# त्योहारी खरीदारी से पहले सोने और चांदी की कीमतों में तेजी, घरेलू बाजार में 1,000 रुपये तक उछले दाम

> लगातार चार दिनों की भारी गिरावट के बाद घरेलू सर्राफा बाजार में सोने के भाव में सुधार आया है, जहां 24 कैरेट और 22 कैरेट सोने की कीमतों में 1,000 रुपये तक की बढ़त दर्ज की गई।

**Type:** article · **Category:** बाज़ार · **Published:** 2026-10-24 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/market/tyohari-kharidari-se-pahale-gold-aura-silver-ki-kimaton-men-teji-gharelu-bajara-men-1-000-rupaye-taka-uchhale-dama-51248 · **Language:** Hindi
**Tags:** सोना, चांदी, सर्राफा बाजार, कच्चा तेल, फेडरल रिजर्व, महंगाई, दीवाली, धनतेरस

भारतीय सर्राफा बाजार में पांच दिनों के लंबे अंतराल के बाद सोने की कीमतों में एक बार फिर मजबूती देखने को मिली है। दीवाली, धनतेरस और लक्ष्मी पूजन जैसे बड़े त्योहारों के नजदीक आने से खुदरा आभूषण बाजार में बढ़ी खरीदारी की हलचल के बीच 24 कैरेट और 22 कैरेट सोने के दामों में 1,000 रुपये प्रति 100 ग्राम की तेजी आई है। वहीं 18 कैरेट सोने के दाम भी न्यूनतम 800 रुपये तक चढ़े हैं। इस उछाल से ठीक पहले, 20 अक्टूबर से 23 अक्टूबर के दौरान घरेलू बाजार में कीमतों में तेज गिरावट देखी गई थी, जिससे खरीदारों को राहत मिली थी। अब त्योहारी मांग लौटते ही भाव संभलने लगे हैं।

## घरेलू बाजार में सोने की मौजूदा कीमतें और हालिया गिरावट का ब्योरा
शनिवार, 24 अक्टूबर को घरेलू बाजार में 24 कैरेट सोने की दर 100 ग्राम के लिए 1,000 रुपये बढ़कर 14,25,800 रुपये पर पहुंच गई। खुदरा स्तर पर 10 ग्राम 24 कैरेट सोने की कीमत 100 रुपये चढ़कर 1,42,580 रुपये दर्ज की गई। इसी तरह 22 कैरेट आभूषण श्रेणी के सोने के भाव में भी 100 ग्राम पर 1,000 रुपये का इजाफा हुआ और यह 13,07,000 रुपये के स्तर पर आ गया। प्रति 10 ग्राम 22 कैरेट सोने की कीमत 100 रुपये बढ़कर 1,30,700 रुपये हो गई है। 18 कैरेट श्रेणी में भी कम से कम 800 रुपये की बढ़ोतरी दर्ज की गई।

इस नए उछाल से पहले पिछले चार कारोबारी सत्रों में सोने के दामों में ऐतिहासिक गिरावट दर्ज की गई थी। 20 अक्टूबर से लेकर 23 अक्टूबर के बीच 24 कैरेट श्रेणी में 100 ग्राम सोने की कीमत में 55,600 रुपये और 10 ग्राम सोने में 5,560 रुपये की भारी कटौती हुई थी। ठीक इसी अवधि में 22 कैरेट सोने के भाव 100 ग्राम पर 51,000 रुपये और 10 ग्राम पर 5,100 रुपये तक टूट गए थे। इस चार दिवसीय बिकवाली ने बाजार में निवेशकों और आभूषण खरीदारों को खरीदारी के नए अवसर दिए थे।

## दीवाली और धनतेरस पर मांग में बढ़ोतरी का रुख
भारतीय परंपरा में दीवाली, धनतेरस और लक्ष्मी पूजन के पावन अवसर पर सोने की खरीदारी को अत्यंत शुभ माना जाता है। निवेशक और आम परिवार इस समय पीली धातु में निवेश करना पसंद करते हैं। हालिया चार दिनों के भारी गोता लगाने के बाद सोने की दरों का सस्ता होना उन खरीदारों के लिए एक बड़ा अवसर बनकर आया, जो त्योहारी मौसम में जेवरात खरीदने की योजना बना रहे थे। मांग में आई इसी तेजी ने शनिवार को बाजार के रुख को बदल दिया और कीमतों को लाल निशान से बाहर निकालकर हरे निशान में ला खड़ा किया।

