अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और फेडरल रिजर्व के कड़े रुख से सोने पर दबाव, चार हफ्तों के सबसे खराब प्रदर्शन की तरफ कीमती धातु फेडरल रिजर्व की तरफ से ब्याज दरों को लंबे समय तक ऊंचा रखने के स्पष्ट संकेतों और वैश्विक बॉन्ड बाजार में जारी उथल-पुथल के चलते सोने की कीमतों में कमजोरी दर्ज की गई है। हालांकि कूटनीतिक वार्ताओं और कच्चे तेल में नरमी ने निचले स्तरों पर धातु को हल्का सहारा दिया है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की चाल इन दिनों वैश्विक केंद्रीय बैंकों के कड़े नीतिगत संदेशों और सरकारी बॉन्ड प्रतिफल की तेज बढ़त के बीच फंसकर रह गई है। इस कारोबारी हफ्ते में पीली धातु अपने एक महीने के सबसे कमजोर दौर की तरफ फिसलती नजर आ रही है। हालांकि सप्ताह के अंत में सोने ने 4,244 डॉलर के निचले स्तर से उबरने की कोशिश की, लेकिन 4,300 डॉलर का मनोवैज्ञानिक अवरोध पार करना खरीदारों के लिए अब भी टेढ़ी खीर साबित हो रहा है। अमेरिकी डॉलर के तीन महीने के उच्चतम स्तर पर डटे रहने की वजह से बुलियन मार्केट में जोखिम लेने का रुझान काफी सीमित हो चुका है। फेडरल रिजर्व की सख्ती और अमेरिकी बॉन्ड बाजार में हलचल अमेरिकी केंद्रीय बैंक यानी फेडरल रिजर्व के नीति-निर्माताओं का लहजा लगातार आक्रामक बना हुआ है। चालू महीने की शुरुआत में की गई ब्याज दर बढ़ोतरी के बाद मौद्रिक अधिकारियों ने यह साफ कर दिया है कि महंगाई पर पूर्ण नियंत्रण पाने तक राहत मिलने की संभावना नहीं है। नीतिगत बयानों से इस बात के संकेत मिले हैं कि मौजूदा वर्ष में कम से कम एक और ब्याज दर वृद्धि हो सकती है, जबकि अगले वर्ष भी दरें लंबे समय तक ऊंची बनी रह सकती हैं। इस सख्त नीतिगत दृष्टिकोण के चलते अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड बहु-वर्षीय ऊंचाइयों पर टिकी हुई है, जिससे दुनिया भर के बॉन्ड बाजारों में बिकवाली का दबाव और गहरा गया है। इसी सिलसिले में फेड अधिकारी हैमैक ने अपने संबोधन में स्पष्ट किया कि केंद्रीय बैंकों की बुनियादी जिम्मेदारी मूल्य स्थिरता बनाए रखना है। उनका कहना रहा कि मजबूत मांग के माहौल में महंगाई अब भी चिंताजनक स्तर पर बनी हुई है, जोखिम ऊपर की तरफ झुके हुए हैं और लगातार जारी आपूर्ति व्यवधान इसे लक्ष्य तक वापस लाना कठिन बना रहे हैं। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि महंगाई जितने लंबे समय तक उच्च स्तर पर बनी रहेगी, उसे नियंत्रित करना उतना ही जटिल हो जाएगा। इस रुख ने स्पष्ट कर दिया है कि अमेरिकी मुद्रा में किसी भी तरह की गिरावट को संस्थागत खरीदार दोबारा खरीदारी के मौके के रूप में देख रहे हैं। भू-राजनीतिक घटनाक्रम और कच्चे तेल की नरमी से सहारा एक तरफ जहां अमेरिकी डॉलर की मजबूती सोने के पंख कतर रही है, वहीं दूसरी तरफ पश्चिम एशिया से आ रही कूटनीतिक प्रगति की खबरों ने गिरावट पर थोड़ा विराम लगाया है। सऊदी अरब और हूती विद्रोहियों के बीच तनाव बरकरार रहने के बावजूद व्यापक संघर्ष को विराम देने के नए राजनयिक प्रयासों के चलते कच्चे तेल के भाव में नरमी देखी गई, जिसने बुलियन की सीमित रिकवरी में मदद की। ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने इस गतिरोध पर अपना पक्ष रखते हुए बातचीत का रास्ता चुनने की अपील की। ईरानी राष्ट्रपति ने कहा कि जब मसलों को बातचीत के जरिए सुलझाया जा सकता है, तब एक-दूसरे के खून-खराबे का रास्ता अख्तियार नहीं करना चाहिए। उन्होंने यह भी जोड़ा कि युद्ध उन पर थोपा गया है, लेकिन वे इसे आगे खींचना नहीं चाहते। इसके समानांतर, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच हुई बहुप्रतीक्षित मुलाकात में दोनों देशों ने प्रतिद्वंद्वी बनने के बजाय साझेदार के तौर पर शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व की राह पर चलने पर सहमति जताई। इन दोनों घटनाओं ने वित्तीय बाजारों में अनिश्चितता के तत्काल जोखिम को कुछ हद तक हल्का किया है। तकनीकी संकेत: चार्ट पर दबाव के बीच अहम पड़ाव दैनिक चार्ट पर नजर डालें तो एक्सएयू/यूएसडी (XAU/USD) 4,285.95 डॉलर के आसपास बना हुआ है, जहां अल्पकालिक दृष्टिकोण मंदी के दबाव को दर्शाता है। हाजिर कीमत कई अहम मूविंग एवरेज के नीचे बंदिश में है। तकनीकी पटल पर 100-दिवसीय सिंपल मूविंग एवरेज (एसएमए) 4,304.64 डॉलर और 50-दिवसीय एसएमए 4,317.58 डॉलर पर स्थित है, जो भाव के लिए तात्कालिक छत का काम कर रहे हैं। इनके ऊपर 21-दिवसीय एसएमए 4,356.32 डॉलर और 200-दिवसीय एसएमए 4,541.36 डॉलर पर बना हुआ है, जो इस बात का संकेत है कि सोने की व्यापक तेजी के भीतर यह एक सुधारात्मक गिरावट का चरण है। इस दौरान 14-दिवसीय रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स (आरएसआई) 44.69 के स्तर पर दर्ज किया गया, जिससे यह साफ होता है कि बिकवाली का दबाव बना हुआ है मगर वह अभी पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है। ऊपर की ओर, सबसे पहला अवरोध 4,304.64 डॉलर पर 100-दिवसीय एसएमए के आसपास नजर आ रहा है, जिसके बाद 4,317.58 डॉलर का 50-दिवसीय एसएमए और 4,337.85 डॉलर का ट्रेंड-लाइन ब्रेक क्षेत्र आता है। यदि कीमत इससे आगे निकलती है, तो 21-दिवसीय एसएमए 4,356.32 डॉलर और पूर्व उच्च स्तर का 4,519.20 डॉलर का क्षेत्र कड़ा प्रतिरोध पेश करेगा, जबकि 200-दिवसीय एसएमए 4,541.36 डॉलर पर अंतिम बाधा बना हुआ है। वहीं निचले स्तरों पर 4,285.95 डॉलर एक महत्वपूर्ण धुरी बिंदु है। यदि इसमें और फिसलन आती है, तो 3,990.07 डॉलर से खिंची गई चढ़ती ट्रेंड-लाइन का सहारा सामने आएगा, जहां खरीदार एक बार फिर से इस तेजी के ढांचे को बचाने उतर सकते हैं। ताजा सत्र के आंकड़ों के अनुसार, सोने का भाव 4,319 डॉलर के आसपास कारोबार कर रहा है, जो पिछले बंद 4,298 डॉलर की तुलना में 0.49 प्रतिशत की मजबूती दिखाता है। मौजूदा 52-सप्ताह का दायरा 3,752 डॉलर से 5,586 डॉलर के बीच है। तकनीकी संकेतकों में आरएसआई 43 के स्तर पर है, जबकि एमएसीडी -24.01 पर है जो -4.57 की सिग्नल रेखा से नीचे मंदी का संकेत देता है। मूविंग एवरेज में 50-दिवसीय ईएमए 4,383 डॉलर और 200-दिवसीय ईएमए 4,432 डॉलर के नीचे डेथ क्रॉस की स्थिति दर्शा रहे हैं, जबकि 50-दिवसीय एसएमए 4,355 डॉलर और 200-दिवसीय एसएमए 4,556 डॉलर पर है। 