स्टैंडर्ड चार्टर्ड का अनुमान: नीतिगत दरों में बढ़ोतरी के बाद धीमी होगी बैंक ऑफ जापान की सामान्यीकरण प्रक्रिया स्टैंडर्ड चार्टर्ड के विश्लेषकों का मानना है कि बैंक ऑफ जापान आगामी बैठक में ब्याज दरों में 0.25 प्रतिशत की बढ़ोतरी कर सकता है, लेकिन इसके बाद आर्थिक सुस्ती को देखते हुए नीतिगत ढील की प्रक्रिया धीमी रहेगी। स्टैंडर्ड चार्टर्ड के विश्लेषकों चोंग हून पार्क और निकोलस चिया के अनुसार, बैंक ऑफ जापान की 17-18 सितंबर को होने वाली आगामी मौद्रिक नीति बैठक में नीतिगत ब्याज दर को 25 बेसिस पॉइंट्स बढ़ाकर 1.25 प्रतिशत किए जाने की संभावना है। वित्तीय विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम अर्थव्यवस्था में समय से पहले सुरक्षात्मक उपाय के रूप में उठाया जा रहा है। हालांकि, देश की संरचनात्मक सुस्ती और वित्तीय सीमाओं को देखते हुए इसके बाद नीतिगत सामान्यीकरण का चरण काफी धीमा और धैर्यपूर्ण रहने वाला है। बैंक ऑफ जापान की दरों में बढ़ोतरी का पूर्वानुमान स्टैंडर्ड चार्टर्ड की विस्तृत विश्लेषण रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया है कि जापानी अर्थव्यवस्था ब्याज दर में एक और मामूली वृद्धि को सहन करने में सक्षम है। लेकिन सितंबर की बैठक के बाद केंद्रीय बैंक अपनी मौद्रिक नीतियों को सख्त करने में अत्यधिक सावधानी बरतेगा। विश्लेषकों ने संकेत दिया है कि जापान में संरचनात्मक आर्थिक विकास की गति ऐतिहासिक रूप से धीमी बनी हुई है, जिससे केंद्रीय बैंक के पास लगातार दरें बढ़ाने का दायरा सीमित है। इसके अलावा, आपूर्ति श्रृंखला में ऊर्जा की बढ़ती कीमतों और जापानी येन में आई पिछली कमजोरी के असर के कारण मुद्रास्फीति के जोखिम लगातार बढ़ रहे हैं। हालांकि महंगाई दर में बढ़ोतरी दिख रही है, लेकिन घरेलू उपभोक्ता खपत अभी भी कमजोर बनी हुई है। इसका मुख्य कारण यह है कि हालिया मुद्रास्फीति का बड़ा हिस्सा आंतरिक मांग के बजाय आयातित वस्तुओं से प्रेरित है। जापानी बॉन्ड और राजकोषीय स्थिति पर बढ़ता दबाव जापान के बॉन्ड बाजार में भी बड़े बदलाव देखने को मिल रहे हैं। जापानी सरकारी बॉन्ड (JGB) की यील्ड में हाल के दिनों में तेज बढ़ोतरी दर्ज की गई है। बॉन्ड यील्ड में इस इजाफे के कारण सरकार के लिए कर्ज की लागत बढ़ गई है, जिससे जापान की राजकोषीय स्थिति पर दबाव बनना शुरू हो गया है। उच्च ब्याज लागत सरकार के बजट और वित्तीय फैसलों को सीमित कर रही है। इन सभी परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए, स्टैंडर्ड चार्टर्ड के विश्लेषकों का निष्कर्ष है कि सितंबर में ब्याज दर बढ़ाना एक एहतियाती कदम होगा। इसके बाद बैंक ऑफ जापान लंबे समय तक परिस्थितियों का आकलन करेगा और बाजार में स्थिरता बनाए रखने के लिए धैर्यपूर्ण रुख अपनाएगा। डॉलर-येन विनिमय दर में 155.00 की ओर उछाल विदेशी मुद्रा बाजार में अमेरिकी डॉलर के मुकाबले जापानी येन (USD/JPY) मंगलवार को सुबह के कारोबार में 155.00 के स्तर की ओर बढ़ता हुआ दिखाई दिया। वैश्विक मुद्रा व्यापारी इस हफ्ते होने वाली फेडरल रिजर्व (FOMC) और बैंक ऑफ जापान की बैठकों के नतीजों का इंतजार कर रहे हैं। अमेरिकी बॉन्ड यील्ड बहु-वर्षीय उच्च स्तर के करीब बनी हुई है, जिसे कच्चे तेल की वजह से बढ़ती मुद्रास्फीति की आशंकाओं और फेडरल रिजर्व द्वारा दरें ऊंची रखने की उम्मीदों से समर्थन मिल रहा है। इस मजबूती ने अमेरिकी डॉलर को सहारा दिया है। हालांकि, बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि यदि बैंक ऑफ जापान अपनी नीतिगत दिशा को लेकर सख्त रुख अपनाता है, तो जापानी येन को समर्थन मिल सकता है, जिससे USD/JPY की बढ़त सीमित हो सकती है। ऑस्ट्रियाई डॉलर और चीनी आर्थिक आंकड़ों का असर एशियाई कारोबारी सत्र के दौरान ऑस्ट्रेलियाई डॉलर (AUD/USD) 0.7150 के स्तर से नीचे दबाव में रहा और पिछले दिन के तीन सप्ताह के निचले स्तर के करीब कारोबार करता दिखा। अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में मजबूती और डॉलर के दबदबे के चलते