अमेरिकी अर्थव्यवस्था में रोजगार और महंगाई के मिले-जुले संकेत, वैश्विक बाजारों में डॉलर की मजबूती से कमोडिटी दबाव में अमेरिका में गैर-कृषि रोजगार में केवल 29 हजार की धीमी बढ़त और 4.2 प्रतिशत बेरोजगारी दर के बीच डॉलर की मजबूती ने यूरो, येन और कच्चे तेल पर दबाव बढ़ा दिया है। अमेरिकी अर्थव्यवस्था से सामने आए नए आंकड़े रोजगार और मुद्रास्फीति को लेकर एक बेहद उलझी हुई तस्वीर पेश कर रहे हैं। गैर-कृषि पेरोल में आई भारी सुस्ती के विपरीत घरेलू सर्वेक्षण ने रोजगार में बड़ी छलांग दिखाई है, जबकि महंगाई के आंकड़े अनुमान से नीचे बने हुए हैं। इस पृष्ठभूमि में वैश्विक वित्तीय बाजारों के भीतर अमेरिकी डॉलर का दबदबा एक बार फिर बढ़ता दिख रहा है, जिसका सीधा असर प्रमुख विदेशी मुद्राओं, सोने की कीमतों और अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार पर महसूस किया जा रहा है। पेरोल में तेज गिरावट लेकिन घरेलू सर्वेक्षण में दिखी तेजी श्रम बाजार के मोर्चे पर सितंबर महीने के दौरान गैर-कृषि पेरोल में केवल 29,000 की वृद्धि दर्ज की गई। यह आंकड़ा ब्लूमबर्ग द्वारा सर्वेक्षण किए गए अर्थशास्त्रियों की 90,000 की उम्मीद की तुलना में काफी कमजोर रहा। हालांकि, इसी दौरान जारी घरेलू सर्वेक्षण ने एक अलग ही रुख दर्शाया, जिसके अनुसार सितंबर में रोजगार में 406,000 का उछाल देखा गया। इसके बावजूद देश में बेरोजगारी दर 0.1 प्रतिशत बढ़कर 4.2 प्रतिशत के स्तर पर पहुंच गई। दूसरी तरफ, आर्थिक वृद्धि के मोर्चे पर राहत के संकेत मिले हैं, जहां दूसरी तिमाही के वास्तविक जीडीपी विकास दर के आंकड़े को संशोधित कर 2.2 प्रतिशत वार्षिक कर दिया गया है। रोजगार के कमजोर पेरोल आंकड़े और घरेलू स्तर पर रोजगार वृद्धि के बीच यह असंतुलन नीति निर्माताओं के लिए श्रम बाजार की वास्तविक मजबूती को परखना चुनौतीपूर्ण बना रहा है। महंगाई दर में स्थिरता और कार्यप्रणाली में बदलाव मुद्रास्फीति के मोर्चे पर अगस्त महीने का हेडलाइन पीसीई डिफ्लेटर 3.4 प्रतिशत पर दर्ज किया गया, जो पिछले महीने के बराबर ही रहा और बाजार के 3.7 प्रतिशत के सर्वसम्मति अनुमान से काफी कम रहा। इसी तरह 12 महीने का मुख्य यानी कोर पीसीई डिफ्लेटर भी 3.0 प्रतिशत पर अपरिवर्तित रहा, जो अर्थशास्त्रियों के अनुमान की तुलना में 0.3 प्रतिशत कम था। मुद्रास्फीति के आंकड़ों में आई इस गिरावट और अनुमान से कम रहने के पीछे एक हिस्सा गणना की कार्यप्रणाली में किए गए बदलावों से भी जुड़ा है। महंगाई के इन आंकड़ों ने फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में बढ़ोतरी की संभावनाओं को कमजोर किया है, लेकिन व्यापक आर्थिक अनिश्चितता के चलते वित्तीय परिसंपत्तियों में उठापटक बनी हुई है। डॉलर इंडेक्स की तेजी से विदेशी मुद्रा बाजारों में गिरावट अमेरिकी डॉलर में आई 17 महीने के उच्चतम स्तर की वापसी ने प्रमुख वैश्विक मुद्राओं पर भारी दबाव बना दिया है। ऑस्ट्रेलियाई डॉलर अमेरिकी डॉलर के मुकाबले देर से एशियाई