{
  "type": "article",
  "title": "तुर्की के केंद्रीय बैंक ने 37 प्रतिशत दर पर शुरू की रेपो नीलामी, लीरा में बढ़ेगा निवेशकों का आकर्षण",
  "summary": "तुर्की के केंद्रीय बैंक ने मौद्रिक नीति को सामान्य करते हुए एक सप्ताह के रेपो संचालन को फिर से शुरू कर दिया है। इसके साथ ही उधारी दर 40 प्रतिशत से घटकर 37 प्रतिशत नीतिगत दर पर आ गई है।",
  "content": "तुर्की के केंद्रीय बैंक ने इस सप्ताहांत एक बड़ा कदम उठाते हुए अपने नियमित एक सप्ताह के रेपो संचालन को फिर से शुरू करने का निर्णय लिया है। इस कदम के साथ ही तुर्की की मौद्रिक नीति सामान्यीकरण की दिशा में तेजी से आगे बढ़ती दिख रही है। केंद्रीय बैंक ने अपने मुख्य फंडिंग तंत्र को 40 प्रतिशत की ओवरनाइट उधारी दर से हटाकर फिर से अपनी मुख्य 37 प्रतिशत की नीतिगत दर पर स्थानांतरित कर दिया है। यह नीतिगत बदलाव मार्च की शुरुआत में अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य तनाव भड़कने के दौरान लागू किए गए आपातकालीन मौद्रिक उपायों को पीछे छोड़ता है। अंतरराष्ट्रीय वित्तीय बाजार इस फैसले का बारीक मूल्यांकन कर रहे हैं। इसके साथ ही वैश्विक स्तर पर निवेशक अमेरिकी ट्रेजरी विभाग द्वारा बांड बायबैक कार्यक्रम के अप्रत्याशित विस्तार, अमेरिका और कनाडा के बीच नए सिरे से उभरते व्यापारिक तनाव और ईरान पर प्रस्तावित अमेरिकी आर्थिक प्रतिबंधों की घोषणाओं पर भी करीब से नजर रख रहे हैं।\n\nतुर्की के केंद्रीय बैंक ने दोबारा शुरू किया एक सप्ताह का रेपो संचालन\nतुर्की के मौद्रिक प्राधिकरण द्वारा अपने मुख्य साप्ताहिक रेपो संचालन को फिर से चालू करना देश के आधिकारिक नकदी प्रबंधन में एक महत्वपूर्ण बदलाव को व्यक्त करता है। मार्च की शुरुआत में, जब अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य संघर्ष भड़क उठा था, तब तुर्की के केंद्रीय बैंक ने अपनी मानक एक सप्ताह की रेपो नीलामी को तुरंत निलंबित कर दिया था। उस समय व्यावसायिक बैंकों को अधिक लागत वाली 40 प्रतिशत की ओवरनाइट उधारी खिड़की से धन जुटाने के लिए विवश होना पड़ा था। इस आपातकालीन कदम के जरिए केंद्रीय बैंक ने अपनी मुख्य नीतिगत दर में बिना कोई औपचारिक बदलाव किए ही वित्तीय प्रणाली में प्रभावी रूप से 300 बेसिस प्वाइंट यानी 3 प्रतिशत की अप्रत्यक्ष ब्याज दर वृद्धि लागू कर दी थी।\n\nअब फिर से 37 प्रतिशत की मुख्य नीतिगत दर पर एक सप्ताह का रेपो संचालन शुरू होने से घरेलू बैंकिंग प्रणाली के लिए फंड की लागत काफी कम हो गई है। वित्तीय संस्थान आईएनजी के विश्लेषक क्रिस टर्नर का कहना है कि पारंपरिक फंडिंग नीति की ओर यह वापसी स्थानीय नीति निर्माताओं के बढ़ते आत्मविश्वास को स्पष्ट रूप से दर्शाती है। सरकारी उधारी लागत में कमी आने से अल्पकालिक प्रतिफल में जो नरमी आई है, उससे विदेशी मुद्रा बाजार में तुर्की लीरा पर कैरी ट्रेड पोजीशन बनाए रखने वाले अंतरराष्ट्रीय निवेशकों का प्रोत्साहन बढ़ेगा। कैरी ट्रेड रणनीति के तहत निवेशक कम ब्याज दर वाली वैश्विक मुद्राओं में पूंजी जुटाकर तुर्की लीरा जैसी उच्च प्रतिफल वाली परिसंपत्तियों में निवेश करते हैं, जिससे लीरा की विनिमय दर को लगातार समर्थन मिलता है।