ब्रिटेन में बेरोजगारी दर घटकर 4.7 फीसदी पर आई, मजबूत पाउंड के मुकाबले लुढ़का यूरो ब्रिटेन में तीन महीने के दौरान बेरोजगारी दर घटकर 4.7 प्रतिशत पर आने और रोजगार बढ़ने से ब्रिटिश पाउंड मजबूत हुआ है, जिसके चलते यूरो गिरकर 0.8407 के करीब आ गया। यूनाइटेड किंगडम के श्रम बाजार से आए ताजा आंकड़ों के बाद विदेशी मुद्रा बाजार में ब्रिटिश पाउंड को मजबूती मिली है, जबकि यूरो पर दबाव बढ़ गया है। यूरो ब्रिटिश पाउंड के मुकाबले 0.2 प्रतिशत गिरकर लगभग 0.8407 के स्तर पर आ गया है। अगस्त को समाप्त हुए तीन महीनों में ब्रिटेन के श्रम बाजार में नई भर्तियों में तेजी दर्ज की गई है और समग्र बेरोजगारी दर में अप्रत्याशित गिरावट देखी गई है, जिससे पाउंड प्रमुख वैश्विक मुद्राओं की तुलना में तेजी दिखा रहा है। ब्रिटेन में भर्तियों में इजाफा और बेरोजगारी दर में कमी अगस्त में समाप्त हुए तीन महीनों के आंकड़ों के अनुसार, नियोक्ताओं ने कुल 102K नए कर्मियों को काम पर रखा है। यह संख्या जुलाई को समाप्त तिमाही के 67K भर्तियों के मुकाबले काफी अधिक है। इसके साथ ही आईएलओ बेरोजगारी दर घटकर 4.7 प्रतिशत पर आ गई है। विश्लेषकों का अनुमान था कि यह दर 4.9 प्रतिशत पर स्थिर रहेगी, लेकिन इसमें आई गिरावट के बाद यह आंकड़ा एक साल से भी अधिक समय का सबसे निचला स्तर बन गया है। वेतन वृद्धि के मोर्चे पर भी महत्वपूर्ण हलचल दर्ज की गई है। बोनस को छोड़कर औसत कमाई, जो वेतन वृद्धि को आंकने का एक प्रमुख पैमाना है, सालाना आधार पर 3.7 प्रतिशत पर दर्ज की गई। यह विश्लेषकों के अनुमानों और 3.6 प्रतिशत के पिछले आंकड़े दोनों से बेहतर है। हालांकि, बोनस सहित वेतन वृद्धि का आंकड़ा घटकर सालाना आधार पर 3.7 प्रतिशत पर आ गया, जो 3.8 प्रतिशत के अनुमान और 3.9 प्रतिशत के पिछले स्तर से नीचे है। ब्रिटेन में बेरोजगारी दर को वहां के श्रम बाजार का सबसे व्यापक संकेतक माना जाता है। महीने के खत्म होने के लगभग छह सप्ताह बाद जारी होने के बावजूद इसका व्यापक असर बाजार और वित्तीय जगत पर पड़ता है। बैंक ऑफ इंग्लैंड मूल्य स्थिरता बनाए रखने के लिए काम करता है, और बेरोजगारी तथा मुद्रास्फीति के बीच गहरा व्युत्क्रम संबंध देखने को मिलता है। जब बेरोजगारी का आंकड़ा उम्मीद से अधिक आता है तो वह पाउंड के लिए कमजोरी का कारण बनता है, लेकिन इस बार बेरोजगारी में तेज गिरावट ने मुद्रा को सहारा दिया है। मुद्रास्फीति में दोबारा तेजी आने की आशंका ब्रिटेन के आर्थिक परिदृश्य पर डॉयचे बैंक के अर्थशास्त्रियों का मानना है कि निकट भविष्य में मुद्रास्फीति एक बार फिर गति पकड़ सकती है। उनके अनुमान के मुताबिक सितंबर का महीना पूरे साल की सबसे ऊंची मुद्रास्फीति दर दर्ज कर सकता है, जिसमें हेडलाइन सीपीआई सालाना आधार पर 3.49 प्रतिशत तक पहुंच सकती है और कोर सीपीआई बढ़कर 2.74 प्रतिशत सालाना हो सकती है। इसके अतिरिक्त, मजबूत बेस इफेक्ट्स के कारण सर्विसेज सीपीआई के भी रफ्तार पकड़कर सालाना आधार पर 3.71 प्रतिशत पर पहुंचने की उम्मीद जताई गई है। तत्काल आने वाले आंकड़ों से परे देखते हुए अर्थशास्त्रियों ने आगाह किया है कि कीमतों का दबाव और बढ़ सकता है। ऊर्जा की कीमतें लगातार चढ़ रही हैं और फसलों की कम पैदावार का असर अब खाद्य लागत के आंकड़ों में दिखने लगा है। इसी पृष्ठभूमि में सीपीआई के अनुमानों को संशोधित किया गया है। 