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  "type": "article",
  "title": "ब्रिटेन में महंगाई 3.4% पहुंचने के आसार, नवंबर में बैंक ऑफ इंग्लैंड के ब्याज दरें बढ़ाने की उम्मीदें तेज",
  "summary": "सितंबर के खुदरा महंगाई आंकड़ों में उछाल की संभावना से बैंक ऑफ इंग्लैंड द्वारा नवंबर में ब्याज दरों में बढ़ोतरी का रास्ता साफ हो सकता है, जिससे ब्रिटिश पाउंड को मजबूती मिली है।",
  "content": "ब्रिटेन में खुदरा कीमतों का दबाव एक बार फिर तेज होता दिख रहा है, जिससे केंद्रीय बैंक पर अपनी मौद्रिक नीति को सख्त करने का भारी दबाव बन गया है। सितंबर महीने के उपभोक्ता मूल्य सूचकांक में वार्षिक दर बढ़कर 3.4 प्रतिशत पर पहुंचने का अनुमान है, जो अगस्त के 3.1 प्रतिशत के मुकाबले उल्लेखनीय बढ़त होगी। यदि यह आंकड़ा पूर्वानुमान के अनुरूप रहता है, तो यह बीते वर्ष दिसंबर के बाद का सबसे उच्चतम स्तर दर्ज करेगा। ऊर्जा के ऊंचे दामों का असर अब व्यापक अर्थव्यवस्था में साफ तौर पर दिखने लगा है, जिसके चलते मुख्य महंगाई दर में भी तेजी के संकेत हैं। इन परिस्थितियों के बीच बाजार में यह धारणा पुख्ता हो रही है कि बैंक ऑफ इंग्लैंड नवंबर में होने वाली अपनी समीक्षा बैठक के दौरान नीतिगत ब्याज दरों में एक चौथाई फीसदी की बढ़ोतरी कर सकता है।\n\nमहंगाई के ताजा आंकड़े और आधिकारिक रिलीज का समय\nयूनाइटेड किंगडम का राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय बुधवार को सुबह 06:00 जीएमटी पर सितंबर के लिए उपभोक्ता मूल्य सूचकांक से जुड़े विस्तृत आंकड़े जारी करने की तैयारी में है। इस महत्वपूर्ण बुलेटिन के साथ ही उत्पादक मूल्य सूचकांक और खुदरा बिक्री की रिपोर्ट भी सार्वजनिक की जाएगी। वित्तीय बाजारों के विशेषज्ञ और निवेशक इन नंबरों का बहुत बारीकी से विश्लेषण करेंगे, क्योंकि इनसे बैंक ऑफ इंग्लैंड के भावी कदमों का स्पष्ट खाका तैयार होगा।\n\nमासिक आधार पर अगर देखा जाए, तो सितंबर में उपभोक्ता कीमतों में 0.3 प्रतिशत का इजाफा होने का अनुमान लगाया गया है, जो अगस्त में दर्ज की गई 0.5 प्रतिशत की मासिक वृद्धि की तुलना में थोड़ी धीमी रफ्तार दर्शाता है। हालांकि, सालाना आधार पर यह दर 3.1 प्रतिशत से चढ़कर 3.4 प्रतिशत पर पहुंचती नजर आ रही है। खाद्य, ऊर्जा, अल्कोहल और तंबाकू जैसे अत्यधिक उतार-चढ़ाव वाले घटकों को अलग रखकर आंकी जाने वाली कोर मुद्रास्फीति भी अगस्त के 2.6 प्रतिशत से बढ़कर 2.8 प्रतिशत पर जाने की संभावना है। यह कोर आंकड़ा दर्शाता है कि पश्चिम एशिया के संघर्ष से उपजे ऊर्जा संकट का असर अब बुनियादी सामानों और सेवाओं की कीमतों में गहराई से घर कर चुका है।