# फेडरल रिजर्व की ब्लैकआउट अवधि से पहले ब्याज दरों की भारी गलत प्राइजिंग, टीडी सिक्योरिटीज ने दी चेतावनी

> सितंबर की नीतिगत बैठक से ठीक पहले फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों को लेकर वित्तीय बाजारों में भारी अनिश्चितता बनी हुई है। टीडी सिक्योरिटीज का कहना है कि सीपीआई आंकड़ों से पहले बाजार की प्राइजिंग जोखिमों का गलत आकलन कर रही है।

**Type:** article · **Category:** बाज़ार · **Published:** 2026-09-09 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/market/td-securities-ki-chetavani-federal-reserve-ki-blaikaauta-avadhi-se-pahale-byaja-daron-ki-galata-praijinga-30179 · **Language:** Hindi
**Tags:** फेडरल रिजर्व, ब्याज दरें, टीडी सिक्योरिटीज, अमेरिकी अर्थव्यवस्था, विदेशी मुद्रा बाजार, सोना, डीजल क्रैक स्प्रेड, वित्त

अमेरिकी फेडरल रिजर्व की आगामी सितंबर नीतिगत बैठक से पहले वित्तीय बाजारों में ब्याज दरों की प्राइजिंग को लेकर एक दुर्लभ और असाधारण स्थिति देखने को मिल रही है। केंद्रीय बैंक के अनिवार्य ब्लैकआउट अवधि में प्रवेश करने से ठीक पहले बाजार में दरों को स्थिर रखने और 25 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी करने, दोनों ही परिदृश्यों के लिए भारी गलत प्राइजिंग दर्ज की गई है। टीडी सिक्योरिटीज के वित्तीय विश्लेषकों के अनुसार, अगस्त महीने की कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स यानी CPI रिपोर्ट से ठीक पहले निवेशकों के पास बाजार के इस गलत आकलन का फायदा उठाने या अपनी रणनीतियों को नए सिरे से ढालने का एक महत्वपूर्ण अवसर है।

## ब्याज दर प्राइजिंग में ऐतिहासिक विचलन और टीडी सिक्योरिटीज का विश्लेषण
ऐतिहासिक रूप से जब भी फेडरल रिजर्व अपनी ब्याज दरों को स्थिर रखता है, तो बाजारों में प्राइजिंग का विचलन 7 बेसिस पॉइंट के दायरे में ही रहता है। वहीं, जब केंद्रीय बैंक 25 बेसिस पॉइंट की दर बढ़ोतरी करता है, तो प्राइजिंग में उतार-चढ़ाव लगभग 9 बेसिस पॉइंट तक सीमित रहता है। हालांकि, मौजूदा सत्र में दर्ज की गई प्राइजिंग के अनुसार, ब्याज दरें स्थिर रहने की स्थिति में 15 बेसिस पॉइंट का विचलन और दर बढ़ोतरी की स्थिति में 10 बेसिस पॉइंट का विचलन देखने को मिल रहा है। यह दोनों ही संभावित फैसलों के लिए अब तक की सबसे अधिक अनिश्चितता को दर्शाता है।

टीडी सिक्योरिटीज के शोध पत्र के अनुसार, अतीत के सभी ऐसे मामलों में जहां ब्लैकआउट अवधि की शुरुआत में बाजार ने कम से कम 16 बेसिस पॉइंट की संभावना को प्राइज इन किया था, फेडरल रिजर्व ने अंततः दर बढ़ोतरी का ही कदम उठाया था। इस संदर्भ में सबसे बड़ा ऐतिहासिक उदाहरण दिसंबर 2018 में देखा गया था, जब फेडरल रिजर्व ने दरें बढ़ाई थीं, लेकिन वित्तीय बाजारों ने उस कदम को उम्मीद से कम सख्त यानी डोविश हाइक के रूप में लिया था। वर्तमान में प्राइजिंग का यह स्तर जुलाई के बाद के अपने उच्चतम स्तर के करीब बना हुआ है। यदि फेडरल रिजर्व दरें बढ़ाता है, तो बैठक के अनुसार पोजीशन लेने की लागत अपने सबसे निचले स्तर पर होगी। इसके विपरीत, यदि आने वाले सीपीआई आंकड़े दर बढ़ोतरी का समर्थन नहीं करते हैं और बैंक दरों को स्थिर रखता है, तो बाजार के गलत आकलन का लाभ उठाने का यह सबसे बड़ा मौका होगा।

