# स्विस नेशनल बैंक ने विदेशी मुद्रा बाजार में दखल की दी चेतावनी, वैश्विक स्तर पर जोखिम धारणा सुधरने से अमेरिकी डॉलर टूटा

> मध्य पूर्व में शांति वार्ता की नई उम्मीदों के बीच ब्रेंट क्रूड फिसलकर दो हफ्तों के निचले स्तर पर आ गया है, जबकि स्विस नेशनल बैंक ने अपनी मुद्रा की अत्यधिक मजबूती रोकने के लिए बाजार में दखल देने की तैयारी जताई है।

**Type:** article · **Category:** बाज़ार · **Published:** 2026-09-22 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/market/swiss-national-bank-ne-videshi-mudra-bajara-men-dakhala-ki-di-chetavani-vaishvika-stara-para-jokhima-dharana-sudharane-se-us-dolla-36489 · **Language:** Hindi
**Tags:** स्विस नेशनल बैंक, विदेशी मुद्रा, अमेरिकी डॉलर, कच्चा तेल, बिटकॉइन, सोना, बैंक ऑफ जापान, मुद्रास्फीति

अंतरराष्ट्रीय मुद्रा बाजार में मंगलवार को व्यापक उथल-पुथल देखी गई, जहाँ सुरक्षित निवेश मानी जाने वाली मुद्राओं और जोखिम भरी संपत्तियों के बीच नए समीकरण बनते नजर आए। विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में USD/CHF जोड़ी में तेज गिरावट दर्ज की गई और यह फिसलकर 0.8200 के स्तर से नीचे चली गई, जो पिछले सप्ताह के उच्च स्तर से लगभग 1% नीचे है। वैश्विक बाजारों में निवेशकों की धारणा में यह बदलाव मुख्य रूप से कूटनीतिक हलचल और कच्चे तेल की कीमतों में आई नरमी के कारण देखने को मिला है। इस बीच, स्विट्जरलैंड के केंद्रीय बैंक यानी स्विस नेशनल बैंक ने विदेशी मुद्रा बाजार में सीधी दखलअंदाजी की चेतावनी जारी कर दी है, जिससे आने वाले दिनों में मुद्रा बाजार में बड़े उलटफेर की संभावना बन गई है।

बाजार में जोखिम लेने की क्षमता सुधरने के पीछे संयुक्त राष्ट्र शिखर सम्मेलन की बैठकों को लेकर बनी सकारात्मक उम्मीदें हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन के बीच संयुक्त राष्ट्र शिखर सम्मेलन की रात होने वाली मुलाकात से कूटनीतिक गतिरोध टूटने और शांति वार्ता का एक नया दौर शुरू होने की आशा जगी है। इस संभावना ने बाजार की चिंता को कुछ हद तक कम किया है, जिसके चलते निवेशकों ने अमेरिकी डॉलर में अपनी लंबी पोजीशन को काटना शुरू कर दिया है और जोखिम भरी संपत्तियों की तरफ रुख किया है। हालांकि, अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा निकट अवधि की मौद्रिक नीति को लेकर सख्त रुख बनाए रखने के कारण डॉलर की गिरावट फिलहाल सीमित दायरे में ही बनी हुई है।

## कच्चे तेल में भारी गिरावट और भू-राजनीतिक परिदृश्य
अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत की उम्मीदों का सबसे सीधा असर वैश्विक जिंस बाजार पर दिखाई दिया है। कच्चे तेल के अंतरराष्ट्रीय मानक ब्रेंट ऑयल की कीमतें दो सप्ताह से अधिक के निचले स्तर पर पहुँच गईं और दिन के शुरुआती कारोबार में 94.20 डॉलर प्रति बैरल के स्तर तक फिसल गईं। यह स्तर पिछले सप्ताह के उच्चतम स्तर की तुलना में 10% से भी अधिक नीचे है। कच्चे तेल की कीमतों में आई इस तेज गिरावट ने ऊर्जा बाजार पर भारी दबाव बना दिया है। ऊर्जा लागत में आई यह कमी वैश्विक स्तर पर महंगाई के दबाव को हल्का करने का संकेत दे रही है, जिससे वैश्विक जोखिम धारणा को और बल मिला है।

