# ब्रिटेन के सर्विस पीएमआई में गिरावट से आर्थिक सुस्ती की आशंका, वैश्विक बाजारों की नजरें ट्रंप-शी मुलाकात पर

> ब्रिटेन में सेवा क्षेत्र की वृद्धि दर सितंबर में घटकर 51.7 पर आ गई है, जबकि अमेरिकी डॉलर की मजबूती के बीच सोने की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई और नजरें वॉशिंगटन में होने वाली द्विपक्षीय वार्ता पर टिकी हैं।

**Type:** article · **Category:** बाज़ार · **Published:** 2026-09-23 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/market/uk-ke-sarvisa-pmi-men-giravata-se-arthika-susti-ki-ashnka-vaishvika-bajaron-ki-najaren-trump-xi-mulakata-para-37017 · **Language:** Hindi
**Tags:** ब्रिटेन पीएमआई, वैश्विक अर्थव्यवस्था, बैंक ऑफ जापान, सोने का भाव, मुद्रा बाजार, डोनाल्ड ट्रंप, शी जिनपिंग

यूनाइटेड किंगडम की अर्थव्यवस्था में सेवा क्षेत्र की वृद्धि दर सितंबर महीने के दौरान धीमी पड़ी है। एसएंडपी ग्लोबल की ओर से जारी शुरुआती आंकड़ों के मुताबिक, यूके का सर्विसेज परचेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स यानी पीएमआई सितंबर में 51.7 दर्ज किया गया। बाजार विश्लेषक इसके 52.0 पर आने का अनुमान जता रहे थे, जो कि अगस्त महीने के 52.5 के आंकड़े से पहले ही कम था। सेवा गतिविधियों में आई इस नरमी का सीधा असर समग्र कारोबारी गतिविधियों पर देखा गया, जिसके कारण कंपोजिट पीएमआई भी अगस्त के 52.5 से गिरकर सितंबर में 51.7 पर पहुंच गया। यह स्थिति इस बात की ओर इशारा करती है कि ब्रिटेन की व्यावसायिक गतिविधियों में ठहराव आ रहा है।

एसएंडपी ग्लोबल मार्केट इंटेलिजेंस में चीफ बिजनेस इकोनॉमिस्ट क्रिस विलियमसन ने आंकड़ों पर टिप्पणी करते हुए कहा कि सितंबर में धीमी आर्थिक वृद्धि और बढ़ती महंगाई का चिंताजनक तालमेल देखने को मिल रहा है। उनके अनुसार, कमजोर कारोबारी भरोसे और लगातार बढ़ती लागत की वजह से कंपनियां नए कर्मचारियों को नौकरी पर रखने से बच रही हैं। आर्थिक विकास की धीमी चाल और उत्पादन लागत में इजाफा नीति निर्माताओं के सामने नई चुनौतियां खड़ी कर रहा है, जिससे कारोबारियों के बीच अनिश्चितता का माहौल गहरा गया है।

## मुद्रा बाजारों में उतार-चढ़ाव और ऑस्ट्रेलियाई डॉलर पर दबाव
वैश्विक करेंसी मार्केट में भी महत्वपूर्ण हलचल देखने को मिल रही है। बुधवार को एशियाई कारोबारी सत्र के दौरान ऑस्ट्रेलियाई डॉलर अमेरिकी डॉलर के मुकाबले ताजा बिकवाली दबाव में आ गया और 0.7100 के स्तर का परीक्षण करता दिखा। ऑस्ट्रेलिया के शुरुआती पीएमआई आंकड़ों ने दर्शाया है कि वहां का विनिर्माण क्षेत्र संकुचन की स्थिति में फिसल चुका है, जबकि सेवा क्षेत्र लगातार दूसरे महीने धीमी रफ्तार से आगे बढ़ रहा है। कमजोर घरेलू आंकड़ों ने ऑस्ट्रेलियाई मुद्रा की गिरावट को रफ्तार दी है। इसके अतिरिक्त, अमेरिकी फेडरल रिजर्व के आक्रामक नीतिगत रुख के कारण मजबूत बना अमेरिकी डॉलर भी इस मुद्रा जोड़ी के लिए प्रतिकूल साबित हो रहा है।