कारोबार में 0.6900 के स्तर की तरफ फिसल गया। मिडिल ईस्ट और रूस-यूक्रेन के बीच जारी भू-राजनीतिक तनाव ने डॉलर को सुरक्षित विकल्प के रूप में सहारा दिया है, जबकि ऑस्ट्रेलियाई मुद्रा के लिए अब नजरें बॉन्ड यील्ड, कच्चे तेल और रिज़र्व बैंक ऑफ़ ऑस्ट्रेलिया के रुख पर टिकी हैं। दूसरी ओर, जापानी येन के मुकाबले अमेरिकी डॉलर 158.00 के स्तर को दोबारा हासिल करने में कामयाब रहा और पिछले एक सप्ताह के दायरे में कारोबार करता दिखा। हालांकि, बैंक ऑफ जापान के सख्त रुख की उम्मीदों और मुद्रा बाजार में संभावित हस्तक्षेप की आशंकाओं के कारण इस जोड़ी की आगे की बढ़त सीमित रह सकती है। यूरो मुद्रा में भी तीव्र गिरावट दर्ज की गई है, जहां यह जोड़ी 1.1312 के स्तर तक गिरकर मई 2025 के बाद के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गई, जो जनवरी के 1.2082 के उच्चतम स्तर से काफी नीचे है। यूरोप के ऊर्जा संकट और भू-राजनीतिक जोखिमों ने यूरो पर दोहरा दबाव बना रखा है। सोने और कच्चे तेल के कारोबार में लगातार नरमी कीमती धातुओं के बाजार में सोना 4,150 डॉलर प्रति औंस के करीब अपने सुधार को बनाए रखने की कोशिश कर रहा है, हालांकि निकट अवधि में इसका तकनीकी रुझान गिरावट की ओर झुका हुआ नजर आ रहा है। अमेरिकी डॉलर के 17 महीने के उच्च स्तर पर पहुंचने से पीली धातु पर दबाव कायम है, भले ही ट्रेजरी यील्ड और तेल की कीमतों में गिरावट देखी जा रही हो। ऊर्जा बाजार में वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट कच्चे तेल के दाम लगातार दूसरे दिन गिरकर एशियाई कारोबारी घंटों के दौरान 89.30 डॉलर प्रति बैरल के आसपास रहे। तेल की कीमतों में यह नरमी तब आई जब जी7 देशों ने अपने आपातकालीन भंडार से 100 मिलियन बैरल कच्चा तेल और डीजल जारी करने पर सहमति जताई। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दबाव के बाद इन देशों ने ऊर्जा निर्यात पर प्रतिबंध लगाने से बचने की प्रतिबद्धता भी जताई, जिससे वैश्विक आपूर्ति को लेकर तात्कालिक राहत मिली है। इसका आप पर असर अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों और डॉलर की मजबूती का सीधा असर अंतरराष्ट्रीय व्यापार, ऊर्जा लागत और विदेशी निवेश पर पड़ता है। • भारत में: कच्चे तेल की कीमतों में 89.30 डॉलर तक आई गिरावट से भारत के आयात बिल और ईंधन कीमतों पर दबाव कम हो सकता है। दूसरी तरफ अमेरिकी डॉलर की मजबूती से भारतीय रुपये और आयातित वस्तुओं की लागत पर नजर रखनी होगी। • वैश्विक निवेशकों के लिए: सोने के 4,150 डॉलर के करीब बने रहने और डॉलर के 17 महीने के उच्च स्तर पर पहुंचने से सुरक्षित संपत्तियों के आवंटन में बदलाव आ सकता है। पोर्टफोलियो धारकों को विदेशी मुद्रा में उतार-चढ़ाव और ब्याज दरों के नए संकेतों पर ध्यान देना चाहिए। • ऊर्जा बाजार में: जी7 देशों द्वारा 100 मिलियन बैरल आपातकालीन भंडार जारी करने से ईंधन की कीमतों में तात्कालिक राहत की संभावना है। ट्रांसपोर्ट और लॉजिस्टिक्स कंपनियों