# ब्रिटेन में महंगाई की नई लहर की चेतावनी: ड्यूश बैंक ने जताया अनुमान, अगले साल 4.3% तक जा सकती है दर

> ड्यूश बैंक के अर्थशास्त्रियों ने अनुमान लगाया है कि ब्रिटेन में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक सितंबर में 3.49% और अगले साल फरवरी में 4.3% के उच्चतम स्तर पर पहुंच सकता है। ऊर्जा की कीमतों में तेजी और कमजोर फसलों की वजह से रोजमर्रा की जरूरी चीजों की लागत बढ़ने का जोखिम बना हुआ है।

**Type:** article · **Category:** बाज़ार · **Published:** 2026-10-14 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/market/uk-men-mahngai-ki-nai-lahara-ki-chetavani-deutsche-bank-ne-jataya-anumana-agale-sala-4-3-taka-ja-sakati-hai-dara-47453 · **Language:** Hindi
**Tags:** ब्रिटेन अर्थव्यवस्था, मुद्रास्फीति, ड्यूश बैंक, बैंक ऑफ इंग्लैंड, उपभोक्ता मूल्य सूचकांक, ऊर्जा मूल्य

ब्रिटेन में रहने वाले परिवारों और कारोबारियों के लिए जीवन-यापन की लागत को लेकर चिंताएं एक बार फिर गहराने लगी हैं। ड्यूश बैंक के अर्थशास्त्रियों संजय राजा और माउई ब्रेनन द्वारा जारी किए गए ताजा आर्थिक विश्लेषण के अनुसार, ब्रिटेन में आने वाले महीनों के दौरान मूल्य दबाव में भारी इजाफा दर्ज किया जा सकता है। विश्लेषकों का मानना है कि सितंबर के महीने में देश की हेडलाइन मुद्रास्फीति सालाना आधार पर बढ़कर 3.49% के स्तर पर पहुंच सकती है, जो पूरे वर्ष की सबसे तेज रफ्तार होगी। इस रफ्तार के पीछे मुख्य रूप से ऊर्जा के चढ़ते दाम और कृषि पैदावार में कमी जैसे बुनियादी कारण उभरकर सामने आ रहे हैं।

## महंगाई के आंकड़ों में तेज उछाल के संकेत
आर्थिक परिदृश्य का बारीक मूल्यांकन करते हुए संजय राजा और माउई ब्रेनन ने स्पष्ट किया है कि हेडलाइन सीपीआई के 3.49% तक पहुंचने के साथ ही कोर सीपीआई भी सालाना आधार पर बढ़कर 2.74% पर जा सकती है। इसके साथ ही सेवा क्षेत्र से जुड़ी मुद्रास्फीति यानी सर्विसेज सीपीआई में भी तेजी आने के आसार हैं और मजबूत बेस इफेक्ट्स के कारण इसके 3.71% के स्तर पर पहुंचने का अनुमान है। अर्थशास्त्रियों के अनुसार, सितंबर का यह उछाल इस बात का स्पष्ट संकेत है कि घरेलू बजट पर दबाव अभी खत्म नहीं हुआ है, बल्कि आने वाले समय में इसके और विकराल होने की आशंका है।

## ऊर्जा बाजार और खाद्य उत्पादों पर बढ़ता दबाव
संजय राजा और माउई ब्रेनन का कहना है कि आने वाले समय में मूल्य दबाव में और अधिक विस्तार देखने को मिलेगा। इसके प्रमुख कारणों में ऊर्जा की कीमतों में लगातार जारी बढ़ोतरी शामिल है, जो कई क्षेत्रों की उत्पादन और परिवहन लागत को प्रभावित कर रही है। इसके अतिरिक्त, कम कृषि पैदावार का असर अब खाद्य लागत के आंकड़ों में भी स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगा है। फसल कम होने की वजह से दैनिक उपभोग की वस्तुओं और किराना सामान के थोक मूल्यों में बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है, जिसका सीधा प्रभाव आम उपभोक्ताओं की जेब पर पड़ रहा है।

## बैंक ऑफ इंग्लैंड के पूर्वानुमानों से ऊपर हैं नए आंकड़े
ड्यूश बैंक की यह नई रिपोर्ट ब्रिटेन के केंद्रीय बैंक, बैंक ऑफ इंग्लैंड के आधिकारिक अनुमानों की तुलना में काफी अधिक सख्त रुख पेश करती है। अर्थशास्त्रियों ने उल्लेख किया है कि उनके ताजा अनुमान दो प्रमुख श्रेणियों को छोड़कर बैंक ऑफ इंग्लैंड के लगभग सभी आकलनों से ऊपर बने हुए हैं। जिन दो श्रेणियों में यह अपवाद दिखता है, वे हैं कोर गुड्स सीपीआई तथा खाद्य एवं गैर-मादक पेय पदार्थ सीपीआई। इन दोनों वर्गों को छोड़कर बाकी सभी पैमानों पर संस्थान को लगता है कि मुद्रास्फीति बैंक ऑफ इंग्लैंड के निर्धारित लक्ष्यों से कहीं अधिक ऊंची बनी रहेगी।

