तेल में उछाल और फेडरल रिजर्व के रुख से चढ़े डाउ जोन्स फ्यूचर्स, अब बड़ी टेक कंपनियों की कमाई पर टिकी नजर अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव से तेल महंगा हुआ और महंगाई की चिंता लौट आई, जबकि निवेशकों को उम्मीद है कि फेडरल रिजर्व इस महीने ब्याज दरें स्थिर रखेगा। सेमीकंडक्टर शेयरों में भारी गिरावट के बाद अब सबकी नजर अल्फाबेट, टेस्ला और इंटेल के तिमाही नतीजों पर है। हफ्ते की शुरुआत में अमेरिकी शेयर बाजार के फ्यूचर्स में हल्की मजबूती दिखी, क्योंकि ज्यादातर कारोबारी मान रहे हैं कि फेडरल रिजर्व इस महीने होने वाली बैठक में ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं करेगा और उन्हें मौजूदा स्तर पर ही टिकाए रखेगा। लेकिन इस राहत के नीचे कई ऐसी वजहें दबी हैं जो बाजार का मूड बिगाड़ सकती हैं, फिर चाहे वह पश्चिम एशिया का तनाव हो, तेल की चढ़ती कीमतें हों या फिर चिप कंपनियों के शेयरों में आई तेज बिकवाली। सोमवार को यूरोपीय कारोबारी घंटों के दौरान डाउ जोन्स फ्यूचर्स 0.14% चढ़कर करीब 52,450 के आसपास कारोबार करते दिखे। इसी दौरान S&P 500 फ्यूचर्स 0.26% की बढ़त के साथ लगभग 7,520 पर और नैस्डैक 100 फ्यूचर्स 0.50% ऊपर करीब 28,920 पर रहे। यानी तीनों प्रमुख अमेरिकी बेंचमार्क के फ्यूचर्स हरे निशान में खुले, भले ही बढ़त बहुत बड़ी न रही हो। पश्चिम एशिया का तनाव और ऊर्जा आपूर्ति की चिंता बाजार की नब्ज इस समय काफी हद तक अमेरिका और ईरान के टकराव पर टिकी है। अमेरिका ने ईरानी ठिकानों पर लगातार नौवीं रात हमले किए हैं। जवाब में ईरानी अधिकारियों ने कहा है कि दोनों देशों के बीच जो संघर्षविराम था, वह अब व्यावहारिक तौर पर खत्म हो चुका है। इससे इस बात का खतरा गहरा गया है कि इस इलाके की संकरी जलधाराओं से गुजरने वाले अहम ऊर्जा मार्गों में गड़बड़ी बढ़ सकती है। यही डर तेल की कीमतों को ऊपर धकेल रहा है, और महंगे तेल का सीधा असर महंगाई पर पड़ता है। इसी वजह से बाजार में यह अटकल फिर तेज हो गई है कि दरें बढ़ सकती हैं। सितंबर में ब्याज दर बढ़ाए जाने की संभावना अब बढ़कर 60.7% तक पहुंच गई है। यानी भले ही इस महीने फेडरल रिजर्व शांत रहे, आगे का रास्ता उतना आसान नहीं दिख रहा। चिप शेयरों का बुरा हफ्ता और नतीजों पर लौटता ध्यान पिछला हफ्ता तकनीकी शेयरों के लिए भारी रहा, और इसकी अगुवाई सेमीकंडक्टर कंपनियों में हुई तेज बिकवाली ने की। इस गिरावट के बाद अब बड़े अमेरिकी सूचकांक दिशा के लिए आने वाले कॉरपोरेट नतीजों की ओर देख रहे हैं। पिछले हफ्ते नैस्डैक कंपोजिट 2.9% फिसला, S&P 500 में 1.55% की गिरावट आई और डाउ जोन्स 0.93% टूटा। सबसे ज्यादा चोट चिप सेक्टर पर पड़ी। वैनईक सेमीकंडक्टर ETF करीब 9% तक लुढ़क गया और यह चार हफ्तों में इसका तीसरा साप्ताहिक नुकसान रहा। ऐसे