टोक्यो में महंगाई उछलने के बाद भी जापानी येन में नरमी, 109.50 के स्तर पर संभला ऑस्ट्रेलियाई डॉलर सितंबर महीने में टोक्यो के उपभोक्ता मूल्य सूचकांक में तेज उछाल दर्ज किए जाने के बावजूद जापानी मुद्रा शुरुआती बढ़त गंवा बैठी, जिससे ऑस्ट्रेलियाई डॉलर 109.50 के करीब स्थिर कारोबार करता दिखा। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा बाजार में शुक्रवार के कारोबारी सत्र के दौरान जापानी मुद्रा अपनी शुरुआती बढ़त को बरकरार रखने के लिए जूझती नजर आई, जिसके चलते ऑस्ट्रेलियाई डॉलर शुरुआती गिरावट से उबरते हुए 109.50 के स्तर के इर्द-गिर्द सपाट रुख में आ गया। टोक्यो क्षेत्र के लिए जारी किए गए ताजा उपभोक्ता मूल्य सूचकांक के आंकड़े उम्मीद से काफी तेज रहने के बावजूद जापानी येन में व्यापक मजबूती नहीं टिक पाई। बाजार सहभागियों ने देखा कि मुद्रा जोड़ी में बिकवाली का दबाव थम गया और कीमतें निचले स्तरों से वापस 109.50 के स्तर तक खिंच आईं। टोक्यो उपभोक्ता मूल्य सूचकांक में तेज उछाल जापान के सांख्यिकी ब्यूरो द्वारा जारी आधिकारिक रिपोर्ट के अनुसार, ताजे खाद्य पदार्थों को छोड़कर टोक्यो का मुख्य उपभोक्ता मूल्य सूचकांक सितंबर महीने में सालाना आधार पर 2.7 प्रतिशत तक बढ़ गया। यह आंकड़ा अगस्त महीने के 1.8 प्रतिशत की तुलना में उल्लेखनीय तेजी दर्शाता है, जबकि बाजार विश्लेषकों ने इस सूचकांक के 2.4 प्रतिशत पर रहने का अनुमान लगाया था। इसके अतिरिक्त, खाद्य और ऊर्जा दोनों को अलग रखकर आंके जाने वाले मुख्य मुद्रास्फीति सूचकांक में भी तीव्र तेजी देखी गई और यह पिछले 2 प्रतिशत के स्तर से छलांग लगाकर सालाना आधार पर 3 प्रतिशत पर पहुंच गया। अनुमान से अधिक गर्म रहे इस मुद्रास्फीति आंकड़े ने बैंक ऑफ जापान द्वारा नीतिगत ब्याज दरों में और बढ़ोतरी किए जाने की संभावनाओं को हवा दी है। जब महंगाई दर केंद्रीय बैंक के निर्धारित स्तरों से ऊपर निकलने लगती है, तो मौद्रिक नीति को सख्त करने की उम्मीदें स्वतः बलवती हो जाती हैं। हालांकि, मुद्रा बाजार में येन इस आंकड़े के आने के बाद मिली शुरुआती गति को बनाए रखने में असमर्थ रहा, क्योंकि नीतिगत स्तर पर अन्य चिंताएं भी उभर कर सामने आई हैं। कैबिनेट कार्यालय की सतर्कता और ब्याज दरों का संचयी प्रभाव मुद्रास्फीति के इन आंकड़ों के बीच जापान के कैबिनेट कार्यालय ने एक महत्वपूर्ण रुख व्यक्त किया है। कैबिनेट कार्यालय की ओर से कहा गया कि बैंक ऑफ जापान को पहले की गई ब्याज दर बढ़ोतरी के संचयी प्रभावों का बेहद सावधानीपूर्वक और व्यापक स्तर पर आकलन करना चाहिए। इस प्रकार की सरकारी सतर्कता यह संकेत देती है कि आक्रामक दर वृद्धियों का देश की व्यापक आर्थिक गतिविधियों और घरेलू रिकवरी पर क्या असर पड़ रहा है, इसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। नीति निर्माताओं का यह दृष्टिकोण केंद्रीय बैंक के भावी कदमों पर एक संयमित दबाव बनाता है, जिसने येन की संभावित बढ़त पर विराम लगाने का काम किया। ऑस्ट्रेलियाई रिजर्व बैंक के नीतिगत दृष्टिकोण पर टिकी नजरें मुद्रा जोड़ी के दूसरे छोर पर, ऑस्ट्रेलियाई डॉलर को लेकर भी निवेशक नए संकेतों