अमेरिका और ईरान के बीच तनाव घटने से अमेरिकी डॉलर में गिरावट, जापानी येन सहित प्रमुख मुद्राओं में सुधार अमेरिका और ईरान के बीच हमलों के रुकने से वैश्विक बाजारों में जोखिम लेने की क्षमता बढ़ी है, जिससे अमेरिकी डॉलर इंडेक्स में गिरावट आई और जापानी येन सहित अन्य मुद्राओं को मजबूती मिली। वॉशिंगटन और तेहरान के बीच सैन्य तनाव कम होने के संकेतों के साथ ही वैश्विक वित्तीय बाजारों में इस हफ्ते की शुरुआत में निवेशकों का रुझान जोखिम वाली परिसंपत्तियों की तरफ बढ़ा है। फेडरल रिजर्व और बैंक ऑफ जापान की महत्वपूर्ण नीतिगत बैठकों से ठीक पहले अमेरिका और ईरान के बीच हमलों को रोकने की पुष्टि हुई है। इस कूटनीतिक प्रगति से निवेशकों के बीच जोखिम लेने की धारणा मजबूत हुई है, जिसके परिणामस्वरूप अमेरिकी डॉलर में नरमी देखी जा रही है जबकि जापानी येन और प्रमुख वैश्विक इक्विटी फ्यूचर्स में बढ़त दर्ज की गई है। भू-राजनीतिक नरमी से अमेरिकी डॉलर पर बढ़ा दबाव सप्ताहांत के दौरान अमेरिकी प्रशासन ने पुष्टि की कि उसने ईरान पर अपने सैन्य हमलों को रोक दिया है। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार ईरानी ठिकानों की सूची समाप्त हो चुकी थी और बड़े पैमाने पर युद्ध अभियान चलाए बिना बमबारी जारी रखने का कोई औचित्य नहीं था। इसके जवाब में ईरान ने भी हमलों को स्थगित करने की बात स्वीकार की है, हालांकि उसने यह स्पष्ट किया है कि उसकी नीति हमले का जवाब हमले से देने की बनी रहेगी। इस कूटनीतिक मोड़ से पांच महीने से चले आ रहे अमेरिका-ईरान संघर्ष के समाप्त होने की उम्मीद जगी है। इस घटनाक्रम के कारण करेंसी मार्केट में अमेरिकी डॉलर (USD) बैकफुट पर आ गया। जापानी येन के मुकाबले डॉलर का जोड़ा (USD/JPY) 0.17% गिरकर 163.57 के स्तर के करीब पहुंच गया। इसी तरह छह प्रमुख वैश्विक मुद्राओं के मुकाबले अमेरिकी मुद्रा की ताकत को मापने वाला अमेरिकी डॉलर इंडेक्स (DXY) 0.25% घटकर 101.20 पर आ गया। करेंसी मार्केट के अलावा शेयर बाजार में भी इसका पॉजिटिव असर दिखा, जहां S&P 500 फ्यूचर्स लगभग 1% बढ़कर 7,485 के स्तर के पास कारोबार करते देखे गए। केंद्रीय बैंकों की नीतियां और मुद्रास्फीति नियंत्रण की कार्यप्रणाली इस हफ्ते केंद्रीय बैंकों के फैसलों पर भी दुनिया भर के निवेशकों की निगाहें टिकी हुई हैं। किसी भी देश के केंद्रीय बैंक का प्राथमिक जनादेश मूल्य स्थिरता बनाए रखना होता है। जब अर्थव्यवस्था में वस्तुओं और सेवाओं की कीमतें लगातार बढ़ती हैं तो उसे मुद्रास्फीति (इन्फ्लेशन) कहा जाता है, और जब कीमतें लगातार घटती हैं तो उसे अवस्फीति (डिफ्लेशन) कहते हैं। फेडरल रिजर्व (Fed), यूरोपियन सेंट्रल बैंक (ECB) और बैंक ऑफ इंग्लैंड (BoE) जैसे बड़े केंद्रीय बैंकों का मुख्य उद्देश्य मुद्रास्फीति को 2% के करीब बनाए रखना होता है। मुद्रास्फीति को नियंत्रित करने के लिए केंद्रीय बैंक के पास सबसे बड़ा हथियार बेंचमार्क ब्याज दर होता है। जब मुद्रास्फीति बहुत अधिक होती है, तो केंद्रीय बैंक अपनी ब्याज दरों में बढ़ोतरी करते हैं, जिसे मॉनेटरी टाइटनिंग कहा जाता है। इसके विपरीत, जब अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देना होता है, तो दरों में कटौती की जाती है, जिसे मॉनेटरी ईजिंग कहते हैं। दरों में बदलाव के हिसाब से वाणिज्यिक बैंक अपने कर्ज और जमा दरों में संशोधन करते हैं, जिससे बाजारों में नकदी का प्रवाह प्रभावित होता है। केंद्रीय बैंकों के बोर्ड सदस्य मौद्रिक नीति को लेकर अलग-अलग विचार रखते हैं। जो सदस्य अर्थव्यवस्था को गति देने के लिए कम ब्याज दरों और सस्ते कर्ज के समर्थक होते हैं, उन्हें 'डव' (Hawks vs Doves) कहा जाता है। वहीं दूसरी ओर, जो सदस्य मुद्रास्फीति