माहौल में निवेशकों का ध्यान अब उन बड़ी कंपनियों के तिमाही नतीजों पर आ गया है जो जल्द आने वाले हैं, खासकर अल्फाबेट, टेस्ला और इंटेल के आंकड़ों पर, जिनसे बाजार को आगे की दिशा का संकेत मिल सकता है। डाउ जोन्स आखिर मापता क्या है डाउ जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज दुनिया के सबसे पुराने शेयर सूचकांकों में से एक है। इसमें अमेरिका के 30 सबसे ज्यादा कारोबार वाले शेयर शामिल होते हैं। खास बात यह है कि यह सूचकांक बाजार पूंजीकरण के आधार पर नहीं, बल्कि शेयरों की कीमत के आधार पर बनता है। इसे निकालने का तरीका भी सीधा है, इसमें शामिल सभी शेयरों की कीमतें जोड़ी जाती हैं और फिर उन्हें एक तय अंक से भाग दिया जाता है, जो फिलहाल 0.152 है। इस सूचकांक की नींव चार्ल्स डाउ ने रखी थी, जिन्होंने वॉल स्ट्रीट जर्नल की भी शुरुआत की थी। बाद के वर्षों में इसकी आलोचना भी होती रही कि यह पूरे बाजार का सही आईना नहीं है, क्योंकि यह सिर्फ 30 बड़ी कंपनियों पर नजर रखता है, जबकि S&P 500 जैसे व्यापक सूचकांक कहीं ज्यादा कंपनियों को समेटते हैं। डाउ को ऊपर नीचे करने वाली ताकतें डाउ जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज (DJIA) को कई कारक चलाते हैं। इनमें सबसे बड़ा है इसमें शामिल कंपनियों का साझा प्रदर्शन, जो हर तिमाही उनके नतीजों में झलकता है। इसके अलावा अमेरिका और दुनिया भर के आर्थिक आंकड़े भी असर डालते हैं, क्योंकि इनसे निवेशकों की धारणा बनती और बिगड़ती है। ब्याज दरों की भूमिका भी अहम है, जिन्हें फेडरल रिजर्व तय करता है। दरें कर्ज की लागत तय करती हैं और कई बड़ी कंपनियां काफी हद तक कर्ज पर ही निर्भर रहती हैं। यही वजह है कि महंगाई भी एक बड़ा कारक बन जाती है, क्योंकि वह और दूसरे आंकड़े मिलकर फेडरल रिजर्व के फैसलों को प्रभावित करते हैं। डाउ थ्योरी से बाजार की चाल पढ़ना चार्ल्स डाउ ने ही बाजार की मुख्य दिशा पहचानने का एक तरीका विकसित किया, जिसे डाउ थ्योरी कहते हैं। इसमें एक अहम कदम यह है कि डाउ जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज (DJIA) और डाउ जोन्स ट्रांसपोर्टेशन एवरेज (DJTA) की चाल की आपस में तुलना की जाए, और सिर्फ उन्हीं रुझानों पर भरोसा किया जाए जब दोनों एक ही दिशा में बढ़ रहे हों। वॉल्यूम यानी कारोबार की मात्रा इसकी पुष्टि करने वाला पैमाना मानी जाती है। यह सिद्धांत ऊंचाई और गिरावट के बिंदुओं के विश्लेषण पर आधारित है। डाउ के मुताबिक बाजार तीन चरणों से गुजरता है। पहला है संचय का दौर, जब समझदार बड़े निवेशक चुपचाप खरीदना या बेचना शुरू करते हैं। दूसरा है आम भागीदारी का दौर, जब बड़ी संख्या में आम लोग भी इसमें जुड़ जाते हैं। और तीसरा है वितरण का दौर, जब वही समझदार पैसा बाजार से बाहर निकल जाता है। डाउ में निवेश