20-दिवसीय बोलिंगर बैंड्स 4,277 डॉलर से 4,538 डॉलर के दायरे में फैले हैं, एडीएक्स 15 पर कमजोर ट्रेंड का संकेत दे रहा है और 14-दिवसीय एटीआर 95.68 डॉलर दर्ज किया गया है। आज के सत्र के लिए मुख्य पिवट 4,316 डॉलर, पहला प्रतिरोध 4,334 डॉलर व दूसरा प्रतिरोध 4,348 डॉलर है, जबकि पहला समर्थन 4,302 डॉलर व दूसरा समर्थन 4,285 डॉलर पर आंका गया है। वैश्विक आर्थिक चक्र और केंद्रीय बैंकों की स्वर्ण खरीद मानव सभ्यता के इतिहास में सोने की हैसियत हमेशा से मूल्य संचय और विनिमय के सबसे भरोसेमंद माध्यम के तौर पर रही है। आभूषणों में इसके आकर्षण के अलावा आधुनिक वित्तीय तंत्र में इसे एक प्रमुख सुरक्षित निवेश साधन के रूप में मान्यता हासिल है। जब भी वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव या आर्थिक मंदी की आशंकाएं गहराती हैं, पूंजी की सुरक्षा के लिए निवेशक सोने का रुख करते हैं। बिना किसी सरकारी गारंटी या जारीकर्ता के अस्तित्व के कारण इसे मुद्रा अवमूल्यन और अनियंत्रित मुद्रास्फीति के खिलाफ सबसे सटीक ढाल माना जाता है। विश्व के केंद्रीय बैंक वर्तमान में सोने के सबसे बड़े धारक हैं। अशांत आर्थिक दौर में अपनी घरेलू मुद्राओं को मजबूती देने के लिए केंद्रीय बैंक विदेशी मुद्रा भंडारों में विविधता लाते हैं और सोने की बड़े पैमाने पर खरीद करते हैं। मजबूत स्वर्ण भंडार किसी भी देश की वित्तीय साख और भुगतान क्षमता के प्रति वैश्विक बाजारों में भरोसा पैदा करता है। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के आंकड़ों के मुताबिक, केंद्रीय बैंकों ने वर्ष 2022 में अपने भंडारों में कुल 1,136 टन सोना जोड़ा था, जिसकी अनुमानित कीमत लगभग 70 अरब डॉलर बैठती है। यह आधिकारिक आंकड़े दर्ज किए जाने के बाद से किसी एक वर्ष में की गई सबसे बड़ी खरीद थी। खासतौर पर भारत, चीन और तुर्की जैसे उभरते हुए आर्थिक तंत्र अपने विदेशी मुद्रा भंडार में सोने का हिस्सा लगातार और तेजी से बढ़ा रहे हैं। मुद्रा, ब्याज दर और परिसंपत्ति वर्गों का अंतर्संबंध सोने का अमेरिकी डॉलर और अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड के साथ ऐतिहासिक रूप से उल्टा संबंध रहा है। डॉलर में जब भी कमजोरी आती है, तो अन्य मुद्राओं के धारकों के लिए सोना अपेक्षाकृत सस्ता हो जाता है, जिससे इसकी मांग बढ़ती है। इसी प्रकार शेयर बाजारों में जब जोरदार तेजी चलती है, तो निवेशक अधिक प्रतिफल की उम्मीद में जोखिम भरी संपत्तियों की तरफ जाते हैं, जिससे सोने में मुनाफावसूली देखने को मिलती है। इसके विपरीत, जब शेयर और अन्य जोखिम भरे बाजारों में घबराहट भरी बिकवाली शुरू होती है, तब पूंजी सोने की तरफ मुड़ती है। सोना बिना ब्याज देने वाली संपत्ति है, इसलिए ब्याज दरों के चक्र का इस पर सीधा असर पड़ता है। जब ब्याज दरें नीचे आती हैं, तब सोने को अपने पास रखने की अवसर लागत घटती है और इसका आकर्षण बढ़ता है। इसके उलट जब नकदी पर अधिक रिटर्न मिलने लगता है, तो निवेशक पीली धातु से पैसा निकालकर बॉन्ड या सावधि जमाओं में लगाना बेहतर समझते हैं। चूंकि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सोने का सौदा डॉलर में तय होता है, इसलिए डॉलर सूचकांक की प्रत्येक चाल सर्राफा बाजार को सीधे तौर पर प्रभावित करती है। अन्य मुद्राओं और बाजारों का ताजा हाल मुद्रा बाजार के अन्य मोर्चों पर, ऑस्ट्रेलियाई डॉलर