ट्रेजरी यील्ड में उछाल से अमेरिकी डॉलर हुआ मजबूत, एफओएमसी मिनट्स से पहले वैश्विक बाजारों में हलचल अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में तेजी और भू-राजनीतिक तनाव के बीच डॉलर मजबूत हुआ है, जबकि निवेशक फेडरल रिजर्व की आगामी नीतिगत समीक्षा और एफओएमसी मिनट्स पर नजरें टिकाए हुए हैं। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा बाजारों में बुधवार, 7 अक्टूबर को हलचल तेज रही क्योंकि अमेरिकी ट्रेजरी प्रतिभूतियों की यील्ड में उछाल ने डॉलर को नई मजबूती दी। विदेशी मुद्रा विनिमय पटल पर सूचीबद्ध प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले ग्रीनबैक में सुधार देखा गया, जिसमें यूरो के मुकाबले डॉलर का प्रदर्शन सबसे दमदार रहा। बाजार प्रतिभागी अब फेडरल ओपन मार्केट कमेटी (एफओएमसी) की बैठक के मिनट्स का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं, ताकि दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था में ब्याज दरों की भावी दिशा का सटीक अनुमान लगाया जा सके। ऋण बाजार से लेकर ऊर्जा और बहुमूल्य धातुओं तक, वैश्विक संपत्तियों में नीतिगत अनिश्चितता और कूटनीतिक तनाव का सीधा असर देखा जा रहा है। ट्रेजरी यील्ड में तेजी और 6 फीसदी स्तर की चेतावनी अमेरिकी बॉन्ड बाजार के दीर्घकालिक छोर पर निवेशकों की चिंताएं स्पष्ट रूप से दिखाई दे रही हैं। डैनस्के बैंक के विश्लेषकों ने आगाह किया है कि केवल सरकारी बॉन्ड की भारी आपूर्ति ही नहीं, बल्कि बड़े पैमाने पर डेटा इंफ्रास्ट्रक्चर बनाने वाली हाइपरस्केलर्स कंपनियों की वजह से भी यील्ड वक्र के लंबे छोर पर दबाव बना हुआ है। विश्लेषकों का स्पष्ट मानना है कि यदि निवेशक लंबे समय के जोखिम के लिए अतिरिक्त प्रीमियम की मांग जारी रखते हैं, तो 10-वर्षीय और 30-वर्षीय अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड बढ़कर 6% तक पहुंच सकती है। इस प्रकार टर्म प्रीमियम को लेकर बढ़ती चिंताएं उधार लेने की लागत को लंबे समय तक ऊंचा रख सकती हैं, जिससे पूंजी का प्रवाह सुरक्षित समझी जाने वाली अमेरिकी संपत्तियों की ओर तेज हुआ है। भू-राजनीतिक घटनाक्रम और ऊर्जा बाजार का रुख कूटनीतिक और सुरक्षा मोर्चे पर तनाव ने भी वित्तीय बाजारों की धारणा को प्रभावित किया है। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने स्पष्ट कहा है कि अमेरिका की मांगें पूरी करने और दोनों देशों के बीच सात महीने से जारी युद्ध को समाप्त करने के लिए ईरान को अपनी परमाणु संवर्धन क्षमता को घटाना होगा। उन्होंने जोर देकर कहा कि वाशिंगटन किसी भी समझौते के लिए खुला है, लेकिन इसके लिए तेहरान की ओर से ठोस परमाणु रियायतों की दरकार होगी। इसी बीच यमन में सक्रिय सऊदी अरब के नेतृत्व वाले गठबंधन ने घोषणा की कि उसने दक्षिण-पश्चिमी सऊदी अरब के खमीस मुशायत की ओर हूती समूह द्वारा दागी गई एक बैलिस्टिक मिसाइल को हवा में ही रोककर नष्ट कर दिया। इन तनावों के बीच मंगलवार को करीब 1% की बढ़त दर्ज करने के बाद कच्चे तेल की कीमतें मध्य सप्ताह में अपेक्षाकृत स्थिर बनी रहीं। अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (डब्ल्यूटीआई) का