक या दो अतिरिक्त वृद्धियां भी देखने को मिल सकती हैं। वर्तमान में वित्त वर्ष 2027 के लिए उपभोक्ता मूल्य सूचकांक आधारित महंगाई का अनुमान 4.9 प्रतिशत पर आंका गया है। इसके अलावा, मौद्रिक नीति समिति अक्टूबर के बजाय सीधे दिसंबर में दरें बढ़ाना शुरू कर सकती है। हालांकि विश्लेषकों का मानना है कि अक्टूबर की बैठक के तुरंत बाद महंगाई के आंकड़े 5 प्रतिशत से ऊपर जाने की संभावना है, ऐसे में दिसंबर तक इंतजार करने से ऐसा लग सकता है कि केंद्रीय बैंक की प्रतिक्रिया में देरी हो गई है। विदेशी मुद्रा बाजार और वैश्विक आर्थिक संकेत व्यापक वित्तीय बाजारों पर नजर डालें तो विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में यूरोपीय सत्र के दौरान पौंड और डॉलर के मुकाबले अन्य प्रमुख मुद्राओं में सुस्ती देखी जा रही है। अमेरिकी फेडरल रिजर्व के रुख और पश्चिम एशिया में जारी तनाव के माहौल के बीच बाजार में कई तरह के उतार-चढ़ाव दर्ज हो रहे हैं। वैश्विक स्तर पर सरकारी बॉण्ड पर मिलने वाले रिटर्न में लगातार तेजी का रुख बना हुआ है, जिससे ऊर्जा और कच्चे तेल की कीमतों पर भी दबाव दिख रहा है। ऊर्जा क्षेत्र की बात करें तो कच्चे तेल के दाम लगभग 90 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बने हुए हैं, जिससे केंद्रीय बैंकों की नीतियां लंबे समय तक सख्त रहने की धारणा को बल मिल रहा है। इसके साथ ही, डीजल के दामों से जुड़े सूचक और रिफाइनिंग मार्जिन में भी ऐतिहासिक स्तर पर उतार-चढ़ाव दर्ज किया गया है, जो वैश्विक ईंधन बाजारों की तंग स्थिति को दर्शाता है। इसका आप पर असर ब्याज दरों में संभावित बदलाव का असर सीधे तौर पर आम नागरिकों के कर्ज, ऋण की ब्याज दरों और दैनिक वित्तीय प्रबंधन पर पड़ सकता है। • भारत में: यदि रिजर्व बैंक रीपो रेट में बढ़ोतरी करता है, तो बैंकों के लिए कर्ज महंगा हो सकता है, जिससे होम लोन और कार लोन की मासिक किस्तें बढ़ सकती हैं। • आम निवेशकों के लिए: दरों में बदलाव के इस दौर में फिक्स्ड डिपॉजिट और अन्य डेट उत्पादों पर मिलने वाले रिटर्न में भी आंशिक सुधार देखने को मिल सकता है। सवाल-जवाब 1. स्टैण्डर्ड चार्टर्ड के रणनीतिकारों ने वित्त वर्ष 2027 के लिए क्या अनुमान लगाया है? रणनीतिकारों का अनुमान है कि भारतीय रिजर्व बैंक वित्त वर्ष 2027 के दौरान रीपो रेट में कुल 50 आधार अंकों की बढ़ोतरी कर सकता है। 2. ब्याज दरों में बढ़ोतरी का संभावित समय क्या बताया गया है? इस बढ़ोतरी को साल 2026 के अक्टूबर और दिसंबर महीनों के बीच दो बराबर हिस्सों में विभाजित किए जाने की संभावना जताई गई है। 3. इस अनुमान के पीछे मुख्य कारण क्या हैं? मजबूत आर्थिक गतिविधियां और मौद्रिक नीति समिति की बैठकों के सख्त रुख को इस अनुमान का मुख्य आधार बनाया गया है। 4. महंगाई को लेकर क्या पूर्वानुमान व्यक्त किया गया है? वित्त वर्ष 2027 के लिए उपभोक्ता मूल्य सूचकांक आधारित महंगाई का औसत अनुमान 4.9 प्रतिशत रखा गया है। https://trendkia.com/market/standard-chartered-expects-rbi-to-deliver-shallow-repo-rate-hikes-totaling-50bps-in-fy27-25709 TrendKia — Har trend, sabse pehle.