# अमेरिकी अर्थव्यवस्था के मजबूत आंकड़ों से यूरो पर बढ़ा दबाव, जुलाई के निचले स्तर पर फिसली साझी मुद्रा

> यूरोपीय बाजारों में बेहतर आर्थिक गतिविधियों के बावजूद डॉलर की जोरदार बढ़त से यूरो टूटकर जुलाई के निचले स्तर पर आ गया है, जबकि व्यापक बाजारों में नीतिगत दरों और मुद्रास्फीति के दबाव स्पष्ट दिखाई दे रहे हैं।

**Type:** article · **Category:** बाज़ार · **Published:** 2026-09-23 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/market/us-arthavyavastha-ke-majabuta-ankaron-se-euro-para-barha-dabava-julai-ke-nichale-stara-para-phisali-sajhi-mudra-37448 · **Language:** Hindi
**Tags:** यूरो, अमेरिकी डॉलर, विदेशी मुद्रा बाजार, यूरोपीय सेंट्रल बैंक, फेडरल रिजर्व, ब्याज दरें, सोना, वैश्विक अर्थव्यवस्था

अंतरराष्ट्रीय मुद्रा बाजार में साझा यूरोपीय मुद्रा यूरो अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारी दबाव का सामना कर रही है, जिससे यह फिसलकर जुलाई के अंतिम दिनों के निचले स्तर के करीब पहुंच गई है। अमेरिका से सामने आए आर्थिक सर्वेक्षणों के आंकड़े यूरोप के अपेक्षाकृत मजबूत प्रदर्शन को पीछे छोड़ रहे हैं, जिसके चलते वैश्विक निवेशक डॉलर को प्राथमिकता दे रहे हैं। यूरोज़ोन में समग्र परचेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स यानी पीएमआई 53.1 दर्ज किया गया, जो अप्रैल 2023 के बाद का सबसे उच्च स्तर है। हालांकि, व्यावसायिक गतिविधियों में आई इस उल्लेखनीय तेजी के बावजूद विदेशी मुद्रा कारोबारियों का ध्यान दोनों क्षेत्रों के नीतिगत ब्याज दर अंतर पर टिका हुआ है, जहां अमेरिकी डॉलर स्पष्ट बढ़त बनाए हुए है।

## नीतिगत दरों का फासला और प्रमुख तकनीकी स्तर
यूरोपीय सेंट्रल बैंक और अमेरिकी फेडरल रिजर्व के बीच दरों का बड़ा अंतर यूरो की कमजोरी की मुख्य वजह बना हुआ है। वर्तमान में ईसीबी की डिपॉजिट दर 2.50 प्रतिशत पर टिकी है, जबकि अमेरिकी फेड की प्रमुख नीतिगत दर 3.75 प्रतिशत से 4.00 प्रतिशत के दायरे में बनी हुई है। ब्याज दरों में यह सीधा अंतर पूंजी को डॉलर परिसंपत्तियों की ओर आकर्षित कर रहा है। चार्ट पर नजर डालें तो तकनीकी स्तर भी तेज बिकवाली की ओर इशारा कर रहे हैं। बुधवार को 1.1400 का अहम रेजिस्टेंस स्तर टूट गया, जबकि 16 सितंबर से लेकर मंगलवार तक 1.1450 के स्तर ने मजबूत आधार का काम किया था। इससे पहले 17 सितंबर से सोमवार तक के प्रत्येक कारोबारी सत्र में 1.1500 के स्तर ने यूरो की बढ़त को सीमित रखा था।