ऑस्ट्रेलियाई मुद्रा पर नकारात्मक असर पड़ा है। इसके साथ ही, अगस्त महीने के लिए चीन से आए मिले-जुले आर्थिक आंकड़ों ने भी ऑस्ट्रेलियाई डॉलर को कोई खास राहत नहीं दी। सोने की कीमतों में गिरावट और FOMC बैठक का इंतजार कीमती धातुओं के बाजार में सोने की कीमतों में लगातार दूसरे दिन गिरावट दर्ज की गई। मंगलवार को यूरोपीय सत्र के पहले छमाही में सोना 0.80 प्रतिशत गिरकर 4,265 डॉलर से 4,264 डॉलर प्रति औंस के दायरे में कारोबार करता नजर आया। सोना सोमवार को छुए गए अपने एक महीने से अधिक के निचले स्तर के करीब ही बना हुआ है। फेडरल ओपन मार्केट कमेटी (FOMC) की दो दिवसीय बैठक शुरू होने से पहले निवेशक सतर्कता बरत रहे हैं, जिससे सोने पर बिकवाली का दबाव बना हुआ है। इसका आप पर असर केंद्रीय बैंकों के ब्याज दर निर्णयों और विदेशी मुद्रा बाजार में होने वाले उतार-चढ़ाव का सीधा असर वैश्विक निवेश, मुद्रा मूल्य और व्यापार लागत पर पड़ता है। • भारत में प्रभाव: वैश्विक स्तर पर बॉन्ड यील्ड बढ़ने और अमेरिकी डॉलर मजबूत होने से भारतीय रुपये पर दबाव बढ़ सकता है, जिससे कच्चे तेल जैसी जरूरी वस्तुओं का आयात महंगा हो सकता है। • फॉरेक्स निवेशकों के लिए: अमेरिकी यील्ड में तेजी और केंद्रीय बैंकों की बैठकों से USD/JPY और सोने की कीमतों में अस्थिरता बढ़ सकती है, जिसके लिए जोखिम प्रबंधन जरूरी है। • अंतरराष्ट्रीय यात्रियों के लिए: प्रमुख वैश्विक मुद्राओं की विनिमय दरों में बदलाव से विदेश यात्रा और लेनदेन के खर्चों पर सीधा असर पड़ सकता है। • फिक्स्ड इनकम निवेशकों के लिए: वैश्विक बॉन्ड यील्ड में लगातार उछाल से डेट फंड के रिटर्न और बॉन्ड पोर्टफोलियो के मूल्यांकन प्रभावित होते हैं। ऐसा क्यों हुआ बैंक ऑफ जापान की दरों में बढ़ोतरी का अनुमान बढ़ती महंगाई और येन की कमजोरी के कारण है, जबकि वैश्विक बाजारों में अमेरिकी बॉन्ड यील्ड ऊंची बनी हुई है। • आयातित मुद्रास्फीति का दबाव: वैश्विक ऊर्जा दरों में वृद्धि और येन में आई पिछली गिरावट के कारण जापानी आपूर्ति श्रृंखला में लागत बढ़ गई है। • उच्च अमेरिकी बॉन्ड यील्ड: फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीतियों और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के कारण अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड बहु-वर्षीय उच्च स्तर पर बनी हुई है। • जापान की वित्तीय सीमाएं: जापानी सरकारी बॉन्ड की यील्ड बढ़ने से देश के लिए कर्ज की ब्याज लागत बढ़ गई है, जिससे तेजी से दरें बढ़ाना मुश्किल हो गया है। • केंद्रीय बैंकों की नीतियां: एफओएमसी और बैंक ऑफ जापान की आगामी बैठकों से पहले निवेशकों की सतर्कता से विदेशी मुद्रा और जिंस बाजारों में हलचल है। सवाल-जवाब 1. स्टैंडर्ड चार्टर्ड ने बैंक ऑफ जापान की ब्याज दरों पर क्या अनुमान जताया है? स्टैंडर्ड चार्टर्ड के विश्लेषकों का अनुमान है कि बैंक ऑफ जापान 17-18 सितंबर की बैठक में अपनी नीतिगत दर को 25 बेसिस पॉइंट्स बढ़ाकर 1.25 प्रतिशत कर सकता है। 2. सितंबर के बाद बैंक ऑफ जापान के दरें बढ़ाने की गति धीमी क्यों रहने की उम्मीद है? जापान की धीमी आर्थिक वृद्धि, कमजोर उपभोक्ता मांग और बढ़ते सरकारी कर्ज की ब्याज लागत के कारण बैंक ऑफ जापान आगे की नीति में अधिक धैर्यपूर्ण रुख अपनाएगा। 3. USD/JPY दर में बढ़ोतरी के मुख्य कारण क्या हैं? अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में मजबूती, फेडरल रिजर्व की बैठकों से जुड़ी उम्मीदें और तेल की वजह से बढ़ती मुद्रास्फीति की चिंताओं के कारण डॉलर मजबूत होकर 155.00 की ओर बढ़ रहा है। 4. FOMC बैठक से पहले सोने की कीमतों का क्या हाल है? सोने की कीमतें 0.80 प्रतिशत गिरकर 4,265-4,264 डॉलर प्रति औंस के आसपास कारोबार कर रही हैं, जो एक महीने से अधिक के निचले स्तर के पास है। https://trendkia.com/market/standard-chartered-ka-anumana-nitigata-daron-men-barhotari-ke-bada-dhimi-hogi-bank-of-japan-ki-samanyikarana-prakriya-32449 TrendKia — Har trend, sabse pehle.