अमेरिकी अर्थव्यवस्था के मजबूत आंकड़ों से डॉलर में उछाल, यूरो और प्रमुख मुद्राओं पर बढ़ा दबाव अमेरिका और यूरो क्षेत्र के पीएमआई आंकड़ों में तेजी के बाद डॉलर इंडेक्स मजबूत हुआ है, जिससे यूरो 1.14 के स्तर से नीचे आ गया। वहीं वैश्विक बाजारों की नजरें ट्रंप-शी मुलाकात और यूएस-चीन ट्रेड समझौते पर टिकी हैं। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा बाजार में अमेरिकी डॉलर ने एक बार फिर जोरदार मजबूती दर्ज की है। संयुक्त राज्य अमेरिका में उम्मीद से कहीं बेहतर रहे आर्थिक आंकड़ों ने मुद्रा बाजार में हलचल तेज कर दी है, जिसके चलते यूरो और अन्य प्रमुख वैश्विक मुद्राओं में भारी बिकवाली देखी गई। वैश्विक वित्तीय स्थितियों में आई इस अचानक सख्ती का असर शेयर और बॉन्ड बाजारों पर भी साफ नजर आया। अमेरिका में कारोबारी गतिविधियों में तेज उछाल संयुक्त राज्य अमेरिका में सितंबर महीने के लिए जारी किए गए फ्लैश पीएमआई आंकड़ों ने विश्लेषकों के अनुमानों को पीछे छोड़ दिया है। समग्र कंपोजिट पीएमआई सूचकांक अगस्त के 56.0 से बढ़कर सितंबर में 58.4 पर पहुंच गया। इस विस्तार में अर्थव्यवस्था के प्रमुख घटकों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। विनिर्माण क्षेत्र का पीएमआई 53.9 से उछलकर 57.0 दर्ज किया गया, जिसमें नए ऑर्डर, औद्योगिक उत्पादन और रोजगार सृजन तीनों मोर्चों पर व्यापक बढ़त दर्ज की गई। वहीं सेवा क्षेत्र का सूचकांक भी 56.5 से चढ़कर 58.7 के स्तर पर पहुंच गया। आंकड़ों की गहराई से पड़ताल करने पर यह सामने आया कि सेवा क्षेत्र में इनपुट लागत नवंबर 2022 के बाद की सबसे तेज गति से बढ़ रही है। इनपुट लागत में आई यह तेजी यह दर्शाती है कि मूल्य दबाव केवल ऊर्जा की कीमतों तक सीमित नहीं है, बल्कि व्यापक आर्थिक गतिविधियों में फैल चुका है। यूरो क्षेत्र के आंकड़े और ब्याज दरों में बढ़ोतरी की आशंका यूरो क्षेत्र में भी आर्थिक गतिविधियों का कंपोजिट पीएमआई सितंबर में अप्रत्याशित रूप से बढ़कर 53.1 पर पहुंच गया, जो कि तीन वर्षों से अधिक समय का उच्चतम स्तर है। इसके पूर्व महीने में यह आंकड़ा 52.0 था, जबकि बाजार का आम सहमति अनुमान 51.7 का था। यूरो क्षेत्र में इस वृद्धि को सेवा क्षेत्र ने गति दी, जो 51.6 के पूर्व स्तर और 51.4 के अनुमान के मुकाबले बढ़कर 53.0 पर आ गया। दूसरी ओर, विनिर्माण क्षेत्र का पीएमआई 52.7 पर स्थिर रहा, जो 52.6 के अनुमान के काफी करीब था। हालांकि यूरो क्षेत्र के आंकड़े सख्त थे, लेकिन अमेरिकी अर्थव्यवस्था की असाधारण मजबूती ने मुद्रा बाजार पर दबदबा बना लिया। आंकड़ों के जारी होने के बाद अमेरिकी केंद्रीय बैंक द्वारा अक्टूबर में ब्याज दरें बढ़ाने की संभावना 70% तक आंकी जाने लगी। इसके परिणामस्वरूप EUR/USD का विनिमय अनुपात 1.14 के नीचे फिसल गया। यूरोपीय शाम के सत्र में वित्तीय स्थितियों में तेज कसावट दर्ज हुई, जिससे बॉन्ड और इक्विटी दोनों बाजारों में बिकवाली