## मुद्रा बाजार का रुझान: USD/JPY और AUD/USD का तकनीकी विश्लेषण
विदेशी मुद्रा बाजार में जापानी येन की मजबूती के कारण अमेरिकी डॉलर पर दबाव देखा जा रहा है। USD/JPY की जोड़ी 153.50 के आसपास मंदी के दायरे में कारोबार कर रही है, जो अपने पिछले बंद स्तर 153.85 से गिरकर 153.30 के स्तर पर आ गई है। बैंक ऑफ जापान यानी BoJ द्वारा मौद्रिक नीति को सामान्य बनाने की बढ़ती संभावनाओं को रॉयटर्स तानकन बिजनेस सर्वे के मजबूत आंकड़ों से बल मिला है। इसके कारण यह करेंसी पेयर सात महीने के निचले स्तर के करीब बना हुआ है। तकनीकी संकेतकों की बात करें तो 14-दिवसीय RSI वर्तमान में 24 के स्तर पर है, जो अत्यधिक बिकवाली यानी ओवरसोल्ड क्षेत्र को दर्शाता है। MACD सूचकांक -1.29 पर है, जो सिग्नल लाइन -0.73 से नीचे बना हुआ है और मंदी के रुझान की पुष्टि करता है। वर्तमान में धुरी बिंदु यानी पिवट लेवल 153.40 पर है, जबकि तात्कालिक सपोर्ट S1 152.83 और S2 152.36 पर स्थित है। ऊपर की ओर पहला रेजिस्टेंस R1 153.87 और R2 154.44 पर देखा जा रहा है, जबकि 52 हफ्तों का दायरा 146.61 से 163.98 के बीच रहा है।

दूसरी ओर, ऑस्ट्रेलियाई डॉलर यानी AUD/USD एशियाई कारोबारी सत्र के दौरान 0.7200 के ऊपर समेकित होता हुआ नजर आया। चीन में सीपीआई और पीपीआई के गर्म आंकड़ों के बावजूद इस मुद्रा में कोई खास उतार-चढ़ाव नहीं देखा गया। हालांकि, रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया यानी RBA द्वारा ब्याज दरें बढ़ाए जाने की तेज होती अटकलों और अमेरिकी डॉलर की कमजोरी ने ऑस्ट्रेलियाई डॉलर को निचले स्तरों पर मजबूत सहारा प्रदान किया है।

## कीमती धातुओं में तेजी और पाई नेटवर्क की रिकवरी
वैश्विक कमोडिटी बाजार में सोने की कीमतों में तीन दिनों की लगातार गिरावट के बाद शानदार वापसी देखने को मिली है। अमेरिकी डॉलर के नरम पड़ने और जापानी येन में आई मजबूती के चलते सोने ने यूरोपीय सत्र की शुरुआत में 4,400 डॉलर प्रति औंस के महत्वपूर्ण स्तर को दोबारा हासिल कर लिया है। डॉलर सूचकांक में दो सप्ताह से अधिक के निचले स्तर पर बने रहने के कारण सोने के खरीदारों को समर्थन मिला है।

डिजिटल एसेट क्षेत्र में पाई नेटवर्क का टोकन PI इस सप्ताह के निचले स्तर पर 50-दिवसीय एक्सपोनेंशियल मूविंग एवरेज यानी EMA से सपोर्ट पाने के बाद 0.098 डॉलर से ऊपर कारोबार कर रहा है। पाई कोर टीम ने नेटवर्क के भीतर एप्लिकेशन-स्तरीय उपयोगिता को बढ़ाने के लिए अपने डेवलपर इकोसिस्टम को मजबूत करने पर विशेष जोर दिया है, जिससे इस क्रिप्टोकरेंसी की कीमतों में सुधार देखा गया है।

## ऊर्जा बाजार में संकट: डीजल क्रैक स्प्रेड का नया रिकॉर्ड
कच्चे तेल का व्यापक बाजार भले ही सतह पर शांत दिखाई दे रहा हो, लेकिन डीजल बाजार से बेहद असमान्य और चिंताजनक संकेत आ रहे हैं। अमेरिकी डीजल क्रैक स्प्रेड यानी डब्लूटीआई क्रूड तेल के मुकाबले अल्ट्रा-लो सल्फर डीजल फ्यूचर्स का प्रीमियम इतिहास में पहली बार 100 डॉलर प्रति बैरल के स्तर को पार कर गया है। कारोबार के दौरान इसने 102.00 डॉलर प्रति बैरल का सर्वकालिक उच्च स्तर छुआ, जो रिफाइनिंग मार्जिन में भारी तनाव और डीजल आपूर्ति की अत्यधिक तंगी को प्रदर्शित करता है।