## लंबी अवधि का दृष्टिकोण और 2027 का परिदृश्य
आगामी वर्षों के लिए जारी किए गए संशोधित अनुमानों में अर्थशास्त्रियों ने स्पष्ट किया है कि उपभोक्ता मूल्य सूचकांक का दबाव वर्ष 2026 और उसके बाद भी जारी रहेगा। उनके ताजा अनुमानों के मुताबिक वर्ष 2026 में हेडलाइन सीपीआई औसतन 3.2% रहने का अनुमान है, जबकि अगले साल यह बढ़कर 3.8% तक जा सकती है, जिसे पहले 3.5% आंका गया था। इसके अलावा, वर्ष 2027 में सीपीआई औसतन 3.7% रहने का अनुमान जताया गया है, जो पूर्व के 3.5% के अनुमान से ज्यादा है। यदि अल्पावधि की बात करें, तो हेडलाइन सीपीआई के अगले साल फरवरी में 4.3% सालाना के उच्चतम स्तर तक पहुंचने की संभावना जताई गई है। खुदरा मूल्य सूचकांक यानी आरपीआई के मोर्चे पर भी स्थिति चिंताजनक है; निकट भविष्य में आरपीआई के 3.7% से बढ़कर 3.93% सालाना होने और लंबी अवधि में 5.2% तक उछलने की बात कही गई है, जिसे पहले 4.8% आंका गया था।

## वैश्विक बाजारों और मुद्राओं में हलचल
ब्रिटेन के मुद्रास्फीति परिदृश्य के अलावा अंतरराष्ट्रीय वित्तीय बाजारों में भी बड़े पैमाने पर उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है। चीनी मुद्रास्फीति के मिले-जुले आंकड़ों और बेहतर व्यापार आंकड़ों के बाद बुधवार के एशियाई कारोबारी सत्र में ऑस्ट्रेलियाई डॉलर बनाम अमेरिकी डॉलर (AUD/USD) 0.7000 के स्तर के पास मजबूती से टिका रहा। चीन में सितंबर महीने के दौरान उपभोक्ता मूल्य सूचकांक उम्मीद से कम बढ़ा, जबकि उत्पादक मूल्य सूचकांक मुद्रास्फीति में तेजी आई, साथ ही चीन का व्यापार अधिशेष भी अप्रत्याशित रूप से बढ़ा। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बावजूद अमेरिकी डॉलर के सीमित दायरे में रहने से इस मुद्रा जोड़ी को सहारा मिला।

दूसरी ओर, डॉलर बनाम येन (USD/JPY) 158.50 के आसपास एक सीमित दायरे में कारोबार करता दिखा, जहां जापानी अधिकारियों के संभावित हस्तक्षेप के जोखिम ने जापानी येन को सहारा दिया। सोने की कीमतों में बुधवार के अमेरिकी सत्र के दौरान गिरावट का सिलसिला आगे बढ़ा, क्योंकि सितंबर महीने में अमेरिकी उपभोक्ता मूल्य सूचकांक में 3.7% सालाना की अप्रत्याशित तेजी दर्ज की गई, जिसने अमेरिकी डॉलर को मजबूती दी और कीमती धातु पर दबाव बनाया। क्रिप्टोकरेंसी बाजार में एक्सआरपी $1.36 से ऊपर कारोबार कर रहा है और $1.40 के स्तर की ओर बढ़ रहा है। रिपल और मेरिट्ज सिक्योरिटीज ने दक्षिण कोरिया के पूंजी बाजारों के लिए संस्थागत कस्टडी और टोकनाइजेशन सेवाओं की दिशा में रणनीतिक साझेदारी की है। इसी बीच, लंबी अवधि की अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड अक्टूबर की शुरुआत में वर्ष 2002 के बाद के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई, जहां निवेशक सरकारी नीलामी में भारी मात्रा में नए बॉन्ड खरीद रहे हैं।

## इसका आप पर असर
ब्रिटेन में मुद्रास्फीति के फिर से बढ़ने के अनुमानों से आम परिवारों के मासिक बजट और कर्ज की ब्याज दरों पर सीधा असर पड़ेगा।