2027 के लिए सीपीआई औसत अब 3.7 प्रतिशत रहने का अनुमान है, जो पहले 3.5 प्रतिशत आंका गया था, जबकि चालू वर्ष में यह 3.2 प्रतिशत पर है। इसके साथ ही हेडलाइन आरपीआई सालाना आधार पर 3.7 प्रतिशत से बढ़कर 5.2 प्रतिशत तक पहुंचने का अनुमान है, जो पहले के 4.8 प्रतिशत के अनुमान से ज्यादा है। दिए गए अनुमान बैंक ऑफ इंग्लैंड के आकलनों की तुलना में व्यापक रूप से ऊंचे हैं, जिसमें कोर गुड्स सीपीआई और खाद्य एवं गैर-अल्कोहलिक पेय पदार्थ सीपीआई को छोड़कर बाकी सभी श्रेणियां अधिक अनुमानित हैं। हेडलाइन सीपीआई के आगे भी ऊपर जाने का अनुमान लगाया गया है, जो अगले साल फरवरी में 4.3 प्रतिशत के सालाना स्तर पर अपने चरम पर पहुंच सकती है। पूरे वर्ष के लिए अब 2026 में हेडलाइन सीपीआई औसतन 3.2 प्रतिशत सालाना रहने और अगले साल 3.8 प्रतिशत सालाना तक बढ़ने की संभावना है, जिसे पहले 3.5 प्रतिशत आंका गया था। फ्रांस के वित्तीय संकट और भू-राजनीतिक तनाव से यूरो पस्त दूसरी तरफ, यूरो लगातार दोहरे दबाव का सामना कर रहा है। एक ओर रूस-यूक्रेन का तनाव बना हुआ है, तो दूसरी ओर फ्रांस के बढ़ते वित्तीय घाटे और राजनीतिक चिंताओं ने निवेशकों का विश्वास कमजोर किया है। फ्रांस में राजनीतिक अस्थिरता का असर पूरे यूरोपीय बाजार पर साफ महसूस किया जा रहा है। फ्रांस के सरकारी कर्ज को लेकर उपजी चिंताओं ने अन्य देशों और विभिन्न परिसंपत्ति वर्गों को भी अपनी चपेट में ले लिया है। जर्मन बंड्स के मुकाबले इतालवी 10-वर्षीय यील्ड स्प्रेड 4.7 बेसिस प्वाइंट्स बढ़कर 111 बेसिस प्वाइंट्स पर पहुंच गया, जबकि स्पेन का स्प्रेड 1.2 बेसिस प्वाइंट्स बढ़कर 62 बेसिस प्वाइंट्स दर्ज किया गया। इक्विटी बाजारों में भी भारी बिकवाली देखी गई, जहां स्टॉक्स बैंक्स इंडेक्स 2.07 प्रतिशत लुढ़ककर चार महीने के निचले स्तर पर आ गया। फ्रांसीसी बैंकों के शेयरों में सबसे ज्यादा गिरावट आई, जिसमें सोसिएते जेनेराल 3.41 प्रतिशत, क्रेडिट एग्रीकोल 2.64 प्रतिशत और बीएनपी परिबा 2.48 प्रतिशत टूटे। मुद्रा बाजार में इन सभी घटनाक्रमों ने यूरो पर गहरा दबाव बनाया और यह अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 0.23 प्रतिशत कमजोर होकर 1.1213 डॉलर पर बंद हुआ। फिक्स्ड इनकम बाजार की स्थिति पर राबोबैंक की राबो रिसर्च टीम का कहना है कि फ्रांस में हिंसक विरोध प्रदर्शनों और लूटपाट के बाद बॉन्ड बाजार में तेज बिकवाली देखी गई है। बेल्जियम और इटली में भी तनाव फैला, जबकि इससे पहले स्पेन और पुर्तगाल में शांतिपूर्ण प्रदर्शन हुए थे। इसके परिणामस्वरूप फ्रांस की 10-वर्षीय यील्ड 13 बेसिस प्वाइंट्स, इटली की 8 बेसिस प्वाइंट्स और जर्मनी की 3 बेसिस प्वाइंट्स तक बढ़ गई। यदि केवल वित्तीय मानकों पर भी ध्यान दिया जाए, तो फ्रांस की 10-वर्षीय उधारी लागत शुक्रवार के मुकाबले आधी ब्याज दर वृद्धि के बराबर बढ़ चुकी है, जो यह दर्शाती है कि वहां फंडिंग की शर्तें कितनी तेजी से सख्त हुई हैं। वैश्विक बाजारों और अन्य मुद्राओं का रुख विदेशी मुद्रा बाजार में आज ब्रिटिश पाउंड सूचीबद्ध