## वैश्विक स्तर पर हाजिर सोने और चांदी का हाल
अंतरराष्ट्रीय बाजारों में हाजिर सोने के भाव में अत्यधिक उतार-चढ़ाव देखा गया। हाजिर सोना जुलाई के मध्य के बाद पहली बार फिसलकर 4,000 डॉलर प्रति औंस के मनोवैज्ञानिक स्तर से नीचे 3,993.96 डॉलर पर आ गया था। हालांकि बाद में इसमें सुधार आया और यह उबरकर लगभग 4,026 डॉलर प्रति औंस पर पहुंचा। सप्ताह-दर-सप्ताह आधार पर सोने में 4 प्रतिशत की शुद्ध गिरावट दर्ज की गई, जिससे यह जुलाई के मध्य के बाद के अपने सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया। इससे पिछले कारोबारी सत्र में सोने में 2.8 प्रतिशत की भारी गिरावट दर्ज की गई थी।

चांदी के भाव में भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारी दबाव बना रहा। शुक्रवार को चांदी की कीमत टूटकर 54 डॉलर प्रति औंस से नीचे चली गई और 53.5 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गई, जो नवंबर 2025 के बाद का सबसे निचला स्तर है। पिछले सत्र में 6 प्रतिशत की तेज गिरावट झेलने के बाद चांदी के भाव में यह लगातार दूसरा झटका था। चांदी की खपत में औद्योगिक क्षेत्र की हिस्सेदारी अधिक होने के कारण, व्यापक बाजार में जोखिम का माहौल बिगड़ने पर इस धातु में अधिक गहरी गिरावट का जोखिम बना रहता है।

## वित्तीय बाजारों में नकदी जुटाने की होड़ और बिकवाली का दबाव
कोटक नियो की कमोडिटी रिसर्च की एवीपी कायनात चैनवाला के अनुसार, अमेरिकी 10-वर्षीय ट्रेजरी यील्ड के 5 प्रतिशत से नीचे आने के बावजूद हाजिर सोना कुछ समय के लिए 4,000 डॉलर के नीचे फिसल गया था। यह गिरावट व्यापक बाजार में बड़े पैमाने पर लिक्विडेशन की वजह से आई, जहां निवेशकों ने एआई और प्रौद्योगिकी शेयरों से अपनी पूंजी निकाली और शेयर बाजार में आई तेज गिरावट के बीच नकदी जुटाई। हालांकि बॉन्ड यील्ड में गिरावट आम तौर पर सर्राफा कीमतों के लिए मददगार होती है, लेकिन जब वित्तीय बाजारों में अत्यधिक तनाव होता है, तो निवेशक अपनी नकदी की जरूरतें पूरी करने के लिए अल्पकालिक रूप से सोने की बिकवाली करते हैं। इसके बावजूद एक सुरक्षित निवेश विकल्प के रूप में सोने की दीर्घकालिक साख पूरी तरह बरकरार है।

कायनात चैनवाला ने आगे स्पष्ट किया कि कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों ने मुद्रास्फीति की चिंताओं को फिर से हवा दी है। इस वजह से अमेरिकी ब्याज दरों के लंबे समय तक ऊंचे बने रहने की संभावनाओं को बल मिला है, जिससे इस महीने सोने और चांदी दोनों पर लगातार बिकवाली का दबाव देखा गया है।

## कच्चे तेल में उछाल और भू-राजनीतिक तनाव
ऊर्जा बाजारों में आई तेज तेजी ने वित्तीय बाजारों की चिंताएं और बढ़ा दी हैं। अमेरिकी डब्ल्यूटीआई क्रूड फ्यूचर्स लगभग 4 प्रतिशत की छलांग लगाकर 103.27 डॉलर प्रति बैरल पर बंद हुआ, और साप्ताहिक आधार पर इसमें 1.5 प्रतिशत से अधिक की तेजी आई। वहीं ब्रेंट क्रूड 3 प्रतिशत से अधिक की दैनिक छलांग लगाकर 116.72 डॉलर प्रति बैरल पर समाप्त हुआ, जो इसका चार साल का उच्चतम स्तर है।

