# ट्रेजरी यील्ड में गिरावट से अमेरिकी शेयर बाजार में लौटी रौनक, डाउ जोन्स 500 अंक उछला

> महंगाई के आंकड़ों के बाद अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में आई गिरावट के चलते डाउ जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज 500 अंक से अधिक चढ़कर 52,600 के करीब बंद हुआ।

**Type:** article · **Category:** बाज़ार · **Published:** 2026-09-11 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/market/trejari-yilda-men-giravata-se-ameriki-sheyara-bajara-men-lauti-raunaka-dow-jones-500-anka-uchhala-31225 · **Language:** Hindi
**Tags:** डाउ जोन्स, शेयर बाजार, ट्रेजरी यील्ड, अमेरिकी बाजार, मुद्रास्फीति, फेडरल रिजर्व, ब्याज दरें, वित्त

अमेरिकी शेयर बाजार में चार दिनों से जारी बिकवाली के सिलसिले पर शुक्रवार को विराम लग गया। ट्रेजरी यील्ड में अचानक आए तेज मोड़ और लंबी अवधि के बॉन्ड प्रतिफल में नरमी के कारण डाउ जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज पूरे कारोबारी सत्र के दौरान बढ़त बनाए रखने में कामयाब रहा। दिन के कारोबार में सूचकांक लगभग 510 अंकों की छलांग लगाकर 52,600 के स्तर के बेहद करीब पहुंच गया। सप्ताह के अंत में बाजार में आई इस तेजी ने निवेशकों को राहत दी है, जो लंबे समय से ब्याज दरों में संभावित वृद्धि और चिपचिपी महंगाई के दबाव से जूझ रहे थे।

बाजार की चाल को गहराई से समझें तो दिन की शुरुआत महंगाई के ताजा आंकड़ों के साथ हुई थी। जब 12:30 जीएमटी पर आंकड़े जारी हुए, तब शुरुआती हलचल में सूचकांक को लगभग 100 अंकों का सहारा मिला। इसके बाद जैसे ही दोपहर के सत्र में लंबी अवधि के सरकारी बॉन्ड प्रतिफल अपने उच्चतम स्तर से नीचे लुढ़के, इक्विटी बाजार में खरीदारी की नई लहर दौड़ पड़ी। कच्चे तेल की कीमतों में नरमी रहने के बावजूद अमेरिकी पंपों पर डीजल के खुदरा भाव रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गए, लेकिन बाजार की इस तेजी की मुख्य धुरी ऊर्जा की कीमतें नहीं बल्कि बॉन्ड यील्ड की चाल रही।

## बॉन्ड यील्ड में उलटफेर और ब्याज दरों की हलचल
शुक्रवार को अमेरिकी सरकारी बॉन्ड बाजार में जबर्दस्त उतार चढ़ाव देखने को मिला। महंगाई का आंकड़ा सामने आते ही 10 वर्षीय अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड तेजी से 5.00 प्रतिशत के मनोवैज्ञानिक स्तर की तरफ बढ़ी, लेकिन वहां टिक नहीं सकी और पलटकर 4.90 प्रतिशत के आसपास आ गई। लंबी अवधि वाले 30 वर्षीय ट्रेजरी बॉन्ड में भी गिरावट दर्ज की गई, जबकि गुरुवार को यह 5.37 प्रतिशत पर पहुंच गई थी, जो साल 2007 के बाद का इसका सबसे ऊंचा स्तर था। लंबी अवधि के यील्ड में इस गिरावट ने उन ग्रोथ कंपनियों और ब्लू चिप शेयरों को सहारा दिया, जो पूंजी लागत बढ़ने की आशंका से पस्त हो रहे थे।

दूसरी ओर, कम अवधि वाले 2 वर्षीय ट्रेजरी यील्ड का व्यवहार पूरी तरह अलग रहा। इसमें दिन भर मजबूती बनी रही और इसने अपनी 11 आधार अंकों की बढ़त का अधिकांश हिस्सा बनाए रखा। यील्ड कर्व का यह छोटा सिरा दरअसल आगामी बुधवार को होने वाली फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति बैठक की संभावनाओं को दर्शाता है। इससे स्पष्ट होता है कि बॉन्ड बाजार का छोटा सिरा नीतिगत दरों में बढ़ोतरी को तय मान चुका है, जबकि लंबा सिरा यह भांप रहा है कि इन बढ़ोतरी का असर आने वाले समय में आर्थिक वृद्धि की रफ्तार पर कैसा पड़ेगा। पिछले चार दिनों की मंदी में भी यही प्रक्रिया उलटी दिशा में काम कर रही थी, जब 10 वर्षीय यील्ड अक्टूबर 2023 के बाद के उच्चतम स्तर और 30 वर्षीय यील्ड 2007 के बाद के शिखर पर पहुंच गई थी।

