# ट्रंप और शी जिनपिंग की अहम बैठक से पहले यूरो लुढ़ककर दो महीने के निचले स्तर पर पहुंचा

> अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीनी समकक्ष शी जिनपिंग की द्विपक्षीय बातचीत से पहले एशियाई सत्र में यूरो गिरकर 1.1380-1.1375 के दायरे में पहुंच गया।

**Type:** article · **Category:** बाज़ार · **Published:** 2026-09-24 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/market/trump-aura-xi-jinping-ki-ahama-baithaka-se-pahale-euro-lurhakakara-do-mahine-ke-nichale-stara-para-pahuncha-37594 · **Language:** Hindi
**Tags:** यूरो, अमेरिकी डॉलर, विदेशी मुद्रा, डोनाल्ड ट्रंप, शी जिनपिंग, ब्याज दरें, यूरोपीय सेंट्रल बैंक, वित्त

वैश्विक विदेशी मुद्रा बाजार में गुरुवार को एशियाई कारोबारी सत्र के दौरान यूरो पर बिकवाली का दबाव बना रहा, जिससे EUR/USD मुद्रा जोड़ी 28 जुलाई के बाद के अपने सबसे निचले स्तर तक फिसल गई। इस भारी गिरावट के बाद हाजिर बाजार में कीमतें 1.1380 से 1.1375 के आसपास स्थिर होती दिखाई दीं। बाजार में सक्रिय बिकवाल इस समय किसी भी नई आक्रामक स्थिति से बचते नजर आ रहे हैं क्योंकि निवेशकों की नजरें अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच होने वाली उच्चस्तरीय बैठक पर टिकी हैं। राजनीतिक अनिश्चितता और दोनों महाशक्तियों के बीच संभावित व्यापारिक रुख को देखते हुए अमेरिकी डॉलर की मजबूती में ठहराव आया है, जिससे हाजिर कीमतों को कुछ राहत मिली है।

## तकनीकी संकेतकों में दिख रहा है अत्यधिक बिकवाली का असर
दैनिक चार्ट पर तकनीकी तस्वीर कमजोर बनी हुई है, जो दर्शाती है कि बाजार में कम से कम प्रतिरोध का रास्ता नीचे की ओर ही है। 14-दिवसीय रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स यानी RSI गिरकर 25.47 के स्तर पर आ चुका है। तकनीकी भाषा में यह स्तर ओवरसोल्ड स्थिति का संकेत देता है। इसका सीधा मतलब यह है कि बाजार में बिकवाली का दबाव कुछ समय के लिए धीमा पड़ सकता है या मामूली सुधार देखने को मिल सकता है, लेकिन यह इस मुद्रा जोड़ी के लिए किसी टिकाऊ तल के बनने का संकेत नहीं देता।

इसके साथ ही मूविंग एवरेज कन्वर्जेंस डाइवर्जेंस यानी MACD शून्य से नीचे बना हुआ है और इसका स्तर -0.0025 के करीब दर्ज किया गया है। यह लगातार मंदी के संवेग की ओर इशारा कर रहा है। यदि बाजार में कोई अल्पकालिक सुधारात्मक उछाल आता भी है, तो 1.1420 के आपूर्ति क्षेत्र के पास उसके तेजी से खत्म हो जाने का जोखिम बना रहेगा। लाइव बाजार आंकड़ों के अनुसार, 52 हफ्तों का दायरा 1.13 से 1.20 के बीच रहा है और मौजूदा मूल्य लंबी अवधि के डाउनट्रेंड में बना हुआ है, जहां 50-दिवसीय ईएमए 1.15 और 200-दिवसीय ईएमए 1.16 पर डेथ क्रॉस जैसी संरचना बनाए हुए हैं।

## यूरोपीय मुद्रा और वैश्विक वित्तीय बाजार में इसकी हैसियत
यूरो यूरोपीय संघ के उन 20 सदस्य देशों की आधिकारिक मुद्रा है जो यूरोज़ोन का हिस्सा हैं। अमेरिकी डॉलर के बाद यह दुनिया की दूसरी सबसे अधिक कारोबार की जाने वाली मुद्रा मानी जाती है। वर्ष 2022 के आंकड़ों के अनुसार, दुनिया भर के सभी विदेशी मुद्रा लेन-देन में यूरो की हिस्सेदारी 31 प्रतिशत थी, जिसका औसत दैनिक कारोबार 2.2 ट्रिलियन डॉलर से अधिक रहा।