का दौर चला और डॉलर जी10 की सभी मुद्राओं के मुकाबले मजबूत होकर उभरा। एशियाई सत्र में अन्य प्रमुख मुद्राओं की चाल गुरुवार को एशियाई व्यापार सत्र के दौरान ऑस्ट्रेलियाई डॉलर अमेरिकी डॉलर के मुकाबले कमजोर होकर 0.7000 के स्तर की ओर फिसलता दिखा। ऑस्ट्रेलिया के अगस्त महीने के रोजगार आंकड़ों के अनुसार बेरोजगारी दर 4.5% के अनुमान के विपरीत बढ़कर 4.6% हो गई। हालांकि रोजगार परिवर्तन के आंकड़े अनुमानों से बेहतर रहे और इसमें 39.5K की वृद्धि दर्ज की गई, फिर भी श्रम बाजार की कमजोरी ने ऑस्ट्रेलियाई डॉलर को दबाव में रखा। जापानी येन के मुकाबले अमेरिकी डॉलर 158.00 के आसपास कारोबार करता दिखा और तीन सप्ताह के उच्च स्तर से कुछ पीछे हटा। जापान में बॉन्ड यील्ड में हुई तेज वृद्धि और अधिकारियों द्वारा संभावित हस्तक्षेप के जोखिमों ने येन को सहारा दिया। इसके बावजूद फेडरल रिजर्व की सख्त मौद्रिक नीति की उम्मीदों और अमेरिकी बॉन्ड प्रतिफल में तेजी के चलते डॉलर दो महीने के उच्च स्तर के करीब टिका रहा। इस बीच, बैंक ऑफ जापान ने मौद्रिक नीति सामान्यीकरण के तहत एक अहम कदम उठाते हुए 7-2 के बहुमत से अपने अल्पकालिक ब्याज दर लक्ष्य को 1.00% से बढ़ाकर 1.25% कर दिया, जो कि बाजार की पूर्व अपेक्षाओं के पूरी तरह अनुकूल था। सोने की चाल और वॉशिंगटन में कूटनीतिक हलचल अमेरिकी डॉलर और बॉन्ड प्रतिफल में तेजी के बीच सुरक्षित निवेश माना जाने वाला सोना एशियाई सत्र के दौरान एक सप्ताह के निचले स्तर के करीब सीमित दायरे में कारोबार करता दिखा। सर्राफा बाजार के कारोबारी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच होने वाली अहम बैठक को लेकर सतर्क बने हुए हैं। बाजार को इस बैठक से किसी बहुत बड़ी घोषणा की आशा नहीं है, परंतु दुर्लभ पृथ्वी खनिजों, प्रौद्योगिकी प्रतिबंधों और मौजूदा व्यापार संघर्ष विराम के विस्तार पर निवेशकों की गहरी नजर है। इस राजनयिक बैठक से ठीक पहले अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट ने संकेत दिया कि संयुक्त राज्य अमेरिका और चीन के बीच नवंबर में समाप्त होने वाले द्विपक्षीय व्यापार संघर्ष विराम को 10 जनवरी तक बढ़ाने पर सहमति बन गई है। यह कूटनीतिक प्रगति स्कॉट बेसेंट और चीन के उप प्रधानमंत्री हे लिफेंग के बीच वॉशिंगटन में आयोजित एक अनिर्धारित बैठक के बाद सामने आई है। इस घटनाक्रम से वैश्विक व्यापार में तात्कालिक अनिश्चितता कुछ समय के लिए टलती नजर आ रही है। इसका आप पर असर अमेरिकी अर्थव्यवस्था के मजबूत आंकड़ों और डॉलर में आई तेजी से वैश्विक मुद्रा बाजार, अंतरराष्ट्रीय व्यापार और जिंसों की कीमतों पर सीधा असर पड़ रहा है। • मुद्रा विनिमय और यात्रा: विदेशी मुद्रा बाजार में डॉलर की मजबूती से अन्य मुद्राएं कमजोर हो रही हैं। विदेश यात्रा करने वाले पर्यटकों और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लेन-देन करने वाले व्यक्तियों की लागत बढ़ सकती है। • आयात