## महंगाई आंकड़ों का गणित और सेवा क्षेत्र की चुनौती
अमेरिकी श्रम विभाग द्वारा जारी उपभोक्ता मूल्य सूचकांक यानी सीपीआई के ताजा आंकड़ों ने बाजार विश्लेषकों को सतर्क कर दिया है। अगस्त महीने में हेडलाइन सीपीआई में 0.4 प्रतिशत की मासिक वृद्धि दर्ज की गई, जबकि वार्षिक आधार पर यह 3.4 प्रतिशत रही। ये दोनों आंकड़े बाजार के आम अनुमानों के पूरी तरह अनुरूप रहे। हालांकि, खाद्य और ऊर्जा को अलग रखकर आंकी जाने वाली कोर सीपीआई में 0.3 प्रतिशत की मासिक वृद्धि हुई, जो 0.2 प्रतिशत के बाजार अनुमान से एक दसवां हिस्सा अधिक रही। वार्षिक कोर महंगाई दर 2.5 प्रतिशत से मामूली गिरकर 2.4 प्रतिशत पर आ गई।

इस पूरे आंकड़े में सबसे अधिक दबाव ईंधन और ऊर्जा की कीमतों की ओर से दिखा। अगस्त महीने में गैसोलीन की कीमतों में 3.9 प्रतिशत का उछाल आया, जिसने पूरे महीने की कुल महंगाई वृद्धि के एक तिहाई से अधिक हिस्से में योगदान दिया। सालाना आधार पर देखें तो ऊर्जा सूचकांक 16.3 प्रतिशत ऊपर चढ़ चुका है। महत्वपूर्ण बात यह रही कि यह उछाल आयात शुल्कों के कारण नहीं आया, क्योंकि कोर वस्तुओं की कीमतों में महीने दर महीने केवल 0.1 प्रतिशत और साल दर साल 0.7 प्रतिशत की मामूली बढ़ोतरी हुई।

इसके विपरीत, ईंधन का भारी इस्तेमाल करने वाली सेवाओं में तेज उछाल देखा गया। हवाई जहाजों के किराए महीने में 2.7 प्रतिशत और सालाना आधार पर 23.4 प्रतिशत बढ़े। परिवहन सेवाओं में 0.5 प्रतिशत की तेजी आई और आवास की लागत यानी शेल्टर इंडेक्स की गति 0.1 प्रतिशत से बढ़कर 0.3 प्रतिशत हो गई। मासिक कोर दर जून में 0.0 प्रतिशत, जुलाई में 0.2 प्रतिशत और अगस्त में 0.3 प्रतिशत दर्ज की गई। इस तरह जिस ऊर्जा घटक को कोर आंकड़े से बाहर रखा जाता है, वही अप्रत्यक्ष रूप से परिवहन और अन्य सेवाओं के जरिए कोर मुद्रास्फीति को ऊपर खींच रहा है।

## डीजल की रिकॉर्ड कीमतें और कॉर्पोरेट जगत पर असर
कमोडिटी बाजार में कच्चे तेल की कीमतें दिन के दौरान नीचे रहीं, हालांकि दोनों प्रमुख अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क बीते एक महीने के दौरान लगभग 20 प्रतिशत की बढ़त बनाए हुए हैं। अमेरिकी खुदरा पंपों पर डीजल के दाम इतिहास में पहली बार 6.00 डॉलर प्रति गैलन के स्तर को पार कर 6.05 डॉलर पर पहुंच गए, जबकि एक महीने पहले यह 5.32 डॉलर थे। डाउ जोन्स में शामिल 30 दिग्गज कंपनियों में से 29 कंपनियां डीजल और ईंधन का उपभोग करती हैं, यानी यह उनकी लागत बढ़ाता है। केवल शेवरॉन एकमात्र ऐसी कंपनी है जो ऊर्जा उत्पादन से जुड़ी है, जबकि सूचकांक में ऊर्जा क्षेत्र का भारांक सबसे कम यानी केवल 2.4 प्रतिशत है। डीजल की यह रिकॉर्ड महंगाई आने वाले दिनों में कॉर्पोरेट मुनाफे पर दबाव डाल सकती है।