की प्रतीक्षा कर रहे हैं। बाजार सहभागी यह स्पष्टता तलाश रहे हैं कि क्या रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया चालू वर्ष के दौरान अपनी नीतिगत ब्याज दरों में और अधिक बढ़ोतरी का रास्ता अपनाएगा। गौरतलब है कि ऑस्ट्रेलियाई केंद्रीय बैंक ने पहले ही 25 आधार अंकों की चार लगातार बढ़ोतरी की हैं, जिसके कारण वहां आधिकारिक नकद दर बढ़कर 4.6 प्रतिशत के स्तर तक पहुंच चुकी है। व्यापारी यह समझने की कोशिश कर रहे हैं कि क्या 4.6 प्रतिशत का यह स्तर मुद्रास्फीति को नियंत्रित करने के लिए पर्याप्त रहेगा या फिर आगामी महीनों में अतिरिक्त सख्ती देखने को मिलेगी। केंद्रीय बैंकों का मूल्य स्थिरता जनादेश और मौद्रिक नियंत्रण दुनिया भर के प्रमुख केंद्रीय बैंकों का प्राथमिक और अनिवार्य जनादेश अर्थव्यवस्था के भीतर मूल्य स्थिरता बनाए रखना होता है। आधुनिक अर्थव्यवस्थाएं निरंतर उतार-चढ़ाव के दौर से गुजरती हैं, जहां वस्तुओं और सेवाओं के दाम या तो तेजी से ऊपर जाते हैं या नीचे गिरते हैं। जब एक ही प्रकार की वस्तुओं और सेवाओं के दाम लगातार ऊपर बढ़ते रहते हैं, तो उस स्थिति को मुद्रास्फीति कहा जाता है। इसके विपरीत, जब मूल्यों में लगातार और व्यापक गिरावट देखी जाती है, तो उसे अपस्फीति के रूप में परिभाषित किया जाता है। वस्तुओं और सेवाओं की समग्र मांग को संतुलित बनाए रखना केंद्रीय बैंकों की मुख्य जिम्मेदारी होती है और इसके लिए वे अपनी नीतिगत ब्याज दरों में फेरबदल करते हैं। विश्व के सबसे बड़े केंद्रीय बैंकों, जैसे संयुक्त राज्य अमेरिका के फेडरल रिजर्व, यूरोपीय सेंट्रल बैंक तथा बैंक ऑफ इंग्लैंड, के लिए सामान्यतः यह जनादेश मुद्रास्फीति को 2 प्रतिशत के वार्षिक लक्ष्य के निकट बनाए रखने का होता है। यदि मूल्य वृद्धि इस 2 प्रतिशत के दायरे से बहुत दूर निकल जाती है, तो आर्थिक असंतुलन का जोखिम बढ़ जाता है। ब्याज दर समायोजन: सख्ती बनाम सुस्ती मुद्रास्फीति को नियंत्रित करने अथवा उसे गति देने के लिए केंद्रीय बैंकों के पास जो सबसे प्रभावी और प्राथमिक उपकरण उपलब्ध होता है, वह उनकी बेंचमार्क नीतिगत दर यानी ब्याज दर का समायोजन है। केंद्रीय बैंक पूर्व-निर्धारित और घोषित समय-सारणी के अनुसार अपनी मौद्रिक नीति बैठक के बाद आधिकारिक वक्तव्य जारी करते हैं। इस वक्तव्य में केवल नई ब्याज दर की घोषणा ही नहीं होती, बल्कि इस निर्णय के पीछे के विस्तृत आर्थिक तर्क भी प्रस्तुत किए जाते हैं, जिसमें यह बताया जाता है कि दरों को यथावत क्यों रखा गया है अथवा उनमें कटौती या बढ़ोतरी क्यों की गई है। केंद्रीय बैंक के इस फैसले के अनुरूप वाणिज्यिक और स्थानीय बैंक अपनी जमा और ऋण दरों में आवश्यक बदलाव करते हैं। जब ब्याज दरें बढ़ती हैं, तो आम नागरिकों के लिए अपनी बचत पर ब्याज अर्जित करना अधिक आकर्षक हो जाता है, लेकिन इसके साथ ही कंपनियों और व्यक्तियों के लिए ऋण लेना महंगा और कठिन हो जाता है, जिससे नए कारोबारी निवेश और उपभोक्ता खर्च पर अंकुश लगता है। जब केंद्रीय बैंक अपनी नीतिगत दरों में बड़ी बढ़ोतरी करता है, तो इस प्रक्रिया को मौद्रिक सख्ती कहा जाता है। इसके उलट, जब आर्थिक विकास