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  "title": "टीडी सिक्योरिटीज का अनुमान: सितंबर में ब्याज दरें नहीं बदलेगा फेडरल रिजर्व, लेकिन आगे कटौती से ज्यादा बढ़ोतरी की आशंका",
  "summary": "टीडी सिक्योरिटीज के अर्थशास्त्री ऑस्कर मुनोज़ और एली नीर का कहना है कि अगस्त का CPI आंकड़ा इतना नरम रहेगा कि फेडरल रिजर्व सितंबर में ब्याज दरें नहीं बदलेगा, हालांकि महंगाई का कोई चौंकाने वाला आंकड़ा आया तो कटौती की बजाय बढ़ोतरी हो सकती है।",
  "content": "टीडी सिक्योरिटीज के अर्थशास्त्री ऑस्कर मुनोज़ और एली नीर को उम्मीद है कि अगस्त महीने का उपभोक्ता मूल्य सूचकांक यानी CPI इतना हल्का रहेगा कि फेडरल रिजर्व सितंबर की बैठक में ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं करेगा। साथ ही उन्होंने आगाह किया है कि अगर महंगाई का आंकड़ा उम्मीद से ज्यादा तेज आया, तो केंद्रीय बैंक दरें घटाने की बजाय बढ़ा भी सकता है।\n\nCPI से PCE तक का हिसाब क्या कहता है\nफेडरल रिजर्व अपनी नीति तय करते वक्त सिर्फ CPI नहीं, बल्कि PCE यानी पर्सनल कंज्म्पशन एक्सपेंडिचर इंडेक्स को ज्यादा तरजीह देता है। टीडी सिक्योरिटीज के अर्थशास्त्रियों ने अगस्त के अनुमानित CPI आंकड़े को इसी PCE पैमाने में बदलकर देखा है। उनका कहना है कि अगर उनका अनुमान सही निकला, तो कोर PCE महंगाई महीने-दर-महीने आधार पर मामूली 0.18% रहेगी, जबकि मार्केट-बेस्ड कोर PCE और भी नरम, यानी सिर्फ 0.13% पर रहेगा। इतने कम आंकड़े फेडरल रिजर्व की नीति-निर्धारक समिति FOMC के उन सदस्यों के लिए राहत भरे होंगे जो नरम रुख रखते हैं, खासकर वालर और विलियम्स जैसे केंद्रवादी सदस्यों के लिए। टीडी सिक्योरिटीज के मुताबिक, यही आंकड़े सितंबर में फेडरल रिजर्व को दरें स्थिर रखने के लिए काफी होंगे।\n\nगवर्नर वालर का रुख इतना अहम क्यों है\nटीडी सिक्योरिटीज ने खासतौर पर फेडरल रिजर्व के गवर्नर वालर के रुख का जिक्र किया है। उनके मुताबिक, जब तक आने वाले आर्थिक आंकड़े इजाजत देते हैं, तब तक वालर दरें स्थिर रखने के पक्ष में हैं। यह इसलिए मायने रखता है क्योंकि अर्थशास्त्रियों ने वालर को FOMC के उन ज्यादा केंद्रवादी सदस्यों में गिना है, जो न तो बहुत नरम हैं और न बहुत सख्त। CPI से PCE में तब्दील किया गया आंकड़ा अगर वाकई कम महंगाई दिखाता है, तो यह सीधे तौर पर वालर जैसे सदस्यों की उस दलील को मजबूत करता है कि फिलहाल इंतजार करना ही सही रणनीति है। यही वजह है कि टीडी सिक्योरिटीज को भरोसा है कि सितंबर की बैठक में समिति दरें बढ़ाने या घटाने के बजाय उन्हें जस का तस रखने का फैसला करेगी।\n\nस्थिर होता श्रम बाजार महंगाई पर ध्यान केंद्रित करने की गुंजाइश देता है\nटीडी सिक्योरिटीज के अर्थशास्त्रियों के मुताबिक, उनके पूरे अनुमान अवधि के दौरान फेडरल रिजर्व दरों को स्थिर ही रखेगा। उनका अनुमान है कि इस साल के बाकी महीनों में महंगाई ऊंचे स्तर पर बनी रहेगी, जबकि श्रम बाजार अब स्थिर हो चुका है। फेडरल रिजर्व का काम दोहरा है, यानी उसे कीमतों को काबू में रखने के साथ-साथ रोजगार बाजार का भी ध्यान रखना होता है। लेकिन जब नौकरियों का बाजार स्थिर हो जाए, तो FOMC को रोजगार की चिंता किए बिना महंगाई के लक्ष्य पर ज्यादा ध्यान केंद्रित करने की गुंजाइश मिल जाती है। टीडी सिक्योरिटीज का कहना है कि फिलहाल यही स्थिति बन रही है, और यही वजह है कि समिति का पूरा ध्यान अब महंगाई के आंकड़ों पर टिका है।