तुर्की में महंगाई दर गिरकर तीस प्रतिशत से नीचे आई, ब्याज दरों में कटौती की संभावना के बीच लीरा पर दबाव जारी तुर्की में सितंबर महीने की खुदरा महंगाई दर घटकर 29.7 प्रतिशत रह गई है, जिससे नीतिगत दरों में 100 आधार अंकों की कटौती की गुंजाइश बन रही है। हालांकि, केंद्रीय बैंक के हस्तक्षेप और वैश्विक दबाव के कारण स्थानीय मुद्रा लीरा में कमजोरी बनी रहने के आसार हैं। तुर्की के घरेलू बाजार में सितंबर महीने के दौरान उपभोक्ता मूल्य सूचकांक में आई अप्रत्याशित नरमी ने केंद्रीय बैंक के लिए मौद्रिक नीति को आसान बनाने का एक नया रास्ता खोल दिया है। वार्षिक स्तर पर खुदरा महंगाई का आंकड़ा तीस फीसदी की सीमा से नीचे आ गया है, जबकि मासिक वृद्धि की रफ्तार में भी उल्लेखनीय सुस्ती देखी गई है। इस बदले हुए आर्थिक परिदृश्य से यह संभावना मजबूत हो रही है कि नीति निर्माता आने वाले दिनों में प्रमुख ब्याज दर में 100 आधार अंकों की कमी कर सकते हैं। हालांकि, मुद्रा बाजार के जानकारों का मानना है कि केवल मुद्रास्फीति में आई इस कमी से राष्ट्रीय मुद्रा लीरा को लंबे समय तक मजबूती मिलना बेहद मुश्किल है, क्योंकि विनिमय दर अभी भी काफी हद तक सरकारी और केंद्रीय वित्तीय संस्थानों के समर्थन पर टिकी हुई है। मुद्रास्फीति के नए आंकड़े और आधार प्रभाव का विश्लेषण सितंबर माह में जारी ताजा आंकड़ों के अनुसार, तुर्की की हेडलाइन वार्षिक मुद्रास्फीति 31.51 प्रतिशत से गिरकर 29.7 प्रतिशत पर आ गई है। विश्लेषकों के आम अनुमानों के मुकाबले कीमतों में मासिक आधार पर केवल 1.8 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई, जो बाजार की उम्मीदों से कहीं अधिक अनुकूल संकेत है। इसके साथ ही मुख्य कोर सी महंगाई दर सालाना आधार पर 28.7 प्रतिशत दर्ज की गई, जिसमें मासिक तौर पर 2.1 प्रतिशत की वृद्धि शामिल है। आर्थिक मामलों के जानकारों के अनुसार, साल-दर-साल आधार पर दर्ज की गई इस गिरावट का एक बड़ा कारण पुराना उच्च आधार प्रभाव है। इसके बावजूद, मौसमी समायोजन के बाद मासिक मूल्य वृद्धि की गति में वास्तविक मंदी दर्ज की गई है, जो घरेलू मांग में आ रहे ठहराव की ओर इशारा करती है। "As usual, we do not attach much significance to the year-on-year decline, which was heavily flattered by base-effects, but there is no question that month-on-month rate of increase also decelerated noticeably." सरकारी हस्तक्षेप और विनिमय दर पर मंडराता खतरा आर्थिक संकेतकों में सुधार के बावजूद तुर्की की मुद्रा लीरा विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में कोई बड़ा लाभ उठाने में नाकाम रही है। वाणिज्यिक बैंकिंग विश्लेषण के अनुसार, मुद्रा के मूल्य को सामान्य बनाए रखने के लिए केंद्रीय बैंक और सार्वजनिक क्षेत्र के सरकारी बैंकों द्वारा भारी स्तर पर डॉलर बेचकर हस्तक्षेप किया जा रहा है। ऐसे नीतिगत कदम मुद्रा के गिरते स्तर को थोड़े समय के लिए थामने में भले ही मददगार साबित हों, लेकिन वे दीर्घकालिक बाजार दिशा को बदलने में असमर्थ रहते हैं। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि वर्ष के उत्तरार्ध में मुद्रास्फीति के एक बार फिर रफ्तार पकड़ने की आशंका बनी हुई है। यदि केंद्रीय बैंक ऐसे समय में उधार दरों में कटौती का फैसला लेता है, तो विदेशी निवेशकों की धारणा और कमजोर हो सकती है। दरों में ढील और संभावित रूप से फिर से बढ़ती कीमतों का यह दोहरा दबाव विनिमय दर पर नकारात्मक असर डालेगा, जिससे लीरा आने वाले महीनों में लगातार दबाव में बनी रह सकती है। अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और वैश्विक मुद्राओं की हलचल अंतरराष्ट्रीय मुद्रा बाजार में केवल लीरा ही नहीं, बल्कि