इस तेजी के पीछे पश्चिम एशिया में बढ़ता भू-राजनीतिक तनाव मुख्य वजह रहा। सऊदी अरब पर हूती विद्रोहियों के हमलों के बाद ऊर्जा आपूर्ति बाधित होने की आशंकाएं गहरा गई हैं। हमलों की गंभीरता को देखते हुए अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने अपने गैर-जरूरी कर्मियों को सऊदी अरब छोड़ने का निर्देश दिया, जबकि तेल कंपनी सऊदी अरामको ने भी अपने धहरान मुख्यालय के कर्मचारियों को दफ्तर खाली कर घर से काम करने का आदेश जारी किया। दूसरी ओर, ईरान के सेना प्रमुख ने कहा कि उनका देश अपनी सैन्य क्षमताओं को मजबूत करने के बाद असममित युद्ध के लिए पूरी तरह तैयार है। वहीं अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि वाशिंगटन तेहरान से कोई बातचीत नहीं कर रहा है और बहुत जल्द कुछ होने वाला है। मध्यवर्ती चुनावों के बाद अमेरिका और इजराइल द्वारा ईरान पर नए हमलों की योजना बनाने की चर्चाएं भी बाजार में हैं।

## अमेरिकी फेडरल रिजर्व की बैठक और महंगाई के आंकड़े
आर्थिक मोर्चे पर निवेशकों की नजरें अब अमेरिकी फेडरल रिजर्व की आगामी नीतिगत बैठक पर टिकी हैं, जो 27-28 अक्टूबर को आयोजित होने वाली है। 28 अक्टूबर को आने वाले नीतिगत नतीजों में बाजार को उम्मीद है कि केविन वॉर्श ब्याज दरों को अपरिवर्तित रखेंगे। सीएमई के फेडवॉच टूल के अनुसार, बाजार अगले सप्ताह की बैठक में ब्याज दर बढ़ाए जाने की संभावना केवल 10 प्रतिशत आंक रहा है, जबकि दिसंबर की बैठक के लिए दर वृद्धि की संभावना लगभग 80 प्रतिशत आंकी गई है।

हाल ही में जारी अमेरिकी आंकड़ों से यह स्पष्ट हुआ है कि ऊर्जा की ऊंची लागतों के कारण उपभोक्ता और उत्पादक मुद्रास्फीति उम्मीद से अधिक रही है। इससे महंगाई के दबाव के लंबे समय तक बने रहने का डर पैदा हो गया है। निवेशक अब 29 अक्टूबर को आने वाले अमेरिकी पीसीई मुद्रास्फीति के आंकड़ों की प्रतीक्षा कर रहे हैं, ताकि यह समझा जा सके कि केंद्रीय बैंक अपने 2 प्रतिशत के मुद्रास्फीति लक्ष्य को हासिल करने में किस दिशा में आगे बढ़ रहा है।

## इसका आप पर असर
त्योहारी सीजन में सोने और चांदी के भाव में आए इस बदलाव का सीधा असर खुदरा आभूषण खरीदारों, निवेशकों और घरेलू बजट पर पड़ेगा।

- **आभूषण खरीदारों पर:** 24 और 22 कैरेट सोने में 1,000 रुपये प्रति 100 ग्राम की बढ़त के बाद प्रति 10 ग्राम पर 100 रुपये का मामूली असर पड़ा है। धनतेरस और दीवाली की खरीदारी करने वाले ग्राहकों को पिछले चार दिनों की 5,000 रुपये से अधिक की गिरावट का फायदा अब भी मिल रहा है।
- **चांदी के खरीदारों पर:** वैश्विक बाजार में चांदी के 54 डॉलर प्रति औंस से नीचे फिसलने से घरेलू बाजार में चांदी के बर्तन और सिक्के अपेक्षाकृत सस्ते मिल सकते हैं। औद्योगिक मांग में सुस्ती के चलते चांदी में आगे भी नरमी के संकेत बने हुए हैं।
- **ईंधन और बजट पर:** ब्रेंट क्रूड के 116 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंचने से आने वाले दिनों में ईंधन की कीमतों और परिवहन लागत में बढ़ोतरी हो सकती है। कच्चे तेल के चार साल के उच्चतम स्तर पर जाने से दैनिक उपभोग की वस्तुओं पर महंगाई का दबाव बढ़ सकता है।
- **निवेशकों की रणनीति:** अमेरिकी केंद्रीय बैंक द्वारा ब्याज दरों को स्थिर रखने की उम्मीद और सोने के 4,000 डॉलर के पास टिकने से यह गिरावट दीर्घकालिक निवेशकों के लिए चरणबद्ध तरीके से खरीदारी का अवसर पेश करती है। आगामी 28 और 29 अक्टूबर के अमेरिकी नीतिगत फैसलों तक बाजार में उतार-चढ़ाव की स्थिति बनी रहेगी।

