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  "type": "article",
  "title": "स्विस नेशनल बैंक की नीति बैठक से पहले ब्याज दरों में स्थिरता के आसार, वैश्विक बाजारों में डॉलर की मजबूती",
  "summary": "स्विस नेशनल बैंक द्वारा ब्याज दर 0% पर स्थिर रखने की संभावना के बीच वैश्विक बाजारों में अमेरिकी डॉलर मजबूत बना हुआ है। उधर वाशिंगटन में डोनाल्ड ट्रंप और शी जिनपिंग की अहम बैठक से पहले सोने और प्रमुख मुद्राओं में हलचल देखने को मिल रही है।",
  "content": "स्विट्जरलैंड का केंद्रीय बैंक यानी स्विस नेशनल बैंक अपनी 24 सितंबर की मौद्रिक नीति बैठक में ब्याज दरों को 0% पर बरकरार रख सकता है। ऊर्जा की बढ़ती कीमतों और मुख्य मुद्रास्फीति में मामूली बढ़ोतरी के बावजूद बैंक अपनी वर्तमान नीति को बनाए रखने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। डीबीएस ग्रुप रिसर्च के अर्थशास्त्री फिलिप वी के अनुसार, स्विस नेशनल बैंक के पास अमेरिकी फेडरल रिजर्व और यूरोपीय सेंट्रल बैंक की तरह सख्त मौद्रिक नीति अपनाने या दरें बढ़ाने की बहुत कम वजह है। हालांकि, अल्पावधि के लिए मुद्रास्फीति के अनुमानों में मामूली बढ़ोतरी की जा सकती है, लेकिन स्विट्जरलैंड की आर्थिक वृद्धि में सुधार और यूरो तथा ब्रिटिश पाउंड के मुकाबले स्विस फ्रैंक पर सेफ-हेवन दबाव कम होने से स्थिति अपेक्षाकृत संतुलित बनी हुई है।\n\nमुद्रास्फीति अनुमान और ऊर्जा बाजार का प्रभाव\nमध्य पूर्व में लगातार बनी अनिश्चितता के कारण ऊर्जा की ऊंची कीमतें पूरी अर्थव्यवस्था में असर दिखा रही हैं, जिसे देखते हुए केंद्रीय बैंक अपने निकट अवधि के मुद्रास्फीति अनुमान को बढ़ा सकता है। इसके अलावा, जून की नीति बैठक के मिनट्स में रेखांकित किए गए दूसरे दौर के प्रभावों पर भी बैंक की नजर रहने की उम्मीद है। इन प्रभावों में प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थ, परिवहन, पर्यटन और रेस्तरां क्षेत्र शामिल हैं। किसी भी संभावित पूर्वानुमान संशोधन की सख्ती इस बात पर निर्भर करेगी कि बैंक कच्चे तेल के झटके को अंतर्निहित मुद्रास्फीति में किस हद तक शामिल होते देखता है, न कि केवल तात्कालिक ऊर्जा लागतों के उछाल पर।\n\nमुद्रा हस्तक्षेप और आर्थिक वृद्धि के आंकड़े\nविदेशी मुद्रा बाजार में हस्तक्षेप को लेकर भी स्विस नेशनल बैंक का रुख थोड़ा नरम पड़ सकता है। जून में बैंक ने अत्यधिक और तीव्र स्विस फ्रैंक की मजबूती को रोकने के लिए बाजार में हस्तक्षेप करने की बढ़ी हुई इच्छा जताई थी, क्योंकि इसका सीधा असर मूल्य स्थिरता और निर्यात पर आधारित अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा था। अब वे चिंताएं काफी हद तक कम हो चुकी हैं। स्टेट सेक्रेटेरिएट फॉर इकोनॉमिक अफेयर्स ने अपने 2026 के विकास अनुमान को जून के 0.9% के अनुमान से बढ़ाकर 1.7% कर दिया है। इसके साथ ही, वर्ष 2026 की दूसरी तिमाही में जीडीपी वृद्धि दर 1.9% तिमाही-दर-तिमाही (2.8% सालाना) पर पहुंच गई, जो 2026 की पहली तिमाही के 0.6% तिमाही-दर-तिमाही (0.5% सालाना) की तुलना में उल्लेखनीय गति दर्शाती है।