के लिए ईंधन खरीद की योजना बनाने का यह महत्वपूर्ण समय है। • मुद्रा व्यापारियों के लिए: यूरो के 1.1312 तक गिरने और येन के 158.00 पर पहुंचने से मुद्रा बाजार में अस्थिरता बढ़ गई है। विदेशी व्यापार में शामिल कारोबारियों को अपने हेजिंग सौदों की तुरंत समीक्षा करनी चाहिए। ऐसा क्यों हुआ यह घटनाक्रम अमेरिकी श्रम बाजार में अलग-अलग पैमानों के परस्पर विरोधी नतीजों, महंगाई की गणना में तकनीकी बदलावों और ऊर्जा बाजार में समन्वित नीतिगत हस्तक्षेपों के कारण हुआ है। • श्रम बाजार का अंतर्विरोध: गैर-कृषि पेरोल में केवल 29 हजार की मामूली वृद्धि दर्ज हुई जबकि घरेलू सर्वेक्षण में 406 हजार की बड़ी छलांग दिखाई दी। इन दोनों अलग-अलग गणनाओं के कारण आर्थिक गति को लेकर मिश्रित संकेत मिले हैं। • मुद्रास्फीति गणना में बदलाव: अगस्त महीने में पीसीई डिफ्लेटर 3.4 प्रतिशत और कोर पीसीई 3.0 प्रतिशत पर रहा, जो अनुमान से काफी कम था। इस गिरावट का एक मुख्य कारण मुद्रास्फीति मापने की कार्यप्रणाली में किया गया तकनीकी बदलाव रहा है। • जी7 देशों का संयुक्त कदम: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दबाव के बाद जी7 देशों ने अपने रणनीतिक भंडार से 100 मिलियन बैरल कच्चा तेल और डीजल जारी करने पर सहमति जताई। इस फैसले का सीधा असर अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों पर पड़ा और दाम गिरकर 89.30 डॉलर पर आ गए। • भू-राजनीतिक तनाव और डॉलर की मांग: मिडिल ईस्ट और रूस-यूक्रेन के बीच जारी संकट ने निवेशकों को सुरक्षित निवेश की तलाश में डॉलर की ओर आकर्षित किया है। इसके चलते ब्याज दरों में बढ़ोतरी की उम्मीदें कमजोर पड़ने के बावजूद डॉलर इंडेक्स 17 महीने के उच्च स्तर पर पहुंच गया। सवाल-जवाब 1. सितंबर में अमेरिका के गैर-कृषि पेरोल आंकड़े कितने रहे? सितंबर में गैर-कृषि पेरोल में केवल 29,000 की बढ़त हुई, जो विश्लेषकों के 90,000 के अनुमान से काफी कमजोर थी। 2. अमेरिका में वर्तमान बेरोजगारी दर कितनी दर्ज की गई है? घरेलू सर्वेक्षण में रोजगार बढ़ने के बावजूद देश की बेरोजगारी दर 0.1 प्रतिशत बढ़कर 4.2 प्रतिशत पर पहुंच गई। 3. अगस्त में मुख्य मुद्रास्फीति (कोर पीसीई) कितनी रही? अगस्त के लिए 12 महीने का कोर पीसीई डिफ्लेटर 3.0 प्रतिशत पर अपरिवर्तित रहा, जो बाजार की उम्मीद से 0.3 प्रतिशत कम था। 4. कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट का क्या मुख्य कारण रहा? जी7 देशों द्वारा आपातकालीन भंडार से 100 मिलियन बैरल कच्चा तेल और डीजल जारी करने के समझौते के बाद तेल के दाम घटकर 89.30 डॉलर पर आ गए। 5. अमेरिकी डॉलर की मजबूती का यूरो पर क्या असर पड़ा? यूरो गिरकर 1.1312 पर आ गया, जो मई 2025 के बाद का इसका सबसे निचला स्तर है। https://trendkia.com/market/us-arthavyavastha-men-rojagara-aura-mahngai-ke-mile-jule-snketa-vaishvika-bajaron-men-dollar-ki-majabuti-se-kamoditi-dabava-men-43014 TrendKia — Har trend, sabse pehle.