भाव लगभग बिना किसी बड़े बदलाव के करीब $89.50 प्रति बैरल पर कारोबार करता देखा गया। मुद्रा बाजारों में उतार-चढ़ाव: येन, ऑस्ट्रेलियन डॉलर और रुपया विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में अमेरिकी डॉलर बनाम जापानी येन (USD/JPY) लगातार मजबूती दर्ज कर रहा है। लगातार दो सत्रों तक मामूली बढ़त हासिल करने के बाद बुधवार को यूरोपीय सत्र के दौरान यह जोड़ी 158.00 के पार निकल गई। एशियाई सत्र में यह डेढ़ हफ्ते के उच्चतम स्तर 158.50 के करीब टिकी रही। लाइव तकनीकी संकेतकों के अनुसार, यूएसडी/जेपीवाई 158.28 के स्तर पर कारोबार कर रहा है, जो पिछले 157.96 के बंद भाव से 0.20% की बढ़त दर्शाता है। इसका 52 हफ्तों का दायरा 149.41 से 163.98 के बीच रहा है। तकनीकी पैमाने पर आरएसआई 56 पर है, जबकि एमएसीडी 0.13 और सिग्नल -0.13 के साथ 0.25 का बुलिश हिस्टोग्राम प्रदर्शित कर रहा है। 20-दिवसीय ईएमए 157.43, 50-दिवसीय ईएमए 157.99 और 200-दिवसीय ईएमए 157.75 पर है, जबकि 200-दिवसीय एसएमए 158.51 पर बना हुआ है। बैंक ऑफ जापान के नरम रुख के बीच तेजी की धारणा रखने वाले ट्रेडर 200-दिवसीय एसएमए से ऊपर निकलने की प्रतीक्षा कर रहे हैं। दूसरी ओर, ऑस्ट्रेलियाई डॉलर बनाम अमेरिकी डॉलर (AUD/USD) अपनी हालिया तेजी को बनाए रखने में असमर्थ रहा और बुधवार के एशियाई सत्र में 0.7000 के मनोवैज्ञानिक स्तर से नीचे नकारात्मक रुख के साथ फिसलता दिखा। रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया से जुड़ी सख्त नीतिगत उम्मीदों के बावजूद, अमेरिकी बॉन्ड प्रतिफल में नई उछाल और डॉलर की खरीदारी ने ऑस्ट्रेलियाई मुद्रा को दबाव में रखा। भारतीय रुपये (INR) की बात करें तो भारतीय रिजर्व बैंक के मौद्रिक नीतिगत फैसले के बाद घरेलू मुद्रा अमेरिकी डॉलर के मुकाबले करीब 96.37 के स्तर पर स्थिर बनी रही। इस समीक्षा बैठक में आरबीआई ने अपनी प्रमुख रेपो दर को 25 आधार अंक बढ़ाकर 5.5% करने का फैसला किया, जो फरवरी 2023 के बाद की पहली नीतिगत ब्याज दर बढ़ोतरी है। सोने और क्रिप्टोकरेंसी पर बिकवाली का असर अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में उछाल और डॉलर की मजबूती का सीधा नुकसान सराफा बाजार को उठाना पड़ा। सोना नकारात्मक दायरे में फिसलते हुए दिन के दौरान करीब 0.7% टूटकर $4,150 प्रति औंस से नीचे आ गया। एशियाई कारोबार के दौरान पीली धातु अपने दो महीने के निचले स्तर, यानी पिछले दिन छुए गए करीब $4,100 के दायरे के बिल्कुल करीब संघर्ष करती नजर आई। बुलियन कारोबारी अब आगामी फेडरल रिजर्व मिनट्स से मिलने वाले नीतिगत संकेतों की प्रतीक्षा कर रहे हैं। क्रिप्टोकरेंसी बाजार में मीम कॉइन डॉगकॉइन (DOGE) में गिरावट का सिलसिला और गहरा गया। डॉगकॉइन करीब $0.090 के आसपास कारोबार कर रहा था, जिसमें इस सप्ताह अब तक 5% से अधिक की गिरावट दर्ज की जा चुकी है। डेरिवेटिव डेटा संकेत दे रहा है कि मंदी का दबाव बढ़ रहा है क्योंकि शॉर्ट पोजीशन एक महीने के शीर्ष स्तर पर पहुंच गई हैं। ओवरहीटेड परिस्थितियों और कमजोर पड़ते मोमेंटम संकेतकों के कारण डॉगकॉइन में