नीचे की ओर सपोर्ट स्तरों की बात करें तो पहला अहम पड़ाव 1.1350 का है। बुधवार का निचला स्तर और जुलाई के अंतिम दिनों का निचला स्तर दोनों ही 1.1350 के ठीक ऊपर स्थित हैं। यदि यह स्तर भी टूटता है, तो बाजार का अगला बड़ा पड़ाव जून के अंत में दर्ज निचला स्तर होगा, जो 1.1300 के ठीक ऊपर बना हुआ है। तकनीकी रुझान के लिहाज से 1.1450 के नीचे की स्थिति बिकवाली यानी शॉर्ट पोजीशन के पक्ष में बनी हुई है, जहां गिरावट के संभावित लक्ष्य 1.1350 और 1.1300 हैं। दूसरी तरफ, दैनिक स्टोकेस्टिक रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स यानी स्टोच आरएसआई गिरकर 8 के करीब आ चुका है, जो यह दर्शाता है कि मुद्रा गहरे ओवरसोल्ड दायरे में पहुंच चुकी है। ऐसी स्थिति में तय लक्ष्यों तक पहुंचने से पहले तकनीकी सुधार या उछाल देखने को मिल सकता है। हालांकि, यदि दैनिक कारोबार 1.1500 के ऊपर बंद होता है, तो शॉर्ट पोजीशन का परिदृश्य पूरी तरह समाप्त हो जाएगा।

## वैश्विक व्यापार में यूरो की स्थिति और ईसीबी की भूमिका
यूरो यूरोपीय संघ के उन 20 सदस्य देशों की आधिकारिक मुद्रा है जो यूरोज़ोन का हिस्सा हैं। वैश्विक मुद्रा बाजार में अमेरिकी डॉलर के बाद यूरो दुनिया की दूसरी सबसे अधिक कारोबार की जाने वाली मुद्रा है। साल 2022 के आंकड़ों के अनुसार, सभी विदेशी मुद्रा लेन-देन में यूरो की हिस्सेदारी 31 प्रतिशत थी, जिसका औसत दैनिक कारोबार 2.2 ट्रिलियन डॉलर प्रतिदिन से अधिक रहा। दुनिया भर में सबसे अधिक कारोबार की जाने वाली मुद्रा जोड़ी EUR/USD है, जिसकी कुल विदेशी मुद्रा सौदों में अनुमानित हिस्सेदारी 30 प्रतिशत बैठती है। इसके बाद EUR/JPY चार प्रतिशत, EUR/GBP तीन प्रतिशत और EUR/AUD दो प्रतिशत की हिस्सेदारी रखते हैं।

जर्मनी के फ्रैंकफर्ट में स्थित यूरोपीय सेंट्रल बैंक यूरोज़ोन का केंद्रीय बैंक है, जो ब्याज दरें तय करने और मौद्रिक नीति का संचालन करने का काम करता है। ईसीबी का मुख्य दायित्व मूल्य स्थिरता बनाए रखना है, जिसका सीधा अर्थ मुद्रास्फीति को नियंत्रित करना या आर्थिक विकास को गति देना है। केंद्रीय बैंक का प्राथमिक हथियार नीतिगत ब्याज दरों को बढ़ाना या घटाना है। जब ब्याज दरें अपेक्षाकृत ऊंची होती हैं या दरें बढ़ने की संभावना होती है, तो आमतौर पर यूरो को मजबूती मिलती है, जबकि इसके विपरीत परिस्थितियों में मुद्रा कमजोर पड़ती है। ईसीबी की गवर्निंग काउंसिल साल में आठ बार मौद्रिक नीति बैठकों का आयोजन करती है, जहां निर्णय यूरोज़ोन के राष्ट्रीय बैंकों के प्रमुखों और छह स्थायी सदस्यों द्वारा लिए जाते हैं, जिसमें ईसीबी की अध्यक्ष क्रिस्टीन लेगार्ड भी शामिल हैं।