\n\nकच्चे तेल में उछाल और केंद्रीय बैंक पर बढ़ता दबाव\nऊर्जा बाजारों में जारी तेजी ने वैश्विक स्तर पर मुद्रास्फीति के दबाव को काफी बढ़ा दिया है। कच्चे तेल के भाव में अकेले अक्टूबर के दौरान 10 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि हो चुकी है, जबकि जुलाई से तुलना करने पर यह उछाल करीब 50 प्रतिशत तक पहुंच चुका है। मौजूदा समय में ब्रेंट क्रूड 108.00 डॉलर प्रति बैरल के स्तर से ऊपर कारोबार कर रहा है, जो पांच महीने का उच्चतम स्तर है। क्षेत्रीय शक्तियों के बीच बढ़ते तनाव और उलझावों को देखते हुए निकट भविष्य में तेल के युद्ध पूर्व स्तरों पर लौटने के आसार बेहद कम दिखाई देते हैं।\n\nइस लंबे खिंचते ऊर्जा संकट के कारण केंद्रीय बैंकों के लिए यह जोखिम बढ़ गया है कि यदि उन्होंने समय पर कड़े कदम नहीं उठाए, तो वे मुद्रास्फीति के चक्र में पीछे छूट जाएंगे। बैंक ऑफ इंग्लैंड उन गिने-चुने प्रमुख केंद्रीय बैंकों में शामिल रहा है, जिसने 2026 में अपनी मौद्रिक नीति में अब तक कोई सख्ती नहीं की है। बैंक ऑफ इंग्लैंड के गवर्नर एंड्रयू बेली और अन्य नीति निर्माताओं ने बढ़ती कीमतों पर नियंत्रण पाने के लिए दरों में वृद्धि की आवश्यकता तो जताई थी, लेकिन किसी निश्चित समय-सारणी का खुलासा नहीं किया था। पिछले सप्ताह बैंकॉक में आयोजित अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष के शिखर सम्मेलन में गवर्नर बेली ने लक्ष्य से अधिक बनी हुई महंगाई पर अपनी निराशा व्यक्त की थी, जिससे इस बात को बल मिला कि वर्ष के अंत से पहले उधारी लागत बढ़ाई जा सकती है।\n\nआर्थिक मजबूती से ब्याज दर वृद्धि की राह आसान\nहाल के दिनों में जारी हुए ब्रिटेन के व्यापक आर्थिक आंकड़ों ने भी नीतिगत दरों में बढ़ोतरी के पक्ष को मजबूत किया है। मंगलवार को सामने आए अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन के बेरोजगारी दर के आंकड़ों से यह स्पष्ट हुआ कि देश का श्रम बाजार लचीला और मजबूत बना हुआ है। हालांकि नौकरी के खाली पदों में कुछ गिरावट देखी गई है और बेरोजगारी भत्ते के दावेदारों की संख्या उम्मीद से अधिक बढ़ी है, फिर भी रोजगार की समग्र स्थिति स्थिर है। इसके अलावा, पिछले हफ्ते आए सकल घरेलू उत्पाद के मासिक आंकड़ों ने औद्योगिक क्षेत्र के बेहतर प्रदर्शन के दम पर अगस्त में अप्रत्याशित वृद्धि दर्ज करके सभी को चौंका दिया था।\n\nकॉमर्जबैंक के विश्लेषकों का मानना है कि यह सकारात्मक आर्थिक डेटा बैंक ऑफ इंग्लैंड को ऐसी स्थिति प्रदान करता है जहां वह पहले से कमजोर हो रही अर्थव्यवस्था पर अतिरिक्त दबाव डाले बिना ब्याज दरों को बढ़ा सकता है। इसके साथ ही, इससे चांसलर पर भी बजट घाटे को घटाने के अपने संकल्प को पूरा करने में कुछ राहत मिलती है। हालांकि, महीने के अंत में बजट पेश होने पर यह तस्वीर और साफ होगी कि सरकार ऊर्जा की ऊंची लागत से जूझ रहे परिवारों और व्यवसायों को राहत देने के साथ-साथ घाटे को कम करने का संतुलन कैसे बनाती है।