आगे और गिरावट का जोखिम बना हुआ है। फेडरल रिजर्व की नीतियां और केंद्रीय बैंकों की दुविधा अमेरिका में मौद्रिक नीति का संचालन फेडरल रिजर्व द्वारा किया जाता है। फेड के दो प्रमुख संवैधानिक अधिदेश हैं: कीमतों में स्थिरता बनाए रखना और अधिकतम रोजगार को बढ़ावा देना। इन लक्ष्यों को साधने का उसका प्राथमिक हथियार अल्पकालिक ब्याज दरों में बदलाव करना है। जब अर्थव्यवस्था में महंगाई फेड के 2% के तय लक्ष्य से ऊपर निकल जाती है, तो वह ब्याज दरों में इजाफा करता है, जिससे पूरी अर्थव्यवस्था में उधारी की लागत बढ़ जाती है। इसका सीधा परिणाम डॉलर की मजबूती के रूप में सामने आता है क्योंकि अंतरराष्ट्रीय निवेशकों के लिए अमेरिका में पूंजी लगाना अधिक आकर्षक हो जाता है। इसके विपरीत, जब महंगाई 2% से नीचे आ जाती है या बेरोजगारी दर बहुत बढ़ जाती है, तो केंद्रीय बैंक उधारी को बढ़ावा देने के लिए ब्याज दरों में कटौती कर सकता है, जिससे ग्रीनबैक पर दबाव पड़ता है। फेडरल रिजर्व वर्ष में आठ नीतिगत बैठकें आयोजित करता है, जहां एफओएमसी आर्थिक परिस्थितियों का आकलन कर ब्याज दरों पर फैसला लेती है। एफओएमसी में बारह शीर्ष अधिकारी भाग लेते हैं, जिनमें बोर्ड ऑफ गवर्नर्स के सात सदस्य, फेडरल रिजर्व बैंक ऑफ न्यूयॉर्क के अध्यक्ष और शेष ग्यारह क्षेत्रीय रिजर्व बैंकों के चार अध्यक्ष शामिल होते हैं, जो एक-एक वर्ष के रोटेटिंग आधार पर सेवा देते हैं। असाधारण वित्तीय संकटों के समय फेडरल रिजर्व मात्रात्मक सहजता यानी क्वांटिटेटिव ईजिंग (QE) का सहारा लेता है। यह एक गैर-मानक नीतिगत उपाय है, जिसके तहत केंद्रीय बैंक वित्तीय संस्थानों से उच्च गुणवत्ता वाले बॉन्ड खरीदने के लिए अतिरिक्त डॉलर जारी करता है, जिससे जाम पड़े वित्तीय तंत्र में तरलता का प्रवाह बढ़ता है। साल 2008 के महामंदी के दौर में इस उपकरण का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया गया था, और यह प्रक्रिया आमतौर पर डॉलर को कमजोर करती है। वहीं क्वांटिटेटिव टाइटनिंग (QT) इसकी ठीक विपरीत प्रक्रिया है, जिसमें फेडरल रिजर्व वित्तीय संस्थानों से बॉन्ड खरीदना बंद कर देता है और परिपक्व होने वाले बॉन्ड से मिलने वाले मूलधन का पुनर्निवेश नहीं करता। यह प्रक्रिया सामान्य तौर पर डॉलर के मूल्य के लिए सकारात्मक साबित होती है। उधर यूरोप में यूरोपीय सेंट्रल बैंक (ईसीबी) एक विकट स्थिति का सामना कर रहा है। सामान्य परिस्थितियों में जब मुद्रास्फीति अपने लक्ष्य से लगभग दोगुनी रफ्तार से भाग रही हो, तो ईसीबी के पास ब्याज दरें बढ़ाने का सीधा विकल्प होता। परंतु मौजूदा परिदृश्य असामान्य है क्योंकि बॉन्ड बाजार पहले ही सख्ती का एक बड़ा हिस्सा खुद पूरा कर रहा है, जिससे यूरोपीय नीति निर्माताओं के समक्ष फैसले लेने की पेचीदा चुनौती खड़ी हो गई है। इसका आप पर असर अमेरिकी डॉलर और बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी से आयातित वस्तुओं की लागत बढ़ सकती है और विदेशी मुद्रा विनिमय दरों पर असर पड़ सकता है। • भारतीय रुपये पर असर: रुपया डॉलर के मुकाबले 96.37 के स्तर पर बना हुआ है और आगे भी दबाव का सामना कर सकता है। इससे