## उपभोक्ता धारणा में भारी गिरावट और फेडरल रिजर्व का रुख
अर्थव्यवस्था के मोर्चे पर एक और चिंताजनक संकेत यूनिवर्सिटी ऑफ मिशिगन के प्रारंभिक सितंबर सर्वेक्षण से मिला। इस सर्वेक्षण में उपभोक्ता धारणा सूचकांक गिरकर 47.8 पर आ गया, जो पिछले महीने 51.7 था और बाजार के 51 के अनुमान से काफी नीचे रहा। भविष्य की उम्मीदों से जुड़ा घटक 51.5 से गिरकर 45.8 पर आ गया। वर्ष 1952 से लगातार चल रहे इस प्रतिष्ठित सर्वेक्षण का ऐतिहासिक निचला स्तर अभी चार महीने पहले ही बना था। सबसे अहम बात यह रही कि उपभोक्ताओं की एक साल आगे की महंगाई की उम्मीद 4.0 प्रतिशत से उछलकर 4.6 प्रतिशत हो गई, जबकि पांच साल का अनुमान 3.3 प्रतिशत से बढ़कर 3.4 प्रतिशत पर पहुंच गया। इन बढ़ती अपेक्षाओं के कारण ही नीति निर्माताओं के सामने ब्याज दरों में एक चौथाई अंक की बढ़ोतरी की संभावना बनी हुई है।

वायदा बाजार के ताजा आंकड़ों के अनुसार, आगामी बुधवार को नीतिगत दरों के 3.75 से 4.00 प्रतिशत के दायरे में जाने की संभावना 86.71 प्रतिशत आंकी जा रही है। वहीं 9 दिसंबर की बैठक तक दरों के 4.00 से 4.25 प्रतिशत होने की संभावना 93.96 प्रतिशत है। 17 मार्च तक बाजार 89.29 प्रतिशत संभावना जता रहा है कि दरें 4.25 से 4.50 प्रतिशत हो जाएंगी, जबकि जुलाई 2027 तक चौथी दर वृद्धि का अनुमान भी लगाया जा रहा है। अब सवाल यह नहीं है कि केंद्रीय बैंक दरें बढ़ाएगा या नहीं, बल्कि यह है कि उसे कितनी बार दरें बढ़ानी होंगी। समिति के अपने जून के अनुमानों में इस वर्ष के अंत तक फंड्स रेट 3.8 प्रतिशत, अगले वर्ष 3.6 प्रतिशत और लंबी अवधि में 3.1 प्रतिशत रहने की बात कही गई थी, जबकि मौजूदा बाजार अनुमान 2027 के लिए इससे करीब एक प्रतिशत ऊपर चल रहा है।

## तकनीकी स्तर और सूचकांक का परिदृश्य
तकनीकी चार्ट पर डाउ जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज के लिए पहला बड़ा प्रतिरोध 50 दिवसीय एक्सपोनेंशियल मूविंग एवरेज यानी ईएमए के पास स्थित है, जो 52,733 से 52,750 के आसपास बैठता है। शुक्रवार के सत्र का उच्चतम स्तर इसी बाधा के ठीक नीचे थमा। इसके ऊपर 53,000 और 53,250 के स्तर हैं, जिसके बाद 53,500 तथा 53,800 का वह दायरा आता है जिसने अगस्त की तेजी को सीमित किया था। अगस्त की शुरुआत में बना 54,744 का शिखर मौजूदा स्तर से लगभग 4 प्रतिशत ऊपर है।