शुक्रवार के एशियाई कारोबार में अगस्त की शुरुआत के बाद के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया। ऑस्ट्रेलियाई डॉलर और अमेरिकी डॉलर का युग्म (AUD/USD) 200-दिवसीय एसएमए के नीचे फिसलने के बाद 0.7000 के मनोवैज्ञानिक स्तर के आसपास बेहद कमजोर दिख रहा है। रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया की तरफ से ब्याज दरों में संभावित बढ़ोतरी की उम्मीदों पर फेडरल रिजर्व की सख्ती और मजबूत डॉलर भारी पड़ रहा है। दूसरी ओर, अमेरिकी डॉलर और जापानी येन (USD/JPY) की चाल में एशियाई सत्र के दौरान हल्का ठहराव आया और यह 159.00 के तीन-सप्ताह के उच्चतम स्तर के करीब संभलता दिखा। जापानी अधिकारियों द्वारा बाजार में संभावित मुद्रा हस्तक्षेप के डर से सटोरिये थोड़ा सतर्क हुए हैं। उधर, बैंक ऑफ जापान ने पिछले हफ्ते नीतिगत सामान्यीकरण की दिशा में कदम बढ़ाते हुए 7-2 के बहुमत से अपनी अल्पकालिक ब्याज दर का लक्ष्य 1.00% से बढ़ाकर 1.25% कर दिया, जो कि बाजार के अधिकांश जानकारों के अनुमानों के अनुरूप था। अमेरिकी बॉन्ड बाजार में बढ़ती यील्ड पर लगाम लगाने के लिए अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने दीर्घकालिक बॉन्ड की 6 अरब डॉलर की अतिरिक्त पुनर्खरीद का फैसला किया है, जिसकी घोषणा ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट ने बुधवार को की थी। व्यापारियों की नजरें अब अगले सप्ताह जारी होने वाले अमेरिकी गैर-कृषि रोजगार (एनएफपी) के आधिकारिक आंकड़ों पर टिकी हैं। जब तक कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट का सिलसिला लंबा नहीं खिंचता या अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों में नरमी के स्पष्ट प्रमाण नहीं मिलते, तब तक सोने की किसी भी तेजी पर डॉलर की मजबूती और ऊंचे बॉन्ड यील्ड की चुनौती बरकरार रहने की पूरी संभावना है। इसका आप पर असर सोने की अंतरराष्ट्रीय कीमतों में गिरावट और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड की मजबूती से घरेलू आभूषण खरीदारों और निवेशकों की रणनीतियों पर सीधा प्रभाव पड़ेगा। • भारत में: अंतरराष्ट्रीय बाजारों में नरमी के चलते घरेलू खुदरा बाजार में आभूषण खरीदारों को कीमतों में तात्कालिक राहत मिल सकती है। हालांकि डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये की चाल यह तय करेगी कि घरेलू स्तर पर सोना कितना सस्ता होगा। • वैश्विक स्तर पर: ऊंची ब्याज दरों के माहौल में बिना ब्याज देने वाले सोने में संस्थागत निवेश का प्रवाह सुस्त रहने की संभावना है। जब तक अमेरिकी केंद्रीय बैंक दर कटौती का स्पष्ट रास्ता नहीं दिखाता, तब तक निवेशकों को सुरक्षित रिटर्न के लिए बॉन्ड और सावधि साधनों की तरफ अधिक झुकाव देखने को मिलेगा। • ट्रेडर्स और सट्टेबाजों पर: दैनिक चार्ट पर 4,300 डॉलर का स्तर एक कड़ा प्रतिरोध बन गया है, जिससे निकट भविष्य में बिकवाली का दबाव बना रहेगा। डेरिवेटिव बाजार में काम करने वाले व्यापारियों को 4,285 डॉलर और 4,244 डॉलर के समर्थन स्तरों पर नजर रखकर सख्त स्टॉप लॉस का इस्तेमाल करना चाहिए। • मुद्रा विनिमय पर: अमेरिकी डॉलर के मजबूत बने रहने से उभरते बाजारों की मुद्राओं पर अवमूल्यन का