विदेश यात्रा, विदेशी पढ़ाई और आयातित इलेक्ट्रॉनिक सामान महंगे हो सकते हैं। • घरेलू ब्याज दरों पर प्रभाव: आरबीआई ने रेपो रेट 25 आधार अंक बढ़ाकर 5.5% कर दिया है। इसके चलते बैंकों द्वारा होम लोन, कार लोन और पर्सनल लोन की ईएमआई में बढ़ोतरी की जा सकती है। • सोने के खरीदारों के लिए: वैश्विक बाजार में सोने की कीमत घटकर $4,150 से नीचे आ गई है। अंतरराष्ट्रीय कीमतों में नरमी से स्थानीय बाजार में आभूषण खरीदारों को खरीदारी के नए अवसर मिल सकते हैं। • कच्चा तेल और ईंधन लागत: डब्ल्यूटीआई क्रूड $89.50 प्रति बैरल पर टिका हुआ है। यदि ऊर्जा कीमतें स्थिर रहती हैं तो घरेलू पेट्रोल और डीजल की दरों में तत्काल बड़े बदलाव की संभावना कम रहेगी। ऐसा क्यों हुआ अमेरिकी डॉलर में मजबूती और बाजार में उथल-पुथल ट्रेजरी यील्ड में उछाल, आगामी फेडरल रिजर्व नीतिगत मिनट्स और मध्य पूर्व में तनाव के चलते देखने को मिली है। • बॉन्ड बाजार में आपूर्ति और तकनीकी दबाव: अमेरिकी ट्रेजरी की भारी नीलामी और तकनीकी हाइपरस्केलर्स के पूंजीगत खर्च ने बॉन्ड यील्ड को ऊपर धकेला है। निवेशकों द्वारा लंबे समय के जोखिम के लिए ज्यादा यील्ड मांगने से 10-वर्षीय और 30-वर्षीय बॉन्ड पर दबाव बढ़ गया है। • फेडरल ओपन मार्केट कमेटी की प्रतीक्षा: एफओएमसी बैठक के मिनट्स जारी होने से पहले निवेशक सतर्क रुख अपना रहे हैं। ब्याज दरों में लंबे समय तक सख्ती बने रहने की आशंका ने अमेरिकी डॉलर को सुरक्षित निवेश के रूप में मजबूती प्रदान की है। • भू-राजनीतिक अनिश्चितता: अमेरिका-ईरान के बीच परमाणु संवर्धन विवाद और सऊदी अरब की ओर दागी गई बैलिस्टिक मिसाइल के बाद भू-राजनीतिक जोखिम बढ़ा है। इस तरह के तनाव पारंपरिक रूप से डॉलर को समर्थन देते हैं और जोखिम वाली संपत्तियों पर दबाव डालते हैं। सवाल-जवाब 1. अमेरिकी डॉलर में बुधवार को मजबूती क्यों देखी गई? अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड यील्ड में सुधार और एफओएमसी मिनट्स से पहले डॉलर में खरीदारी लौटने से इसे मजबूती मिली। 2. डैनस्के बैंक के विश्लेषकों ने ट्रेजरी यील्ड को लेकर क्या चेतावनी दी है? विश्लेषकों ने आगाह किया कि आपूर्ति दबाव और हाइपरस्केलर्स के कारण 10-वर्षीय और 30-वर्षीय ट्रेजरी यील्ड बढ़कर 6% तक जा सकती है। 3. आरबीआई ने अपनी हालिया मौद्रिक नीति बैठक में क्या फैसला लिया? आरबीआई ने रेपो रेट में 25 आधार अंकों की बढ़ोतरी कर इसे 5.5% कर दिया, जो फरवरी 2023 के बाद पहली वृद्धि है। 4. सोने और कच्चे तेल की कीमतों का ताजा रुख क्या है? सोना 0.7% गिरकर $4,150 से नीचे आ गया, जबकि डब्ल्यूटीआई कच्चा तेल $89.50 प्रति बैरल के आसपास स्थिर बना रहा। 5. उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने ईरान को लेकर क्या बयान दिया? उन्होंने कहा कि युद्ध समाप्त करने और अमेरिकी मांगों को पूरा करने के लिए ईरान को अपनी परमाणु संवर्धन क्षमता घटानी होगी। https://trendkia.com/market/treasury-yield-men-uchhala-se-us-dollar-hua-majabuta-fomc-minutes-se-pahale-vaishvika-bajaron-men-halachala-44454 TrendKia — Har trend, sabse pehle.