नीचे की ओर, 52,100 का क्षेत्र पहला मजबूत सहारा है, जिसके ठीक नीचे गुरुवार का बंद स्तर मौजूद है। यदि गिरावट बढ़ती है तो 52,000 और 51,500 के बाद जून का निचला स्तर 51,300 नजर आएगा। 200 दिवसीय ईएमए 50,225 के करीब है जो फिलहाल काफी दूर है। तकनीकी विश्लेषकों का मानना है कि जब तक सूचकांक 52,750 के ऊपर दैनिक आधार पर बंद नहीं होता, तब तक रुझान मंदी का रह सकता है। दैनिक स्टोकेस्टिक आरएसआई लगभग 39 पर है जो जुलाई के बाद से ओवरसोल्ड नहीं हुआ है, जिसका अर्थ है कि चार सत्रों की गिरावट ने बिकवाली को पूरी तरह खाली नहीं किया था। 53,000 के ऊपर दैनिक बंद होने पर ही मंदी का परिदृश्य अमान्य होगा।

## वैश्विक बाजार और अन्य परिसंपत्तियों की स्थिति
विदेशी मुद्रा बाजार में एशियाई सत्र के दौरान ऑस्ट्रेलियाई डॉलर अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 0.7100 के मध्य स्तर पर स्थिर रहा। उत्पादक मूल्य सूचकांक से उपजी चिंताओं के बावजूद रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया के सख्त रुख ने ऑस्ट्रेलियाई मुद्रा को सहारा दिया। वहीं अमेरिकी डॉलर और जापानी येन की जोड़ी 154.00 के करीब रही, जहां बैंक ऑफ जापान द्वारा सख्त कदम उठाने की उम्मीदों ने जापानी येन को मजबूती दी। दूसरी ओर, सर्राफा बाजार में सोने ने अपनी चमक दोबारा हासिल की और अमेरिकी डॉलर में आई हल्की नरमी के चलते 4,440 डॉलर प्रति औंस के भाव के करीब पहुंचकर मजबूत बढ़त दर्ज की।

## डाउ थ्योरी और इंडेक्स की संरचना
डाउ जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज दुनिया के सबसे पुराने शेयर सूचकांकों में से एक है, जिसमें अमेरिका की 30 सबसे अधिक कारोबार वाली दिग्गज कंपनियां शामिल हैं। यह सूचकांक बाजार पूंजीकरण के बजाय शेयरों के मूल्य भारित आधार पर तैयार किया जाता है। इसकी गणना घटक शेयरों के भावों को जोड़कर एक निश्चित विभाजक से भाग देकर की जाती है, जो वर्तमान में 0.152 है। इस सूचकांक की स्थापना चार्ल्स डाउ ने की थी, जिन्होंने वॉल स्ट्रीट जर्नल की भी स्थापना की थी। व्यापक सूचकांक जैसे एसएंडपी 500 की तुलना में केवल 30 कंपनियों को शामिल करने के कारण अक्सर इसकी आलोचना भी होती रही है।

चार्ल्स डाउ द्वारा विकसित डाउ थ्योरी के अनुसार, बाजार के प्राथमिक रुझान को पहचानने के लिए डाउ जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज और डाउ जोन्स ट्रांसपोर्टेशन एवरेज की दिशा की तुलना की जाती है। जब दोनों सूचकांक एक ही दिशा में बढ़ रहे हों, तभी उस रुझान को प्रामाणिक माना जाता है। इस सिद्धांत में तीन प्रमुख चरण बताए गए हैं: संचय यानी एक्युमुलेशन, सार्वजनिक भागीदारी, और वितरण यानी डिस्ट्रीब्यूशन जब बड़ा पैसा बाजार से बाहर निकलता है। वर्तमान में निवेशक इस सूचकांक में सीधे शेयरों के अलावा ईटीएफ जैसे एसपीडीआर डाउ जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज ईटीएफ, फ्यूचर्स, ऑप्शंस और म्यूचुअल फंड के जरिए भी निवेश और ट्रेडिंग करते हैं।

## इसका आप पर असर
अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और डाउ जोन्स में आई तेजी से वैश्विक और भारतीय शेयर बाजारों के निवेशकों पर सीधा असर पड़ सकता है।