भू-राजनीतिक घटनाक्रमों के इस व्यापक परिदृश्य के बीच, स्विस नेशनल बैंक ने मंगलवार को आधिकारिक तौर पर आगाह किया कि मध्य पूर्व का संघर्ष ऐसी स्थिति बना रहा है जिसमें जरूरत पड़ने पर वे विदेशी मुद्रा बाजार में हस्तक्षेप करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। हालांकि केंद्रीय बैंक ने अपनी इस योजना का कोई विस्तृत ब्योरा साझा नहीं किया है, लेकिन मुद्रा विश्लेषकों का स्पष्ट मानना है कि इस कदम का मुख्य उद्देश्य स्विस फ्रैंक की बहुत तेज रफ्तार वाली बढ़त को रोकना है। स्विस फ्रैंक का अत्यधिक मजबूत होना देश के भीतर मुद्रास्फीति को तय लक्ष्य तक उठाने के बैंक के प्रयासों को झटका दे सकता है।

## स्विस नेशनल बैंक का जनादेश और नीतिगत रूपरेखा
स्विट्जरलैंड के केंद्रीय बैंक के रूप में स्विस नेशनल बैंक पूरी तरह से स्वतंत्र होकर काम करता है और इसका प्राथमिक दायित्व मध्यम और लंबी अवधि में देश के भीतर मूल्य स्थिरता बनाए रखना है। इस मूल्य स्थिरता को सुनिश्चित करने के लिए, केंद्रीय बैंक मौद्रिक परिस्थितियों को अनुकूल बनाए रखने का लक्ष्य रखता है, जो मुख्य रूप से ब्याज दरों के स्तर और विदेशी मुद्रा विनिमय दरों से निर्धारित होती हैं। स्विस नेशनल बैंक की औपचारिक परिभाषा के अनुसार, मूल्य स्थिरता का अर्थ स्विस उपभोक्ता मूल्य सूचकांक यानी CPI में सालाना 2% से कम की वृद्धि होना है।

स्विस नेशनल बैंक का गवर्निंग बोर्ड अपने मूल्य स्थिरता के उद्देश्य के अनुरूप ही अपनी नीतिगत दर का स्तर तय करता है। जब मुद्रास्फीति लक्ष्य से ऊपर चली जाती है या निकट भविष्य में इसके लक्ष्य से ऊपर जाने का अनुमान होता है, तो बैंक अत्यधिक मूल्य वृद्धि को थामने के लिए अपनी नीतिगत दर में बढ़ोतरी करता है। आमतौर पर उच्च ब्याज दरें स्विस फ्रैंक के लिए सकारात्मक मानी जाती हैं, क्योंकि इनसे बेहतर यील्ड मिलती है और देश अंतरराष्ट्रीय निवेशकों के लिए अधिक आकर्षक गंतव्य बन जाता है। इसके ठीक विपरीत, जब ब्याज दरों में कटौती की जाती है या दरें निचले स्तर पर रखी जाती हैं, तो उससे स्विस फ्रैंक कमजोर होता है।

## विदेशी मुद्रा बाजार में हस्तक्षेप का इतिहास और रणनीति
स्विस फ्रैंक को अन्य विदेशी मुद्राओं के मुकाबले बहुत अधिक मजबूत होने से रोकने के लिए स्विस नेशनल बैंक नियमित रूप से विदेशी मुद्रा बाजार में दखल देता रहा है। बहुत मजबूत स्विस फ्रैंक देश के विशाल और ताकतवर निर्यात क्षेत्र की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता को गंभीर नुकसान पहुँचाता है, जिससे स्थानीय विनिर्माताओं के लिए अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अपने उत्पाद बेचना महंगा हो जाता है। ऐतिहासिक रूप से देखें तो वर्ष 2011 से 2015 के बीच, स्विस नेशनल बैंक ने यूरो के मुकाबले स्विस फ्रैंक की तीव्र बढ़त को सीमित करने के लिए यूरो के साथ एक निश्चित पेग लागू किया था।