को गति देने के लिए बेंचमार्क दरों में कटौती की जाती है, तो उसे मौद्रिक सुगमता या ढील कहा जाता है। बोर्ड के सदस्य, वैचारिक विभाजन: 'हॉक्स' बनाम 'डोव्स' आमतौर पर केंद्रीय बैंक राजनीतिक हस्तक्षेप से स्वतंत्र होकर स्वायत्त रूप से कार्य करते हैं। केंद्रीय बैंक के नीति निर्माण बोर्ड के सदस्यों को उनके पदों पर नियुक्त किए जाने से पहले कई स्तरीय पैनल प्रक्रियाओं, जांचों और आधिकारिक सुनवाई के दौर से गुजरना पड़ता है। बोर्ड में शामिल प्रत्येक सदस्य का मुद्रास्फीति नियंत्रण और मौद्रिक नीति के संचालन को लेकर अपना एक व्यक्तिगत आर्थिक दृष्टिकोण और दृढ़ विश्वास होता है। बोर्ड के वे सदस्य जो अत्यधिक ढीली मौद्रिक नीति के पक्षधर होते हैं, जहां कम ब्याज दरें और सुलभ सस्ता कर्ज उपलब्ध कराकर समग्र अर्थव्यवस्था को तेज गति देने का प्रयास किया जाता है, उन्हें आमतौर पर 'डोव्स' के रूप में जाना जाता है। ऐसे सदस्य यदि मुद्रास्फीति 2 प्रतिशत के लक्ष्य से थोड़ी अधिक भी हो, तो उसे आर्थिक विस्तार की खातिर स्वीकार करने के लिए तैयार रहते हैं। इसके विपरीत, जो सदस्य बचतकर्ताओं को उचित प्रतिफल देने और मुद्रास्फीति को हर समय कसकर नियंत्रित रखने के लिए ऊंची ब्याज दरों की जोरदार वकालत करते हैं, उन्हें 'हॉक्स' कहा जाता है। हॉक्स तब तक चैन से नहीं बैठते जब तक कि मुद्रास्फीति 2 प्रतिशत या उससे ठीक नीचे के स्तर तक वापस न आ जाए। अध्यक्ष की भूमिका, सहमति निर्माण और 'ब्लैकआउट' अवधि सामान्यतः प्रत्येक मौद्रिक नीति समीक्षा बैठक की अध्यक्षता केंद्रीय बैंक के अध्यक्ष या गवर्नर द्वारा की जाती है। अध्यक्ष का मुख्य उत्तरदायित्व विभिन्न विचारों में बंटे हॉक्स और डोव्स के बीच सहमति का निर्माण करना होता है। किसी नीतिगत निर्णय पर मतविभाजन होने और 50-50 के टाई की स्थिति उत्पन्न होने पर अध्यक्ष के पास अंतिम निर्णायक मत देने का अधिकार होता है, जिससे गतिरोध समाप्त हो सके। अध्यक्ष नीतिगत फैसलों के बाद आधिकारिक प्रेस कॉन्फ्रेंस और भाषणों के जरिए वर्तमान मौद्रिक रुख और भावी दृष्टिकोण को जनता और वित्तीय बाजारों तक पहुंचाते हैं। केंद्रीय बैंकों का यह निरंतर प्रयास रहता है कि वे अपनी मौद्रिक नीतियों को इस प्रकार लागू करें जिससे बॉन्ड यील्ड्स, शेयर बाजारों या विदेशी मुद्रा दरों में किसी प्रकार का अनियंत्रित और हिंसक उतार-चढ़ाव पैदा न हो। नीति बैठक के आयोजन से पहले बोर्ड के सभी सदस्य विभिन्न माध्यमों से अपने व्यक्तिगत रुख के संकेत बाजारों को देते रहते हैं। हालांकि, नीति बैठक शुरू होने के कुछ दिन पहले से लेकर नए नीतिगत फैसले के सार्वजनिक रूप से संप्रेषित होने तक के समय में सभी सदस्यों के सार्वजनिक वक्तव्यों और चर्चाओं पर पूर्ण प्रतिबंध रहता है। इस संवेदनशील समयावधि को वित्तीय जगत में 'ब्लैकआउट पीरियड' कहा जाता है। विदेशी मुद्रा, सोना और डिजिटल संपत्तियों में अन्य गतिविधियां शुक्रवार के एशियाई सत्र के दौरान मुद्रा बाजार में अन्य जोड़ियों में भी उल्लेखनीय हलचल देखने को मिली। अमेरिकी डॉलर के 17 महीने के उच्चतम स्तर से फिसलने के कारण एशियाई सत्र में ऑस्ट्रेलियाई डॉलर अमेरिकी