\n\nवैश्विक विदेशी मुद्रा बाजार में डॉलर की वापसी और प्रमुख मुद्राओं पर दबाव\nतुर्की लीरा में आए बदलावों के अलावा वैश्विक मुद्रा बाजार में भी अमेरिकी राजकोषीय कदमों और भू-राजनीतिक घटनाओं का सीधा असर दर्ज किया जा रहा है। सोमवार को नए कारोबारी सप्ताह की शुरुआत में ब्रिटिश पाउंड पर कुछ दबाव देखा गया और यह 1.3600 के मध्य स्तर के आसपास कारोबार कर रहा था। पिछले कारोबारी सत्रों में दिखी बिकवाली के बाद अमेरिकी डॉलर में आए मामूली सुधार के कारण जोखिम वाली मुद्रा के रूप में देखा जाने वाला पाउंड बैकफुट पर आ गया।\n\nइसी तरह यूरोपीय सत्र के दौरान यूरो भी रक्षात्मक रुख अपनाते हुए 1.1700 के स्तर से नीचे कारोबार कर रहा था। अमेरिकी डॉलर में रिकवरी की कोशिशों और वाशिंगटन द्वारा ईरान पर लगाए जाने वाले नए आर्थिक प्रतिबंधों की घोषणा को लेकर बाजार में बनी अनिश्चितता ने यूरो की बढ़त को सीमित कर दिया। विदेशी मुद्रा बाजार के भागीदार यह समझने की कोशिश कर रहे हैं कि ईरान के खिलाफ अमेरिकी प्रतिबंधों की अंतिम रूपरेखा अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा आपूर्ति और वैश्विक व्यापार प्रवाह को किस तरह प्रभावित कर सकती है।\n\nभू-राजनीतिक तनाव और अमेरिका-कनाडा विवाद के बीच रिकॉर्ड स्तर के पास सोना\nकमोडिटी बाजार में सोने की अंतरराष्ट्रीय कीमतों में लगातार मजबूती देखी जा रही है। सोमवार को यूरोपीय कारोबारी सत्र के दौरान सोना 4,650 डॉलर प्रति औंस के करीब अपने तीन महीने के उच्चतम स्तर के बेहद पास कारोबार कर रहा था। अमेरिकी ट्रेजरी विभाग के हालिया बांड बायबैक फैसलों के कारण अमेरिकी डॉलर में आई गिरावट से सोने को मजबूत समर्थन मिला है। इसके अलावा अमेरिका और कनाडा के बीच उभरे नए व्यापारिक मतभेदों ने भी निवेशकों को सोने जैसे सुरक्षित ठिकानों की ओर रुख करने के लिए प्रेरित किया है।\n\nसोना व्यापारियों की नजर अब अमेरिका द्वारा ईरान पर घोषित किए जाने वाले विस्तृत प्रतिबंधों के ब्योरे पर टिकी हुई है। जब तक अमेरिकी प्रशासन की ओर से प्रतिबंधों के पूर्ण दायरे और उनके क्रियान्वयन तंत्र के बारे में स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं हो जाती, तब तक कीमती धातुओं में सुरक्षित निवेश की मांग बनी रहने का अनुमान है।\n\nअमेरिकी ट्रेजरी ने बांड बायबैक सीमा को दोगुना कर 4 अरब डॉलर किया\nअंतरराष्ट्रीय वित्तीय बाजार में सरकारी प्रतिभूतियों के प्रतिफल और डॉलर की चाल को गहराई से प्रभावित करने वाला एक बड़ा घटनाक्रम अमेरिकी ट्रेजरी विभाग की ओर से आया। बुधवार को 12:32 GMT पर अमेरिकी ट्रेजरी ने अपने निर्धारित कैलेंडर से हटकर एक घोषणा की, जिसमें उसने द्वितीयक बाजार में तरलता सहायता प्रदान करने वाले बांड बायबैक संचालन के आकार को कम से कम दोगुना करने की बात कही।\n\nइस अद्यतन योजना के तहत अमेरिकी ट्रेजरी 10 साल से 20 साल और 20 साल से 30 साल की परिपक्वता अवधि वाले दीर्घकालिक बांड क्षेत्रों में खरीदारी की सीमा बढ़ा रही है। प्रत्येक संचालन के लिए अधिकतम बायबैक सीमा को 2 अरब डॉलर से बढ़ाकर कम से कम 4 अरब डॉलर कर दिया गया है। यह विस्तारित तरलता सहायता कार्यक्रम 9 सितंबर से लागू होगा और 4 नवंबर तक जारी रहेगा। लंबी अवधि वाले सरकारी बांडों की सीधी खरीदारी करके अमेरिकी ट्रेजरी का उद्देश्य बांड बाजार में अत्यधिक अस्थिरता को रोकना और सरकारी ऋण बाजार की तरलता को मजबूती देना है।