केंद्रीय बैंक अपने भारी-भरकम विदेशी मुद्रा भंडार का इस्तेमाल करके खुले बाजार में हस्तक्षेप करता है, जिसके तहत वह आमतौर पर अमेरिकी डॉलर या यूरो जैसी प्रमुख विदेशी मुद्राओं की सीधी खरीदारी करता है। हालांकि, उच्च मुद्रास्फीति के दौर में, विशेष रूप से जब ऊर्जा की कीमतों में अत्यधिक उछाल आता है, तब स्विस नेशनल बैंक बाजारों में हस्तक्षेप करने से बचता है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि मजबूत स्विस फ्रैंक विदेशों से आयात होने वाली ऊर्जा को सस्ता बना देता है, जिससे स्विस परिवारों और स्थानीय व्यवसायों पर पड़ने वाले मूल्य वृद्धि के झटके को काफी हद तक कम करने में मदद मिलती है। स्विस नेशनल बैंक साल में चार बार यानी हर तिमाही में मार्च, जून, सितंबर और दिसंबर में अपनी मौद्रिक नीति समीक्षा बैठक आयोजित करता है, जिसमें प्रत्येक समीक्षा के बाद नीतिगत दरों पर निर्णय और मध्यम अवधि का मुद्रास्फीति पूर्वानुमान सार्वजनिक किया जाता है।

## वैश्विक मुद्रा बाजार और अमेरिकी डॉलर की स्थिति
मंगलवार को अमेरिकी डॉलर में भी हल्का दबाव और नरमी देखने को मिली। छह प्रमुख वैश्विक मुद्राओं की एक टोकरी के मुकाबले ग्रीनबैक के मूल्य को मापने वाला अमेरिकी डॉलर सूचकांक यानी DXY अपने लगभग दो महीने के उच्च स्तर 100.67 से फिसल गया, लेकिन यह अब भी 100.00 के महत्वपूर्ण मनोवैज्ञानिक स्तर से ऊपर टिका हुआ है। बाजार में डॉलर की इस सीमित गिरावट के बीच अन्य प्रमुख मुद्राओं में भी हलचल देखी जा रही है। एशियाई कारोबारी सत्र में AUD/USD जोड़ी ने 0.7100 के ऊपर मजबूती दिखाई। ऑस्ट्रेलियाई डॉलर को यह समर्थन रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया की सहायक गवर्नर सारा हंटर और गवर्नर मिशेल बुलक के कड़े नीतिगत बयानों से मिला है। हालांकि, मध्य पूर्व में बना तनाव और फेडरल रिजर्व का सख्त नीतिगत दृष्टिकोण अमेरिकी डॉलर के अंतर्निहित रुख को समर्थन दे रहे हैं, जिससे इस जोड़ी की बढ़त सीमित रह सकती है। इसके अलावा, इस सप्ताह के उत्तरार्ध में होने वाला ट्रंप और शी जिनपिंग का महत्वपूर्ण शिखर सम्मेलन भी बाजार के केंद्र में बना हुआ है।

दूसरी ओर, मंगलवार को एशियाई कारोबारी सत्र में USD/JPY जोड़ी मामूली बढ़त के साथ 157.50 के स्तर के आसपास कारोबार करती दिखी। बाजार में जापानी अधिकारियों द्वारा संभावित मुद्रा हस्तक्षेप के डर ने जापानी येन के नुकसान को एक निश्चित दायरे में सीमित रखने का काम किया है। हालांकि, बैंक ऑफ जापान द्वारा 31 साल के उच्चतम स्तर पर की गई नरम ब्याज दर वृद्धि ने येन पर दांव लगाने वाले निवेशकों को रक्षात्मक मुद्रा में बनाए रखा है। बैंक ऑफ जापान ने अपने अल्पकालिक ब्याज दर लक्ष्य को 7-2 के बहुमत से 1.00% से बढ़ाकर 1.25% कर दिया है, जो मौद्रिक नीति के सामान्यीकरण की दिशा में एक और बड़ा कदम है और यह फैसला ठीक वैसा ही रहा जिसकी बाजार हफ्तों से उम्मीद कर रहा था।