\n\nवैश्विक मुद्रा बाजार और डॉलर का रुख\nवैश्विक विदेशी मुद्रा बाजार में बुधवार के एशियाई सत्र के दौरान ऑस्ट्रेलियाई डॉलर बनाम अमेरिकी डॉलर (AUD/USD) पर नया बिकवाली दबाव देखा गया, जिससे यह जोड़ी 0.7100 के स्तर का परीक्षण कर रही है। ऑस्ट्रेलिया के ताजा पीएमआई आंकड़ों में विनिर्माण क्षेत्र में संकुचन देखा गया, जबकि सेवा क्षेत्र लगातार दूसरे महीने धीमी गति से बढ़ा। अमेरिकी डॉलर की मजबूती इस मुद्रा जोड़ी के लिए बाधा बनी हुई है, क्योंकि निवेशक गुरुवार को वाशिंगटन में होने वाली अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की महत्वपूर्ण बैठक पर नजर टिकाए हुए हैं। इस बीच, बाजारों ने अमेरिका और ईरान के बीच संपन्न अप्रत्यक्ष बातचीत को नजरअंदाज कर दिया है।\n\nबैंक ऑफ जापान की दर वृद्धि और येन का हाल\nयूएसडी/जेपीवाई (USD/JPY) एशियाई सत्र में 157.00 के मध्य स्तर पर कारोबार करता नजर आया, जो पिछले शुक्रवार को छुए गए दो सप्ताह के उच्चतम स्तर के करीब है। बैंक ऑफ जापान ने अपनी अल्पकालिक ब्याज दर लक्ष्य को 7-2 के बहुमत से 1.00% से बढ़ाकर 1.25% कर दिया है। यह कदम मौद्रिक नीति के सामान्यीकरण की दिशा में उठाया गया है और बाजार की अपेक्षाओं के पूरी तरह अनुरूप रहा है। बैंक ऑफ जापान के इस रुख के चलते जापानी येन में कमजोरी बनी हुई है। दूसरी ओर, फेडरल रिजर्व के सख्त रुख के कारण अमेरिकी डॉलर को निरंतर समर्थन मिल रहा है, हालांकि जापानी येन में संभावित सरकारी हस्तक्षेप की आशंका डॉलर की बढ़त को सीमित कर रही है।\n\nसोने की कीमतों में गिरावट और शिखर सम्मेलन पर नजर\nयूरोपीय सत्र के पहले हिस्से में सोने की कीमतों में लगातार इंट्राडे गिरावट दर्ज की गई, जिससे पिछले दिन 4,300 डॉलर से नीचे के स्तर से हुई कुछ रिकवरी पलट गई। फेडरल रिजर्व के सख्त रुख के चलते डॉलर की लगातार खरीदारी हो रही है, जिससे बिना ब्याज वाली पीली धातु से पूंजी बाहर निकल रही है। इस बीच, बाजारों का पूरा ध्यान वाशिंगटन में होने वाली अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की द्विपक्षीय वार्ता पर टिका है। दोनों देशों के बीच व्यापार तनाव में कई महीनों की राहत के बाद, यह बैठक तय करेगी कि दुनिया की दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाएं अपने समझौते को आगे बढ़ाएंगी या फिर अनिश्चितता के एक नए दौर में प्रवेश करेंगी।\n\nइसका आप पर असर\nवैश्विक केंद्रीय बैंकों की मौद्रिक नीतियों और आगामी अमेरिका-चीन शिखर सम्मेलन से अंतरराष्ट्रीय मुद्रा विनिमय दरों, सोने के भाव और आयात-निर्यात लागत पर सीधा असर पड़ेगा।\n\n• मुद्रा विनिमय और यात्रा: अमेरिकी डॉलर के मजबूत रहने से विदेशी यात्रा और पढ़ाई के खर्चों पर सीधा प्रभाव पड़ेगा। यदि डॉलर के मुकाबले अन्य मुद्राएं कमजोर रहती हैं, तो अंतरराष्ट्रीय लेनदेन महंगे हो सकते हैं।\n• सोने के निवेशक: सोने के दाम 4,300 डॉलर प्रति औंस के आसपास दबाव में बने हुए हैं। फेडरल रिजर्व के कड़े रुख और डॉलर की मजबूती के चलते सोने में अल्पावधि उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।