के रास्ते डाउ में कारोबार के कई तरीके हैं। एक तरीका ETF का इस्तेमाल है, जिनकी मदद से निवेशक सभी 30 कंपनियों के शेयर अलग अलग खरीदे बिना पूरे सूचकांक में एक ही सिक्योरिटी की तरह कारोबार कर सकते हैं। इसका एक बड़ा उदाहरण एसपीडीआर डाउ जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज ETF (DIA) है। इसके अलावा DJIA के फ्यूचर्स कॉन्ट्रैक्ट कारोबारियों को सूचकांक के भविष्य के मूल्य पर दांव लगाने का मौका देते हैं। वहीं ऑप्शंस निवेशक को यह अधिकार देते हैं, पर बाध्यता नहीं, कि वह भविष्य में एक तय कीमत पर सूचकांक खरीदे या बेचे। म्यूचुअल फंड के जरिए भी निवेशक डाउ की कंपनियों के एक विविध पोर्टफोलियो में हिस्सेदारी खरीद सकते हैं और पूरे सूचकांक से जुड़ सकते हैं। मुद्राओं, सोने और क्रिप्टो का हाल करेंसी बाजार में सोमवार को यूरोपीय सत्र में GBP/USD 1.3450 के ऊपर टिका रहा, क्योंकि अमेरिकी डॉलर में सुस्त कारोबार दिखा। बाजार अभी भी सप्ताहांत की झड़प के बाद अमेरिका और ईरान के तनाव पर नजर रख रहा है, जबकि मंगलवार को ब्रिटेन के रोजगार आंकड़ों पर ध्यान रहेगा। EUR/USD 1.1450 की ओर बढ़त गंवाकर पीछे हटा, क्योंकि युद्ध के चलते सतर्क कारोबार का माहौल ECB से जुड़ी सख्त उम्मीदों पर भारी पड़ा। ECB से इस गुरुवार दरें स्थिर रखने की उम्मीद है, लेकिन ऊर्जा कीमतों पर युद्ध के असर से बढ़ते महंगाई के जोखिम के बीच वह सितंबर में दर बढ़ोतरी का संकेत दे सकता है। सोना दिन के भीतर आई हल्की तेजी को भुना नहीं पाया और यूरोपीय सत्र से पहले 4,000 डॉलर के मनोवैज्ञानिक स्तर के आसपास लगभग सपाट रहा। बढ़ते भू राजनीतिक तनाव और ऊंची अमेरिकी दरों की उम्मीद डॉलर को सहारा देती है, जिससे सोने की तेजी पर अंकुश लगता है। क्रिप्टो में एथेरियम ने पिछले हफ्ते बाकी बड़ी करेंसियों के मुकाबले बेहतर प्रदर्शन कर अपनी सापेक्ष मजबूती दिखाई, हालांकि भीतरी आंकड़े बताते हैं कि यह तेजी अभी नाजुक है। बीते हफ्ते से बुधवार के बीच ETH ने दहाई अंकों में बढ़त दर्ज की और बिटकॉइन, XRP तथा सोलाना जैसी बड़ी करेंसियों को पीछे छोड़ा, इससे पहले कि गुरुवार से पूरा बाजार सुधार की ओर मुड़ जाता। कार्डानो (ADA) पिछले हफ्ते की हल्की रिकवरी के बाद 0.165 डॉलर पर अटका रहा। शनिवार को वैन रॉसेम हार्ड फोर्क सक्रिय हुआ, जो कार्डानो का पहला ऐसा प्रोटोकॉल अपग्रेड रहा जिसे पूरी तरह ऑनचेन गवर्नेंस के जरिए मंजूरी मिली। इसके साथ प्रोटोकॉल वर्जन 11 आया, जिसमें स्मार्ट कॉन्ट्रैक्ट की लागत घटाने पर जोर दिया गया है। महंगाई के मोर्चे पर थोड़ी राहत जून का उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) महीने दर महीने 0.4% गिरा, जो अप्रैल 2020 के बाद किसी एक महीने में सबसे बड़ी गिरावट है। इससे सालाना महंगाई दर मई के 4.2% से