## सोने और क्रिप्टोकरेंसी बाजार का ताजा हाल
वैश्विक कमोडिटी बाजार में सोने की चमक लगातार दूसरे दिन फीकी पड़ती दिखाई दी। दिन के दौरान आई मामूली इंट्राडे रिकवरी के बाद पीली धातु पर दबाव बढ़ गया और यूरोपीय कारोबारी सत्र में यह फिसलकर 4,315 डॉलर के स्तर को चुनौती देती नजर आई, जो इसका तीन दिनों का निचला स्तर है। अमेरिकी फेडरल रिजर्व के कड़े मौद्रिक नीति दृष्टिकोण को बिना ब्याज वाली इस परिसंपत्ति से निवेशकों के फंड को बाहर निकालने का सबसे प्रमुख कारक माना जा रहा है। सोने में लगातार दूसरे दिन आई यह कमजोरी इस बात को रेखांकित करती है कि बांड प्रतिफल और ब्याज दरों का दबाव सुरक्षित निवेश के आकर्षण पर हावी हो रहा है।

डिजिटल परिसंपत्तियों के बाजार में बिटकॉइन की रफ्तार भी थमती हुई नजर आई। पिछले दिन 6.7% की जोरदार छलांग लगाने के बाद मंगलवार को बिटकॉइन मुनाफावसूली का सामना करते हुए फिसल गया और 85,500 डॉलर के स्तर से नीचे कारोबार करता दिखा। हालांकि, इस मामूली तकनीकी गिरावट के बावजूद संस्थागत मांग की मजबूती कीमतों को लगातार आधार प्रदान कर रही है। स्पॉट बिटकॉइन एक्सचेंज ट्रेडेड फंड्स यानी ETF ने सोमवार को लगभग 1 बिलियन डॉलर की भारी शुद्ध आवक दर्ज की, जबकि स्ट्रेटेजी ने अपने खजाने में अतिरिक्त 950 BTC शामिल किए हैं। इन संस्थागत निवेशों से संकेत मिलता है कि बाजार में मध्यम अवधि की तेजी का रुख अब भी बरकरार है।

## इसका आप पर असर
वैश्विक विदेशी मुद्रा बाजार में स्विस नेशनल बैंक की चेतावनी और कच्चे तेल में आई तेज गिरावट से अंतरराष्ट्रीय व्यापार और निवेश पर सीधा प्रभाव पड़ेगा।

- **भारत में प्रभाव:** अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड के 94.20 डॉलर तक फिसलने से भारत के आयात बिल पर दबाव कुछ कम हो सकता है। यदि कच्चे तेल में नरमी लंबे समय तक बनी रहती है तो घरेलू स्तर पर पेट्रोल, डीजल और रसद लागत को स्थिर रखने में राहत मिल सकती है।
- **वैश्विक निवेशकों के लिए:** अमेरिकी डॉलर इंडेक्स के 100.67 से फिसलने और जोखिम धारणा में सुधार से उभरते बाजारों में विदेशी पूंजी प्रवाह को समर्थन मिल सकता है। जो निवेशक करेंसी ट्रेडिंग या अंतरराष्ट्रीय संपत्तियों में निवेश करते हैं, उन्हें स्विस फ्रैंक और येन में केंद्रीय बैंकों के संभावित दखल को लेकर सतर्क रहना चाहिए।
- **सोने और कमोडिटी खरीदारों के लिए:** सोने के दाम फिसलकर 4,315 डॉलर के तीन दिवसीय निचले स्तर पर आने से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बुलियन पर दबाव साफ दिख रहा है। फेडरल रिजर्व की सख्त ब्याज दर नीतियों के कारण गैर-ब्याज वाली संपत्तियों में निकट अवधि में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है।
- **क्रिप्टो निवेशकों के लिए:** बिटकॉइन के 85,500 डॉलर से नीचे आने के बावजूद संस्थागत मांग बहुत मजबूत बनी हुई है। स्पॉट ETF में एक ही दिन में करीब 1 बिलियन डॉलर का निवेश और कंपनियों द्वारा सीधे बिटकॉइन जोड़ना यह दर्शाता है कि दीर्घकालिक निवेशक गिरावट पर खरीदारी कर रहे हैं।

## ऐसा क्यों हुआ
वैश्विक वित्तीय बाजारों में यह तीव्र बदलाव मुख्य रूप से अमेरिका और ईरान के बीच राजनयिक वार्ता की नई संभावनाओं और केंद्रीय बैंकों की भिन्न मौद्रिक नीतियों के टकराव के कारण उत्पन्न हुआ है।

