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  "type": "article",
  "title": "स्वीडिश रिक्सबैंक ने ब्याज दर 1.75 प्रतिशत पर रखी बरकरार, मध्य पूर्व के तनाव के बीच दिए बढ़ोतरी के संकेत",
  "summary": "स्वीडिश रिक्सबैंक ने अपनी नीतिगत ब्याज दर को 1.75 प्रतिशत पर स्थिर रखा है, लेकिन गर्मियों में बढ़ी महंगाई और मध्य पूर्व के संकट को देखते हुए साल के अंत तक दरों में बढ़ोतरी का विकल्प खुला रखा है।",
  "content": "वैश्विक केंद्रीय बैंकों द्वारा मुद्रास्फीति पर नियंत्रण पाने के प्रयासों के बीच स्वीडन के केंद्रीय बैंक रिक्सबैंक ने अपनी नीतिगत ब्याज दर में कोई बदलाव न करते हुए इसे 1.75 प्रतिशत पर बनाए रखने का फैसला किया है। बैंक ने अपनी मौद्रिक नीति के कड़े रुख को जारी रखा है और यह स्पष्ट संकेत दिया है कि चालू वर्ष की उत्तरार्ध अवधि में ब्याज दरों में वृद्धि की संभावना अभी भी बनी हुई है। वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में आए व्यवधानों और ऊर्जा कीमतों में उतार-चढ़ाव के कारण महंगाई में दोबारा बढ़ोतरी की आशंका को देखते हुए केंद्रीय बैंक भविष्य में और सख्त कदम उठाने के लिए तैयार है।\n\nरिक्सबैंक का नीतिगत फैसला और महंगाई पर रुख\nकमरज़बैंक की बाजार विश्लेषक आंत्ये प्रेफके के अनुसार, स्वीडिश रिक्सबैंक का ब्याज दरों को 1.75 प्रतिशत पर स्थिर रखने का निर्णय बाजार की उम्मीदों के पूरी तरह अनुकूल था। हालांकि, बैंक ने अपने बयान में स्वीकार किया है कि जून के महीने में लगाए गए अनुमानों की तुलना में आर्थिक वृद्धि और मुद्रास्फीति दोनों के आंकड़े काफी ऊंचे रहे हैं। गर्मियों के दौरान दर्ज की गई अप्रत्याशित उच्च महंगाई यदि केवल एक अस्थायी उछाल न होकर एक व्यापक और दीर्घकालिक प्रवृत्ति की शुरुआत साबित होती है, तो रिक्सबैंक अपनी मौद्रिक नीति को अधिक कड़ा करने से पीछे नहीं हटेगा।\n\nकेंद्रीय बैंक के सामने सबसे बड़ी चुनौती अंतर्निहित मुद्रास्फीति को नियंत्रित रखना है। यदि आपूर्ति पक्ष के झटके अर्थव्यवस्था को प्रभावित करना जारी रखते हैं, तो मुख्य महंगाई दर लक्ष्य से ऊपर बनी रह सकती है। इसी जोखिम को ध्यान में रखते हुए स्वीडिश नीति निर्माताओं ने मौद्रिक नीति में सख्ती का द्वार पूरी तरह खुला रखा है, ताकि वित्तीय स्थिरता को कोई खतरा न पहुंचे।\n\nमध्य पूर्व का संकट और सितंबर की बैठक की अहमियत\nस्वीडिश रिक्सबैंक ने अपनी आगामी नीतिगत दिशा तय करने के लिए मध्य पूर्व में जारी संघर्ष को अनिश्चितता का सबसे बड़ा और प्राथमिक स्रोत माना है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की आपूर्ति और भू-राजनीतिक तनावों का सीधा असर स्वीडन की घरेलू अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है। इसी वजह से केंद्रीय बैंक ने यह साफ नहीं किया है कि ब्याज दरों में अगली बढ़ोतरी कब और कितनी होगी।\n\nरिक्सबैंक की अगली मौद्रिक नीति समीक्षा बैठक सितंबर के उत्तरार्ध में आयोजित होने वाली है। तब तक केंद्रीय बैंक के पास वैश्विक और घरेलू अर्थव्यवस्था से जुड़े अतिरिक्त आंकड़े उपलब्ध होंगे। इन नए आंकड़ों के आधार पर ही नीति निर्माता यह तय करेंगे कि दर वृद्धि के लिए सही समय आ गया है या नहीं। इस बीच, मुद्रा बाजार में स्वीडिश क्रोना (SEK) पर इस फैसले का प्रभाव काफी हद तक तटस्थ देखा गया है।\n\nविदेशी मुद्रा बाजार में हलचल: GBP/USD और EUR/USD का हाल\nरिक्सबैंक के इस फैसले के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय मुद्रा बाजार में भी महत्वपूर्ण हलचल देखने को मिल रही है। यूरोपीय कारोबारी सत्र के दौरान GBP/USD जोड़ी 1.3650 के स्तर के आसपास सकारात्मक दायरे में कारोबार कर रही है। ब्रिटेन में खुदरा बिक्री के कमजोर आंकड़ों के बावजूद हाल ही में आए मजबूत PMI आंकड़ों ने पाउंड स्टर्लिंग को सहारा दिया है। इसके अलावा, अमेरिकी डॉलर में जारी नरमी ने भी इस करेंसी पैर को मजबूती प्रदान की है।