\n\nअगर फेडरल रिजर्व हिला भी, तो कटौती नहीं बढ़ोतरी का दांव ज्यादा\nटीडी सिक्योरिटीज ने साफ कहा है कि भले ही उनका मूल अनुमान दरें स्थिर रहने का है, लेकिन अगर महंगाई का आंकड़ा उम्मीद से ज्यादा तेज निकला, तो फेडरल रिजर्व दरें बढ़ाने पर मजबूर हो सकता है। इस बारे में अर्थशास्त्रियों ने सीधे तौर पर कहा, \"अगर फेडरल रिजर्व इस साल कोई कदम उठाता है, तो हमें लगता है कि वह कदम कटौती के बजाय बढ़ोतरी का होने की ज्यादा संभावना है।\" यानी मौजूदा हालात में बाजार में जो कयास दरों में कटौती को लेकर लगते रहे हैं, टीडी सिक्योरिटीज की राय उससे उलट है। उनके मुताबिक अगर सितंबर की बैठक में दरें स्थिर नहीं रहीं, तो अगला कदम राहत नहीं बल्कि सख्ती वाला ही होगा।\n\nइसका आप पर असर\nअमेरिकी फेडरल रिजर्व का यह अनुमानित रुख भारत सहित दुनियाभर के बाजारों, डॉलर की कीमत और सोने-चांदी के दामों पर असर डाल सकता है।\n\n• शेयर बाजार निवेशकों के लिए: अगर फेडरल रिजर्व सितंबर में दरें स्थिर रखता है, तो यह वैश्विक बाजारों के लिए राहत की बात होगी। लेकिन बढ़ोतरी की आशंका बनी रहने से भारतीय शेयर बाजार में भी उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।\n• सोना खरीदने वालों के लिए: ब्याज दरें ऊंची रहने या बढ़ने की आशंका डॉलर को मजबूत कर सकती है, जिससे सोने की कीमतों पर दबाव बन सकता है। जो लोग सोना खरीदने की योजना बना रहे हैं, वे कीमतों पर नजर रखें।\n• विदेशी मुद्रा और रुपये पर असर: फेडरल रिजर्व की सख्त नीति डॉलर को मजबूत कर सकती है, जिससे रुपये पर दबाव बढ़ सकता है। इससे आयात महंगा हो सकता है और विदेश यात्रा या पढ़ाई करने वालों का खर्च बढ़ सकता है।\n• कर्ज लेने वालों के लिए: अगर आगे चलकर फेडरल रिजर्व दरें बढ़ाता है, तो वैश्विक स्तर पर उधारी महंगी हो सकती है, जिसका असर डॉलर में कर्ज लेने वाली भारतीय कंपनियों पर भी पड़ सकता है।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. टीडी सिक्योरिटीज को उम्मीद है कि सितंबर में फेडरल रिजर्व क्या करेगा?\nटीडी सिक्योरिटीज को उम्मीद है कि फेडरल रिजर्व सितंबर की बैठक में ब्याज दरें स्थिर रखेगा।\n\n2. इस अनुमान के पीछे कौन से अर्थशास्त्री हैं?\nयह अनुमान टीडी सिक्योरिटीज के अर्थशास्त्री ऑस्कर मुनोज़ और एली नीर का है।\n\n3. अनुमानित कोर PCE महंगाई दर कितनी रहेगी?\nउनके मुताबिक कोर PCE महीने-दर-महीने आधार पर 0.18% रहेगा, जबकि मार्केट-बेस्ड कोर PCE 0.13% रहेगा।\n\n4. फेडरल रिजर्व गवर्नर वालर का रुख क्या है?\nगवर्नर वालर तब तक दरें स्थिर रखने के पक्ष में हैं, जब तक आने वाले आंकड़े इसकी इजाजत देते हैं।\n\n5. क्या फेडरल रिजर्व इस साल दरों में बदलाव कर सकता है?\nटीडी सिक्योरिटीज के मुताबिक अगर फेडरल रिजर्व कोई कदम उठाता भी है, तो वह कटौती के बजाय बढ़ोतरी होने की ज्यादा संभावना है।\n\n6. श्रम बाजार की स्थिति का इस अनुमान से क्या संबंध है?\nश्रम बाजार स्थिर हो चुका है, जिससे फेडरल रिजर्व को रोजगार की बजाय महंगाई पर ध्यान केंद्रित करने की गुंजाइश मिलती है।",
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  "category": "बाज़ार",
  "publishedAt": "2026-09-07",
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