## इसका आप पर असर
अमेरिकी फेडरल रिजर्व के फैसले और मुद्रा बाजार के उतार-चढ़ाव का सीधा असर वैश्विक तरलता, कमोडिटी दरों और शेयर बाजारों के रुझान पर पड़ता है।

- **भारत में:** विदेशी निवेशकों (FIIs) का प्रवाह अमेरिकी ब्याज दरों की अनिश्चितता से प्रभावित हो सकता है, जिससे भारतीय शेयर बाजार और भारतीय रुपये (INR) में अस्थिरता आ सकती है।
- **वैश्विक बाजार में:** यदि सितंबर बैठक में दरों को लेकर गलत प्राइजिंग की स्थिति सुधरती है, तो अंतरराष्ट्रीय शेयर बाजारों और मुद्रा दरों में अचानक बड़ा फेरबदल देखने को मिल सकता है।
- **सोना और कमोडिटी:** सोने का 4,400 डॉलर के पार लौटना निवेशकों के लिए सुरक्षित संपत्तियों की ओर रुझान को दर्शाता है, जिससे घरेलू सोने की कीमतें प्रभावित हो सकती हैं।
- **ऊर्जा और ईंधन लागत:** डीजल क्रैक स्प्रेड का 100 डॉलर प्रति बैरल के पार रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचना भविष्य में वैश्विक लॉजिस्टिक्स और परिवहन लागत में वृद्धि का संकेत है।

## ऐसा क्यों हुआ
फेडरल रिजर्व की आगामी सितंबर बैठक से पहले ब्याज दर प्राइजिंग में आई विसंगति और कमोडिटी बाजारों में अनिश्चितता के कई प्रमुख कारण हैं।

- **सीपियाई आंकड़ों पर निर्भरता:** फेडरल रिजर्व का रुख मुख्य रूप से अगस्त महीने की आगामी सीपीआई मुद्रास्फीति रिपोर्ट पर निर्भर है, जिससे ब्लैकआउट अवधि के दौरान दर कटौती या बढ़ोतरी के कयास लगाए जा रहे हैं।
- **बैंक ऑफ जापान का सख्त रुख:** जापानी केंद्रीय बैंक द्वारा मौद्रिक नीति को सामान्य बनाने और रॉयटर्स तानकन सर्वे के बेहतर नतीजों ने येन को मजबूत किया है, जिससे अमेरिकी डॉलर कमजोर हुआ है।
- **डीजल रिफाइनिंग पर दबाव:** वैश्विक स्तर पर मिडिल डिस्टिलेट आपूर्ति में आई कमी और रिफाइनिंग मार्जिन में उछाल के कारण डीजल क्रैक स्प्रेड ऐतिहासिक ऊंचाई पर पहुंचा है।

## सवाल-जवाब

### 1. फेडरल रिजर्व की ब्लैकआउट अवधि क्या होती है?
ब्लैकआउट अवधि नीतिगत बैठक से पहले का वह समय होता है जब फेडरल रिजर्व के अधिकारी अर्थव्यवस्था या ब्याज दरों पर सार्वजनिक बयान नहीं देते हैं।

### 2. टीडी सिक्योरिटीज के अनुसार सितंबर बैठक में क्या अनिश्चितता है?
टीडी सिक्योरिटीज का कहना है कि बाजार दरें स्थिर रखने में 15 बेसिस पॉइंट और 25 बेसिस पॉइंट दर बढ़ाने में 10 बेसिस पॉइंट का गलत आकलन कर रहे हैं, जो सबसे उच्च अनिश्चितता है।

### 3. जापानी येन की मजबूती से USD/JPY पर क्या असर पड़ा है?
बैंक ऑफ जापान द्वारा ब्याज दरें बढ़ाने की संभावनाओं और रॉयटर्स तानकन सर्वे के कारण जापानी येन मजबूत हुआ है, जिससे USD/JPY गिरकर 153.30 के स्तर पर आ गया है।

### 4. डीजल क्रैक स्प्रेड ने क्या रिकॉर्ड बनाया है?
अमेरिकी डीजल क्रैक स्प्रेड इतिहास में पहली बार 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर चला गया और 102.00 डॉलर प्रति बैरल के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया।

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