## आर्थिक संकेतक और मुद्रास्फीति का प्रभाव
यूरोज़ोन में महंगाई के आंकड़ों का आकलन हार्मोनाइज्ड इंडेक्स ऑफ कंज्यूमर प्राइसेज यानी एचआईसीपी के जरिए किया जाता है, जो यूरो के लिए बेहद संवेदनशील आर्थिक पैमाना है। यदि महंगाई दर उम्मीद से अधिक बढ़ती है और विशेष रूप से ईसीबी के 2 प्रतिशत के लक्ष्य को पार कर जाती है, तो केंद्रीय बैंक को इसे काबू में लाने के लिए ब्याज दरें बढ़ाने पर मजबूर होना पड़ता है। दुनिया के अन्य देशों की तुलना में यूरोज़ोन में अधिक ब्याज दरें यूरो को लाभ पहुंचाती हैं, क्योंकि इससे वैश्विक निवेशकों के लिए यह क्षेत्र निवेश के लिहाज से ज्यादा आकर्षक बन जाता है।

अर्थव्यवस्था के समग्र स्वास्थ्य को आंकने वाले आंकड़े यूरो के रुख को सीधे तय करते हैं। सकल घरेलू उत्पाद यानी जीडीपी, विनिर्माण और सेवा क्षेत्र के पीएमआई आंकड़े, रोजगार की स्थिति और उपभोक्ता विश्वास सर्वेक्षण जैसी रिपोर्ट एकल मुद्रा की चाल को प्रभावित करती हैं। एक मजबूत अर्थव्यवस्था यूरो के लिए अनुकूल मानी जाती है क्योंकि यह विदेशी निवेश को आकर्षित करने के साथ-साथ ईसीबी को दरें बढ़ाने का आधार देती है। इसके विपरीत, कमजोर आर्थिक आंकड़े मुद्रा को नीचे धकेलते हैं। यूरोज़ोन की चार सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं यानी जर्मनी, फ्रांस, इटली और स्पेन के आंकड़े विशेष महत्व रखते हैं, क्योंकि ये चारों मिलकर पूरे यूरोज़ोन की अर्थव्यवस्था का 75 प्रतिशत हिस्सा बनाते हैं।

इसके अलावा व्यापार संतुलन भी एक महत्वपूर्ण संकेतक है, जो एक निश्चित अवधि के दौरान किसी देश द्वारा अपने निर्यात से अर्जित राशि और आयात पर खर्च की गई राशि के बीच के अंतर को मापता है। जब कोई क्षेत्र ऐसे उत्पादों का उत्पादन करता है जिनकी वैश्विक स्तर पर भारी मांग होती है, तो अंतरराष्ट्रीय खरीदारों की मांग के कारण वहां की मुद्रा मजबूत होती है। इसलिए एक सकारात्मक शुद्ध व्यापार संतुलन मुद्रा को सहारा देता है, जबकि व्यापार घाटा मुद्रा पर नकारात्मक दबाव डालता है।

## अन्य मुद्रा जोड़ों, बॉन्ड और जिंस बाजार की स्थिति
अमेरिकी डॉलर में जारी तेजी का असर अन्य वैश्विक मुद्राओं और परिसंपत्तियों पर भी व्यापक रूप से देखा जा रहा है। ऑस्ट्रेलियाई डॉलर और अमेरिकी डॉलर की जोड़ी में बुधवार को गिरावट और तेज हो गई, जिससे यह जोड़ी फिसलकर 0.7000 के निचले दायरे में पहुंच गई, जो स्तर अगस्त की शुरुआत में देखे गए थे। इस जोड़ी में जारी मंदी का मुख्य कारण डॉलर का मजबूत रुख और फेडरल रिजर्व द्वारा मौद्रिक सख्ती जारी रखने के बढ़ते दांव हैं। आने वाले समय में घरेलू आर्थिक कैलेंडर पर रोजगार रिपोर्ट बाजार की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