दूसरी तरफ, निवेशक अमेरिका और ईरान के बीच अप्रत्यक्ष वार्ता के दौर के पूरा होने पर ज्यादा ध्यान नहीं दे रहे हैं। बाजार सहभागियों का मुख्य ध्यान आने वाली बड़ी वैश्विक कूटनीतिक घटनाओं पर टिका हुआ है। भू-राजनीतिक मोर्चे पर कुछ बदलावों के बावजूद, ट्रेडर्स मुख्य तौर पर ब्याज दरों के रुझान और व्यापार वार्ता पर दांव लगा रहे हैं।

## बैंक ऑफ जापान की दर वृद्धि और जापानी येन की स्थिति
एशियाई सत्र के दौरान डॉलर-येन जोड़ी 157.00 के मध्य स्तर के करीब मंडराती रही, जो पिछले शुक्रवार को छुए गए दो सप्ताह के उच्चतम स्तर के पास है। बैंक ऑफ जापान ने अपनी अल्पकालिक ब्याज दर लक्ष्य को 1.00% से बढ़ाकर 1.25% करने का फैसला किया है। यह नीतिगत कदम 7-2 के बहुमत से उठाया गया, जो मौद्रिक नीति को सामान्य बनाने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम है। हालांकि दर वृद्धि बाजार की अपेक्षाओं के पूरी तरह अनुरूप थी, लेकिन केंद्रीय बैंक का रुख नरम माना गया, जिसने जापानी येन पर दबाव बनाए रखा है।

अमेरिकी फेडरल रिजर्व के सख्त रुख के कारण अमेरिकी डॉलर को लगातार समर्थन मिल रहा है, जिससे डॉलर-येन के स्तर को सहारा मिल रहा है। हालांकि, जापानी अधिकारियों द्वारा मुद्रा बाजार में संभावित हस्तक्षेप की आशंका के चलते येन के मुकाबले डॉलर की बढ़त एक सीमित दायरे में बनी हुई है। जापानी मुद्रा के अवमूल्यन को थामने के लिए नीतिगत उपायों पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।

## सोने की कीमतों में गिरावट और ट्रंप-शी शिखर सम्मेलन पर नजर
कमोडिटी बाजार में सोने की कीमतों में गिरावट का सिलसिला जारी रहा। यूरोपीय सत्र के पहले पहर के दौरान पीली धातु में बिकवाली देखी गई, जिससे यह पिछले दिन सब-$4,300 के स्तर से उबरने के बाद वापस नीचे की ओर फिसल गया। अमेरिकी फेडरल रिजर्व के सख्त आर्थिक दृष्टिकोण के चलते डॉलर में निरंतर खरीदारी देखी जा रही है, जिसे बिना ब्याज आय वाली संपत्ति यानी सोने से निवेशकों के दूर जाने का मुख्य कारण माना जा रहा है। डॉलर इंडेक्स की मजबूती से कमोडिटी निवेश पर दबाव स्पष्ट दिखाई दे रहा है।

इधर, वैश्विक वित्तीय बाजारों की निगाहें वॉशिंगटन में होने वाली उच्चस्तरीय बैठक पर जमी हुई हैं। संयुक्त राज्य अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग गुरुवार को वॉशिंगटन में एक शिखर सम्मेलन के लिए मिलने वाले हैं। कई महीनों तक व्यापारिक तनाव में कमी रहने के बाद, यह बैठक तय करेगी कि दुनिया की दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाएं अपनी व्यापारिक सुलह को आगे बढ़ाएंगी या फिर वैश्विक कारोबार अनिश्चितता के एक नए दौर में प्रवेश करेगा।

## इसका आप पर असर
वैश्विक अर्थव्यवस्था में सुस्ती और प्रमुख मुद्राओं के उतार-चढ़ाव से निवेशकों और कारोबारियों के फैसलों पर सीधा असर पड़ेगा।

