ताइवान डॉलर में रिकॉर्ड व्यापार अधिशेष के बाद भी सुस्ती, जानें क्या है वजह रिकॉर्ड व्यापार अधिशेष और मजबूत शेयर बाजार के बावजूद ताइवान डॉलर में अपेक्षित मजबूती नहीं दिखी है। कॉर्पोरेट निवेश और अमेरिका के साथ यील्ड अंतर के चलते मुद्रा पर दबाव बना हुआ है। ताइवान की अर्थव्यवस्था इस समय दोहरे आर्थिक रुझानों का सामना कर रही है, जहां एक तरफ विदेशी व्यापार के मोर्चे पर ऐतिहासिक रिकॉर्ड बन रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ स्थानीय मुद्रा की चाल काफी संतुलित और सीमित बनी हुई है। देश के निर्यात में तकनीकी क्षेत्र की वैश्विक तेजी के कारण भारी उछाल आया है और शेयर बाजार में भी विदेशी निवेशकों ने जोरदार पूंजी डाली है। इसके बावजूद ताइवान डॉलर उस अनुपात में मजबूत नहीं हो सका है, जिसकी उम्मीद ऐसे अनुकूल आर्थिक आंकड़ों के बीच की जाती है। विदेशी निवेश और यील्ड अंतर का दोहरा असर मुद्रा बाजार में ताइवान डॉलर की इस सीमित चाल के पीछे मुख्य रूप से दो बड़े आर्थिक कारण सक्रिय हैं। पहला कारण ताइवान की घरेलू कंपनियों द्वारा अपनी उत्पादन क्षमता बढ़ाने के इरादे से विदेशों में किया जा रहा भारी निवेश है। कंपनियां विनिर्माण और आपूर्ति श्रृंखला का विस्तार अंतरराष्ट्रीय बाजारों में कर रही हैं, जिसके लिए पूंजी ताइवान से बाहर भेजी जा रही है। दूसरा प्रमुख कारक ताइवान और अमेरिका जैसे विकसित बाजारों के बीच बॉन्ड यील्ड में मौजूद भारी अंतर है। अमेरिकी बॉन्ड बाजार में मिलने वाला बेहतर रिटर्न निवेशकों को अपनी पूंजी बाहर ले जाने के लिए प्रेरित करता है। इन पूंजीगत बहिर्वाहों ने निर्यात और इक्विटी बाजार से आने वाले विदेशी प्रवाह के असर को काफी हद तक संतुलित कर दिया है। केंद्रीय बैंक के कदम और ब्याज दरों में बढ़ोतरी के आसार इस पूरे घटनाक्रम के बीच ताइवान के सेंट्रल बैंक ऑफ चाइना ने विदेशी मुद्रा बाजार में स्थिरता बनाए रखने के उद्देश्य से कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। विनिमय दर में अत्यधिक उतार-चढ़ाव को रोकने के लिए नियामक संस्था लगातार सक्रिय निगरानी बनाए हुए है। अर्थव्यवस्था में महंगाई के ताजा आंकड़े भी मौद्रिक नीति के लिए नई चुनौतियां पेश कर रहे हैं। वार्षिक आधार पर महंगाई दर 2.7 प्रतिशत दर्ज की गई है, जो अनुमानों से अधिक है। वहीं दूसरी ओर नए व्यापार आंकड़े दर्शाते हैं कि आर्थिक वृद्धि मजबूत बनी हुई है। सितंबर में निर्यात कीमतों में साल-दर-साल 25.8 प्रतिशत की भारी वृद्धि हुई है, जिससे साबित होता है कि ताइवान को वैश्विक स्तर पर तकनीकी उत्पादों की ऊंची कीमतों का सीधा लाभ मिल रहा है। इन परिस्थितियों को देखते हुए सेंट्रल बैंक ऑफ चाइना द्वारा दिसंबर की अपनी बैठक में नीतिगत ब्याज दरों में बढ़ोतरी करने का ठोस आधार बनता दिख रहा है, हालांकि उस बैठक तक पहुंचने में अभी काफी समय बाकी है। वैश्विक मुद्रा बाजार और अन्य प्रमुख संपत्तियों की स्थिति अंतरराष्ट्रीय मुद्रा बाजारों में अन्य प्रमुख मुद्राओं और संपत्तियों में भी महत्वपूर्ण हलचल देखने को मिल रही है। गुरुवार के एशियाई कारोबारी सत्र में ऑस्ट्रेलियाई डॉलर अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 0.6950 के ठीक ऊपर स्थिर रुख अपनाए हुए है। पश्चिम एशिया के संकट के बीच पेंटागन द्वारा ईरान पर संभावित हमलों के लिए सैन्य तैयारियों के आदेश दिए जाने के घटनाक्रम पर व्यापारी नजर रखे हुए हैं। भू-राजनीतिक जोखिम, सख्त मौद्रिक नीति से जुड़े एफओएमसी मिनट्स और ऊंची अमेरिकी बॉन्ड यील्ड के कारण अमेरिकी डॉलर को समर्थन मिल रहा है। दूसरी ओर, अमेरिकी डॉलर और जापानी येन की जोड़ी एशियाई सत्र में गिरकर 158.00 के स्तर से नीचे आ गई है। बाजार में इस बात की अटकलें तेज हैं कि जापानी अधिकारी अपनी मुद्रा को सहारा देने के लिए बाजार में हस्तक्षेप कर सकते हैं। इसके साथ ही अमेरिकी डॉलर में 18 महीने के उच्च स्तर के करीब मुनाफावसूली होने से भी इस जोड़ी में गिरावट आई है। कमोडिटी बाजार में सोने ने गुरुवार को बढ़त के साथ वापसी की है और यह लगभग 4,150 डॉलर प्रति ट्रॉय औंस के स्तर के करीब पहुंच गया है। अमेरिकी डॉलर की मजबूती में आई सुस्ती और अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में सभी अवधियों में आई गिरावट के चलते पीली धातु की कीमतों को सहारा मिला है। इसका आप पर असर ताइवान की मजबूत तकनीकी आपूर्ति और वैश्विक मुद्रा दरों में होने वाले बदलाव अंतरराष्ट्रीय व्यापार तथा कमोडिटी बाजार पर सीधा असर डालते हैं। • आयात और तकनीकी लागत पर: वैश्विक स्तर पर तकनीकी निर्यात की ऊंची कीमतों से इलेक्ट्रॉनिक्स सामानों की लागत बढ़ सकती है। भारत सहित दुनिया भर के उपभोक्ताओं को गैजेट्स और कंपोनेंट्स के लिए स्थिर या अधिक कीमत चुकानी पड़ सकती है। • सोने के निवेशकों के लिए: सोने का भाव 4,150 डॉलर प्रति औंस के करीब पहुंचने से सुरक्षित निवेश की मांग बढ़ी है। कमोडिटी निवेशक अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और डॉलर के उतार-चढ़ाव पर नजर रखकर अपनी रणनीति तय कर सकते हैं। • वैश्विक वित्तीय बाजारों पर: अमेरिकी यील्ड और अन्य मुद्राओं के बीच ब्याज अंतर से पूंजी प्रवाह प्रभावित होता है। उभरते बाजारों में निवेश करने वाले फंड्स ब्याज दरों में संभावित बदलावों के अनुसार अपना आवंटन समायोजित कर सकते हैं। • केंद्रीय बैंकों के रुख पर: ताइवान में 2.7 प्रतिशत महंगाई के बाद दिसंबर में ब्याज दरें बढ़ने के संकेत हैं। इससे एशियाई क्षेत्र में मौद्रिक नीतियों के कड़े बने रहने की संभावना को बल मिलता है। ऐसा क्यों हुआ ताइवान डॉलर की सीमित चाल और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में हलचल के पीछे घरेलू कॉर्पोरेट नीतियां, ब्याज दर अंतर और भू-राजनीतिक तनाव मुख्य कारक हैं। • पूंजीगत बहिर्वाह और विदेशी विस्तार: ताइवानी कंपनियां अपनी विनिर्माण क्षमता बढ़ाने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पूंजी लगा रही हैं। इसके अलावा अमेरिका और ताइवान के बीच बॉन्ड यील्ड के बड़े अंतर के कारण पूंजी घरेलू बाजार से बाहर जा रही है। • मुद्रा स्थिरता के नियामक उपाय: सेंट्रल बैंक ऑफ चाइना ने विनिमय दर में अत्यधिक उतार-चढ़ाव को थामने के लिए बाजार में स्थिरता उपाय लागू किए हैं। इन कदमों ने भारी व्यापार अधिशेष के बावजूद मुद्रा को एक सीमित दायरे में बनाए रखा है। • बढ़ती महंगाई और तकनीकी मांग: सितंबर में निर्यात कीमतों में 25.8 प्रतिशत का उछाल आया और महंगाई दर 2.7 प्रतिशत वार्षिक रही। मजबूत विकास और गर्म महंगाई के आंकड़ों ने ताइवान के केंद्रीय बैंक द्वारा दिसंबर में ब्याज दरें बढ़ाने की संभावना को मजबूत किया है। • भू-राजनीति और वैश्विक बॉन्ड बाजार: पश्चिम एशिया में तनाव और सख्त अमेरिकी मौद्रिक रुख ने डॉलर को मजबूती दी है, जबकि बॉन्ड यील्ड में गिरावट ने सोने को संभलने का मौका दिया। सवाल-जवाब 1. ताइवान डॉलर मजबूत व्यापार अधिशेष के बावजूद कमजोर क्यों बना हुआ है? कंपनियों द्वारा विदेशों में विनिर्माण विस्तार और अमेरिका के साथ बॉन्ड यील्ड के बड़े अंतर के कारण पूंजी बाहर जाने से मुद्रा पर दबाव है। 2. ताइवान में हालिया महंगाई दर कितनी दर्ज की गई है? ताइवान में वार्षिक आधार पर महंगाई दर 2.7 प्रतिशत दर्ज की गई है, जो मजबूत आर्थिक वृद्धि का संकेत देती है। 3. सितंबर में ताइवान के निर्यात मूल्यों में कितनी बढ़ोतरी हुई? वैश्विक स्तर पर तकनीकी उत्पादों की ऊंची कीमतों के चलते सितंबर में निर्यात मूल्यों में 25.8 प्रतिशत की वार्षिक वृद्धि हुई। 4. क्या ताइवान का केंद्रीय बैंक ब्याज दरें बढ़ा सकता है? मजबूत विकास और 2.7 प्रतिशत महंगाई को देखते हुए सेंट्रल बैंक ऑफ चाइना द्वारा दिसंबर की बैठक में दरें बढ़ाने की संभावना जताई गई है। 5. अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमत किस स्तर पर पहुंची है? अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में गिरावट और डॉलर में नरमी के बाद सोना लगभग 4,150 डॉलर प्रति ट्रॉय औंस के पास पहुंच गया है। 6. जापानी येन और अमेरिकी डॉलर की विनिमय दर में क्या रुझान देखा गया? सरकारी हस्तक्षेप की आशंका और डॉलर में मुनाफावसूली के चलते यूएसडी/जेपीवाई गिरकर 158.00 के नीचे आ गया। https://trendkia.com/market/taiwan-dollar-men-rikorda-vyapara-adhishesha-ke-bada-bhi-susti-janen-kya-hai-vajaha-45020 TrendKia — Har trend, sabse pehle.