और महंगाई: मजबूत डॉलर के कारण आयातित वस्तुओं और कच्चे माल के दाम ऊंचे बने रह सकते हैं। स्थानीय विनिर्माताओं और उपभोक्ताओं पर इससे इनपुट लागत का सीधा वित्तीय बोझ पड़ सकता है। • सोने के निवेशक: सर्राफा बाजार में डॉलर इंडेक्स की तेजी के कारण सोने की कीमतें सीमित दायरे में दबाव झेल रही हैं। कीमती धातुओं में निवेश की योजना बना रहे खरीदारों को अल्पकालिक अस्थिरता के लिए तैयार रहना चाहिए। • वैश्विक व्यापार नीतियां: अमेरिका और चीन के बीच व्यापार समझौते की अवधि 10 जनवरी तक बढ़ने से आपूर्ति श्रृंखला को अस्थायी राहत मिली है। अंतरराष्ट्रीय कारोबार से जुड़ी कंपनियां इस दौरान बिना अतिरिक्त टैरिफ के योजनाएं बना सकती हैं। ऐसा क्यों हुआ यह बाजार बदलाव अमेरिकी सेवा और विनिर्माण क्षेत्र में आए अप्रत्याशित विस्तार के कारण हुआ, जिससे केंद्रीय बैंक द्वारा ब्याज दरें ऊंची रखने की संभावनाएं बढ़ गईं। • उम्मीद से बेहतर पीएमआई आंकड़े: सितंबर में अमेरिका का कंपोजिट पीएमआई बढ़कर 58.4 हो गया, जिसमें उत्पादन और नए ऑर्डर दोनों में बड़ा उछाल देखा गया। इस त्वरित वृद्धि ने निवेशकों को हैरान कर दिया और डॉलर में भारी पूंजी प्रवाह शुरू हो गया। • लागत मूल्य दबाव: सेवा क्षेत्र में इनपुट लागत नवंबर 2022 के बाद के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई। इससे यह संकेत मिला कि मुद्रास्फीति का दबाव अभी खत्म नहीं हुआ है, जिससे केंद्रीय बैंक की दरों में वृद्धि की 70% संभावना बन गई। • वैश्विक कूटनीतिक बैठकें: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की आगामी बैठक से पहले बाजार में सतर्कता का माहौल था। हालांकि व्यापार संघर्ष विराम को 10 जनवरी तक बढ़ाए जाने से कुछ जोखिमों में कमी आई। सवाल-जवाब 1. अमेरिका के सितंबर पीएमआई आंकड़ों में क्या बदलाव आया? अमेरिका का समग्र कंपोजिट पीएमआई अगस्त के 56.0 से बढ़कर सितंबर में 58.4 पर पहुंच गया, जिसमें विनिर्माण 57.0 और सेवाएं 58.7 दर्ज की गईं। 2. आंकड़ों के आने के बाद EUR/USD पर क्या प्रभाव पड़ा? डॉलर में आई व्यापक मजबूती के कारण EUR/USD की विनिमय दर गिरकर 1.14 के स्तर से नीचे फिसल गई। 3. बैंक ऑफ जापान ने ब्याज दरों पर क्या निर्णय लिया? बैंक ऑफ जापान ने 7-2 के बहुमत से अपनी अल्पकालिक ब्याज दर को 1.00% से बढ़ाकर 1.25% कर दिया है। 4. अमेरिका और चीन के व्यापार समझौते की नई तारीख क्या तय हुई है? दोनों देशों के बीच नवंबर में समाप्त होने वाले द्विपक्षीय व्यापार संघर्ष विराम को बढ़ाकर अब 10 जनवरी तक कर दिया गया है। 5. ऑस्ट्रेलिया के रोजगार बाजार के आंकड़े कैसे रहे? ऑस्ट्रेलिया में अगस्त के दौरान बेरोजगारी दर बढ़कर 4.6% हो गई, जबकि कुल 39.5K नए रोजगार जोड़े गए। https://trendkia.com/market/us-arthavyavastha-ke-majabuta-ankaron-se-dollar-men-uchhala-eur-aura-pramukha-mudraon-para-barha-dabava-37909 TrendKia — Har trend, sabse pehle.