\n\nमुद्रा बाजारों में पाउंड का दबदबा और अन्य मुद्राओं का हाल\nइन उत्साहजनक आर्थिक आंकड़ों और नवंबर में दर वृद्धि की बढ़ती संभावनाओं ने ब्रिटिश पाउंड को इस सप्ताह की सबसे मजबूत प्रदर्शन करने वाली मुद्राओं में शुमार कर दिया है। प्रधानमंत्री एंडी बर्नहैम के मंत्रिमंडल द्वारा घोषित कर-राहत उपायों की लागत से जुड़ी चिंताओं में भी कमी आई है। इसके विपरीत, अमेरिकी डॉलर में कमजोरी का रुख देखा जा रहा है क्योंकि निवेशक फेडरल रिजर्व द्वारा लगातार ब्याज दरें बढ़ाने की उम्मीदों को कम कर रहे हैं। वहीं दूसरी ओर, पेरिस में हिंसक प्रदर्शनों के बाद सरकार द्वारा कई शहरों में कर्फ्यू लगाने के कारण यूरो भारी दबाव में दिखाई दे रहा है।\n\nअन्य प्रमुख मुद्रा जोड़ियों पर नजर डालें तो ऑस्ट्रेलियाई डॉलर के मुकाबले अमेरिकी डॉलर (AUD/USD) एशियाई सत्र में 0.7000 से ऊपर तीन सप्ताह के उच्चतम स्तर पर सकारात्मक बना रहा। रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया के डिप्टी गवर्नर एंड्रयू हॉसर की सख्त टिप्पणियों और मुद्रास्फीति की चिंताओं ने इसे सहारा दिया, यद्यपि अमेरिका और ईरान के बीच की अनिश्चितता ने इस बढ़त को सीमित रखा। दूसरी तरफ, यूएस डॉलर बनाम जापानी येन (USD/JPY) 158.50 के आसपास एक सीमित दायरे में रहा, जहां बैंक ऑफ जापान द्वारा अगली दर वृद्धि के समय को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। सोने के बाजार में भी लगातार चौथे दिन सुस्ती देखी गई और एशियाई सत्र में यह साप्ताहिक निचले स्तर के पास बना रहा, जहां निवेशक 4,100 डॉलर से नीचे के स्तर पर नजरें टिकाए हुए हैं। इसके साथ ही, नेटफ्लिक्स, मेटा प्लेटफॉर्म्स और टेस्ला की आय रिपोर्टें भी बाजार की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।\n\nGBP/USD का तकनीकी ढांचा और प्रमुख स्तर\nचार घंटे के चार्ट पर पाउंड बनाम अमेरिकी डॉलर (GBP/USD) का तकनीकी परिदृश्य तात्कालिक तेजी का संकेत दे रहा है। अगस्त के अंत से चली आ रही डाउनट्रेंड रेजिस्टेंस लाइन को पार करने के बाद मूल्य ने इसे सफलतापूर्वक पुनः परखा है। रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स 60 के स्तर से ऊपर रहकर गति का समर्थन कर रहा है, जबकि मूविंग एवरेज कन्वर्जेंस डाइवर्जेंस शून्य के आसपास सपाट है, जो यह दर्शाता है कि अपट्रेंड अभी भी कुछ नाजुक हो सकता है।\n\nलाइव मार्केट आंकड़ों के अनुसार, GBP/USD वर्तमान में 1.34 के स्तर पर कारोबार कर रहा है, जो पिछले बंद 1.33 की तुलना में 0.50 प्रतिशत की बढ़त दिखाता है। इसका 52-सप्ताह का दायरा 1.30 से 1.38 के बीच है। तकनीकी संकेतकों में 14-अवधि का आरएसआई 56 पर है, जबकि 20-दिवसीय घातीय चलती औसत 1.33 और 50-दिवसीय तथा 200-दिवसीय ईएमए 1.34 पर स्थित हैं। लंबी अवधि में 50-दिवसीय ईएमए का 200-दिवसीय ईएमए से नीचे होना एक डेथ क्रॉस दर्शाता है, लेकिन अल्पकालिक गति तेजड़ियों के पक्ष में है। प्रतिरोध स्तर 1.3370 और 1.3400 के पास केंद्रित हैं, जिन्हें पार करने पर अगस्त-अक्टूबर की गिरावट का 61.8 प्रतिशत फाइबोनैचि रिट्रेसमेंट 1.3467 पर और 1.3470 का पिछला सपोर्ट क्षेत्र सामने आ सकता है। नीचे की ओर, 1.3295 का स्तर तत्काल गिरावट को रोके हुए है, जिसके टूटने पर यह जोड़ी वर्ष के निचले स्तर 1.3140 की ओर फिसल सकती है।