विदेशी मुद्रा विनिमय में EUR/USD दुनिया भर में सबसे अधिक कारोबार की जाने वाली मुद्रा जोड़ी है, जो कुल अंतरराष्ट्रीय लेन-देन के लगभग 30 प्रतिशत हिस्से का प्रतिनिधित्व करती है। इसके बाद अन्य जोड़ियों में EUR/JPY की हिस्सेदारी 4 प्रतिशत, EUR/GBP की हिस्सेदारी 3 प्रतिशत और EUR/AUD की हिस्सेदारी लगभग 2 प्रतिशत बैठती है।

## यूरोपीय सेंट्रल बैंक की नीति और मौद्रिक नियंत्रण
जर्मनी के फ्रैंकफर्ट में स्थित यूरोपीय सेंट्रल बैंक यानी ECB पूरे यूरोज़ोन का केंद्रीय रिजर्व बैंक है। यह बैंक यूरोज़ोन की मौद्रिक नीति का संचालन करता है और आधिकारिक ब्याज दरों का निर्धारण करता है। ECB का प्राथमिक दायित्व कीमतों में स्थिरता बनाए रखना है, जिसका मुख्य उद्देश्य मुद्रास्फीति को नियंत्रित करना या जरूरत पड़ने पर आर्थिक विकास को गति देना होता है।

ब्याज दरों को बढ़ाना या घटाना बैंक का सबसे प्रमुख नीतिगत हथियार है। सामान्य तौर पर अपेक्षाकृत ऊंची ब्याज दरें या भविष्य में दरें बढ़ने की उम्मीदें यूरो को मजबूत करती हैं, जबकि दरों में कटौती से मुद्रा कमजोर होती है। ECB की गवर्निंग काउंसिल साल में आठ बार मौद्रिक नीति बैठकें आयोजित करती है। इन बैठकों में निर्णय यूरोज़ोन के राष्ट्रीय केंद्रीय बैंकों के प्रमुखों और छह स्थायी सदस्यों द्वारा लिए जाते हैं, जिनकी अध्यक्षता बैंक की अध्यक्ष क्रिस्टीन लेगार्ड करती हैं।

## आर्थिक आंकड़े और मुद्रास्फीति का प्रभाव
हार्मनाइज्ड इंडेक्स ऑफ कंज्यूमर प्राइसेज यानी HICP द्वारा मापे जाने वाले यूरोज़ोन मुद्रास्फीति आंकड़े यूरो की चाल के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माने जाते हैं। जब मुद्रास्फीति अपेक्षा से अधिक बढ़ती है और विशेष रूप से बैंक के निर्धारित 2 प्रतिशत के लक्ष्य से ऊपर निकल जाती है, तो इसे नियंत्रण में लाने के लिए दरों में बढ़ोतरी आवश्यक हो जाती है। दूसरे देशों के मुकाबले अपेक्षाकृत ऊंची ब्याज दरें विदेशी निवेशकों को अपनी पूंजी लगाने के लिए आकर्षित करती हैं, जिससे यूरो की मांग बढ़ती है।

सकल घरेलू उत्पाद यानी GDP, विनिर्माण और सेवा क्षेत्र के PMI, रोजगार रिपोर्ट और उपभोक्ता विश्वास सर्वेक्षण जैसे आंकड़े यूरोज़ोन की आर्थिक सेहत का पैमाना तय करते हैं। यदि अर्थव्यवस्था मजबूत होती है तो यूरो को बल मिलता है। यूरोज़ोन की चार सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाएं जर्मनी, फ्रांस, इटली और स्पेन मिलकर पूरे यूरोज़ोन की 75 प्रतिशत अर्थव्यवस्था बनाती हैं, इसलिए इन देशों के आर्थिक आंकड़े मुद्रा पर सबसे गहरा प्रभाव डालते हैं। इसके अतिरिक्त व्यापार संतुलन भी एक महत्वपूर्ण पैमाना है। जब कोई क्षेत्र आयात के मुकाबले निर्यात से अधिक कमाता है, तो विदेशी खरीदारों द्वारा उसके उत्पादों की मांग से मुद्रा मजबूत होती है।