- **भारतीय शेयर बाजार पर असर:** अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में आई नरमी से भारतीय शेयर बाजार में विदेशी संस्थागत निवेशकों की बिकवाली थमने की उम्मीद है। सोमवार को घरेलू बाजारों में आईटी और बैंकिंग शेयरों में राहत की रैली देखने को मिल सकती है।
- **वैश्विक इक्विटी निवेशकों के लिए:** लंबी अवधि के बॉन्ड प्रतिफल में गिरावट से कॉर्पोरेट कर्ज की लागत का दबाव कुछ कम हुआ है। हालांकि जब तक सूचकांक 53,000 के ऊपर नहीं निकलता, तब तक निवेशकों को आक्रामक खरीदारी के बजाय सतर्क रहना चाहिए।
- **मुद्रा और डॉलर का रुख:** अमेरिकी डॉलर में आई हल्की नरमी से भारतीय रुपये को स्थिरता मिल सकती है। आयातकों के लिए डॉलर के ऊंचे स्तरों से फिसलना राहत भरा संकेत है।
- **जिंस और तेल खरीदारों के लिए:** डीजल के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचने से लॉजिस्टिक्स और माल ढुलाई लागत बढ़ने का जोखिम बना हुआ है। इससे आने वाले हफ्तों में रोजमर्रा की उपभोक्ता वस्तुओं के दाम प्रभावित हो सकते हैं।

## ऐसा क्यों हुआ
अमेरिकी शेयर बाजार में शुक्रवार को आई 500 अंकों की तेजी की मुख्य वजह लंबी अवधि के ट्रेजरी बॉन्ड प्रतिफल का अपने उच्चतम स्तर से वापस लौटना था। चार सत्रों की लगातार बिकवाली के बाद तकनीकी सुधार और बॉन्ड यील्ड में राहत ने सूचकांक को ऊपर खींचा।

- **बॉन्ड यील्ड में तेज मोड़:** 10 वर्षीय अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड 5.00 प्रतिशत के स्तर को छूने के बाद फिसलकर 4.90 प्रतिशत पर आ गई। 30 वर्षीय यील्ड भी अपने 2007 के बाद के शिखर 5.37 प्रतिशत से नीचे आ गई, जिससे इक्विटी पर दबाव घटा।
- **महंगाई के मिले-जुले आंकड़े:** हालांकि कोर सीपीआई 0.3 प्रतिशत मासिक बढ़कर अनुमान से थोड़ी अधिक रही, लेकिन हेडलाइन महंगाई 0.4 प्रतिशत पर अनुमान के अनुरूप रही। इससे बाजार ने राहत की सांस ली कि स्थिति अनुमान से बहुत ज्यादा खराब नहीं है।
- **सप्ताह के अंत में शॉर्ट कवरिंग:** लगातार चार दिनों तक भारी गिरावट झेलने के बाद ट्रेडर्स ने सप्ताहांत से पहले अपनी मंदी की पोजीशन को काटा। इस शॉर्ट कवरिंग ने डाउ जोन्स को 52,600 के करीब पहुंचने में मदद की।

## सवाल-जवाब

### 1. डाउ जोन्स में शुक्रवार को कितनी तेजी दर्ज की गई?
डाउ जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज में लगभग 510 अंकों की बढ़त दर्ज की गई और यह 52,600 के स्तर के करीब बंद हुआ।

### 2. अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में क्या बदलाव हुआ?
10 वर्षीय ट्रेजरी यील्ड 5.00 प्रतिशत के करीब पहुंचने के बाद गिरकर 4.90 प्रतिशत पर आ गई, जबकि 30 वर्षीय यील्ड 5.37 प्रतिशत से नीचे फिसल गई।

### 3. अगस्त महीने में महंगाई के आंकड़े कैसे रहे?
अगस्त में हेडलाइन सीपीआई मासिक आधार पर 0.4 प्रतिशत और सालाना आधार पर 3.4 प्रतिशत बढ़ी, जबकि कोर सीपीआई 0.3 प्रतिशत दर्ज की गई।

### 4. डीजल की कीमतों में क्या रिकॉर्ड बना?
अमेरिकी पंपों पर डीजल के भाव इतिहास में पहली बार 6.00 डॉलर प्रति गैलन को पार कर 6.05 डॉलर प्रति गैलन पर पहुंच गए।

### 5. आगामी फेडरल रिजर्व बैठक से बाजार क्या उम्मीद कर रहा है?
फ्यूचर्स बाजार 86.71 प्रतिशत संभावना जता रहा है कि नीतिगत ब्याज दरों को बढ़ाकर 3.75 से 4.00 प्रतिशत के दायरे में लाया जाएगा।

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