- **भू-राजनीतिक वार्ता की उम्मीदें:** अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन के बीच संयुक्त राष्ट्र शिखर सम्मेलन के दौरान बैठक की खबरों ने मध्य पूर्व में तनाव घटने की उम्मीद जगा दी। इसके परिणामस्वरूप कच्चे तेल में भारी बिकवाली हुई और निवेशकों ने रक्षात्मक डॉलर की जगह जोखिम वाली संपत्तियों में पूंजी लगाई।
- **स्विस फ्रैंक की अत्यधिक मजबूती:** वैश्विक अनिश्चितता के दौरान स्विस फ्रैंक में लगातार तेज खरीदारी होने से यह अन्य प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले बहुत मजबूत हो गया था। घरेलू मुद्रा के अत्यधिक मजबूत होने से स्विस निर्यात उद्योग को नुकसान पहुँचने और महंगाई दर तय लक्ष्य से नीचे फिसलने का खतरा पैदा हो गया, जिसके चलते केंद्रीय बैंक को हस्तक्षेप की चेतावनी देनी पड़ी।
- **केंद्रीय बैंकों के नीतिगत कदम:** बैंक ऑफ जापान ने अपनी अल्पकालिक नीति दर को 31 साल के उच्चतम स्तर 1.25% पर पहुँचा दिया, जबकि फेडरल रिजर्व की सख्त नीतिगत टिप्पणियों ने डॉलर की गिरावट को एक सीमित दायरे में बनाए रखा। विभिन्न देशों के केंद्रीय बैंकों के बीच ब्याज दरों के इस अंतर ने मुद्रा जोड़ियों में भारी अस्थिरता पैदा की है।

## सवाल-जवाब

### 1. स्विस नेशनल बैंक ने विदेशी मुद्रा बाजार में हस्तक्षेप की चेतावनी क्यों दी है?
स्विस फ्रैंक की बहुत तेज मजबूती को रोकने के लिए यह चेतावनी दी गई है, क्योंकि अत्यधिक मजबूत मुद्रा स्विट्जरलैंड के निर्यात क्षेत्र को नुकसान पहुँचाती है और घरेलू मुद्रास्फीति को बढ़ाने के प्रयासों को कमजोर करती है।

### 2. USD/CHF विनिमय दर में कितनी गिरावट दर्ज की गई?
USD/CHF जोड़ी फिसलकर 0.8200 के स्तर से नीचे चली गई है, जो पिछले सप्ताह के उच्चतम स्तर की तुलना में लगभग 1% कम है।

### 3. कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट का क्या कारण रहा?
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन के बीच संयुक्त राष्ट्र शिखर सम्मेलन में वार्ता की उम्मीदों से ब्रेंट क्रूड फिसलकर 94.20 डॉलर प्रति बैरल के दो सप्ताह के निचले स्तर पर आ गया।

### 4. स्विस नेशनल बैंक के अनुसार मूल्य स्थिरता का पैमाना क्या है?
स्विस नेशनल बैंक के अनुसार मूल्य स्थिरता का तात्पर्य स्विस उपभोक्ता मूल्य सूचकांक यानी CPI में सालाना 2% से कम की वृद्धि दर बनाए रखना है।

### 5. बैंक ऑफ जापान ने अपनी ब्याज दरों में क्या बदलाव किया?
बैंक ऑफ जापान ने अपने अल्पकालिक ब्याज दर लक्ष्य को 7-2 के बहुमत से 1.00% से बढ़ाकर 1.25% कर दिया, जो 31 साल का उच्चतम स्तर है।

### 6. सोने की कीमतों में मंगलवार को क्या रुख देखने को मिला?
अमेरिकी फेडरल रिजर्व के सख्त नीतिगत रुख के कारण सोने में लगातार दूसरे दिन गिरावट आई और यह फिसलकर 4,315 डॉलर के तीन दिवसीय निचले स्तर पर पहुँच गया।

### 7. बिटकॉइन बाजार में संस्थागत निवेश का क्या हाल रहा?
बिटकॉइन फिसलकर 85,500 डॉलर से नीचे आ गया, लेकिन स्पॉट बिटकॉइन ETF में करीब 1 बिलियन डॉलर का नया निवेश आया और स्ट्रेटेजी ने 950 BTC अपने खजाने में जोड़े।

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