को हर हाल में 2% या उससे नीचे रखने के लिए सख्त ब्याज दरों की वकालत करते हैं, उन्हें 'हॉक' कहा जाता है। नीतिगत बैठक से कुछ दिन पहले तक जब तक नई दर का ऐलान नहीं हो जाता, तब तक सदस्यों को सार्वजनिक बयानबाजी से रोक दिया जाता है, जिसे 'ब्लैकआउट पीरियड' कहा जाता है। ग्लोबल फॉरेक्स मार्केट में प्रमुख मुद्रा जोड़ों का रुख अमेरिकी डॉलर में आई कमजोरी का फायदा अन्य प्रमुख वैश्विक मुद्राओं को मिला है। जीबीपी/यूएसडी (GBP/USD) की जोड़ी शुक्रवार के तीन हफ्ते के निचले स्तर से उबरने के बाद लगातार दूसरे दिन मजबूत बढ़त बनाने में सफल रही। एशियाई कारोबारी सत्र के दौरान यह जोड़ी 1.3300 के मध्य स्तर से ऊपर निकल गई। वहीं दूसरी ओर, यूरो/यूएसडी (EUR/USD) की जोड़ी ने हफ्ते की शुरुआत बढ़त के गैप के साथ की और एशियाई सत्र में 1.1400 के स्तर को पार कर लिया। अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध समाप्त होने की उम्मीदों ने यूरो में खरीदारी को बढ़ावा दिया है। हालांकि ऑस्ट्रेलियाई डॉलर (AUD) के लिए आगे की राह अनिश्चितताओं से भरी दिख रही है। साल की पहली छमाही में चार साल के उच्चतम स्तर को छूने के बाद ऑस्ट्रेलियाई डॉलर में करेक्शन आया था, और मध्य पूर्व के अनिश्चित माहौल के कारण वहां ब्याज दरों और मुद्रास्फीति का दृष्टिकोण धुंधला बना हुआ है। कमोडिटी और क्रिप्टो मार्केट: सोना 4,100 डॉलर के पास स्थिर, कार्डानो पर दबाव सुरक्षित निवेश माने जाने वाले सोने (Gold) ने सोमवार को शुरुआती गैप-अप बढ़त को बरकरार रखा, लेकिन यह $4,100 के स्तर के आसपास संघर्ष करता नजर आया। भू-राजनीतिक मोर्चे पर अनिश्चितता घटने और फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति के फैसले से पहले बुलियन ट्रेडर्स सतर्क रुख अपना रहे हैं। क्रिप्टोकरेंसी बाजार में कार्डानो (ADA) पर दबाव कायम है। पिछले हफ्ते की सुस्ती के बाद सोमवार को कार्डानो $0.165 के स्तर पर नीचे कारोबार करता दिखा। डेरिवेटिव्स डेटा और मोमेंटम इंडिकेटर्स कार्डानो में मंदी के रुझान की ओर इशारा कर रहे हैं, जिससे इसके आगे के सुधार पर सीमाएं लग गई हैं। इसका आप पर असर • वैश्विक निवेशकों के लिए: भू-राजनीतिक तनाव कम होने से इक्विटी मार्केट में रिकवरी देखने को मिल सकती है, जबकि अमेरिकी डॉलर के कमजोर होने से उभरते बाजारों की मुद्राओं को सहारा मिलेगा। • भारतीय बाजारों पर असर: क्रूड ऑयल और भू-राजनीतिक जोखिम कम होने से भारतीय शेयर बाजार और भारतीय रुपये पर सकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। सवाल-जवाब 1. अमेरिका और ईरान के बीच क्या सहमति बनी है? वॉशिंगटन ने ईरान पर हमले रोकने की पुष्टि की है क्योंकि ईरानी लक्ष्यों की सूची समाप्त हो चुकी है, जिसके जवाब में ईरान ने भी हमले रोकने की बात कही है। 2. अमेरिकी डॉलर इंडेक्स (DXY) और USD/JPY का ताजा स्तर क्या है? अमेरिकी डॉलर इंडेक्स 0.25% गिरकर लगभग 101.20 के स्तर पर आ गया, जबकि USD/JPY की जोड़ी 0.17% गिरकर 163.57 के पास कारोबार कर रही थी। 3. केंद्रीय बैंकों की 'ब्लैकआउट अवधि' (Blackout Period) क्या होती है? नीतिगत बैठक से कुछ दिन पहले तक जब तक नई नीति की घोषणा नहीं हो जाती, केंद्रीय बैंक के सदस्यों को सार्वजनिक रूप से बयान देने से मना किया जाता है, जिसे ब्लैकआउट अवधि कहा जाता है। 4. सोने और कार्डानो (ADA) का बाजार में क्या रुझान है? सोना 4,100 डॉलर के स्तर के पास कारोबार कर रहा है, जबकि कार्डानो 0.165 डॉलर पर दबाव में है। https://trendkia.com/market/us-aura-iran-ke-bicha-tanava-ghatane-se-us-dollar-men-giravata-japanese-yen-sahita-pramukha-mudraon-men-sudhara-10702 TrendKia — Har trend, sabse pehle.