\n\nदूसरी ओर, EUR/USD जोड़ी 1.1700 के स्तर के आसपास अपनी साप्ताहिक बढ़त को संभालती हुई नजर आ रही है। जर्मनी और समग्र यूरोजोन से आए मिले-जुले PMI आंकड़ों के बाद निवेशक अब अमेरिका के प्रारंभिक अगस्त PMI सर्वेक्षणों की प्रतीक्षा कर रहे हैं। अमेरिकी डॉलर की वैश्विक कमजोरी के कारण यूरो अपनी बढ़त बनाए रखने में सफल रहा है।\n\nसोने में उछाल और फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति\nकमोडिटी बाजार में सोने की कीमतें जून की शुरुआत के बाद से अपने उच्चतम स्तर के करीब टिकी हुई हैं। शुक्रवार को यूरोपीय सत्र की शुरुआत में सोना $4,550 प्रति औंस से ठीक ऊपर कारोबार कर रहा है। तकनीकी विश्लेषण के नजरिए से देखें तो सोना अपने महत्वपूर्ण 200-दिवसीय साधारण मूविंग एवरेज (200-day SMA) के ऊपर बना हुआ है और मजबूती के साथ आगे बढ़ रहा है।\n\nसोने में आई इस तेजी का मुख्य कारण अमेरिकी डॉलर में आई गिरावट और अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में बढ़ोतरी की उम्मीदों का कम होना है। हाल ही में जारी हुए अमेरिकी मुद्रास्फीति के आंकड़ों ने मूल्य दबावों के ठंडा होने के संकेत दिए हैं। इसके बाद वित्तीय बाजारों के ट्रेडरों ने फेडरल रिजर्व द्वारा तत्काल ब्याज दर बढ़ाने पर लगाए जा रहे दांव को कम कर दिया है, जिससे कीमती धातुओं को समर्थन मिला है।\n\nअमेरिकी ट्रेजरी का तरलता समर्थन और बॉन्ड बाजार\nवैश्विक बाजारों में एक और बड़ा घटनाक्रम अमेरिकी ट्रेजरी विभाग द्वारा घोषित तरलता सहायता कार्यक्रम है। अमेरिकी ट्रेजरी ने अपने नियमित कैलेंडर से हटकर एक अप्रत्याशित कदम उठाया है। विभाग ने 10-वर्ष से 20-वर्ष और 20-वर्ष से 30-वर्ष की परिपक्वता अवधि वाले बॉन्ड क्षेत्रों में अपने बायबैक संचालन के आकार को कम से कम दोगुना करने की घोषणा की है।\n\nइस नए फैसले के तहत प्रत्येक संचालन की अधिकतम सीमा को $2 बिलियन से बढ़ाकर कम से कम $4 billion कर दिया गया है। यह व्यवस्था 9 सितंबर से लागू होकर 4 नवंबर तक प्रभावी रहेगी। अमेरिकी सरकार के इस कदम का मुख्य उद्देश्य दीर्घकालिक बॉन्ड बाजार में तरलता को बढ़ाना और प्रतिफल दर में होने वाले अचानक उतार-चढ़ाव को रोकना है। इस नीतिगत निर्णय के कारण अमेरिकी डॉलर अन्य प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले दबाव में आ गया है, जिसका असर वैश्विक वित्तीय परिसंपत्तियों पर साफ दिखाई दे रहा है।\n\nइसका आप पर असर\n• भारत में: अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमतें $4,550 प्रति औंस से ऊपर बने रहने से घरेलू आभूषण विक्रेताओं और खरीदारों के लिए कीमतें ऊंची रह सकती हैं।\n• निवेशकों के लिए: वैश्विक केंद्रीय बैंकों के कड़े रुख और अमेरिकी डॉलर की कमजोरी के कारण मुद्रा बाजार और कमोडिटी परिसंपत्तियों में उतार-चढ़ाव बना रहेगा।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. स्वीडन के रिक्सबैंक ने ब्याज दर पर क्या निर्णय लिया है?\nस्वीडन के रिक्सबैंक ने अपनी नीतिगत ब्याज दर को 1.75 प्रतिशत पर स्थिर रखने का निर्णय लिया है, लेकिन भविष्य में दरें बढ़ाने का विकल्प खुला रखा है।\n\n2. रिक्सबैंक ब्याज दरों में बढ़ोतरी पर विचार क्यों कर रहा है?\nगर्मियों के दौरान उम्मीद से ज्यादा महंगाई और आपूर्ति पक्ष के झटकों के कारण अंतर्निहित मुद्रास्फीति बढ़ने के डर से बैंक ब्याज दरें बढ़ाने पर विचार कर रहा है।\n\n3. अंतरराष्ट्रीय सोने की कीमत का वर्तमान स्तर क्या है?\nअंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना $4,550 प्रति औंस से ठीक ऊपर कारोबार कर रहा है, जो जून की शुरुआत के बाद का इसका उच्चतम स्तर है।\n\n4. अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने क्या महत्वपूर्ण घोषणा की है?\nअमेरिकी ट्रेजरी ने दीर्घकालिक बॉन्ड क्षेत्रों के लिए अपने तरलता समर्थन बायबैक संचालन की सीमा को $2 बिलियन से बढ़ाकर कम से कम $4 बिलियन प्रति संचालन कर दिया है।",
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  "publishedAt": "2026-08-21",
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