दूसरी ओर, एशियाई कारोबारी सत्र में USD/JPY 157.00 के मध्य स्तर के आसपास बना रहा, जो पिछले शुक्रवार को छुए गए दो सप्ताह के उच्चतम स्तर के नजदीक है। बैंक ऑफ जापान द्वारा दर वृद्धि के बावजूद अपनाए गए नरम रुख के चलते जापानी येन पर दबाव बना हुआ है। बैंक ऑफ जापान ने अपनी अल्पकालिक ब्याज दर लक्ष्य को 7-2 के बहुमत से 1.00 प्रतिशत से बढ़ाकर 1.25 प्रतिशत कर दिया, जिसे मौद्रिक नीति को सामान्य बनाने की दिशा में उठाया गया कदम माना जा रहा है और यह बाजार की उम्मीदों के बिल्कुल अनुरूप रहा। हालांकि, फेड के सख्त रुख से डॉलर को समर्थन मिल रहा है, जबकि जापानी अधिकारियों द्वारा येन में हस्तक्षेप की आशंका ने जोड़ी की अतिरिक्त बढ़त को सीमित किया है। बाजार ने ट्रंप और शी की आगामी बैठक से पहले अमेरिका और ईरान के बीच अप्रत्यक्ष वार्ता के संपन्न होने पर खास प्रतिक्रिया नहीं दी है।

जिंस बाजार में सोने की कीमतों पर भी बुधवार को भारी बिकवाली का दबाव देखा गया, जिससे लगातार दो दिनों की तेजी थम गई। डॉलर में आए मजबूत सुधार और अमेरिकी मुद्रा बाजार में बने सकारात्मक माहौल के चलते सोना प्रति ट्रॉय औंस 4,300 डॉलर के स्तर से नीचे फिसलकर साप्ताहिक निचले स्तर पर पहुंच गया। इस बीच, फेडरल रिजर्व ने अपने मुख्य संदर्भ दर को 2027 तक अपरिवर्तित रखने का अनुमान जताया है। ऐसा उस समय हो रहा है जब बढ़ी हुई शिपिंग लागत अमेरिकी खुदरा कीमतों पर असर डाल रही है। फरवरी के अंत में ईरान के साथ संघर्ष शुरू होने के बाद से एशिया से अमेरिका तक कंटेनर भेजने की लागत चार गुना से अधिक हो चुकी है। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष के शोध के अनुसार, खुदरा दुकानों पर इसका चरम प्रभाव लगभग एक साल बाद यानी 2027 तक देखने को मिल सकता है।

## इसका आप पर असर
अमेरिकी डॉलर की मजबूती और यूरो में जारी गिरावट से अंतरराष्ट्रीय व्यापार, विदेश यात्रा और जिंसों की कीमतों पर सीधा असर पड़ेगा।

- **भारतीय अर्थव्यवस्था पर प्रभाव:** डॉलर के मजबूत होने से अन्य वैश्विक मुद्राओं पर दबाव बढ़ता है, जिससे आयात बिल और विदेशी व्यापार संतुलन पर असर देखने को मिल सकता है। कच्चे तेल और आयातित वस्तुओं की लागत में उतार-चढ़ाव घरेलू बाजारों को भी प्रभावित करता है।
- **यूरोप यात्रा और पढ़ाई:** यूरो के कमजोर होने से भारतीय छात्रों और पर्यटकों के लिए यूरोज़ोन देशों में पढ़ाई और यात्रा का खर्च तुलनात्मक रूप से घट सकता है। डॉलर के मुकाबले यूरो में आई यह गिरावट यूरोपीय मुद्रा में भुगतान करने वालों को थोड़ी राहत दे सकती है।
- **सोना और कमोडिटी खरीदार:** डॉलर की मजबूती के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना 4,300 डॉलर प्रति औंस के नीचे आ गया है। वैश्विक बाजार में कीमतों के नरम पड़ने से आभूषण खरीदारों और कमोडिटी निवेशकों को कीमतों पर नजर रखनी चाहिए।
- **वैश्विक माल ढुलाई और कीमतें:** एशिया से अमेरिका के बीच शिपिंग लागत चार गुना से अधिक हो चुकी है, जिसका चरम प्रभाव 2027 तक खुदरा सामानों की कीमतों पर दिखेगा। उपभोक्ता वस्तुओं और आयातित उत्पादों के दामों में लंबी अवधि तक दबाव बना रह सकता है।