## वैश्विक बाजारों में अन्य प्रमुख मुद्राओं और संपत्तियों की स्थिति
गुरुवार के कारोबारी सत्र में केवल यूरो ही नहीं, बल्कि अन्य प्रमुख मुद्राओं और परिसंपत्तियों में भी व्यापक हलचल दर्ज की गई। ऑस्ट्रेलिया की अगस्त महीने की रोजगार रिपोर्ट आने के बाद ऑस्ट्रेलियाई डॉलर अमेरिकी डॉलर के मुकाबले कमजोर होकर 0.7000 के स्तर की ओर खिसक गया। इस रिपोर्ट में बेरोजगारी दर 4.5 प्रतिशत के अनुमान के मुकाबले बढ़कर 4.6 प्रतिशत पर पहुंच गई, हालांकि रोजगार में बदलाव 39.5K दर्ज हुआ जो उम्मीदों से बेहतर था। ऑस्ट्रेलियाई डॉलर के व्यापारी भी वाशिंगटन और बीजिंग के बीच की इस महत्वपूर्ण बैठक से पहले सतर्क दिखाई दिए।

दूसरी ओर जापानी येन के मुकाबले अमेरिकी डॉलर यानी USD/JPY तीन हफ्ते के उच्च स्तर से फिसलकर 158.00 के करीब आ गया। जापान में बॉन्ड प्रतिफल बढ़ने और सरकार द्वारा संभावित हस्तक्षेप के जोखिमों ने येन को समर्थन दिया। वहीं अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा सख्त रुख बनाए रखने के दांव और अमेरिकी बॉन्ड प्रतिफल में तेजी ने डॉलर को दो महीने के उच्च स्तर के आसपास बनाए रखा।

सोने के बाजार में भी पिछले नुकसान की भरपाई का दौर देखा गया और गुरुवार के एशियाई सत्र में सोना 4,300 डॉलर के नीचे साप्ताहिक निचले स्तर पर स्थिर होता नजर आया। निवेशक किसी भी बड़े निर्णय से पहले ट्रंप और शी जिनपिंग के बीच होने वाले संवाद के नतीजों का इंतजार कर रहे हैं। इस बीच कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और ऊंचे बॉन्ड प्रतिफल ने इक्विटी बाजारों की हालिया तेजी को रोक दिया है। सप्ताह की मजबूत शुरुआत के बाद तेल और प्रतिफल में बढ़ोतरी ने प्रमुख शेयर सूचकांकों पर दबाव बना दिया है।

एशियाई केंद्रीय बैंकों के मोर्चे पर, बैंक ऑफ जापान ने अपने अल्पकालिक ब्याज दर लक्ष्य को 1.00 प्रतिशत से बढ़ाकर 1.25 प्रतिशत करने का फैसला किया। यह निर्णय 7-2 के बहुमत से लिया गया, जो मौद्रिक नीति को सामान्य बनाने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम है और बाजार की हफ्तों पुरानी अपेक्षाओं के पूरी तरह अनुकूल रहा।

## इसका आप पर असर
वैश्विक मुद्रा बाजारों में यूरो की कमजोरी और डॉलर की मजबूती अंतरराष्ट्रीय व्यापार, यात्रा और निवेश की लागत को सीधे प्रभावित करती है।