जोखिम बढ़ेगा। इससे आयातित वस्तुओं की लागत में इजाफा हो सकता है, जिससे विकासशील देशों के केंद्रीय बैंकों को भी अपनी ब्याज दरें ऊंची रखनी पड़ सकती हैं। ऐसा क्यों हुआ फेडरल रिजर्व की तरफ से ब्याज दरों को लंबे समय तक ऊंचा रखने के रुख और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में लगातार उछाल के कारण सोने में बिकवाली का दबाव बना है। इस मौद्रिक सख्ती ने डॉलर को मजबूती दी, जिससे गैर-ब्याज वाली संपत्तियों से पूंजी निकलकर सावधि उपकरणों की ओर बढ़ी। • फेडरल रिजर्व की मौद्रिक सख्ती: हालिया ब्याज दर बढ़ोतरी और मुद्रास्फीति को काबू में रखने के लिए फेड नीति-निर्माताओं के कड़े बयानों ने बाजार में इस साल एक और दर वृद्धि की संभावना को मजबूत किया है। ऊंची दरों के बने रहने से बिना यील्ड वाली संपत्तियों जैसे सोने की मांग पर नकारात्मक असर पड़ा है। • ट्रेजरी यील्ड में रिकॉर्ड उछाल: वैश्विक बॉन्ड बाजार में जारी तेज बिकवाली ने अमेरिकी सरकारी बॉन्ड के प्रतिफल को बहु-वर्षीय उच्चतम स्तर पर पहुंचा दिया है। सरकारी बॉन्ड में आकर्षक रिटर्न मिलने से संस्थागत निवेशकों ने सुरक्षित निवेश के तौर पर सोने से पूंजी निकालना शुरू कर दिया है। • मजबूत डॉलर इंडेक्स: अमेरिकी डॉलर के तीन महीने के उच्चतम स्तर के करीब पहुंचने से अन्य मुद्राओं के खरीदारों के लिए अंतरराष्ट्रीय सोना महंगा हो गया है। डॉलर में लगातार मजबूती ने सोने की हर तेजी को सीमित कर दिया है। • कच्चे तेल में नरमी और कूटनीतिक प्रगति: ईरान और अमेरिका-चीन के बीच कूटनीतिक बयानों के बाद ऊर्जा कीमतों में गिरावट से तात्कालिक महंगाई की चिंताएं कुछ शांत हुईं। इससे सुरक्षित निवेश के रूप में सोने की तात्कालिक मांग में ठहराव आया है। सवाल-जवाब 1. इस हफ्ते सोने की कीमतों में गिरावट की मुख्य वजह क्या है? फेडरल रिजर्व की ओर से ब्याज दरों को लंबे समय तक ऊंचा रखने के संकेत और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में तेज उछाल इस गिरावट का मुख्य कारण हैं। 2. सोने के लिए तात्कालिक तकनीकी प्रतिरोध स्तर कौन सा है? सोने के लिए 4,300 डॉलर का मनोवैज्ञानिक स्तर और 100-दिवसीय एसएमए के करीब 4,304.64 डॉलर पहला बड़ा अवरोध बना हुआ है। 3. अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने बॉन्ड यील्ड को नियंत्रित करने के लिए क्या कदम उठाया? ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट ने बढ़ती बॉन्ड यील्ड पर अंकुश लगाने के लिए 6 अरब डॉलर के दीर्घकालिक बॉन्ड की अतिरिक्त पुनर्खरीद की घोषणा की। 4. कच्चे तेल की नरमी से सोने को क्या राहत मिली? पश्चिम एशिया में कूटनीतिक वार्ताओं से तेल के दाम घटे, जिससे बाजार में घबराहट कम हुई और सोने को 4,244 डॉलर के निचले स्तर से उबरने में मदद मिली। 5. बैंक ऑफ जापान ने अपनी ब्याज दरों में क्या बदलाव किया है? बैंक ऑफ जापान ने 7-2 के बहुमत से अपनी अल्पकालिक ब्याज दर का लक्ष्य 1.00% से बढ़ाकर 1.25% कर दिया है। https://trendkia.com/market/us-bond-yield-aura-federal-reserve-ke-kare-rukha-se-gold-para-dabava-chara-haphton-ke-sabase-kharaba-pradarshana-ki-tarapha-kimati-38216 TrendKia — Har trend, sabse pehle.