डॉलर के मुकाबले सुधरकर 0.6950 के स्तर की ओर बढ़ा। अमेरिकी डॉलर में यह गिरावट प्रमुख गैर-कृषि पेरोल रिपोर्ट जारी होने से पहले व्यापारियों द्वारा मुनाफावसूली किए जाने के चलते आई। इसी बीच, वैश्विक स्तर पर बॉन्ड यील्ड्स में तेजी और मुद्रास्फीति जोखिमों के चलते ऑस्ट्रेलियाई डॉलर को नवंबर में संभावित ब्याज दर बढ़ोतरी की पुनर्जीवित उम्मीदों से भी समर्थन प्राप्त हुआ। दूसरी ओर, टोक्यो उपभोक्ता मूल्य सूचकांक के उम्मीद से अधिक रहने और अमेरिकी डॉलर में व्यापक नरमी के बावजूद अमेरिकी डॉलर और जापानी येन की जोड़ी 158.00 के करीब नई गति हासिल करने के लिए संघर्ष करती दिखी। यह जोड़ी शुक्रवार को एशियाई सत्र के दौरान अपने साप्ताहिक उच्च स्तरों से नीचे खिसक गई, क्योंकि ट्रेडर आगामी रोजगार आंकड़ों से पूर्व अपनी स्थिति समायोजित कर रहे थे। कमोडिटी बाजार में, सोना शुक्रवार को यूरोपीय सत्र की शुरुआत तक 4,200 डॉलर प्रति औंस के स्तर से नीचे सीमित दायरे में कारोबार करता रहा। बाजार अनुमान जता रहा है कि अमेरिका की आगामी गैर-कृषि पेरोल रिपोर्ट में सितंबर महीने में केवल 90 हजार नई नौकरियां जुड़ने की बात सामने आ सकती है, जो कि पिछले महीने दर्ज की गई 162 हजार की संख्या से काफी कम है। वहीं डिजिटल परिसंपत्ति क्षेत्र में, पाई नेटवर्क में अल्पकालिक अस्थिरता बनी रही और पिछले दिन 3 प्रतिशत से अधिक की गिरावट के बाद यह 0.0900 डॉलर के आसपास मंडराता दिखा। चार घंटे के चार्ट पर राइजिंग वेज पैटर्न के टूटने के जोखिम के बीच पाई नेटवर्क 0.1000 डॉलर के मनोवैज्ञानिक स्तर से नीचे सीमित रहा। इसका आप पर असर मुद्रा बाजार में होने वाले इन नीतिगत बदलावों और विनिमय दर के उतार-चढ़ाव का सीधा असर अंतरराष्ट्रीय यात्रा, आयात-निर्यात लागत और वैश्विक निवेश रणनीतियों पर पड़ता है। • मुद्रा विनिमय दर: जापानी येन में तेज उछाल न आने से जापान की यात्रा करने वाले पर्यटकों और वहां शिक्षा ले रहे छात्रों को फिलहाल किसी तात्कालिक अतिरिक्त मुद्रा खर्च का सामना नहीं करना पड़ेगा। यदि बैंक ऑफ जापान भविष्य में आक्रामक रुख अपनाता है, तो जापानी मुद्रा महंगी होने से आयात बिल में बढ़ोतरी हो सकती है। • आयात और कारोबारी लागत: ऑस्ट्रेलिया और जापान के बीच द्विपक्षीय व्यापार करने वाली कंपनियों के लिए मुद्रा का 109.50 पर स्थिर होना अनुबंध मूल्य निर्धारण में अनिश्चितता को कम करता है। आयातकों को अगले कुछ सत्रों में दोनों केंद्रीय बैंकों के बयानों पर पैनी नजर रखकर अपनी हेजिंग योजना बनानी होगी। • खुदरा निवेशकों पर असर: विदेशी मुद्रा और कमोडिटी बाजारों में सक्रिय ट्रेडर अमेरिकी पेरोल डेटा और केंद्रीय बैंकों की आगामी बैठकों से पहले अत्यधिक अस्थिरता की स्थिति देख सकते हैं। ऐसे में लीवरेज्ड पोजीशन रखने वाले निवेशकों को अपने स्टॉप लॉस और मार्जिन स्तरों की तत्काल समीक्षा करनी चाहिए। • वैश्विक ब्याज दर चक्र: यदि रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया और बैंक ऑफ जापान दोनों ही ब्याज दरों को सख्त बनाए रखते हैं, तो वैश्विक वित्तीय बाजारों में सस्ता कर्ज मिलना और कठिन हो जाएगा। इसका असर अंततः