घटकर 3.5% पर आ गई और तीन महीने से चली आ रही तेजी की कड़ी टूट गई। कोर कीमतें एक जगह ठहरी रहीं, महीने के दौरान सपाट रहीं और सालाना आधार पर घटकर 2.6% पर आ गईं, ये दोनों ही आंकड़े अनुमान से कम रहे। डाउ की ताजा तस्वीर लाइव आंकड़ों के मुताबिक डाउ जोन्स (^DJI) फिलहाल 51,839 डॉलर के स्तर पर है, जो पिछले बंद 52,146 डॉलर से 0.59% नीचे है। पिछले 52 हफ्तों में इसका दायरा 43,341 से 53,289 डॉलर के बीच रहा है और कारोबार 20 दिन के औसत का करीब 0.73 गुना है। तकनीकी संकेतकों में RSI(14) 48 पर है, जबकि MACD 310.23 अपने सिग्नल 447.43 से नीचे है और हिस्टोग्राम नकारात्मक है, जो अल्पावधि में कमजोरी दिखाता है। दूसरी ओर EMA50, EMA200 से ऊपर बना हुआ है, यानी दीर्घकालिक रुझान अब भी तेजी का है। ADX(14) 21 पर होने से रुझान कमजोर या दायरे में दिख रहा है। नीचे की ओर करीब 51,302 पर सहारा और ऊपर 53,289 के आसपास अवरोध का स्तर बना हुआ है। इसका आप पर असर • निवेशकों के लिए: फेडरल रिजर्व के दरें स्थिर रखने की उम्मीद से राहत है, लेकिन सितंबर में दर बढ़ोतरी की 60.7% संभावना और चिप शेयरों की गिरावट बाजार में उतार चढ़ाव बनाए रख सकती है। • आम उपभोक्ता के लिए: अमेरिका ईरान तनाव से तेल महंगा होने पर महंगाई फिर बढ़ सकती है, जिसका असर ईंधन और रोजमर्रा की कीमतों पर पड़ता है। • सोना खरीदने वालों के लिए: सोना 4,000 डॉलर के आसपास टिका है, ऊंची दरों और मजबूत डॉलर से इसकी तेजी पर फिलहाल दबाव बना हुआ है। सवाल-जवाब 1. फेडरल रिजर्व की आगामी बैठक में क्या उम्मीद है? बाजार व्यापक रूप से मान रहा है कि फेडरल रिजर्व इस महीने की बैठक में ब्याज दरें मौजूदा स्तर पर स्थिर रखेगा। 2. सितंबर में ब्याज दर बढ़ने की संभावना कितनी है? तेल की कीमतों में उछाल से महंगाई की चिंता लौटने के बाद सितंबर में दर बढ़ोतरी की संभावना बढ़कर 60.7% हो गई है। 3. पिछले हफ्ते प्रमुख अमेरिकी सूचकांक कितने गिरे? नैस्डैक कंपोजिट 2.9%, S&P 500 1.55% और डाउ जोन्स 0.93% गिरा, जबकि वैनईक सेमीकंडक्टर ETF करीब 9% लुढ़का। 4. निवेशकों की नजर अब किन कंपनियों के नतीजों पर है? निवेशक अब अल्फाबेट, टेस्ला और इंटेल के आने वाले तिमाही नतीजों पर ध्यान दे रहे हैं। 5. अमेरिका और ईरान के बीच ताजा हालात क्या हैं? अमेरिका ने ईरानी ठिकानों पर लगातार नौवीं रात हमले किए और ईरान ने कहा कि संघर्षविराम व्यावहारिक तौर पर खत्म हो चुका है। 6. जून के CPI आंकड़े क्या रहे? जून CPI महीने दर महीने 0.4% गिरा और सालाना महंगाई दर मई के 4.2% से घटकर 3.5% पर आ गई। https://trendkia.com/market/tela-men-uchhala-aura-federal-reserve-ke-rukha-se-charhe-dow-jones-phyucharsa-aba-bari-teka-knpaniyon-ki-kamai-para-tiki-najara-9275 TrendKia — Har trend, sabse pehle.