प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले बढ़त बनाने में सफल रहा, जिसमें अमेरिकी डॉलर के मुकाबले यह सबसे अधिक मजबूत स्थिति में दिखा। मुद्रा जोड़े एयूडी/यूएसडी में भी एशियाई कारोबार के दौरान सुधार देखने को मिला और यह सुधरते बाजार मूड के बीच 0.7000 की ओर बढ़ रहा है। अमेरिकी डॉलर के रिबाउंड में ठहराव आने से भी इस जोड़ी को मदद मिली है, हालांकि भू-राजनीतिक जोखिम और आगामी एआई टेक अर्निंग रिपोर्ट के प्रति सतर्कता इसकी बढ़त को सीमित रख सकती है। जापानी येन के मुकाबले अमेरिकी डॉलर यानी यूएसडी/जेपीवाई एशियाई व्यापार घंटों के दौरान 158.50 के आसपास स्थिर बना रहा। शुक्रवार को आने वाले जापान के नेशनल कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स मुद्रास्फीति के आंकड़ों से पहले कारोबारी बड़ी स्थिति बनाने से बच रहे हैं। इस बीच, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में मजबूती ने येन के मुकाबले डॉलर को कुछ सहारा प्रदान किया है। कमोडिटी और बॉन्ड बाजार में अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में सुधार और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के बीच शुरुआती यूरोपीय व्यापार में सोने की कीमत गिरकर लगभग 4,120 डॉलर के करीब आ गई। निकट भविष्य में अमेरिकी हाइपरस्केलर्स द्वारा अपने तीसरी तिमाही के वित्तीय नतीजे पेश किए जाने से पहले अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड संभलती दिखी है, जिसमें 10-वर्षीय अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड 0.35 प्रतिशत घटकर लगभग 5.13 प्रतिशत के आसपास रही। वहीं डिजिटल एसेट बाजार में नियर प्रोटोकॉल की कीमत में 2 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई, जो पिछले दिन की 2 प्रतिशत की गिरावट के समान है। इसके बावजूद संस्थागत मांग बनी हुई है, जहां बिटवाइज़ के नियर केंद्रित एक्सचेंज ट्रेडेड फंड (ईटीएफ) में 5 मिलियन डॉलर से अधिक का निवेश दर्ज किया गया। इसका आप पर असर यूके श्रम बाजार में मजबूती और यूरोपीय बॉन्ड बाजारों में अस्थिरता का सीधा असर वैश्विक मुद्रा विनिमय दरों, यात्रा खर्च और अंतरराष्ट्रीय व्यापार लागत पर पड़ेगा। • मुद्रा विनिमय दर: पाउंड के मुकाबले यूरो कमजोर होने से ब्रिटेन और यूरोप के बीच यात्रा करने वालों के लिए करेंसी एक्सचेंज की लागत बदल जाएगी। यदि आप यूरोप से ब्रिटेन की यात्रा की योजना बना रहे हैं, तो आपको पाउंड खरीदने के लिए अधिक यूरो खर्च करने पड़ेंगे। • आयात और निर्यात: ब्रिटेन के मजबूत होते पाउंड से यूरोपीय सामान ब्रिटिश खरीदारों के लिए सस्ते हो सकते हैं, जबकि ब्रिटिश उत्पाद यूरोपीय खरीदारों के लिए महंगे हो जाएंगे। अंतरराष्ट्रीय व्यापार से जुड़ी कंपनियों को अपने हेजिंग अनुबंधों और मूल्य निर्धारण को तुरंत रीसेट करना होगा। • ब्याज दरें और कर्ज: ब्रिटेन में उम्मीद से कम बेरोजगारी और वेतन में मजबूती से बैंक ऑफ इंग्लैंड द्वारा ब्याज दरों में आक्रामक कटौती की संभावना कम हो सकती है। इसका सीधा असर मकान खरीदारों और मॉर्गेज कर्जधारकों की मासिक ईएमआई पर पड़ेगा, जो लंबे समय तक ऊंची बनी रह सकती हैं। • यूरोपीय निवेश और बॉन्ड: फ्रांस के बढ़ते सरकारी बॉन्ड यील्ड