बॉन्ड यील्ड्स और अंतरराष्ट्रीय ऋणों की ब्याज दरों पर देखने को मिलेगा। ऐसा क्यों हुआ जापानी मुद्रा में टोक्यो के उच्च मुद्रास्फीति आंकड़ों के बाद भी मजबूती न टिक पाने और ऑस्ट्रेलियाई डॉलर के संभलने के पीछे नीतिगत बयानों और व्यापक बाजार समायोजन का संयोजन रहा है। • सरकारी सतर्कता का दबाव: टोक्यो में मुख्य मुद्रास्फीति 2.7 प्रतिशत तक उछलने के बावजूद जापान के कैबिनेट कार्यालय ने बैंक ऑफ जापान को पिछली दर वृद्धियों के संचयी असर का आकलन करने की सलाह दी। इस सरकारी रुख ने बाजार में यह संदेश दिया कि नीतिगत सख्ती की गति उतनी तेज नहीं हो सकती जितनी आंकड़ों से प्रतीत हो रही थी। • ऑस्ट्रेलियाई दर वृद्धि की पृष्ठभूमि: ऑस्ट्रेलियाई रिजर्व बैंक द्वारा पहले ही दरों को 4.6 प्रतिशत तक पहुंचाए जाने और वर्ष के अंत तक अतिरिक्त सख्ती की संभावनाओं ने ऑस्ट्रेलियाई डॉलर को मजबूती प्रदान की। वैश्विक बॉन्ड यील्ड्स के ऊंचे स्तरों ने भी ऑस्ट्रेलियाई मुद्रा के निचले स्तरों पर खरीदारों को आकर्षित किया। • अमेरिकी डेटा से पहले मुनाफावसूली: वैश्विक मुद्रा बाजारों में व्यापारी अमेरिकी गैर-कृषि रोजगार रिपोर्ट से ठीक पहले अमेरिकी डॉलर में भारी तेजी के बाद मुनाफावसूली कर रहे थे। इस व्यापक पुनर्संतुलन के कारण विदेशी मुद्रा बाजार में क्रॉस-करेंसी जोड़ियों में मिश्रित उतार-चढ़ाव देखने को मिला। सवाल-जवाब 1. टोक्यो में सितंबर महीने की मुद्रास्फीति दर कितनी दर्ज की गई? ताजे खाद्य पदार्थों को छोड़कर टोक्यो का उपभोक्ता मूल्य सूचकांक सितंबर में सालाना आधार पर 2.7 प्रतिशत रहा, जो अगस्त के 1.8 प्रतिशत से अधिक है। 2. खाद्य और ऊर्जा को छोड़कर टोक्यो का मुख्य मुद्रास्फीति आंकड़ा क्या रहा? खाद्य और ऊर्जा दोनों को अलग रखकर आंका गया टोक्यो का कोर मुद्रास्फीति सूचकांक पिछले 2 प्रतिशत से बढ़कर 3 प्रतिशत दर्ज किया गया। 3. जापान के कैबिनेट कार्यालय ने केंद्रीय बैंक को क्या सलाह दी है? कैबिनेट कार्यालय ने कहा कि बैंक ऑफ जापान को पहले की गई ब्याज दर बढ़ोतरी के संचयी प्रभाव का सावधानीपूर्वक आकलन करना चाहिए। 4. रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया की वर्तमान आधिकारिक नकद दर क्या है? रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया द्वारा 25 आधार अंकों की चार लगातार बढ़ोतरी किए जाने के बाद वर्तमान आधिकारिक नकद दर 4.6 प्रतिशत है। 5. केंद्रीय बैंकों में 'हॉक्स' और 'डोव्स' का क्या अर्थ होता है? हॉक्स मुद्रास्फीति को नियंत्रित रखने के लिए ऊंची ब्याज दरों के समर्थक होते हैं, जबकि डोव्स आर्थिक विकास को बढ़ावा देने के लिए कम ब्याज दरों और आसान ऋण की वकालत करते हैं। 6. केंद्रीय बैंक की बैठक से पहले 'ब्लैकआउट अवधि' क्या होती है? यह नीति बैठक से कुछ दिन पहले से लेकर घोषणा होने तक की वह अवधि है जिसमें बोर्ड सदस्यों के मौद्रिक नीति पर सार्वजनिक रूप से बोलने पर रोक होती है। https://trendkia.com/market/tokyo-men-mahngai-uchhalane-ke-bada-bhi-japanese-yen-men-narami-109-50-ke-stara-para-snbhala-australian-dollar-41814 TrendKia — Har trend, sabse pehle.