\n• विदेशी मुद्रा व्यापारी: प्रमुख मुद्रा जोड़ियों जैसे AUD/USD और USD/JPY में तेज हलचल जारी रह सकती है। व्यापारियों को बैंक ऑफ जापान की नीति और आगामी बैठकों के दौरान अतिरिक्त सतर्कता बरतनी होगी।\n• वैश्विक व्यापार और आयात लागत: वाशिंगटन में होने वाले शिखर सम्मेलन से वैश्विक व्यापार की दिशा तय होगी। यदि व्यापार तनाव दोबारा बढ़ता है, तो अंतरराष्ट्रीय आपूर्ति श्रृंखला और आयातित सामान की कीमतों पर असर पड़ सकता है।\n\nऐसा क्यों हुआ\nकेंद्रीय बैंकों के अलग-अलग नीतिगत फैसलों और वैश्विक कूटनीतिक बैठकों ने वित्तीय बाजारों में यह स्थिति पैदा की है। एक तरफ विभिन्न देश अपनी आर्थिक वृद्धि और मुद्रास्फीति को संतुलित कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ प्रमुख वैश्विक महाशक्तियों के बीच व्यापारिक समीकरण तय हो रहे हैं।\n\n• स्विस केंद्रीय बैंक का रुख: स्विट्जरलैंड की विकास दर दूसरी तिमाही में बढ़कर 1.9% पहुंच गई है और मुद्रा पर दबाव कम हुआ है। इसी कारण स्विस नेशनल बैंक अपनी ब्याज दर 0% पर बरकरार रखने की स्थिति में है।\n• डॉलर की मजबूती का कारण: अमेरिकी फेडरल रिजर्व के कड़े रुख के चलते निवेशक डॉलर को प्राथमिकता दे रहे हैं। उच्च प्रतिफल के आकर्षण ने बिना ब्याज वाले सोने और अन्य विदेशी मुद्राओं से निवेश खींच लिया है।\n• बैंक ऑफ जापान का कदम: बैंक ऑफ जापान ने दर को 1.00% से बढ़ाकर 1.25% किया, लेकिन इसके नरम रुख ने येन पर दबाव बनाए रखा। इसके चलते यूएसडी/जेपीवाई जोड़ी उच्च स्तरों पर टिकी रही।\n• कूटनीतिक अनिश्चितता: वाशिंगटन में डोनाल्ड ट्रंप और शी जिनपिंग की द्विपक्षीय वार्ता से पहले बाजार सतर्क रुख अपना रहे हैं। महीनों के व्यापारिक ठहराव के बाद दोनों पक्ष किसी नए समझौते पर पहुंचेंगे या नहीं, इस पर सभी की नजरें हैं।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. स्विस नेशनल बैंक अपनी 24 सितंबर की बैठक में ब्याज दरों पर क्या निर्णय ले सकता है?\nअर्थशास्त्रियों के अनुसार, स्विस नेशनल बैंक अपनी नीतिगत ब्याज दर को 0% पर अपरिवर्तित रख सकता है।\n\n2. स्विट्जरलैंड की आर्थिक वृद्धि दर के हालिया आंकड़े क्या रहे हैं?\nवर्ष 2026 की दूसरी तिमाही में स्विट्जरलैंड की जीडीपी वृद्धि दर 1.9% तिमाही-दर-तिमाही और 2.8% सालाना दर्ज की गई।\n\n3. बैंक ऑफ जापान ने अपनी ब्याज दर में कितना बदलाव किया है?\nबैंक ऑफ जापान ने 7-2 के बहुमत से अपनी अल्पकालिक ब्याज दर को 1.00% से बढ़ाकर 1.25% कर दिया है।\n\n4. अमेरिकी डॉलर की मजबूती का सोने की कीमतों पर क्या असर पड़ा है?\nफेडरल रिजर्व के कड़े रुख और मजबूत डॉलर के कारण सोने में गिरावट आई और यह 4,300 डॉलर प्रति औंस के आसपास दबाव में रहा।\n\n5. वाशिंगटन में किन दो नेताओं के बीच अहम शिखर सम्मेलन होने जा रहा है?\nअमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग गुरुवार को वाशिंगटन में एक महत्वपूर्ण बैठक करने जा रहे हैं।",
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  "category": "बाज़ार",
  "publishedAt": "2026-09-23",
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