ऑस्ट्रेलियन डॉलर में मजबूती, आरबीए के आक्रामक रुख का असर रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया के संकेत के बाद ऑस्ट्रेलियन डॉलर में तेजी देखी गई है। निवेशक अब वैश्विक आर्थिक आंकड़ों और अमेरिकी फेडरल रिजर्व की बैठक के नतीजों पर नजर बनाए हुए हैं। बुधवार को एशियाई कारोबार के दौरान ऑस्ट्रेलियन डॉलर (AUD) ने अमेरिकी डॉलर (USD) के मुकाबले मजबूती दिखाई है। ऑस्ट्रेलियाई मुद्रा 0.6943 के स्तर के आसपास कारोबार कर रही है, जो कि 0.23 प्रतिशत की बढ़त को दर्शाता है। यह उछाल तब देखने को मिला जब रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया (RBA) ने महंगाई को लक्ष्य तक लाने के लिए अपनी प्रतिबद्धता दोहराई और भविष्य में जरूरत पड़ने पर ब्याज दरों में और बढ़ोतरी की संभावना को खुला रखा। आरबीए की रणनीति और मुद्रा की स्थिति रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया ने इस साल पहले ही तीन बार में 25 आधार अंकों (bps) की वृद्धि की है, जिससे आधिकारिक नकद दर (OCR) 4.35 प्रतिशत तक पहुंच गई है। आरबीए का मुख्य उद्देश्य ब्याज दरों को समायोजित करके मुद्रास्फीति को 2 से 3 प्रतिशत के दायरे में बनाए रखना है। उच्च ब्याज दरें आमतौर पर ऑस्ट्रेलियन डॉलर के लिए सकारात्मक होती हैं, क्योंकि यह अन्य केंद्रीय बैंकों की तुलना में अधिक रिटर्न प्रदान करती हैं। वहीं, आरबीए क्रेडिट स्थितियों को नियंत्रित करने के लिए मात्रात्मक सख्ती का भी उपयोग कर सकता है, जो अक्सर ऑस्ट्रेलियाई मुद्रा के लिए सहायक साबित होती है। चीन की अर्थव्यवस्था और व्यापार का प्रभाव चीन, ऑस्ट्रेलिया का सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार है, इसलिए चीनी अर्थव्यवस्था की स्थिति ऑस्ट्रेलियन डॉलर की चाल तय करने में एक प्रमुख भूमिका निभाती है। जब चीन में आर्थिक गतिविधियां तेज होती हैं, तो वहां से ऑस्ट्रेलिया के कच्चे माल और सेवाओं की मांग बढ़ जाती है, जिससे डॉलर की वैल्यू को समर्थन मिलता है। इसके विपरीत, धीमी विकास दर मुद्रा पर नकारात्मक दबाव डालती है। निवेश के दृष्टिकोण से, बाजार की भावना, जैसे कि निवेशकों का जोखिम लेना (risk-on) या सुरक्षित निवेश की तलाश (risk-off), भी महत्वपूर्ण है, जहां जोखिम-अनुकूल माहौल ऑस्ट्रेलियन डॉलर के लिए फायदेमंद रहता है। आयरन ओर और व्यापार संतुलन की भूमिका ऑस्ट्रेलिया के सबसे बड़े निर्यात उत्पाद के रूप में आयरन ओर का बड़ा महत्व है। 2021 के आंकड़ों के अनुसार, यह 118 बिलियन डॉलर का बाजार है। जब आयरन ओर की कीमतें बढ़ती हैं, तो ऑस्ट्रेलिया की निर्यात आय में वृद्धि होती है और व्यापार संतुलन सकारात्मक होने की संभावना बढ़ जाती है, जो कि डॉलर के लिए सकारात्मक संकेत है। एक देश के निर्यात और आयात के बीच का अंतर यानी व्यापार संतुलन भी इसकी विनिमय दर को सीधे प्रभावित करता है, जहां निर्यात की अधिक मांग मुद्रा को मजबूती प्रदान करती है। तकनीकी स्तर और भविष्य की राह मौजूदा तकनीकी विश्लेषण के अनुसार, ऑस्ट्रेलियन डॉलर के लिए तत्काल प्रतिरोध 20-अवधि के EMA पर 0.6967 के स्तर पर बना हुआ है। यदि मुद्रा इस स्तर को पार कर लेती है, तो यह सुधार की दिशा में एक नया मोड़ हो सकता है। दूसरी ओर, 30 जून का निचला स्तर 0.6865 एक प्रमुख समर्थन क्षेत्र के रूप में काम कर रहा है। यदि यह स्तर टूटता है, तो कीमतों में गिरावट 30 मार्च के निचले स्तर 0.6833 की ओर बढ़ सकती है। निवेशक अब गुरुवार को आने वाले चीन के उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) डेटा का इंतजार कर रहे हैं ताकि बाजार की अगली दिशा स्पष्ट हो सके। इसका आप पर असर भारत में: अंतरराष्ट्रीय बाजारों में ऑस्ट्रेलियन डॉलर में उतार-चढ़ाव का असर कच्चे तेल और सोने के आयात लागत पर पड़ सकता है। निवेशकों के लिए: मुद्रा बाजार में अस्थिरता के दौरान विदेशी मुद्रा जोड़े में निवेश करते समय स्टॉप-लॉस का ध्यान रखें और आर्थिक डेटा रिलीज पर नजर रखें। सवाल-जवाब 1. ऑस्ट्रेलियन डॉलर में तेजी का मुख्य कारण क्या है? आरबीए के आक्रामक रुख और ब्याज दरों को लेकर उनके संकेत के कारण ऑस्ट्रेलियन डॉलर में तेजी देखी जा रही है। 2. ऑस्ट्रेलियन डॉलर के लिए प्रमुख प्रतिरोध स्तर क्या है? वर्तमान में, 20-अवधि के EMA के पास 0.6967 का स्तर तत्काल प्रतिरोध के रूप में कार्य कर रहा है। 3. चीन की अर्थव्यवस्था का ऑस्ट्रेलियन डॉलर पर क्या प्रभाव पड़ता है? चीन ऑस्ट्रेलिया का सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार है, इसलिए वहां की मजबूत आर्थिक स्थिति ऑस्ट्रेलियाई सामानों की मांग बढ़ाकर डॉलर की वैल्यू बढ़ाती है। 4. अगला प्रमुख आर्थिक इवेंट क्या है? अगला महत्वपूर्ण इवेंट गुरुवार को चीन का उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) डेटा है, जिस पर निवेशकों की नजर है। https://trendkia.com/market/streliyana-dolara-men-majabuti-rba-ke-akramaka-rukha-ka-asara-5707 TrendKia — Har trend, sabse pehle.