- **उपभोक्ता खर्च:** ऊर्जा की कीमतों और खाद्य लागत में वृद्धि से दैनिक घरेलू खर्चों में उल्लेखनीय बढ़ोतरी होगी। परिवारों को उपयोगिता बिलों और किराने के सामान के लिए पहले से अधिक बजट आवंटित करना पड़ सकता है।
- **ब्याज दरें और कर्ज:** बैंक ऑफ इंग्लैंड के अनुमानों से अधिक महंगाई रहने पर केंद्रीय बैंक ब्याज दरों में कटौती को टाल सकता है। इसका सीधा मतलब यह होगा कि गृह ऋण और व्यक्तिगत ऋण की मासिक किस्तें लंबी अवधि तक ऊंची बनी रहेंगी।
- **वेतन और बचत:** खुदरा मूल्य सूचकांक (आरपीआई) के 5.2% तक पहुंचने से कर्मचारियों की वास्तविक क्रय शक्ति घट सकती है। निश्चित आय वाले लोगों और बचतकर्ताओं को अपने निवेश पर नकारात्मक वास्तविक रिटर्न का सामना करना पड़ सकता है।
- **व्यावसायिक लागत:** सेवा क्षेत्र में 3.71% की संभावित महंगाई दर से कंपनियों के संचालन और श्रम लागत पर दबाव बढ़ेगा। छोटे और मध्यम उद्यमों को अपने मार्जिन बचाने के लिए उत्पादों और सेवाओं के दाम बढ़ाने पड़ सकते हैं।

## ऐसा क्यों हुआ
ब्रिटेन में मुद्रास्फीति के दोबारा रफ्तार पकड़ने के पीछे ऊर्जा बाजार की लागत में बढ़ोतरी और घरेलू खाद्य उत्पादन में आई गिरावट मुख्य रूप से जिम्मेदार हैं।

- **ऊर्जा कीमतों में बढ़ोतरी:** अंतरराष्ट्रीय बाजार में ऊर्जा की बढ़ती कीमतों के कारण बिजली और ईंधन की थोक लागत में निरंतर इजाफा हो रहा है। यह लागत आपूर्ति श्रृंखला और विनिर्माण क्षेत्र को सीधे प्रभावित कर रही है।
- **फसल उत्पादन में गिरावट:** प्रतिकूल मौसमी परिस्थितियों और कम फसल कटाई के कारण कृषि पैदावार प्रभावित हुई है। खाद्य उत्पादों की सीमित उपलब्धता ने थोक मंडियों में किराना सामान की कीमतों को ऊपर धकेल दिया है।
- **सेवा क्षेत्र का बेस इफेक्ट:** सेवा क्षेत्र की मुद्रास्फीति में 3.71% की दर पिछले साल के मजबूत तुलनात्मक आधार और मजदूरी से जुड़े अनुबंधों की वजह से बढ़ रही है। सेवा उद्योग में निरंतर मांग भी कीमतों को नीचे आने से रोक रही है।
- **केंद्रीय बैंक के अनुमानों में अंतर:** अधिकांश गैर-खाद्य श्रेणियों में लगातार बने हुए मूल्य दबाव ने बैंक ऑफ इंग्लैंड के आधिकारिक अनुमानों को पीछे छोड़ दिया है। कोर गुड्स और गैर-मादक पेय पदार्थों को छोड़कर लगभग हर क्षेत्र में दबाव बढ़ रहा है।

## सवाल-जवाब

### 1. ड्यूश बैंक के अनुसार सितंबर में ब्रिटेन की हेडलाइन सीपीआई क्या रहने का अनुमान है?
ड्यूश बैंक के अर्थशास्त्रियों के अनुसार सितंबर में ब्रिटेन की हेडलाइन सीपीआई सालाना आधार पर बढ़कर 3.49% रहने का अनुमान है।

### 2. मुद्रास्फीति दर अपने उच्चतम स्तर पर कब तक पहुंच सकती है?
विश्लेषकों का अनुमान है कि हेडलाइन सीपीआई अगले साल फरवरी में 4.3% सालाना के उच्चतम स्तर पर पहुंच सकती है।

### 3. मूल्य दबाव बढ़ाने वाले मुख्य कारक कौन से हैं?
ऊर्जा की कीमतों में निरंतर बढ़ोतरी और कृषि फसलों की कम पैदावार के कारण खाद्य लागत में वृद्धि मुख्य कारण हैं।

### 4. वर्ष 2026 और 2027 के लिए मुद्रास्फीति का क्या अनुमान है?
हेडलाइन सीपीआई वर्ष 2026 में औसतन 3.2% और 2027 में औसतन 3.7% रहने का अनुमान लगाया गया है।

### 5. रिटेल प्राइस इंडेक्स (आरपीआई) के बारे में क्या आकलन है?
निकट भविष्य में हेडलाइन आरपीआई के 3.93% और लंबी अवधि में 5.2% तक बढ़ने का अनुमान है।

### 6. क्या ड्यूश बैंक का अनुमान बैंक ऑफ इंग्लैंड के आंकड़ों से अलग है?
हां, कोर गुड्स और खाद्य व गैर-मादक पेय को छोड़कर बाकी सभी श्रेणियों में ड्यूश बैंक के अनुमान बैंक ऑफ इंग्लैंड से ऊंचे हैं।

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