- **मुद्रा विनिमय:** अमेरिकी डॉलर में मजबूती से आयातित वस्तुएं महंगी हो सकती हैं। अंतरराष्ट्रीय यात्रा और विदेश में पढ़ाई करने वालों के लिए डॉलर के मुकाबले अन्य मुद्राओं की चाल अहम रहने वाली है।
- **सोने के निवेशक:** फेडरल रिजर्व के सख्त रुख से सोने की कीमतें सब-$4,300 के आसपास दबाव में हैं। कीमती धातुओं में निवेश करने वाले खरीदारों को ब्याज दरों के संकेतकों पर ध्यान देने की जरूरत है।
- **वैश्विक व्यापार:** ट्रंप और शी जिनपिंग के बीच शिखर सम्मेलन अंतरराष्ट्रीय व्यापार की दिशा तय करेगा। यदि व्यापारिक तनाव बढ़ता है तो आपूर्ति श्रृंखला प्रभावित हो सकती है, जिससे कई उत्पाद महंगे हो सकते हैं।
- **बॉन्ड और शेयर बाजार:** बैंक ऑफ जापान द्वारा दरें 1.25% करने से वैश्विक पूंजी प्रवाह में बदलाव आ सकता है। इक्विटी और फिक्स्ड इनकम में निवेश करने वालों को केंद्रीय बैंकों की नीतियों के अनुसार पोर्टफोलियो संतुलित करना होगा।

## ऐसा क्यों हुआ
ब्रिटेन में व्यावसायिक गतिविधियों की सुस्ती और बाजारों में उथल-पुथल उच्च उत्पादन लागत, मुद्रास्फीति और केंद्रीय बैंकों के नीतिगत फैसलों के कारण उत्पन्न हुई है।

- **लागत और मुद्रास्फीति दबाव:** बढ़ती लागत और अनिश्चित मांग के कारण ब्रिटेन की कंपनियों का भरोसा घटा है। इसी वजह से नए कर्मचारियों की भर्ती पर रोक लग रही है और कंपोजिट पीएमआई गिरकर 51.7 पर आ गया।
- **केंद्रीय बैंकों के विपरीत कदम:** फेडरल रिजर्व के आक्रामक रुख और बैंक ऑफ जापान द्वारा 1.25% तक दरें बढ़ाने के बावजूद नरम रुख ने डॉलर को मजबूत बनाए रखा है। इससे येन और सोने दोनों पर नकारात्मक असर देखा गया।
- **भू-राजनीतिक अनिश्चितता:** अमेरिका और चीन के राष्ट्रपतियों की बैठक को लेकर बाजार संशय में हैं। व्यापार समझौते के विस्तार या टकराव के डर से निवेशक सतर्कता बरत रहे हैं।

## सवाल-जवाब

### 1. सितंबर 2026 में ब्रिटेन का सर्विसेज पीएमआई कितना रहा?
ब्रिटेन का एसएंडपी ग्लोबल सर्विसेज पीएमआई सितंबर में 51.7 दर्ज किया गया, जो अगस्त के 52.5 से कम है।

### 2. ब्रिटेन के कंपोजिट पीएमआई में क्या बदलाव आया?
कमजोर सेवा गतिविधियों के चलते ब्रिटेन का कंपोजिट पीएमआई अगस्त के 52.5 से गिरकर सितंबर में 51.7 पर आ गया।

### 3. बैंक ऑफ जापान ने ब्याज दरों को लेकर क्या फैसला किया?
बैंक ऑफ जापान ने 7-2 के बहुमत से अपनी अल्पकालिक ब्याज दर लक्ष्य को 1.00% से बढ़ाकर 1.25% कर दिया है।

### 4. सोने की कीमतों में गिरावट का मुख्य कारण क्या रहा?
अमेरिकी फेडरल रिजर्व के आक्रामक नीतिगत रुख के कारण डॉलर में निरंतर खरीदारी से सोने पर दबाव बना रहा।

### 5. ऑस्ट्रेलियाई डॉलर पर बिकवाली का दबाव क्यों देखा गया?
ऑस्ट्रेलिया के विनिर्माण क्षेत्र में संकुचन और सेवाओं की सुस्त वृद्धि के चलते ऑस्ट्रेलियाई डॉलर 0.7100 के स्तर पर दबाव में आ गया।

### 6. डोनाल्ड ट्रंप और शी जिनपिंग की मुलाकात कहां और कब होनी है?
संयुक्त राज्य अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग गुरुवार को वॉशिंगटन में मिलने वाले हैं।

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