और राजनीतिक तनाव से यूरोपीय बैंकों के शेयरों में कमजोरी आई है। वैश्विक म्यूचुअल फंड और यूरोपीय इक्विटी में निवेश करने वाले खुदरा निवेशकों को अपने पोर्टफोलियो में अल्पकालिक उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। ऐसा क्यों हुआ ब्रिटेन में रोजगार के मजबूत आंकड़े और फ्रांस में गहराते वित्तीय और सामाजिक संकट ने यूरो और ब्रिटिश पाउंड के बीच की विनिमय दरों में तेज बदलाव पैदा किया है। • श्रम बाजार में आश्चर्यजनक मजबूती: ब्रिटेन में अगस्त तक की तिमाही में 102K नई भर्तियां हुईं, जिससे बेरोजगारी दर 4.9 प्रतिशत पर स्थिर रहने के अनुमान के उलट घटकर 4.7 प्रतिशत पर आ गई। इसके साथ ही नियमित वेतन वृद्धि 3.7 प्रतिशत पर रहने से बैंक ऑफ इंग्लैंड की दरों में नरमी की उम्मीदें धीमी पड़ी हैं। • फ्रांस में राजनीतिक और राजकोषीय उथल-पुथल: फ्रांस में कर्ज को लेकर बढ़ती चिंताओं, लूटपाट और विरोध प्रदर्शनों के चलते सरकारी बॉन्ड यील्ड में 13 बेसिस प्वाइंट्स की तेज बढ़ोतरी हुई। इस वित्तीय तनाव ने इटली और स्पेन के बॉन्ड स्प्रेड को भी बढ़ा दिया और यूरोपीय बैंकों के शेयरों को नीचे धकेल दिया। • मुद्रास्फीति का दोबारा उभरता दबाव: ऊर्जा की बढ़ती कीमतों और खराब फसलों से खाद्य लागत में वृद्धि के कारण ब्रिटेन में मुद्रास्फीति के दोबारा 4.3 प्रतिशत तक पहुंचने के अनुमानों ने पाउंड की यील्ड को समर्थन दिया है। • केंद्रीय बैंकों के नीतिगत विचलन: जहां ब्रिटेन में मजबूत रोजगार आंकड़े दरों को ऊंचा बनाए रखने के संकेत दे रहे हैं, वहीं यूरोप में ऋण संकट और बैंकिंग कमजोरी के कारण यूरो पर लगातार बिकवाली का दबाव बढ़ रहा है। सवाल-जवाब 1. ब्रिटेन में ताजा बेरोजगारी दर कितनी दर्ज की गई है? अगस्त में समाप्त हुई तिमाही में ब्रिटेन की आईएलओ बेरोजगारी दर घटकर 4.7 प्रतिशत पर आ गई है, जो एक साल से अधिक का सबसे निचला स्तर है। 2. अगस्त तिमाही में ब्रिटेन में कितनी नई नौकरियां जुड़ीं? अगस्त को समाप्त तीन महीनों के दौरान नियोक्ताओं ने 102K नए श्रमिकों को काम पर रखा, जो जुलाई की तिमाही के 67K से काफी अधिक है। 3. ब्रिटिश पाउंड के मुकाबले यूरो का स्तर क्या रहा? मजबूत रोजगार आंकड़ों के बाद यूरो ब्रिटिश पाउंड के मुकाबले 0.2 प्रतिशत टूटकर लगभग 0.8407 के स्तर पर आ गया। 4. ब्रिटेन में वेतन वृद्धि के क्या आंकड़े रहे हैं? बोनस को छोड़कर औसत कमाई सालाना आधार पर 3.7 प्रतिशत बढ़ी, जबकि बोनस सहित वेतन वृद्धि भी 3.7 प्रतिशत पर दर्ज की गई। 5. यूरोपीय बाजारों और बैंकों में गिरावट की मुख्य वजह क्या है? फ्रांस में कर्ज को लेकर बढ़ती वित्तीय चिंताएं, विरोध प्रदर्शन और बॉन्ड यील्ड में तेज उछाल के कारण सोसिएते जेनेराल और बीएनपी परिबा जैसे बड़े बैंकों के शेयरों में भारी गिरावट आई। 6. ब्रिटेन में मुद्रास्फीति को लेकर क्या अनुमान जताया गया है? डॉयचे बैंक के अनुसार हेडलाइन मुद्रास्फीति सितंबर में 3.49 प्रतिशत और अगले साल फरवरी में 4.3 प्रतिशत के उच्चतम स्तर पर पहुंच सकती है। https://trendkia.com/market/uk-men-berojagari-dara-ghatakara-4-7-phisadi-para-ai-majabuta-pound-ke-mukabale-lurhaka-euro-50054 TrendKia — Har trend, sabse pehle.