\n\nनिवेशकों के लिए भविष्य के संकेत और बाजार का दृष्टिकोण\nतुर्की की मौद्रिक नीति के सामान्यीकरण और अमेरिकी बांड बाजार में सरकारी हस्तक्षेप के संयुक्त प्रभाव का अंतरराष्ट्रीय निवेशकों के लिए गहरा अर्थ है। तुर्की के लिए 37 प्रतिशत की बेंचमार्क नीतिगत दर पर वापस लौटना एक व्यवस्थित मौद्रिक ढांचे की बहाली का प्रतीक है, जो वाणिज्यिक उधारी लागत को नियंत्रित करने के साथ-साथ विकसित अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में आकर्षक ब्याज दर अंतर को बनाए रखता है। यह स्थिति विदेशी मुद्रा बाजार में कैरी ट्रेड गतिविधियों को बनाए रखने के लिए बेहद अनुकूल मानी जाती है।\n\nदूसरी ओर, वैश्विक व्यापक आर्थिक परिदृश्य पर अमेरिकी राजकोषीय और मौद्रिक उपायों की छाप साफ दिखाई दे रही है। अमेरिकी ट्रेजरी द्वारा 4 अरब डॉलर के बायबैक के माध्यम से दीर्घकालिक बांड बाजार में बड़ी मात्रा में तरलता डालने और मध्य पूर्व तथा उत्तरी अमेरिका से जुड़े भू-राजनीतिक घटनाक्रमों के बीच, वैश्विक मुद्रा और कमोडिटी बाजार सतर्क बने हुए हैं। आने वाले हफ्तों में निवेशक विभिन्न केंद्रीय बैंकों के बयानों और आर्थिक आंकड़ों पर बारीक नजर रखेंगे ताकि यह आकलन किया जा सके कि विभिन्न परिसंपत्ति वर्गों में मौजूदा रुझान किस दिशा में आगे बढ़ेंगे।\n\nइसका आप पर असर\n• वैश्विक वित्तीय बाजार: तुर्की द्वारा नीतिगत दर के सामान्यीकरण और अमेरिकी बांड बायबैक विस्तार से मुद्रा और ऋण बाजारों में तरलता को बढ़ावा मिल सकता है।\n• भारतीय निवेशकों पर प्रभाव: अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना 4,650 डॉलर प्रति औंस के पास बने रहने से घरेलू भारतीय सर्राफा बाजार में भी सोने के भाव ऊंचे रह सकते हैं।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. तुर्की के केंद्रीय बैंक ने अपने रेपो संचालन में क्या बदलाव किया है?\nकेंद्रीय बैंक ने एक सप्ताह के रेपो संचालन को फिर से शुरू किया है, जिससे मुख्य फंडिंग 40 प्रतिशत की ओवरनाइट दर से घटकर 37 प्रतिशत की नीतिगत दर पर आ गई है।\n\n2. तुर्की में रेपो संचालन को पहले क्यों रोक दिया गया था?\nमार्च की शुरुआत में अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य तनाव के बाद रेपो संचालन निलंबित कर दिया गया था, जिससे प्रभावी रूप से 300 बेसिस प्वाइंट की ब्याज दर वृद्धि लागू हुई थी।\n\n3. अमेरिकी ट्रेजरी ने बांड बायबैक योजना में क्या घोषणा की है?\nअमेरिकी ट्रेजरी ने 10-20 साल और 20-30 साल की अवधि वाले बांडों के बायबैक का आकार 2 अरब डॉलर से बढ़ाकर कम से कम 4 अरब डॉलर प्रति संचालन कर दिया है।\n\n4. वर्तमान में सोने की कीमत का क्या रुख है?\nसोना तीन महीने के उच्च स्तर 4,650 डॉलर प्रति औंस के करीब कारोबार कर रहा है, जिसे अमेरिकी डॉलर की कमजोरी और व्यापारिक तनाव से समर्थन मिला है।",
  "url": "https://trendkia.com/market/turkey-ke-kendriya-bainka-ne-37-pratishata-dara-para-shuru-ki-repo-nilami-lira-men-barhega-niveshakon-ka-akarshana-21117",
  "category": "बाज़ार",
  "publishedAt": "2026-08-24",
  "tags": [
    "तुर्की लीरा",
    "केंद्रीय बैंक",
    "रेपो दर",
    "कैरी ट्रेड",
    "अमेरिकी ट्रेजरी",
    "सोना कीमत",
    "विदेशी मुद्रा"
  ],
  "language": "hi",
  "site": "TrendKia"
}