- **भारतीय यात्रियों और छात्रों पर:** यदि आप यूरोप की यात्रा करने या वहां पढ़ाई करने की योजना बना रहे हैं, तो यूरो के निचले स्तर पर होने से यात्रा पैकेज और यूरो में चुकाई जाने वाली ट्यूशन फीस अपेक्षाकृत सस्ती होगी। भारतीय रुपए के मुकाबले डॉलर की मजबूती अन्य विदेशी खर्चों को प्रभावित कर सकती है।
- **आयातकों और निर्यातकों पर:** यूरोपीय देशों को निर्यात करने वाले भारतीय कारोबारियों की प्राप्तियों पर असर पड़ सकता है, जबकि वहां से मशीनरी या कच्चा माल मंगाने वाली कंपनियों को मुद्रा के स्तर का लाभ मिल सकता है। हेजिंग रणनीतियों की समीक्षा तुरंत करनी चाहिए।
- **वैश्विक निवेशकों पर:** डॉलर की मजबूती और बॉन्ड यील्ड में तेजी से उभरते बाजारों से पूंजी का बहिर्गमन बढ़ सकता है। शेयर बाजारों में अस्थिरता रहने के कारण नए निवेश में सावधानी बरतना जरूरी है।
- **जिंस और तेल खरीदारों पर:** अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें घरेलू ईंधन दरों पर दबाव बना सकती हैं। इससे परिवहन लागत और सामान्य महंगाई पर असर पड़ने की संभावना रहती है।

## ऐसा क्यों हुआ
अमेरिकी और चीनी नेतृत्व के बीच होने वाले महत्वपूर्ण सम्मेलन से पहले निवेशकों द्वारा जोखिम भरे दांव घटाने और तकनीकी स्तरों के टूटने के कारण यूरो में यह गिरावट देखी गई।

- **भू-राजनीतिक बैठक की अनिश्चितता:** अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच होने वाले शिखर सम्मेलन के परिणामों को लेकर बाजार में भारी सतर्कता है। दोनों देशों के बीच व्यापारिक और कूटनीतिक रुख स्पष्ट होने तक व्यापारी अपनी मुद्रा स्थितियों को सीमित कर रहे हैं।
- **तकनीकी स्तरों का टूटना:** EUR/USD जोड़ी में लगातार तीसरे दिन बिकवाली जारी रही, जिससे तकनीकी संकेतकों में कमजोरी दर्ज हुई। दैनिक आरएसआई 25.47 तक गिरने से बाजार में ओवरसोल्ड स्थिति बनी लेकिन नए खरीदार अभी आगे नहीं आ रहे हैं।
- **ब्याज दरों और आर्थिक आंकड़ों का प्रभाव:** यूरोज़ोन में आर्थिक गतिशीलता की तुलना में अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में बढ़त ने डॉलर को अतिरिक्त सहारा दिया। इसके चलते विदेशी मुद्रा बाजार में यूरो के मुकाबले डॉलर को मजबूती मिली।

## सवाल-जवाब

### 1. EUR/USD मुद्रा जोड़ी में गिरावट का मुख्य कारण क्या है?
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच होने वाली बैठक से पहले बाजार में सतर्कता और तकनीकी बिकवाली के कारण यह गिरावट आई है।

### 2. हाजिर बाजार में यूरो की मौजूदा कीमत किस स्तर पर है?
हाजिर बाजार में EUR/USD लगभग 1.1380 से 1.1375 के दायरे में कारोबार कर रहा है।

### 3. तकनीकी संकेतक आरएसआई (RSI) क्या संकेत दे रहा है?
दैनिक 14-दिवसीय आरएसआई 25.47 पर पहुंच गया है, जो ओवरसोल्ड स्थिति दर्शाता है हालांकि यह टिकाऊ निचले स्तर की पुष्टि नहीं करता।

### 4. वैश्विक मुद्रा विनिमय में यूरो की कुल हिस्सेदारी कितनी है?
वर्ष 2022 के आंकड़ों के अनुसार, कुल विदेशी मुद्रा लेन-देन में यूरो की हिस्सेदारी 31 प्रतिशत रही है और यह दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी मुद्रा है।

### 5. बैंक ऑफ जापान ने अपनी ब्याज दरों में क्या बदलाव किया है?
बैंक ऑफ जापान ने मौद्रिक नीति को सामान्य करते हुए अपने अल्पकालिक ब्याज दर लक्ष्य को 1.00 प्रतिशत से बढ़ाकर 1.25 प्रतिशत कर दिया है।

### 6. ऑस्ट्रेलिया के रोजगार आंकड़ों का ऑस्ट्रेलियाई डॉलर पर क्या असर हुआ?
बेरोजगारी दर 4.6 प्रतिशत तक बढ़ने के बाद एशियाई सत्र में ऑस्ट्रेलियाई डॉलर गिरकर 0.7000 के स्तर की ओर आ गया।

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