\n\nकेंद्रीय बैंकों की ब्याज दर व्यवस्था का मूल आधार\nब्याज दरें वह लागत हैं जो वित्तीय संस्थान ऋण लेने वालों से वसूलते हैं और जमाकर्ताओं को भुगतान करते हैं। इन दरों की मुख्य दिशा केंद्रीय बैंकों द्वारा तय की जाने वाली आधार उधारी दरों से निर्धारित होती है। अधिकांश केंद्रीय बैंकों को लगभग 2 प्रतिशत की कोर मुद्रास्फीति बनाए रखकर मूल्य स्थिरता सुनिश्चित करने का कानूनी जनादेश प्राप्त होता है। जब महंगाई इस 2 प्रतिशत के लक्ष्य से काफी ऊपर निकल जाती है, तो मुद्रा के प्रसार को नियंत्रित करने और मांग को घटाने के लिए केंद्रीय बैंक ब्याज दरों में इजाफा करते हैं। इसके विपरीत, यदि आर्थिक गतिविधियों में सुस्ती हो और मुद्रास्फीति लक्ष्य से नीचे आ जाए, तो उधारी को बढ़ावा देने के लिए ब्याज दरों में कटौती की जाती है।\n\nउच्च ब्याज दरें सामान्यतः किसी देश की मुद्रा को वैश्विक स्तर पर मजबूती प्रदान करती हैं, क्योंकि वे अंतरराष्ट्रीय निवेशकों को अपनी पूंजी वहां लगाने के लिए अधिक आकर्षक प्रतिफल देती हैं। दूसरी ओर, बढ़ती ब्याज दरें सोने की कीमतों पर नकारात्मक असर डालती हैं, क्योंकि इससे बिना ब्याज वाली संपत्ति को अपने पास रखने की अवसर लागत बढ़ जाती है। अमेरिका में फेडरल फंड्स रेट वह मानक दर है जिस पर बैंक आपस में रात भर के लिए उधार लेते हैं, और इसके भावी कदमों पर सीएमई फेडवॉच टूल के जरिए नजर रखी जाती है। बैंक ऑफ इंग्लैंड के लिए भी 2 प्रतिशत मुद्रास्फीति का लक्ष्य सर्वोपरि है, और उपभोक्ता मूल्य सूचकांक में अपेक्षित तेजी नीति को कड़ा करने के साथ पाउंड को मजबूती देने का स्पष्ट संकेत देती है।\n\nइसका आप पर असर\nब्रिटेन में महंगाई दर 3.4 प्रतिशत पर पहुंचने और संभावित ब्याज दर वृद्धि का सीधा असर विदेशी मुद्रा व्यापार, अंतरराष्ट्रीय यात्रा और कर्ज की लागत पर पड़ेगा।\n\n• मुद्रा विनिमय और पाउंड: ब्रिटिश पाउंड में अमेरिकी डॉलर और अन्य मुद्राओं के मुकाबले मजबूती देखने को मिल सकती है। विदेशी मुद्रा बाजार में कारोबार करने वाले ट्रेडर्स को पाउंड से जुड़ी जोड़ियों में अस्थिरता के लिए तैयार रहना चाहिए।\n• ब्रिटेन में रहने वाले लोग: यदि बैंक ऑफ इंग्लैंड नवंबर में ब्याज दरें बढ़ाता है, तो मॉर्गेज और व्यक्तिगत ऋण की मासिक किस्तें तुरंत बढ़ जाएंगी। कर्जदारों को अपने बजट को पुनर्गठित करना होगा, जबकि बचत खातों पर जमाकर्ताओं को कुछ बेहतर ब्याज मिल सकता है।\n• भारत में निवेशक: कच्चे तेल की कीमतें 108 डॉलर के पार बने रहने से भारतीय आयात बिल और घरेलू मुद्रास्फीति पर दबाव बना रह सकता है। इससे भारतीय शेयर बाजार में ऊर्जा आधारित क्षेत्रों पर नजर रखने वाले निवेशकों की रणनीति प्रभावित होगी।