कई प्रमुख वैश्विक मुद्राएं भी अमेरिकी आर्थिक दबाव का सामना कर रही हैं। मंगलवार के एशियाई सत्र में ऑस्ट्रेलियाई डॉलर अमेरिकी डॉलर के मुकाबले कमजोर पड़ता दिखाई दिया। फिक्स्ड इनकम बाजार में अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड कई वर्षों के उच्चतम स्तर के करीब बनी हुई है, जिसने डॉलर इंडेक्स को मजबूत सहारा दे रखा है। हालांकि, अक्टूबर में फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में बढ़ोतरी की संभावनाओं में आई कमी के बावजूद भू-राजनीतिक तनावों ने डॉलर की तेजी को बनाए रखा है। दूसरी तरफ, ऑस्ट्रेलियाई रिजर्व बैंक की ओर से संभावित दर वृद्धि की उम्मीदें ऑस्ट्रेलियाई डॉलर को भारी गिरावट से बचाने में कुछ हद तक सहायक बन रही हैं। इसी तरह जापानी येन के मुकाबले अमेरिकी डॉलर मंगलवार की सुबह यूरोपीय कारोबारी सत्र में 158.00 के मनोवैज्ञानिक स्तर को पार कर गया। बैंक ऑफ जापान की ओर से सख्त रुख के संकेतों और संभावित सरकारी हस्तक्षेप की चर्चाओं के बावजूद येन को कोई खास सहारा नहीं मिल पा रहा है। डॉलर की मजबूती और बॉन्ड यील्ड्स के उच्च स्तरों ने जापानी मुद्रा को लगातार बैकफुट पर रखा हुआ है। कमोडिटी बाजार और केंद्रीय बैंकों का असमंजस मजबूत होते डॉलर और बॉन्ड प्रतिफल का सीधा असर कीमती धातुओं पर भी देखने को मिल रहा है। सोने की कीमतों में यूरोपीय सत्र के शुरुआती घंटों में मामूली कमजोरी देखी गई, हालांकि पीली धातु 4,100 डॉलर प्रति औंस के महत्वपूर्ण स्तर से ऊपर टिकी हुई है। फेडरल रिजर्व द्वारा आगामी बैठक में दरों को स्थिर रखे जाने की संभावनाओं से बिना ब्याज वाली संपत्तियों जैसे सोने को निचली सतहों पर कुछ समर्थन मिल रहा है, जिससे कीमतों में भारी गिरावट पर रोक लगी हुई है। वैश्विक आर्थिक परिदृश्य में किसी बड़े प्रथम श्रेणी के आर्थिक आंकड़े के अभाव में निवेशकों का सारा ध्यान अब मध्य पूर्व के भू-राजनीतिक घटनाक्रमों और यूरोपीय बाजारों की गतिविधियों पर केंद्रित हो गया है। विशेष रूप से फ्रांस में राजनीतिक स्थिरता को लेकर चिंताएं बढ़ रही हैं, जहां सोशलिस्ट पार्टी और मरीन ले पेन की नेशनल रैली के आगामी बजट के मुद्दे पर मौजूदा सरकार को गिराने के संभावित कदमों पर पैनी नजर रखी जा रही है। इस बीच यूरोपीय सेंट्रल बैंक भी एक गंभीर नीतिगत धर्मसंकट में फंसा हुआ है। सामान्य आर्थिक परिस्थितियों में, अपने लक्ष्य से लगभग दोगुनी रफ्तार से चल रही मुद्रास्फीति को नियंत्रित करने के लिए दरें बढ़ाना केंद्रीय बैंक का स्वाभाविक कदम होता। लेकिन मौजूदा स्थिति असामान्य बनी हुई है, क्योंकि बॉन्ड बाजार में जारी उथल-पुथल पहले से ही वित्तीय स्थितियों को कड़ा कर रही है। ऐसे माहौल में केंद्रीय बैंक के लिए विकास दर को नुकसान पहुंचाए बिना कीमतों पर अंकुश लगाना बेहद चुनौतीपूर्ण साबित हो रहा है। इसका आप पर असर तुर्की में मुद्रास्फीति में आई नरमी और अंतरराष्ट्रीय बॉन्ड यील्ड की मजबूती वैश्विक निवेशकों तथा मुद्रा व्यापारियों के लिए जोखिम प्रबंधन को अत्यंत महत्वपूर्ण बनाती है। • मुद्रा व्यापारियों के लिए: तुर्की लीरा में संभावित ब्याज दर कटौती के चलते आगे भी कमजोरी बने रहने के आसार हैं। व्यापारियों को सरकारी हस्तक्षेप पर अत्यधिक निर्भर मुद्राओं में पोजीशन लेते समय कड़े स्टॉप-लॉस का उपयोग करना चाहिए। • सोना और कमोडिटी निवेशकों के लिए: मजबूत डॉलर के कारण अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सोने की कीमतों में $4,100 के आसपास अस्थिरता बनी हुई है। धातु के निवेशकों को अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति के संकेतों पर नजर रखनी चाहिए। • वैश्विक वित्तीय बाजारों पर: अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड के उच्च स्तर पर बने रहने से उभरते बाजारों की मुद्राओं पर पूंजी निकासी का दबाव बढ़ सकता है। उभरते बाजारों में निवेश करने वाले फंड प्रबंधकों को विनिमय दरों के उतार-चढ़ाव को लेकर अतिरिक्त सतर्कता बरतनी होगी। • यूरोपीय बाजार के लिए: फ्रांस में बजट को लेकर संभावित राजनीतिक संकट और यूरोपीय सेंट्रल बैंक का असमंजस यूरो पर दबाव डाल सकता है। यूरोपीय परिसंपत्तियों में निवेश रखने वालों को राजनीतिक घटनाक्रमों पर सतर्क रुख अपनाना चाहिए। ऐसा क्यों हुआ तुर्की में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक में आई गिरावट और विभिन्न मुद्रा जोड़ों में देखी जा रही हलचल कई आंतरिक आर्थिक चक्रों तथा अंतरराष्ट्रीय मौद्रिक कारकों के संयोजन का परिणाम है। • सांख्यिकीय आधार प्रभाव: पिछले वर्ष इसी अवधि के दौरान दर्ज की गई अत्यधिक उच्च कीमतों के कारण वार्षिक हेडलाइन मुद्रास्फीति 31.51 प्रतिशत से गिरकर 29.7 प्रतिशत पर आ गई। इसके साथ ही मौसमी समायोजन के बाद मासिक उपभोक्ता मूल्य वृद्धि 1.8 प्रतिशत तक सीमित रही, जिसने गिरावट में योगदान दिया। • आधिकारिक बाजार हस्तक्षेप: तुर्की के केंद्रीय बैंक और सरकारी बैंकों द्वारा विदेशी मुद्रा बाजार में नियमित हस्तक्षेप के कारण लीरा बेहतर मुद्रास्फीति आंकड़ों के बावजूद स्वतंत्र रूप से लाभ प्राप्त नहीं कर सकी। यह नीतिगत प्रबंधन विनिमय दर के स्वाभाविक रुझान को पूरी तरह बदलने में असमर्थ रहा है। • अमेरिकी बॉन्ड प्रतिफल की मजबूती: फिक्स्ड इनकम बाजारों में जारी बिकवाली के चलते अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड बहु-वर्षीय उच्च स्तरों के निकट बनी रही। इस मजबूती ने डॉलर को वैश्विक स्तर पर समर्थन दिया, जिससे जापानी येन और ऑस्ट्रेलियाई डॉलर जैसी प्रमुख मुद्राओं पर दबाव बना। • यूरोपीय नीतिगत जटिलताएं: मुद्रास्फीति के लक्ष्य से लगभग दोगुने स्तर पर होने के बावजूद यूरोपीय बॉन्ड बाजारों में स्वतः कड़े होते वित्तीय हालात ने केंद्रीय बैंक को ब्याज दरें बढ़ाने को लेकर जटिल स्थिति में डाल दिया है। सवाल-जवाब 1. तुर्की में सितंबर महीने की वार्षिक मुद्रास्फीति दर कितनी दर्ज की गई? सितंबर माह में तुर्की की हेडलाइन मुद्रास्फीति घटकर 29.7 प्रतिशत दर्ज की गई, जो पिछले महीने के 31.51 प्रतिशत से कम है। 2. कोर सी मुद्रास्फीति के आंकड़े क्या रहे? कोर सी मुद्रास्फीति सालाना आधार पर 28.7 प्रतिशत रही, जबकि इसमें मासिक आधार पर 2.1 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। 3. मुद्रास्फीति में कमी के बाद केंद्रीय बैंक की ब्याज दरों में कितनी कटौती की उम्मीद की जा रही है? विश्लेषकों के अनुसार मुद्रास्फीति के इन आंकड़ों से केंद्रीय बैंक द्वारा ब्याज दरों में 100 आधार अंकों की कटौती करने की गुंजाइश बन गई है। 4. तुर्की लीरा बेहतर महंगाई आंकड़ों से लाभ उठाने में असमर्थ क्यों रही? लीरा को केंद्रीय बैंक और सरकारी बैंकों के हस्तक्षेप के जरिए सहारा दिया जा रहा है, जिससे यह मुद्रा बेहतर आंकड़ों का स्वाभाविक फायदा नहीं उठा सकी। 5. विदेशी मुद्रा बाजार में जापानी येन और ऑस्ट्रेलियाई डॉलर की क्या स्थिति रही? उच्च अमेरिकी बॉन्ड यील्ड के कारण डॉलर येन के मुकाबले 158.00 के पार निकल गया, जबकि ऑस्ट्रेलियाई डॉलर में भी गिरावट देखी गई। 6. कमोडिटी बाजार में सोने की कीमत का क्या स्तर रहा? सोना मामूली गिरावट के बावजूद 4,100 डॉलर प्रति औंस के महत्वपूर्ण स्तर के ऊपर बना रहा। https://trendkia.com/market/turkey-men-mahngai-dara-girakara-tisa-pratishata-se-niche-ai-byaja-daron-men-katauti-ki-snbhavana-ke-bicha-lira-para-dabava-jari-43781 TrendKia — Har trend, sabse pehle.