## ऐसा क्यों हुआ
अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों के यूरोप से बेहतर आने और दोनों केंद्रीय बैंकों की ब्याज दरों में बड़े अंतर के कारण विदेशी मुद्रा बाजार में यूरो लगातार कमजोर हुआ है।

- **ब्याज दर अंतर का दबाव:** फेडरल रिजर्व की संदर्भ दर 3.75 से 4.00 प्रतिशत पर है, जबकि यूरोपीय सेंट्रल बैंक की जमा दर महज 2.50 प्रतिशत पर बनी हुई है। इस बड़े ब्याज अंतर की वजह से वैश्विक निवेशक बेहतर रिटर्न के लिए डॉलर की ओर रुख कर रहे हैं।
- **मजबूत अमेरिकी सर्वेक्षण:** यूरोज़ोन का समग्र पीएमआई 53.1 पर पहुंचकर अप्रैल 2023 के बाद के उच्चतम स्तर पर रहा, लेकिन अमेरिकी आर्थिक सर्वेक्षणों ने इसे भी पछाड़ दिया। इसके चलते बाजार का रुझान अमेरिकी डॉलर की मजबूती के पक्ष में और मजबूत हुआ है।
- **भू-राजनीतिक और आपूर्ति बाधाएं:** फरवरी के अंत में ईरान के साथ संघर्ष शुरू होने के बाद कंटेनर शिपिंग लागत चार गुना बढ़ गई है, जिससे फेड की दरें 2027 तक स्थिर रहने का अनुमान है। दीर्घकालिक दरें ऊंची बने रहने की संभावनाओं ने भी डॉलर को अतिरिक्त समर्थन दिया है।

## सवाल-जवाब

### 1. यूरो गिरकर किस स्तर पर पहुंच गया है?
यूरो डॉलर के मुकाबले फिसलकर जुलाई के अंतिम दिनों के निचले स्तर के करीब आ गया है, जहां बुधवार को 1.1400 का स्तर भी टूट गया।

### 2. यूरोज़ोन का हालिया पीएमआई आंकड़ा क्या रहा?
यूरोज़ोन का समग्र पीएमआई 53.1 दर्ज किया गया, जो अप्रैल 2023 के बाद का सबसे उच्चतम स्तर है।

### 3. ईसीबी और फेड की ब्याज दरों में कितना अंतर है?
यूरोपीय सेंट्रल बैंक की डिपॉजिट दर 2.50 प्रतिशत है, जबकि अमेरिकी फेड की प्रमुख नीतिगत दर 3.75 से 4.00 प्रतिशत के दायरे में है।

### 4. बैंक ऑफ जापान ने हाल ही में क्या नीतिगत फैसला लिया?
बैंक ऑफ जापान ने 7-2 के बहुमत से अपनी अल्पकालिक ब्याज दर लक्ष्य को 1.00 प्रतिशत से बढ़ाकर 1.25 प्रतिशत कर दिया है।

### 5. अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमत पर क्या असर पड़ा?
डॉलर में मजबूती के कारण सोना बुधवार को 4,300 डॉलर प्रति ट्रॉय औंस के नीचे फिसलकर साप्ताहिक निचले स्तर पर आ गया।

### 6. कंटेनर शिपिंग लागत में कितनी वृद्धि हुई है और इसका क्या असर होगा?
फरवरी के अंत में ईरान के साथ संघर्ष शुरू होने के बाद एशिया से अमेरिका की शिपिंग लागत चार गुना से अधिक हो गई है, जिसका चरम प्रभाव अमेरिकी दुकानों पर 2027 तक दिखेगा।

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