\n• यात्रा और अध्ययन लागत: पाउंड के मजबूत होने से ब्रिटेन में पढ़ाई करने जाने वाले भारतीय छात्रों और पर्यटकों के लिए खर्च अधिक हो जाएगा। ट्यूशन फीस और रहने का खर्च भारतीय रुपये में पहले से अधिक चुकाना पड़ सकता है।\n\nऐसा क्यों हुआ\nब्रिटेन में उपभोक्ता महंगाई दर के दोबारा बढ़कर 3.4 प्रतिशत पर पहुंचने के पीछे भू-राजनीतिक तनाव और ऊर्जा बाजारों में आई जबरदस्त तेजी प्रमुख कारण हैं। इसके साथ ही घरेलू अर्थव्यवस्था में औद्योगिक उत्पादन और रोजगार की मजबूती ने भी मांग को बनाए रखा है।\n\n• ऊर्जा कीमतों में भारी उछाल: पश्चिम एशिया में संघर्ष के चलते जुलाई से अब तक कच्चे तेल की कीमतों में करीब 50 प्रतिशत की भारी बढ़त दर्ज की गई है। ब्रेंट क्रूड के 108 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंचने से परिवहन और उत्पादन लागत काफी बढ़ गई है।\n• व्यापक अर्थव्यवस्था पर असर: कच्चे तेल और ईंधन की ऊंची कीमतों का असर अब खाद्य, सेवाओं और अन्य बुनियादी उपभोक्ता वस्तुओं तक फैल चुका है। इसी कारण कोर मुद्रास्फीति भी अगस्त के 2.6 प्रतिशत से बढ़कर सितंबर में 2.8 प्रतिशत होने का अनुमान है।\n• घरेलू आर्थिक मजबूती: ब्रिटेन में अगस्त के दौरान सकल घरेलू उत्पाद में अप्रत्याशित वृद्धि और स्थिर श्रम बाजार ने आर्थिक गतिविधियों को सहारा दिया है। अर्थव्यवस्था के लचीलेपन की वजह से केंद्रीय बैंक के पास मंदी के तत्काल डर के बिना दरें बढ़ाने का पर्याप्त अवसर है।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. ब्रिटेन में सितंबर की महंगाई दर कितनी रहने का अनुमान है?\nसितंबर महीने में ब्रिटेन की उपभोक्ता मुद्रास्फीति दर सालाना आधार पर 3.4 प्रतिशत रहने की संभावना है, जो अगस्त में 3.1 प्रतिशत थी।\n\n2. कोर मुद्रास्फीति क्या होती है और इसका क्या अनुमान है?\nकोर मुद्रास्फीति में ऊर्जा, खाद्य, अल्कोहल और तंबाकू को शामिल नहीं किया जाता है; सितंबर में इसके बढ़कर 2.8 प्रतिशत होने का अनुमान है।\n\n3. बैंक ऑफ इंग्लैंड की ओर से क्या कदम उठाए जाने की संभावना है?\nबढ़ती महंगाई को नियंत्रित करने के लिए बैंक ऑफ इंग्लैंड नवंबर की मौद्रिक नीति बैठक में ब्याज दरों में 0.25 प्रतिशत की बढ़ोतरी कर सकता है।\n\n4. कच्चे तेल की कीमतों का महंगाई पर क्या प्रभाव पड़ा है?\nजुलाई से कच्चे तेल के भाव लगभग 50 प्रतिशत बढ़े हैं और ब्रेंट क्रूड 108 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया है, जिससे उत्पादन और परिवहन लागत बढ़ गई है।\n\n5. मुद्रा बाजार में ब्रिटिश पाउंड का रुख कैसा रहा है?\nदरों में बढ़ोतरी की उम्मीद और मजबूत आर्थिक आंकड़ों के चलते ब्रिटिश पाउंड प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले मजबूत प्रदर्शन कर रहा है और GBP/USD 1.34 के स्तर पर पहुंच गया है।",
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  "publishedAt": "2026-10-21",
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