## ऐसा क्यों हुआ
घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में सोने, चांदी और कच्चे तेल की कीमतों में यह तीव्र फेरबदल वैश्विक भू-राजनीतिक टकराव, तकनीकी शेयरों की बिकवाली और अमेरिकी ब्याज दरों के अनुमानों के चलते हुआ है।

- **त्योहारी मांग और घरेलू सुधार:** 20 से 23 अक्टूबर के बीच सोने में 55,600 रुपये प्रति 100 ग्राम की भारी गिरावट के बाद घरेलू खुदरा खरीदारों ने धनतेरस और दीवाली के लिए खरीदारी तेज की। इस त्योहारी मांग ने लगातार चार दिनों से जारी गिरावट के सिलसिले को शनिवार को थाम लिया।
- **शेयर बाजार में बिकवाली और नकदी की मांग:** अमेरिकी बॉन्ड यील्ड के 5 प्रतिशत से नीचे रहने के बावजूद वैश्विक टेक और एआई शेयरों में आई भारी बिकवाली के कारण निवेशकों ने नकदी जुटाने के लिए सोने की होल्डिंग्स बेचीं। इस लिक्विडेशन ने अंतरराष्ट्रीय हाजिर सोने को कुछ समय के लिए 4,000 डॉलर प्रति औंस के नीचे धकेल दिया।
- **पश्चिम एशिया तनाव और कच्चे तेल का उछाल:** सऊदी अरब पर हूती हमलों और ईरान के साथ बढ़ते तनाव के कारण ब्रेंट क्रूड चार साल के उच्चतम स्तर 116.72 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। ऊर्जा की ऊंची कीमतों ने मुद्रास्फीति बढ़ने और अमेरिकी ब्याज दरों के लंबे समय तक ऊंचे रहने की आशंकाओं को जन्म दिया है, जिससे सर्राफा पर दबाव बना।
- **अमेरिकी नीतिगत बैठक का इंतजार:** 27-28 अक्टूबर को अमेरिकी फेडरल रिजर्व की बैठक से पहले बाजार में सतर्कता का माहौल है, जहां अक्टूबर में दरें अपरिवर्तित रहने की 90 प्रतिशत संभावना है लेकिन दिसंबर में दर वृद्धि के 80 प्रतिशत आसार जताए जा रहे हैं।

## सवाल-जवाब

### 1. 24 अक्टूबर को 24 कैरेट और 22 कैरेट सोने के भाव में कितनी तेजी आई?
24 अक्टूबर को 24 कैरेट और 22 कैरेट सोने के भाव में 100 ग्राम पर 1,000 रुपये और 10 ग्राम पर 100 रुपये की तेजी दर्ज की गई।

### 2. 20 से 23 अक्टूबर के दौरान सोने की कीमतों में कितनी गिरावट आई थी?
इस दौरान 24 कैरेट सोना 100 ग्राम पर 55,600 रुपये और 22 कैरेट सोना 100 ग्राम पर 51,000 रुपये तक टूटा था।

### 3. अंतरराष्ट्रीय बाजार में हाजिर सोने और चांदी का क्या भाव रहा?
हाजिर सोना गिरकर 3,993.96 डॉलर तक फिसलने के बाद सुधरकर 4,026 डॉलर प्रति औंस पर पहुंचा, जबकि चांदी लुढ़ककर 53.5 डॉलर प्रति औंस पर आ गई।

### 4. कच्चे तेल की कीमतों में तेजी की मुख्य वजह क्या रही?
सऊदी अरब पर हूती हमलों और पश्चिम एशिया में बढ़ते सैन्य तनाव के कारण ब्रेंट क्रूड चार साल के उच्चतम स्तर 116.72 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया।

### 5. अमेरिकी फेडरल रिजर्व की आगामी बैठक को लेकर बाजार का क्या अनुमान है?
बाजार का अनुमान है कि 27-28 अक्टूबर की बैठक में ब्याज दरें स्थिर रहेंगी, जहां अक्टूबर में दर वृद्धि की संभावना सिर्फ 10% और दिसंबर के लिए 80% आंकी गई है।

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